डायबिटीज से बचाव-Diabetes se bachav

Diabetes se bachav

डायबिटीज से बचाव कैसे करेंDiabetes se bachav

डायबिटीज हमारे जीवनशैली से जुड़ी एक लाइलाज बीमारी है उचित दवाइयों का सेवन, खानपान में  नियंत्रण, प्रतिदिन एक्सरसाइज करके डायबिटीज को नियंत्रित किया जा सकता है।

डायबिटीज एक गंभीर बीमारी नहीं लेकिन डायबिटीज कई बीमारियों का घर है जिसके कारण हमारे शरीर का कोई अंग प्रभावित होते हैं अगर समय रहते हम हम इस बीमारी का पता नहीं चल पाया और डायबिटीज को नियंत्रित नहीं कर सके तो हार्ट अटैक, किडनी फेल होने, रेटिनोपैथी और ब्रेन स्ट्रोक का खतरा हमारे शरीर में कई गुना बढ़ जाता है।

डायबिटीज क्या है-Diabetes kya hai

डायबिटीज का सबसे बड़ा कारण यह है कि जब हमारा अग्नाशय हमारे शरीर में पर्याप्त मात्रा में इंसुलिन नहीं बना पाता या शरीर द्वारा स्रावित इंसुलिन का उपयोग नहीं कर पाना। इंसुलिन एक प्रकार का हार्मोन है जो हमारे शरीर में रक्त की शंर्करा को नियंत्रित करता है। जब डायबिटीज और नियंत्रित हो जाती है तो हमारे रक्त में  शंर्करा की मात्रा काफी हद तक बढ़ जाती है। डायबिटीज के इस स्थिति को हाइपरग्लाइसेमिया कहते हैं।डायबिटीज मुख्यतः तीन प्रकार के होती है-टाइप 1 डायबिटीज, टाइप 2 डायबिटीज और गेस्टैशनल डायबिटीज। लेकिन हाल ही में डॉक्टरों के प्रयोग द्वारा एक और डायबिटीज का प्रकार देखा गया है जिसे टाइप 1.5 डायबिटीज कहते हैं।

टाइप 1 डायबिटीज

टाइप 1 डायबिटीज से ग्रसित लोगों में देखा गया है उन्हें या तो इंसुलिन का निर्माण नहीं होता या तो बहुत कम मात्रा में होता है। यह डायबिटीज का केस किसी भी आयु वर्ग के लोगों को हो सकता है। लेकिन अधिकतर यह देखा गया है कि बच्चे और बूढ़े इससे ज्यादा ग्रसित होते हैं। टाइप 1 डायबिटीज से ग्रसित व्यक्ति को इंसुलिन नियंत्रण करने के लिए उन्हें इंसुलिन का इंजेक्शन दिया जाता है।

टाइप 2 डायबिटीज

दुनिया में अधिकतर लोग टाइप 2 डायबिटीज के शिकार होते हैं। टाइप टू डायबिटीज के कारण व्यक्ति के रक्त में शुगर की मात्रा अनियंत्रित हो जाती है। ज्यादा कर भारी भरकम या मोटे लोग टाइप टू डायबिटीज के शिकार होते हैं। इसमें कुछ लक्षण टाइप 1 डायबिटीज के ही समान है, लेकिन यह टाइप 1 डायबिटीज की तरह गंभीर नहीं होती है। टाइप टू डायबिटीज में देखा गया है बीमारी के शुरू होने के कई साल बाद तक डायग्नोज नहीं हो पाती।

गेस्टैशनल डायबिटीज

गेस्टैशनल डायबिटीज एक प्रकार का हाइपर ग्लैसेमियां 

है जो सबसे पहले महिलाओं में गर्भावस्था के दौरान पहचान में आती है। इस डायबिटीज के लक्षण टाइप टू डायबिटीज के समान ही है। अगर गर्भवती महिला डायबिटीज के शिकार हो जाए तो यह मां और बच्चों दोनों के लिए खतरा बना रहता है।

टाइप 1.5 डायबिटी

इस डायबिटीज को टाइप-3 डायबिटीज के भी नाम से जाना जाता है। यह डायबिटीज अधिकतर वयस्क लोगों में होती है इस डायबिटीज को तुरंत नियंत्रित करने के लिए लोगों को इंसुलिन की इंजेक्शन की आवश्यकता नहीं होती। यदि व्यक्ति में शुगर की मात्रा नियंत्रित रहे तो मनुष्यों में हृदय का बीमारी टाइप वन और टाइप टू डायबिटीज से कम देखा गया।

