Duniya ke ajeeb rahasya-ऐसे हुए गायब कि मिले ही नहीं 

Duniya ke ajeeb rahasya

Duniya ke ajeeb rahasya-ऐसे हुए गायब कि मिले ही नहीं 

दिसंबर, 1949 को भीड़ भरी एक बस से अचानक एक आदमी गायब हो गया। वह आदमी था टेट फोर्ड। वह बेनिंग्टन से बस में बैठकर सेंट अलबांस जा रहा था। वह पूर्व सैनिक था। बस यात्रियों ने बाद में बताया कि उन्होंने टेट फोर्ड को अपनी सीट पर सोते हुए देखा था। लेकिन जब बस सेंट अलबांस पहुंची तो बस में से अन्य सभी यात्री तो उतर गए लेकिन टेट फोर्ड का कहीं पता नहीं था। उसका सामान बस में ही उसकी सीट पर पड़ा था और बस का टाईम वहां खुला पड़ा था। पुलिस उसे कभी नहीं ढूंढ़ पाई। वह यह भी पता नहीं लगा पाई कि वह बस से कहीं उतर गया था या नहीं? 

इससे ठीक तीन साल पहले 1 दिसंबर, 1946 को पॉल वेल्डन नाम की एक अठारह वर्षीय लड़की लोगों के देखते-देखते ही गायब हो गई। वह ग्लेसनबरी पहाड़ियों में घूमने गई थी। उससे करीब सौ गज पीछे चल रहे एक दम्पती ने उसे | अपने आगे चलते देखा था। रास्ता एक चट्टान के बाद मुड़ता था। उस दम्पती ने देखा कि वेल्डन उस चट्टान तक पहुंचने के बाद नजर नहीं आई। उसके बाद उस लड़की का कहीं पता नहीं लगा कि आखिर वह कहां गई। 

अक्टूबर, 1950 के बीच आठ वर्षीय पॉल जेक्सन को उसकी मां अपने फार्म में लिए बैठी थी। वह वहां पशुओं की देखभाल का काम करती थी। पॉल को वहीं छोड़कर उसकी मां पशुओं को देखने गई और जब लौटी तो वह बच्चा गायब था। उसे ढूंढ़ने के लिए दिन-रात एक कर दिए लेकिन वह नहीं मिला। 

इंग्लैण्ड में सेपटन मेलर के ओवेन पेर्फिट को लकवा हो गया था। जून, 1763 में उसकी बहन उसे धूप खाने के लिए घर के बाहर बिठा गई थी। 60 वर्षीय पेर्फिट ने एक शर्ट पहन रखी थी। उस पर हवा से बचने के लिए एक कोट भी ओढ़ रखा था। उनके घर के सामने एक खेत था जिसमें मजदूर काम कर रहे थे। करीब 7 बजे शाम को पेर्फिट की बहन सुसना पड़ोस में किसी काम से गई और फिर थोड़ी देर बाद ही लौट आई। लेकिन जब वह लौटी तो कुर्सी खाली पडी थी और पेर्फिट गायब था। कुर्सी पर वह कोट अवश्य पड़ा था जो पेर्फिट ने पहन रखा था। लाख कोशिशों के बाद भी पेर्फिट का कहीं पता नहीं चला। जबकि लकवे के  कारण वह चल भी नहीं सकता था। 

1809 में आस्ट्रिया की एक अदालत में पेशी के लिए ब्रिटिश राजनयिक बेंजामिन बाथहर्ट जा रहे थे। रास्ते में पेरलबर्ग में वे रात्रि भोजन के लिए रुके। भोजन करने के बाद वे वापस अपनी घोडागाड़ी में आगे की तरफ चढ़े। बेंजामिन के साथी घोड़ागाड़ी में पीछे बैठे। पीछे बैठकर साथियों ने जब आगे देखा तो आगे की सीट पर बेंजामिन नहीं थे। उनकी समझ में कुछ नहीं आया। बेंजामिन चढ़े तो गाड़ी में थे, फिर वहां बैठे दिख क्यों नहीं रहे। बेंजामिन उसके बाद इस दुनिया में किसी को नहीं मिले। 

1975 में जेक्सन राइट अपनी पत्नी के साथ कार में न्यूजर्सी से न्यूयार्क सिटी जा रहे थे। इसके लिए उन्हें लिंकन टनल से गुजरना था। राइट के अनुसार टनल से गुजरते समय ठंडक से कार के शीशों पर ओस जम गई जिसे साफ करने के लिए उनकी पत्नी मार्था पीछे मुड़ी और पीछे का कांच साफ करने लगी। राइट का ध्यान सामने की तरफ था, जब उन्होंने मुड़कर देखा तो मार्था गायब थी। 

