यदि मैं करोड़पति हो जाऊं निबंध |Essay if i Become a Millionaire

यदि मैं करोड़पति हो जाऊं निबंध

यदि मैं करोड़पति हो जाऊं

आज के भौतिक युग में धनाढ्य होना गौरव तथा सम्मान की बात है, परंतु व्यक्ति सौभाग्य से ही धन-संपत्ति का स्वामी बन पाता है। वैसे तो गुजारे लायक धन-संपत्ति अनेक व्यक्तियों के पास होती है, लेकिन करोड़ों की धन-संपत्ति सौभाग्यशाली लोगों को ही मिल पाती है। धन के बिना जीवन निरर्थक सा लगता है। अधिक धन प्राप्त होने पर प्रत्येक व्यक्ति अकसर व्यभिचारी बन जाता है तथा अनेक प्रकार के कुकर्मों में लिप्त हो जाता है। 

प्रायः मैं सोचता हूं कि यदि मैं संयोग से करोड़पति बन जाऊं, तो कितना अच्छा हो। ऐसा होने पर मैं इन व्यभिचारों से दूर रहकर देश, समाज तथा दलित वर्ग के लिए अच्छे-अच्छे काम करूंगा। यही मेरे जीवन का स्वप्न है। लेकिन यदि मन में लगन हो और अपना भाग्य साथ दे, तो यह कोई कठिन कार्य नहीं है। आजकल ऐसे अनेक कार्यक्रम हैं, जिनके माध्यम से करोड़पति बनना बहुत सरल है। कुछ दिनों पूर्व ‘कौन बनेगा करोड़पति’ नामक टी.वी. कार्यक्रम बहुत चर्चित था। इसके द्वारा कई व्यक्ति करोड़पति बन गए। 

करोड़पति बनने पर सर्वप्रथम मैं एक ऐसी संस्था की स्थापना करूंगा, जो योग्य छात्र-छात्राओं के लिए छात्रवृत्ति की व्यवस्था करे, ताकि विद्यार्थियों में अध्ययन एवं उच्च शिक्षा के प्रति होड़ लग सके। अच्छे विद्यार्थी अपने जीवन में आगे बढ़ सकें तथा देश को योग्य इंजीनियर, डॉक्टर, सी.ए. एवं कुशल प्रशासक मिल सकें। उचित शिक्षा व्यवस्था होने पर ही देश को शिक्षित नेता मिल सकेंगे, जो देश की कार्यप्रणाली को सुचारु रूप से चलाएंगे। 

इसके अतिरिक्त लोगों की आध्यात्मिक तृप्ति के लिए मैं देश में अनेक मंदिरों, धर्मशालाओं एवं गौशालाओं का निर्माण करवाऊंगा। निर्धन व्यक्तियों को सर्दी से बचाने के लिए ऊनी वस्त्रों का मुफ्त वितरण करूंगा। वृद्धों की धार्मिक रुचि के लिए धार्मिक पुस्तकें बांटूंगा। वृद्धों तथा अस्वस्थ व्यक्तियों के लिए पौष्टिक पदार्थों का प्रबंध करूंगा। वृद्धों के लिए वृद्धाश्रम की स्थापना करूंगा, जहां वे सुगमतापूर्वक जीवन यापन कर सकेंगे। 

आंखें भगवान की सुंदर वरदान हैं। इनके बिना मानव जीवन अंधकारमय होता है। भारत में अनेक प्राणी नेत्र रोगों से ग्रस्त हैं। अनेक वृद्ध मोतियाबिंद से परेशान हैं। उनकी इन समस्याओं के समाधान के लिए आंखों के अस्पताल का निर्माण कराऊंगा, जहां निर्धनों को मुफ्त सुविधाएं उपलब्ध होंगी। 

इनके अतिरिक्त निर्धन छात्र-छात्राओं को नि:शुल्क पुस्तकें, वर्दी तथा कॉपियां आदि देने का प्रबंध करूंगा, ताकि वे शिक्षा से वंचित न रह सकें। शिक्षा ग्रहण करके ही वे छात्र-छात्राएं अपना भविष्य उज्ज्वल बना सकेंगे। अपने क्षेत्र में उच्च श्रेणी के पुस्तकालय तथा वाचनालय की स्थापना कराऊंगा, ताकि लोग अपना ज्ञान बढ़ा सकें। निर्धन एवं योग्य छात्र-छात्राएं भी वहां से अपने अध्ययन संबंधी पुस्तकें प्राप्त कर सकेंगे। अनाथ बच्चों के लिए अनाथालयों की स्थापना करूंगा तथा वर्तमान अनाथालयों को दान देकर उनके सुधार में सहयोग दूंगा, जिससे अनाथ बच्चे अपना भविष्य सुधार सकें। 

कबड्डी, कुश्ती, दौड़ आदि देशी खेलों को बढ़ावा देने के लिए अखाड़ों एवं व्यायामशालाओं का प्रबंध करूंगा। इन खेलों में पारस्परिक प्रतियोगिता संबंधी आयोजन करवाता रहूंगा, ताकि लोगों में सहयोग तथा स्वच्छ प्रतियोगिता की भावना पनप सके। एक ऐसे निःशुल्क अस्पताल की व्यवस्था करूंगा, जहां निर्धन रोगियों का उपचार हो सके। सप्ताह में एक-दो दिन निर्धन तथा लाचार व्यक्तियों को भोजन कराऊंगा। यदि मैं करोड़पति हो जाऊं, तो रोजगारोन्मुखी शिक्षा के प्रचार-प्रसार में धन का सदुपयोग करूंगा। देश की जनता को अच्छे साधन उपलब्ध कराऊंगा, जिससे उनका जीवन सुखमय हो जाएगा। 

यह सत्य है कि धनवान होना भगवान का श्रेष्ठतम वरदान है तथा धन भगवान की असीम कृपा से ही प्राप्त होता है। इसलिए प्राप्त धन का प्रयोग अच्छे कामों में करना चाहिए। अतः मैं सदैव अपने धन के गलत प्रयोग से बचूंगा। यदि मैं करोड़पति बन जाऊं, तो अपने कार्यों से सभी का जीवन आनंदमय बनाऊंगा। इसके अतिरिक्त निर्धन कन्याओं के विवाह में मदद करूंगा। इससे मेरा जीवन सफल होगा तथा मेरे धन का भी सदुपयोग होगा।

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