डॉलर का आविष्कार कैसे हुआ-Dollar ka aavishkar kaise hua

डॉलर का आविष्कार कैसे हुआ

डॉलर का आविष्कार कैसे हुआ

मनुष्य अपना लेन-देन आरंभ में वस्तुओं के लेन-देन से करता था, जिसे बार्टर प्रथा का नाम दिया गया था। विकास प्रक्रिया के साथ-साथ इस प्रथा में अपेक्षित सुधार हुआ और मुद्रा का चलन शुरू हुआ। हर राजा अपने है ढंग से अपनी मुद्रा को सिक्के का रूप देकर उसे टकसाल में डालने लगा। सिक्कों में सबसे पहले तांबा निर्मित सिक्के अस्तित्व में आए। इसके बाद चांदी, सोने व निकिल के सिक्कों का प्रचलन हुआ। बाद में सिक्कों की सहायता के लिए नोटों की करेंसी भी प्रचलन में आई।

डॉलर का आविष्कार कैसे हुआ

आज हर राष्ट्र की अपनी मुद्रा में सिक्के एव नोट (कागज के) प्रचलित हैं। हर राष्ट्र की मुद्रा का उसकी मांग के अनुसार विश्व बाजार में महत्त्व है। संयुक्त राज्य अमरीका विश्व का सबसे धनी, साधन संपन्न एवं विकसित राष्ट्र है, इसलिए वहां की मुद्रा डॉलर का मूल्य विश्व बाजार में सबसे ऊंचा है। भारतीय मुद्रा उसकी तुलना में काफी नीचे मानी जाती है।

यहां एक प्रश्न यह भी है कि डॉलर का नाम डॉलर कैसे पड़ा? बहुत पुराने जमाने से ही चांदी का मुद्रा के रूप में प्रयोग हो रहा है। 25वीं शताब्दी पहले एशिया माइनर (टर्की) में चांदी के सिक्के चलते थे। आज से लगभग 75 वर्ष पहले हमारे देश में भी जॉर्ज पंचम के चलाए चांदी के ही सिक्के थे।

आज से लगभग 425 वर्ष पहले बोहेमिया की जोखिम्स देलर नामक जगह में चांदी की इतनी बड़ी खान मिली कि वहां एक टकसाल ही खोल दी गई। वहां ढाला गया चांदी का एक सिक्का उस जगह के नाम पर जोखिम्स देलर कहलाता था। इसे लोग संक्षेप में ‘देलर’ कहने लगे। इसी देलर से अमरीकी सिक्के (मुद्रा) का नाम डॉलर प्रचलित हो गया।

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