सितंबर, 1880 में टेनिस प्रांत के गलेटिन कस्बे के नजदीक एक फार्म हाउस में जो घटना हुई, उसे कई लोगों ने देखा था। फार्म हाउस के प्रांगण में दो बच्चे जार्ज और सारा खेल रहे थे। उनके माता-पिता डेविड और ऐसा मुख्य दरवाजे पर खड़े थे। डेविड अपना घोड़ा लेने के लिए जाने वाले थे कि उन्हें सामने से एक बग्घी आती दिखाई दी जिसमें उनके दोस्त न्यायाधीश अगस्त पेक का परिवार बैठा हुआ था। डेविड ने देखा कि न्यायाधीश पेग नीचे उतर कर उनके बच्चों जार्ज और सारा की तरफ बढ़े। 

डेविड ने अभिवादन के लिए हाथ हिलाया और फिर ऐसा और पेग के परिवार के देखते-देखते डेविड गायब हो गए। ऐसा और न्यायाधीश ने सोचा कि शायद जमीन में कोई गड्ढा हो जिसमें डेविड गिर पड़े हों। लेकिन वहां खुदाई करने पर कुछ नहीं मिला। उनका कभी पता नहीं लगा। हालांकि उनके गायब होने के कुछ महीने बाद जिस जगह डेविड गायब हुए थे, वहां की जमीन पर उगी घास करीब 15 फीट व्यास के गोल घेरे में पीली पड़ गई थी। 

Duniya ke ajeeb rahasya-ऐसे हुए गायब कि मिले ही नहीं 

एक-दो लोगों के गायब होने के तो ये मामले थे। लेकिन 1915 में सेना की एक पूरी बटालियन ही गायब हो गई। इस घटना के गवाह तीन सैनिकों ने अपनी कम्पनी में बताया कि वे न्यूजीलैंड की रॉयल नारफोक रेजीमेंट को तुर्की के सुवला बे में पहाड़ियों की तरफ मार्च करते हुए देख रहे थे। इस बटालियन में अंग्रेज सैनिक थे। पहाड़ी पर बादल घिरे हुए थे, लेकिन वे अंग्रेज सैनिक बिना किसी हिचकिचाहट के उन बादलों में प्रवेश कर गए, लेकिन फिर दिखाई नहीं दिए। 

जब बटालियन का आखिरी सैनिक बादलों में प्रवेश कर गया तो बादल धीरे-धीरे पहाड़ियों से ऊपर उठकर आसमान में चले गए। युद्ध के दौरान जो सैनिक जिस-जिसके कब्जे में थे, बंदी बना लिए गए थे। जब युद्ध खत्म हुआ तो ब्रिटेन की सरकार ने तुर्की की सरकार को अपने बंदियों की जो सूची दी उसमें उस बटालियन के सभी सैनिकों के नाम भी थे। लेकिन तुर्की सरकार बार-बार यही कहती रही कि न तो उन्होंने बटालियन को कब्जे में किया, न ही उसके पास उस बटालियन का कोई सैनिक है। 

बटालियन का किस्सा तो आपने अभी पढ़ा। लेकिन नवंबर, 1930 में तो कनाडा में एक पूरा का पूरा गांव ही गायब हो गया। इस एस्कीमों गांव में आदमी, औरतों और बच्चों सहित करीब दो हजार लोग रहते थे। उत्तरी कनाडा में एंजीपूनी झील के किनारे बसे इस गांव में जो लेबेल फर खरीदने गया था। लेबेल अक्सर गांव में जाता रहता था। उसके अनुसार वहां मछुआरा समुदाय के करीब 2000 लोग रहते थे। 

Duniya ke ajeeb rahasya-ऐसे हुए गायब कि मिले ही नहीं 

नवंबर, 1930 में जब वह वहां गया तो सारा गांव वीराना मिला। उस गांव की सभी झोंपड़ियां और भण्डार खाली थे। उसने वहां पर एक बर्तन में आग अवश्य लगती देखी। जिससे यह अंदाजा होता था कि वहां कुछ देर पहले तक लोग थे। 

लेबेल ने प्रशासन को इसकी जानकारी दी। उसके बाद उस गांव के लोगों की खोजबीन शुरू हुई, लेकिन उस गांव में रहने वाले किसी भी आदमी का पता नहीं चला। उस गांव के जो कुत्ते एस्कीमों गाड़ी खींचते थे वे 12 फीट ऊंचे बर्फ के ढेर में दबे पड़े मिले। वे सब भूख से मर गए थे जबकि गांव की झोंपड़ियों में सारा सामान और भोजन जहां का तहां पड़ा था। 

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

fifteen + 7 =