Drishti IAS Essay 2021-देश में खेल-कूद की संस्कृति का विकास 

Drishti IAS Essay 2021

Drishti IAS Essay 2021-देश में खेल-कूद की संस्कृति का विकास 

एक बार भारत के प्रख्यात क्रिकेट खिलाड़ी कपिल देव से पूछा गया कि आखिर भारत को खेल प्रतियोगिताओं में उसकी जनसंख्या के अनुपात में पदक क्यों नहीं मिलते? कपिल देव ने इस पर बहुत सूझ-बूझ भरा उत्तर दिया। उन्होंने कहा कि भारत ‘खेल संस्कृति’ की कमी की वजह से अपनी क्षमताओं का पूरा उपयोग नहीं कर पा रहा है। इसी बात की व्याख्या करते हुए उन्होंने कहा-खेल संस्कृति का मतलब यह नहीं है कि कुछ नौजवान रोजाना खेल-कूद का अभ्यास करते रहें। उनके अनुसार जिस रोज देश में दादा-दादी, नाना-नानी अपने नाती-पोतों के साथ सुबह को जॉगिंग करने जाने लगेंगे उसी दिन देश में खेल-संस्कृति का शुभागमन हो जाएगा। इसी को देखते हुए भारत सरकार ने 29 अगस्त, 2019 को खेल दिवस के अवसर पर फिट इंडिया अभियान (Fit India Movement) की भी शुरूआत की। नौजवान और बुजुर्ग और सभी नागरिकों को खेल कूद को आदत की तरह अपनाना चाहिए, तभी भारत खेल-कद का सुपरवाइजर बन पाएगा जिसका वह वास्तविक हकदार है। 

“पिछले कुछ वर्षों में इस बात के स्पष्ट संकेत हैं कि सरकार खेल-कूद पर जोर देना चाहती है। उसका जोर अंतर्राष्ट्रीय स्पर्धाओं में सिर्फ पदक जीतने तक के लिए सीमित नहीं है बल्कि वह सभी लोगों को किसी न किसी तरह खेल-कूद और शारीरिक गतिविधि में लगाए रखने को प्रेरित करना चाहती है।” 

पिछले कुछ वर्षों में इस बात के स्पष्ट संकेत हैं कि सरकार खेल-कूद पर जोर देना चाहती है। उसका जोर अंतर्राष्ट्रीय स्पर्धाओं में सिर्फ पदक जीतने तक के लिए सीमित नहीं है बल्कि वह सभी लोगों को किसी न किसी तरह खेल-कूद और शारीरिक गतिविधि में लगाए रखने को प्रेरित करना चाहती है। सबसे ज्यादा उत्साहवर्धक बात तो यह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं इसमें बड़ी दिलचस्पी ले रहे हैं और देश की जनता को चुस्त-दुरुस्त रखने और शारीरिक श्रम वाले खेल-कूद में हिस्सा लेने के लिए प्रेरित करने में राष्ट्र का नेतृत्व कर 

केन्द्र सरकार की कई पहलों में ‘खेलो इंडिया’ एक ऐसी पहल है जिसकी ओर सबका ध्यान गया है। खेलो इंडिया (स्कूली खेल कृद) एक ऐसी अवधारणा है जो ओलम्पिक के मॉडल पर आधारित है। इसका शुभारंभ जनवरी, 2018 में किया गया। यह देश के 17 साल से कम उम्र के स्कूली विद्यार्थियों के लिए राष्ट्रीय स्तर की वार्षिक खेल-कूद प्रतियोगिता है जिसमें कई खेल शामिल हैं। खेलो इंडिया स्कूल खेल-कूद प्रतियोगिता में कई रिकार्ड टूटे और अनेक उपलब्धियाँ हासिल की गयीं। 16 खेल स्पर्धाओं में 209 स्वर्ण पदक दिये गये। इन प्रतिस्पर्धाओं में तीरंदाजी, बैडमिंटन, बास्केटबॉल, बॉक्सिंग, फुटबॉल, जिमनॉस्टिक, हॉकी, जूडो, कबड्डी, खो-खो, निशानेबाजी, तैराकी, बॉलीबॉल, वेट लिफ्टिंग, कुश्ती और ट्रैक एंड फील्ड स्पर्धाएं शामिल थीं। 

