इलेक्ट्रिक आयरन का आविष्कार किसने किया-Electric iron ka avishkar kisney kiya

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इलेक्ट्रिक आयरन का आविष्कार-Electric iron ka avishkar

प्रारंभ से ही मनुष्य की इच्छा आकर्षक दीखने की रही है। इसके लिए वह साफ-सुथरे आकर्षक कपड़े पहनता रहा है। धुलने के बाद इन कपड़ों पर इस्तरी करने की परंपरा प्रारंभ में ही विकसित हो गई थी। 

प्रारंभ में धोबी कपड़े धोने के बाद इस्तरी करता था। इस इस्तरी(electric iron) का स्वरूप लगभग वैसा ही होता था जैसा आज की इस्तरी(आयरन) का होता है; पर यह बड़े आकार की होती थी तथा इसके अंदर जलता कोयला रहता था। कोयले का ताप और इस्तरी का भार कपड़े पर तह बनाता था और सलवटें दूर करता था। इस्तरी करने से पहले कपड़े पर पानी छिड़ककर उसे नम किया जाता था। 

पर उपर्युक्त काम काफी मेहनत का और खर्चीला था। आम आदमी रोजाना इस्तरी किए कपड़े नहीं पहन पाता था। सिर्फ राजे-महाराजे और अमीर लोग ही इसका खर्च उठा पाते थे। 

जब बिजली का उत्पादन प्रारंभ हुआ तो लोग बिजली से इस्तरी करने की कल्पना करने लगे। सन् 1880 के दशक में न्यूयॉर्क के हेनरी सीले ने बिजली से चलनेवाली पहली इस्तरी तैयार की, जो विद्युत् आर्क से चलती थी। इसके अंदर से चटकने की आवाज आती थी। लोग इसका इस्तेमाल करने से डरते थे। 

बाद में इसमें तरह-तरह के सुधार किए गए। इसमें दोनों तरफ एक-एक प्लग लगाया गया। प्लग को सुरक्षित तरीके से सॉकेट में लगाया गया। अब लोगों को इसपर भरोसा होने लगा और यह हर घर का जरूरी हिस्सा बन गई।

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