प्रौढ़ शिक्षा पर निबंध |Essay on Adult Education in Hindi

प्रौढ़ शिक्षा पर निबंध

प्रौढ़ शिक्षा पर निबंध |Essay on Adult Education in Hindi

 प्रौढ़ शिक्षा का अर्थ है-अनपढ़ प्रौढ़ों को शिक्षित करना। ऐसे व्यक्ति जिनकी आयु 28 से 40 वर्ष के बीच हो, वे प्रौढ़ माने जाते हैं। वैसे तो सरकार ने 14 वर्ष के सभी लड़के-लड़कियों के लिए शिक्षा को अनिवार्य कर दिया है, फिर भी गरीबी के कारण बहुत से बच्चे शिक्षा से वंचित रह जाते हैं। 

प्रौढ़ या वयस्क ही देश की पूंजी हैं। ये जहां भी होते हैं, देश के निर्माण में लगे रहते हैं-चाहे खेतों में काम कर रहे हों या कारखानों में काम करते हों। इनके अशिक्षित रहने से देश का अपेक्षित विकास नहीं हो पाता है। शिक्षा के अभाव में ये कृषि के वैज्ञानिक तरीकों से भी अनभिज्ञ रहते हैं। इसका कृषि उत्पादन पर कुप्रभाव पड़ता है। वे समाज में व्याप्त बाल विवाह, दहेज प्रथा, अस्पृश्यता आदि कुरीतियों को नहीं समझ पाते। अनपढ़ प्रौढ़ों को तो परिवार नियोजन का महत्व समझाना भी टेढ़ी खीर होता है। इतना ही नहीं, ये अपने मताधिकार का भी महत्व नहीं समझ पाते। इससे चुनाव में इनके द्वारा गलत उम्मीदवारों का चयन हो जाता है, जो इनके एवं राष्ट्र के लिए घातक होता है। 

हमारे देश में प्रौढ़ शिक्षा को पंचवर्षीय योजना में महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। इस कार्यक्रम की शुरुआत 2 अक्टूबर, 1978 में हुई थी। इस कार्य हेतु सरकार द्वारा एक अलग निदेशालय की स्थापना की गई है। इस योजना के तीन प्रमुख कार्यक्रम हैं-प्रौढ़ों को साक्षर बनाना, उनकी कार्यक्षमता बढ़ाना तथा उनमें नागरिकता का भाव जागृत करना। 

इसके लिए निदेशालय के कर्मचारी गांव-गांव जाकर प्रौढ़ शिक्षा केंद्रों का संचालन करते हैं। प्रौढ़ अनपढ़ युवक काम के घंटों के बाद इन केंद्रों से जुड़कर शिक्षा पाते हैं। सरकारी स्तर पर यह योजना चलाई ही जा रही है, साथ ही स्वयं सेवी संगठनों से भी इसमें सहयोग प्राप्त हो रहा है। समाज सेवी गांव-गांव जाकर लोगों को शिक्षा का महत्व समझाते हैं और उन्हें साक्षर होने के लिए प्रेरित करते हैं। इससे प्रौढ़ शिक्षा के उद्देश्य की पूर्ति में काफी मदद मिल रही है। लेकिन इस कार्य के लिए आवंटित राशि का बंदर-बांट हो रहा है। फलतः इस योजना की सफलता पर प्रश्न-चिह्न लग गया है। 

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