दूरस्थ शिक्षाः भविष्य का रास्ता

दूरस्थ शिक्षाः भविष्य का रास्ता

दूरस्थ शिक्षाः भविष्य का रास्ता (Distance Education: Way to Future) 

खगोलीकरण/ वैश्वीकरण के युग में निरंतर वर्धमान लोकतंत्रीकरण तथा विज्ञान एवं यांत्रिकी के पसरते प्रभाव का हमारे दैनिक जीवन के सभी पक्षों पर प्रभाव पड़ रहा है। हमारी शिक्षा व्यवस्था इससे अप्रभावी नहीं रह सकती। जीवन की गति अति तीव्र है और जीवन रूटीन से उलझा हुआ है। ऐसे में व्यक्ति के पास अपनी अनेक गैर-पेशेवर गतिविधियों के लिए समय बिल्कुल नहीं मिल पा रहा है। आज अगर हम प्रतिस्पर्धा की दुनिया की भागम-भाग से पार पाना चाहते हैं तो अपने क्षेत्र के नवीनतम विकासक्रमों से अनिवार्यतः अवगत रहना पड़ेगा। लेकिन समय की अत्यल्पता के कारण यह संभव नहीं लगता क्योंकि कार्यस्थल तथा परिवार की हमसे अनेक अपेक्षाएँ होती हैं।

Click here -HINDI NIBANDH FOR UPSC  

वर्तमान विषयों पर हिंदी में निबंध

इसी बिंदु पर आकर दूरस्थ शिक्षा एक अहम भूमिका निभाती है क्योंकि यह स्थान एवं समय के मामले में लचीली होती है। खुली एवं दूरस्थ शिक्षा व्यवस्था एक ज्ञानाधारित समाज के अभ्युदय का आश्वासन देती है यह विशेषकर विकासशील दुनिया के बारे में ज्यादा सच है। खुली एवं दूरस्थ शिक्षा का निर्णायक महत्व है। यह तीसरी दुनिया के गंभीर शैक्षणिक चुनौतियों से निबट सकती है। शिक्षण की इस विधि की उपलब्धता गुणवत्ता, खर्च इन चुनौतियों को प्रभावित करती हैं। 

आज सामान्यतः लोग अपनी शैक्षणिक योग्यता बढ़ाना चाहते हैं ताकि वे अत्यधिक बहु-विषयी तथा प्रतिस्पर्धी कार्य परिवेश के लिए स्वयं को योग्य साबित कर सकें। अपने कई व्यस्तताओं के कारण वे उच्चतर शिक्षा के लिए समय नहीं निकाल पाते। ऐसे में इस कमी को दूरस्थ शिक्षा दूरकर देती है क्योंकि इसमें स्थान-समय को लेकर एक लचीलापन होता है। अगर दूरस्थ शिक्षा अधिक लोकप्रिय होती जा रही है तो इसका कारण है कि यह कहीं भी रहकर तथा अपनी गति से शिक्षा पाने की सुविधा मुहैया कराती है। इंदिरा गांधी खुला विश्वविद्यालय, जो कि दुनिया का विशालतम विश्वविद्यालय है, इस बात का सबूत है।

1960 के दशक में ही कोठारी आयोग ने दूरदृष्टि का परिचय दिया था। वह यह समझ गया था कि दूरस्थ शिक्षा केवल विश्वविद्यालय की डिग्री तक ही सीमित नहीं होनी चाहिए बल्कि यह ऐसा रोजगारपरक विशेषीकृत पाठ्यक्रम भी होना चाहिए जो उद्योग, कृषि तथा अन्य क्षेत्रों के लिए उपयोगी कर्मी दे सके। खुली तथा दूरस्थ शिक्षा का विकास कई कारकों द्वारा हुआ है जो जनत्रांकीय, सामाजिक-आर्थिक, राजनीतिक तथा तकनीकी विचार को आवरित करते हैं। एक अनमान के अनसार हमारे देश में लगभग 30 करोड निरक्षर हैं। भारत सरकार के शिक्षा विभाग 2016 की एक रिपोर्ट के अनुसार उच्च शिक्षा की पहँच देश भर के छात्रों के 10% तक ही है, जबकि चीन में 22% तथा संयुक्त 

राष्ट्र अमेरिका में 28% है। दूसरे शब्दों में उच्च शिक्षा केवल 1 करोड़ 40 लाख लोगों तक पहुँची है। अतः हमें कम-से-कम 40% लोगों को उच्च शिक्षा से जोड़ना है, अगर हमें विकसित राष्ट्रों की विशिष्ट पंक्ति में शामिल होना है तो | 