हरियाणा ने सबसे अधिक पदक जीते जिनमें 38 स्वर्ण और 102 अन्य पदक शामिल थे। महाराष्ट्र दूसरे स्थान पर रहा और उसने कुल 110 पदक जीते जबकि 94 पदक जीतकर दिल्ली ने । तीसरा स्थान प्राप्त किया। खेलो इंडिया स्कूल खेलों में प्रतिस्पर्धा की गुणवत्ता सर्वोच्च दर्जे की रही। सबसे ज्यादा उत्साहवर्धक बात यह थी | कि खेलो इंडिया के कुछ चैम्पियनों ने आगे चलकर राष्ट्रमंडल खेलों समेत कई अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भी नाम कमाया। 

खेलो इंडिया स्कूल खेलों में मनु भाकर (शूटिंग) और श्रीहरि नटराज (तैराकी) ने कई रिकॉर्ड तोड़ कर चैम्पियन के रूप में उभर कर सामने आये। 

मनु और नटराज को अपनी शानदार उपलब्धियों की बदौलत ऑस्ट्रेलिया में राष्ट्रमंडल खेलों में जगह मिली और वहाँ भी इन्होंने निराश नहीं किया, नजराज ने 50 मीटर बैकस्ट्रोक तैराकी स्पर्धा में अपने ही रिकॉर्ड में सुधार किया और सेमीफाइनल तक पहुँचने में कामयाबी पायी मगर फाइनल में पहुंचने से रह गये। इस बीच मनु भाकर ने ऑस्ट्रेलिया के गोल्ड कोस्ट में आयोजित राष्ट्रमंडल खेलों में भारत के लिए पहला स्वर्ण पदक जीता। मनु ने 10 मीटर एयर पिस्टल स्पर्धा में नया राष्ट्रमंडल खेल रिकॉर्ड बनाया और हीना सिद्धू सहित कई वरिष्ठ शूटरों को पछाड़ दिया। भाकर को भारत के भविष्य के शूटिंग स्टार के रूप में देखा जा रहा है। सरकार की इस महत्त्वपूर्ण खेल प्रतिस्पर्धा में कामयाबी हासिल करने की बड़ी महत्वाकांक्षी परियोजना है। केन्द्रीय खेल और युवा कार्य मंत्री श्री राज्यवर्धन सिंह | राठौड़ ने कहा है कि इसके लिए धन की कोई कमी नहीं है। मंत्रालय ने भविष्य में सबसे निचले यानी सामुदायिक स्तर पर और अधिक संख्या में प्रशिक्षकों को प्रशिक्षण देने की योजना बनायी है ताकि वे सही तरह से प्रशिक्षण उपलब्ध करा सकें। 

सरकार एक कार्यक्रम भी चला रही है जिसका उद्देश्य ओलम्पिक खेलों में और अधिक संख्या में भारतीय खिलाड़ियों को विजेता मंच पर पहुँचते देखना है। इस कार्यक्रम का नाम ‘टॉरगेट ओलम्पिक पोडियम’ (टॉप) रखा गया है। इसका शुभारंभ वर्ष 2014 में युवा कार्य और खेल मंत्रालय ने किया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य 2016 और 2020 के ओलम्पिक खेलों के लिए पदकों की संभावनाओं का पता लगाना और खिलाड़ियों को प्रशिक्षण में मदद करना है। इसके पहले चरण में सात खेलों-एथलेटिक्स, तीरंदाजी, बैडमिंटन, मुक्केबाजी. शूटिंग, कुश्ती और यॉटिंग की पहचान की गयी है। 

दुनिया के कई देशों में खेल अर्थव्यवस्था का भरपूर फायदा उठाया जाता है। खेल-कूद वैश्विक उद्योग है जिसका कारोबार करीब 600 अरब डालर होने का अनुमान लगाया गया है। लेकिन इस कई अरब डालर वाले उद्योग में भारत का योगदान केवल 2 अरब डालर का ही है। भारत सरकार ने उन कमियों की पहचान कर ली है। सरकार चाहती है कि देश में खेल उद्योग का भी विस्तार हो क्योंकि यह एक ऐसा क्षेत्र है जिसमें भारत ने वैसा प्रदर्शन नहीं किया है जैसा वह कर सकता था। सरकार का मानना है कि खेल-कूद में सक्रिय भागीदारी और अंतर्राष्ट्रीय स्पर्धाओं में पर्याप्त संख्या में मेडल जीतकर देश में खेल उद्योग के लिए माहौल को बेहतर बनाया जा सकता है। केरल में विश्व स्तरीय सिंथैटिक ट्रैक का वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए उद्घाटन करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा था कि खेल संस्कृति के विकास से देश की खेल अर्थव्यवस्था के विकास में मदद मिल सकती है। उन्होंने कहा है कि खेल-कूद से प्रोफेशनल लीग, खेल-कूद औषधि, खेल वस्तुओं, खेल कर्मचारियों, पौष्टिक आहार, कौशल विकास तथा खेल प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में रोजगार के अवसर उत्पन्न किये जा सकते हैं। 

