वायुयान यात्रा पर निबंध |Essay on Aeroplane(airplane) Travel in Hindi

वायुयान यात्रा पर निबंध

वायुयान यात्रा पर निबंध |Essay on Aeroplane(airplane) Travel in Hindi

चाहे आप बैलगाड़ी से यात्रा करें या रेलगाड़ी से, चाहे आप द्विचक्र यान (साइकिल) से यात्रा करें या जलयान से, पर यात्रा का आनंद क्या है? बस की यात्रा में तो आदमी बेबस हो जाता है। पर, वायुयान की यात्रा का सुख क्या है, उसे सामान्य जन क्या समझें? आदेश हो, तो एक छोटा उदाहरण उपस्थित करूँ। मान लीजिए, आपको राँची से पटना ही जाना हो। रेलगाड़ी से आपको चार सौ बारह किलोमीटर की दूरी तय करनी होगी। सड़क से आपको तीन सौ पैंतीस किलोमीटर की दूरी तय करनी होगी। यदि आप रेल से यात्रा करते हैं, तो आपको बारह घंटे का समय गँवाना पड़ता है, यदि आप बस से यात्रा करते हैं, तो आपको लगभग दस घंटे का समय नष्ट करना पड़ता है, यदि आप अपनी मोटरगाड़ी से यात्रा करते हैं, तो आपको लगभग तो देह की हड्डी-पसली ढीली कराकर लगभग छत्तीस घंटे का समय जाया करना पड़ता पर, यदि आप वायुयान से यात्रा करते हैं, तो महज पच्चीस-तीस मिनटों में आप राँची से पटना पहुँच जाते हैं। 

आपको राँची से पटना जाना है। इंडियन एयर लाइंस से टिकट खरीदिएं। नियत समय पर हवाई अड्डा पहुँच जाइए। सुरक्षा-जाँच कराकर वायुयान पर सवार हो जाइए। वायुयान का दरवाजा बंद होते ही सुशोभना लिपिस्टिकरंजिता विमान-परिचारिका टे में टॉफी लिए आपके सामने उपस्थित हो जाएगी। थोड़ी देर के बाद आपको सूचना दी जाएगी-हम अपने मुख्य वैमानिक कैप्टन मेहरोत्रा तथा उनके कर्मचारियों की ओर से इस उड़ान में सम्मिलित होनेवाले यात्रियों का स्वागत करते हैं। राँची से पटना तक की दूरी तीस मिनटों में तय की जाएगी। विमान उड़ चला। आनन-फानन में आप पटना पहुँच गए। फिर, विमान-परिचारिका माइक से कहेगी-मैं कैप्टन मेहरोत्रा तथा उनके कर्मचारियों की ओर से आपसे विदा लेती हूँ। आशा है, आपकी यात्रा सुखद रही। आपकी सूचना के लिए बाहर का तापमान तीस डिग्री सेलसियस है आदि। 

और, आप सानंद वायुयान से उतर गए। वायुयान-यात्रा में न केवल आपका बहमल्य समय बचता है, वरन् धूल, गर्द, गुब्बार, सर्दी, गर्मी आदि सबसे बच जाते हैं। जिस ताजगी और सफाई से आप राँची से चले थे, उसी ताजगी और सफाई से आप पटना पहुंच गए। 

आप जरा सोचिए तो, राँची से आप रेलगाड़ी से पतरातू जा रहे हैं, दूरी लगभग 40 किलोमीटर है, आपका पाँच-छह घंटे का समय नष्ट हो जाता है। पर, लंदन से वाशिंगटन वायुयान से जाते हैं, तो लगभग पाँच हजार सात सौ किलोमीटर की दूरी महज छह घंटे में आराम से तय कर लेते हैं। आप दिल्ली से लंदन वायुयान से जाना चाहते हैं। दुरी है लगभग छः हजार सात सौ किलोमीटर। आप वायुयान की प्रथम श्रेणी की शायिका का टिकट खरीदें, आराम से सोए हुए महज आठ घंटे में पहुँच जाएँ। क्या मजा है। 

