एक भीषण अग्निकांड पर निबंध-Essay on a Horrific fire

एक भीषण अग्निकांड पर निबंध

एक भीषण अग्निकांड पर निबंध-Essay on a Horrific fire

प्रकृति में जहां फूल होते हैं, वहीं कांटे भी होते हैं। संसार में अच्छाई के साथ बुराई, सुख के साथ दुख तथा लाभ के साथ हानि भी अवश्यंभावी है। कभी-कभी हितकारी सुख-साधन विनाशकारी भी सिद्ध होते हैं। यह नियम अग्नि पर भी लागू होता है। जो अग्नि हमारे लिए अत्यंत आवश्यक है अर्थात जिसके बिना जीवन संचालन कठिन होता है, वही अग्नि थोड़ी सी असावधानी बरतने पर बड़े विकराल रूप में भयानक परिणाम देती है। गरमी के दिनों में इसके तांडव की खबरें प्रायः सुनने और पढ़ने को मिल जाती हैं। 

एक बार मैं एक भीषण अग्निकांड का प्रत्यक्षदर्शी बन गया था। तीन वर्ष पूर्व की बात है-एक दिन मैं अपने पड़ोस के गांव से पैदल ही अपने घर लौट रहा था। तभी जोर-जोर से घंटियां बजने की आवाजें आने लगीं। थोड़ी देर बाद लाल रंग की तीन-चार मोटर गाड़ियां गुजरी। अनेक लोग मोटरों के साथ-साथ भाग रहे थे। मैं समझ गया कि अवश्य ही कहीं आग लगी है या कोई मकान गिरा है। मेरी इच्छा उस दृश्य को देखने की हुई। मैं भी उधर चल पड़ा, जिधर मोटरगाड़ियां गई थीं। कुछ दूर चलने पर पास की एक गली से मुझे भयंकर शोर सुनाई दिया और आग की लपटें दिखाई दीं। आग देखकर मेरी आंखें फटी रह गईं। ऐसी भीषण आग मैंने पहले कभी नहीं देखी थी। 

आग एक तिमंजिले मकान में लगी थी। दूर-दूर तक आग की प्रचंड लपटें फैल रही थीं। चारों ओर धुएं के बादल बने हुए थे। आग तीसरी मंजिल पर लगी थी, इसलिए लोग पहली और दूसरी मंजिल पर से सामान निकाल रहे थे। चारों ओर धुआं फैला हुआ था। मकान के 15-20 गज तक पुलिस ने घेरा डाल रखा था, ताकि लोग उसके समीप न जाएं। आग बुझाने वाले लोग तीन ओर से मकान को घेरकर उस पर पानी डाल रहे थे। लेकिन आग एक जगह बुझती, तो दूसरी जगह भड़क उठती। इस प्रकार वे लोग आग से जूझ रहे थे। 

तभी एक स्त्री ने अपने बच्चे को कमरे में छूट जाने की बात बताई। वह काफी जोर-जोर से रो रही थी। अग्निशमन दल के निरीक्षक ने उस स्त्री से उसके कमरे के बारे में पूछा। कुछ देर बाद अग्निशमन दल साहसिक कदम उठाते हुए आग के बीच से बच्चे को जीवित निकाल लाया। बच्चा धुएं के कारण बेहोश हो गया था। बच्चे को तुरंत ही निकट के एक अस्पताल में भेजा गया। सभी ने अग्निशमन दल की काफी सराहना की। लगातार तीन घंटों के अथक प्रयास के बाद उस भीषण अग्नि पर काबू पाया जा सका। 

शताब्दियों की दासता के कारण लोगों में भौतिक पतन काफी हद तक जड़ें जमा चुका है। वे कभी भले-बुरे का ध्यान नहीं रखते। एक ओर जलते मकान से लोग अपने सामान बाहर निकाल रहे थे, तो दूसरी ओर चोर-उच्चके नजर बचाकर कीमती सामान लेकर भाग रहे थे। 

आग लगने के बारे में पता चला कि किसी बच्चे ने तीसरी मंजिल पर माचिस की तीली जलाकर उस ओर फेंक दिया था, जहां कागज और प्लास्टिक के टुकड़े पड़े थे। फिर वह घर से बाहर खेलने चला गया था। उस समय तीसरी मंजिल पर कोई नहीं था। इस प्रकार कागज और प्लास्टिक ने आग पकड़ लिया। अग्निशमन दल और ग्रामीणों की मदद से आग पर काबू पाया जा सका। लोगों ने राहत की सांस ली। अब देखने वालों की भीड़ उमड़ रही थी। तभी अग्निशमन दल अपनी गाड़ियां लेकर चल पड़ा। मैं भी अपने घर लौट आया। परंतु आज भी उस दिन की घटना देह में सिहरन पैदा कर देती है।

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