विभिन्न खेलों और कई देशों वाली प्रतियोगिताओं में भारत का प्रदर्शन लगातार सुधर रहा है और बीते वर्षों में कार्य निष्पादन में सुधार का स्पष्ट रूझान उभर कर सामने आया है। 2008-2016 तक की अवधि में (अगर 2014-15 को छोड़ दिया जाए) भारत की उपलब्धियों में स्पष्ट सुधार देखा जा सकता है। 

1990 में बीजिंग एशियाई खेलों में कबड्डी में एकमात्र कांस्य पदक प्राप्त कर दयनीय प्रदर्शन करने और 2014 के इंचेओन में एशियाई खेलों में आठवां स्थान हासिल करने के बाद से अब तक भारत कई मंजिलें पार कर चुका है। 19 सितंबर से 4 अक्टूबर, 2014 तक आयोजित इंचेओन एशियाई खेलों में भारत ने 11 स्वर्ण, 10 रजत और 36 कांस्य पदक प्राप्त किये और इस तरह कुल 57 पदक जीते। मगर यह 2010 में चीन के ग्वांझाऊ में आयोजित एशियाई खेलों में भारत के प्रदर्शन की तुलना में कम है जहाँ भारत ने कुल 65 पदक जीतकर छठा स्थान हासिल किया था। 

विभिन्न खेलों और कई देशों वाली प्रतियोगिताओं में भारत का प्रदर्शन लगातार सुधर रहा है और बीते वर्षों में कार्य निष्पादन में सुधार का स्पष्ट रूझान उभर कर सामने आया है। 

राष्ट्रमंडल खेलों में भारत का बेहतरीन प्रदर्शन वर्ष 2010 में रहा जब देश ने कुल 101 पदक जीते जिनमें 38 स्वर्ण, 27 रजत और 36 कांस्य पदक भी शामिल थे। भारत पदक तालिका में पदकों की कुल संख्या की दृष्टि से दूसरे स्थान पर यानि ऑस्ट्रेलिया के बाद रहा। मगर 2014 में भारत के प्रदर्शन में कुछ गिरावट दिखाई दी और उसे 15 स्वर्ण, 30 रजत और 19 कांस्य पदकों से ही संतोष करना पड़ा। इसके बाद हाल में ऑस्ट्रेलिया में सम्पन्न राष्ट्रमंडल खेलों में भारत ने 66 पदक जीते जिनमें से 26 स्वर्ण, 20 रजत और 20 कांस्य पदक शामिल थे। बहुआयामी स्पर्धाओं को छोड़कर भारतीय खिलाड़ियों ने बैडमिंटन और शूटिंग में शानदार सुधार किया है और टेबल टेनिस, एथलेटिक्स तथा शतरंज आदि में भी स्पष्ट सुधार नजर आता है। टारगेट ओलम्पिक पोडियम जैसे कार्यक्रमों का मकसद पदक तालिकाओं में भारत की स्थिति को सुधारना है और इन सब प्रयासों के अच्छे नतीजे दिखाई भी देने लगे हैं। 

सबसे अधिक प्रसन्नता की बात तो यह है कि वर्तमान सरकार देश में खेल संस्कृति के विकास के लिए प्रयत्नशील है। इसके लिए उसने दो सूत्री नीति अपनायी है-पहला, लोगों को खेल-कूद में हिस्सा लेने के लिए प्रेरित करना; और दूसरा, भारत को अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में अधिक पदक दिलवाने में मदद करना। निस्संदेह देश में खेलकूद के बारे में जागरूकता की कमी की समस्या के समाधान का भी यह सही तरीका है। भारत को खेल-कूद के क्षेत्र में अग्रणी देश बनाने के लिए खेलों को चंद (अत्यधिक महत्वाकांक्षी) लोगों की गिरफ्त से छुड़ाना होगा और आम जनता को इससे जोड़ना होगा। जब अधिक से अधिक संख्या में लोग खेल-कूद में भाग लेने लगेंगे तो अंतर्राष्ट्रीय स्पर्धाओं में कम पदक जीतने की समस्या अपने आप ही हल हो जाएगी। 

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा.

5 × 2 =