इस लक्ष्य को पारंपरिक शिक्षातंत्र के जरिये हासिल करना बहुत मुश्किल है। जबकि खुली मुक्त तथा दूरस्थ शिक्षा का तंत्र मांग में घातांकी वृद्धि को पूरा कर सकता है, केवल फ्रंट-एंडेड (front-ended) शिक्षा की मांग ही नहीं, बल्कि जीवनपर्यंत प्रशिक्षण की मांग को भी पूरा कर सकती है। मुक्त शिक्षा व्यवस्था का द्रुत प्रसार इसकी उपादेयता को साबित करता है। यह भी दर्शाता है कि विकासशील देशों अल्प संसाधन परिवेश में इसकी प्रभावकारिता कितनी है। दूरस्थ शिक्षा उच्च शिक्षा का लोकतंत्रीकरण करती है, आवश्यकता केंद्रित अकादमिक पाठ्यक्रमों को पेश करती है, लोगों के दरवाजे तक स्तरीय शिक्षा पहुँचाती है प्रचार करती है। यह उच्च शिक्षा के मानक तय करती हैं और उनका निर्वाह करती है। दूरस्थ शिक्षा के सफल प्रयोग के कई कारण हैं: प्रवेश-निकासी नियमनों की आसानी, कोर्स चयन में असुविधा लचीलापन तथा परीक्षा एवं अध्ययन के स्थान के चयन की सुविधा। आज अपने देश में मुक्त विश्वविद्यालयों में वार्षिक नामांकन की संख्या लगभग 40 लाख तक पहँच चकी है। देश में उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे विद्यार्थियों की संख्या की यह एक-तिहाई है। आगे चलकर शिक्षार्थी महज निष्क्रिय प्राप्तकर्ता नहीं रह जाएंगे बल्कि ज्ञान संसाधनों तथा विविध ज्ञान उत्पादों के उपभोक्ता भी होंगे। आज एक शिक्षार्थी के लिए आसान है कि वह दुनिया के किसी कोने से अपने अनुकूल कोई पाठ्य विषय और पाठ्यक्रम चुन लें। 

वर्तमान रुझान देखकर पता चलता है कि दूरस्थ शिक्षा व्यवस्था की क्षमता को और बढ़ाने के व्यापक अवसर है। इसके लिये व्यवस्था को अतिरिक्त संरचना और सहायता की जरूरत होगी। विज्ञान और प्रविधि के हाल के विकास की मदद से मुक्त शिक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने में सहूलियत होगी। उच्च शिक्षा के क्षेत्र में प्रतिमान परिवर्तन को नई सूचना एवं संचार प्रविधि के व्यापक इस्तेमाल के कारण मदद मिलती है। संरचना के निर्माण तथा पाठ्यक्रमों के विकास के लिए भारी पूंजी निवेश की आवश्यकता है ताकि उच्च शिक्षा की बढ़ती मांग की घातांकी वृद्धि को पूरा किया जा सके। इस तरह इस वृद्धि हतवूजी को बनाये रखने के लिये मुक्त एवं दूरस्थ शिक्षा व्यवस्था में निजी क्षेत्र की सहभागिता तथा उपक्रम जरूरत हो जाता है।

आज इग्नू के अलावा चौदह अन्य मुक्त विश्वविद्यालय है जो देश भर में कार्यरत है। दूरस्थ शिक्षा व्यवस्था आज भारी संख्या में विद्यार्थियों को अपनी ओर आकर्षित कर रही है। इसमें युवा वर्ग के छात्र तो हैं ही, अधेड़ उम्र की लोग इसमें रुचि ले रहे हैं क्योंकि आज की प्रतिस्पर्धा केंद्रित दुनिया में वे निरंतर शिक्षण की आवश्यकता महसूस कर रहे हैं। ऐसे लोग अपने करियर के लिए अपनी कुशलता में इजाफा करना चाह रहे हैं। 

भावी शिक्षार्थी अब केवल निष्क्रिय प्राप्तकर्ता नहीं रहेंगे, बल्कि वे अब विविध ज्ञान सामग्रियों तथा सूचनाओं के सक्रिय संसाधक होंगे। आज यह संभव है कि एक शिक्षार्थी एक सार्थक पाठ्यचर्या तथा कोर्स दुनिया के किसी कोने से चन सके। सामान्यतः मक्त तथा दूरस्थ शिक्षा व्यवस्था तथा विशेषकर इग्न (IGNOU) की सफलता दूरस्थ शिक्षा के क्षेत्र में काफी स्पेस बना लिया है, उच्च शिक्षा के लगभग 30% विद्यार्थी इससे शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। इस तरह यह कहा जा सकता है कि उच्च शिक्षा के लिए दूरस्थ मुक्त शिक्षा एक मात्र विकल्प है।

इसके अलावे दूरस्थ शिक्षा व्यवस्था लोगों तक पहुँच सकती है। यह कम खर्चे में यानी पारंपरिक व्यवस्था की तुलना में काफी कम खर्चे में संभव है। उत्तर- औद्योगिक समाज-व्यवस्था की ओर की गति के संदर्भ में दूरस्थ शिक्षा तथा मुक्त शिक्षा मुख्य वितरक माध्यम रहे हैं। ये समाज-व्यवस्था वैश्वीकरण तथा बढ़ती अंतर्निभरता से चिह्नित है। इसमें अतिविशिष्ट जनसंचार माध्यमों की भूमिका बड़ी है। यह माना जा रहा है कि अगली सदी में शिक्षा की रीढ़ दूरस्थ शिक्षा की व्यवस्था ही होगी। यह बात उत्साहवर्धक है कि नीतिनियंता इसे उचित महत्व दे रहे हैं। आबादी में की होगी। इसलिये आबादी से जो महत्तम लाभ मिल सकता है उसे ये नीतिनियंता ध्यान में रखे

Click here -HINDI NIBANDH FOR UPSC  

वर्तमान विषयों पर हिंदी में निबंध

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा.

ten − 1 =