अब लगभग सौ प्रकार के विमान हैं। जैसे बोइंग 747, बोइंग 737, एयर बस 300, डी० सी० 10-300, फोकर फ्रेंडशिप-32, कॉनकार्ड, डॉरनियर आदि। विभिन्न प्रकार के विमानों में दो से लगभग पाँच सौ यात्री सवार हो सकते हैं। विभिन्न प्रकार के विमानों की गति तीन सौ किलोमीटर प्रति घंटे से सोलह सौ किलोमीटर प्रति घंटे तक है। विभिन्न प्रकार के विमान पाँच सौ मीटर से लगभग नौ-दस हजार मीटर तक की ऊँचाई से उड़ानें भरते हैं जबकि विश्व के सर्वोच्च पर्वत-शिखर एवरेस्ट की ऊँचाई आठ हजार आठ सौ अड़तालीस मीटर है। 

अगर आप वायुयान से देश-विदेश की यात्रा कीजिए, आपको एक विचित्र सुखद अनुभव प्राप्त होगा। संसार के सबसे ऊँचे हिमशिखर एवरेस्ट की ऊँचाई से भी बहुत ऊपर वायुयान उड़ता है। अंबर-आश्लेषी अट्टालिकाएँ बच्चों के घरौंदे जैसे मालूम पड़ते हैं। बड़ी-बड़ी नदियाँ नहरों जैसी दिखाई पड़ती हैं, बड़े-बड़े जंगल झाड़ियाँ जैसे लगते हैं। रात में यदि किसी महानगर से आपका विमान उड़ रहा है, तो लगता है जैसे इंद्रधनुषी बल्बों के बंदनवार के ऊपर से आपका विमान शनैः शनैः खिसक रहा है। और. दिन में यदि बादल हो, तो आपका विमान उससे बहुत ऊपर उड़ता दिखाई देगा। बादल के टुकड़े ऐसे लगेंगे, जैसे धुनी रूई के दूह या स्तूप लटक रहे हों या विभिन्न आकारों के. श्वेत जीव-जंतु आकाश में तैर रहे हों या रूई के छोटे-छोटे पादप लटक रहे हों। ये दृश्य इतने रोमांचकारी होते हैं कि आप कल्पना या कविता के संसार में खो जाते हैं, जीवन की सारी हताशा और निराशा के रौरव से मुक्त होकर आप एक विचित्र स्वर्गलोक में प्रविष्ट कर जाते हैं। पर, यदि विमान के यंत्र में कुछ गड़बड़ी हो जाए, तो मत पूछिए। 23 जून, 1985 के दिन एयर इंडिया का एक जंबोजेट ‘कनिष्क’ आयरलैंड के दक्षिण तट के लगभग दो सौ किलोमीटर दूर एटलांटिक महासागर में दर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसमें तीन सौ उनतीस लोग मारे गए। 3 अगस्त, 1985 को अमरीकी विमान सेवा ‘डेल्टा एयर लाइंस’ का विमान अचानक एक विस्फोट के कारण ध्वस्त हो गया। विमान में सवार एक सौ एकसठ यात्रियों में लगभग एक सौ तीस यात्रियों की मृत्यु दुर्घटनास्थल पर ही हो गई। कुछ वर्ष पहले जापान के ओसाका नगर से टोकियो नगर जानेवाला जेट विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया और उसपर सवार सभी पाँच सौ उनतीस यात्री काल के गाल में समा गए। ऐसी दुर्घटनाएँ संसार में प्रतिवर्ष हो ही जाती हैं। 

कभी-कभी किसी उग्रवादी या आतंकवादी के द्वारा विमान का अपहरण कर लिया जाता है, तो यात्रियों की जान आफत में फँस जाती है। 

कित, दुर्घटनाओं एवं अपहरणों की बात छोड़ दें, तो वायुयान-यात्रा कितनी सुखावह है, आप इसकी कल्पना तभी करेंगे, जब आप विमान से देश-विदेश की यात्रा करेंगे। 

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