डूबे हुए जहाज समुद्र की तली तक क्यों नहीं पहुँच पाता-Dube hue jahaj samudra ki tali tak kyu nahi pahunch pata

डूबे हुए जहाज समुद्र की तली तक क्यों नहीं पहुँच पाताजूल्स वर्ने ने अपने उपन्यास ‘ट्वंटी थाउजेंड लीग्ज अंडर दि सी’ में लिखा है कि जहाज डूबने के बाद कुछ गहराई पर ‘स्थिर’ लटक रहा था। क्या यह सही है? हाँ, सही है। 

इसका कारण यह है कि समुद्र के जल के ऊपरी स्तरों के दाब से कुछ गहराई पर घनत्व इतना हो जाता है कि जहाज का मलवा नीचे न जाकर बीच में लटका रह जाता है। अनुमान है कि 10 मीटर गहराई पर जल का दाब प्रति वर्ग सेमी. पर 1 किग्रा. होता है। 

इस तरह 50 मीटर गहराई पर 5 किग्रा. और 100 मीटर गहराई पर 10 किग्रा. तो 1000 मीटर यानी एक किमी. गहराई पर 100 किग्रा. दाब होगा। 

समुद्र की तली की अधिकतम गहराई 11 किमी. से भी अधिक (11,033 मीटर) है। जरा सोचो, इतनी गहराई पर कितना भीषण दाब होगा! 

जिस तरह पारे में लोहे का टुकड़ा डूबता नहीं, उसी तरह समुद्री जल में टूटा जहाज। फिर जहाज के भीतर तमाम वायु फँसी रहती है, जिसके कारण जहाज कुछ गहराई पर जाकर रुक जाता है, वहीं लटका रहता है। 

आधुनिक पनडुब्बियाँ 250 मीटर से अधिक गहराई तक नहीं जा सकतीं, क्योंकि वे 25 वायुमंडल से अधिक दाब सहन नहीं कर सकतीं। 

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