डायबिटीज के लक्षण-Diabetes ke lakshan

  • व्यक्ति के हाथ पैर में झुनझुनी या अकड़न आना।
  • भोजन करने के बाद भी भूख महसूस होना
  • बार बार पेशाब लगना
  • शरीर में प्यास अधिक मात्रा में लगना
  • हमारे शरीर का वजन तेजी से घटना
  • आंखों का नजर कमजोर हो जाना
  • हमारे नाखून और त्वचा में संक्रमण होना
  • घाव या किसी चोट के जख्म जल्दी ठीक नहीं होना
  • बिना कोई हार्ड वर्क किए थकान महसूस होना
  • स्किन पर खुजली होना
  • चिड़चिड़ापन महसूस होना
  • हमारे मसूरी और त्वचा में में संक्रमण होना।

डायबिटीज से बचने का उपाय-Diabetes se bachane ka upay

डायबिटीज का आसान शिकार होने वाले हैं

डायबिटीज एक प्रकार का साइलेंट बीमारी है क्योंकि लगभग 15 से 20% मरीजों में डायबिटीज का कोई लक्षण नहीं दिखाई देता। जो लोग शरीर से मोटे हैं उन्हें अपने समय समय पर शुगर टेस्ट करवाते रहना चाहिए ताकि इस बीमारी से शुरुआती लक्षण मैं ही पकड़ा जाए। जिस व्यक्ति को थायराइड होता है उन व्यक्तियों को भी डायबिटीज़ का खतरा बना रहता है। अल्कोहल, खाने में पोषक तत्वों की कमी, आरामदायक जीवन, तनाव व्यक्ति को डायबिटीज होने की आशंका बनी रहती है।

ब्लड शुगर टेस्ट और डायबिटीज स्क्रीनिंग

  • ब्लड शुगर टेस्ट में व्यक्ति का  यूरिन का जांच कर पता लगाया जाता है की रक्त में शुगर की मात्रा कितनी है।
  • डायबिटीज स्क्रीनिंग टेस्ट में व्यक्ति के शरीर में ग्लूकोज के अवशोषण की जांच की जाती है।

यह जांच कब कराए

व्यक्ति के उम्र जब 45 या 50 हो जाए कोई आप अपना यह शुगर जांच करवा सकते हैं। लेकिन आप युवावस्था में ही मोटे हैं यह आपका ब्लड प्रेशर सामान्य से अधिक रहता है। परिवारिक इतिहास में यह बीमारी आपको पुरखों को हो तो हो सकता है तो आप भी इस बीमारी के शिकार हो सकते हैं। लेकिन आजकल इस भागदौड़ जिंदगी में डायबिटीज युवाओं को भी हो जा रही है।

यह जांच कितने अंतराल पर कराएं

हम इस जांच को 3 साल में एक बार करवा सकते हैं। यदि परिवारिक इतिहास में किसी को बीमारी हुआ हो तो आप यह प्रतिवर्ष करवा सकते हैं।

शुगर बीमारी से बचने का उपाय

डायबिटीज ब्लड शुगर को नियंत्रित करने वाली घरेलू उपाय

लहसुन

लहसुन शुगर नियंत्रित करने का प्राकृतिक उपहार है। यह हमारे शरीर में ग्लूकोज के स्तर को कम कर देता है और इंसुलिन की मात्रा हमारे शरीर में बढ़ाता है अर्थात हमें फ्री में इंसुलिन मिलता है।

करेल

करेला हमारे शरीर में अधिक मात्रा में बनने वाले गुलकोज को ग्रहण कर लेता है और हर खून में गुलकोज की मात्रा को कम कर लेता है।

नींबू

नींबू में साइट्रिक एसिड पाया जाता है जो हमारे शरीर में विटामिन सी देता है। नींबू का सेवन करने से यह हमारे भोजन का ग्लिसमिक इंडेक्स को कम कर देता है। नींबू का सेवन हमें खाने में निचोड़ कर या खाना खाने के बाद पानी में डालकर सेवन करना चाहिए। नींबू से व्यक्ति का रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ता है जो हमारे शरीर में अनेक बीमारियों से लड़ने में मदद करता है।

ग्रीन टी

ग्रीन टी में ईजीसी एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं। इसके कारण यह हमारे शरीर में इन्सुलिन लेवल में सुधार करते हैं जिसके कारण खून में ग्लूकोज की मात्रा समान स्तर में बनी रहती है। याद रखें ग्रीन टी में चीनी और शहद का प्रयोग ना करें, सादा ग्रीन टी का सेवन करें।

पालक

हरी  पत्तेदार सब्जियां में पालक बहुत गुणकारी होती है अनेक प्रकार के पोषण के तत्व मौजूद रहते हैं। पालक में मैग्नीशियम की प्रचुर मात्रा होती है जिसके कारण यह हमें डायबिटीज बीमारी में ठीक होने में मदद करती है। वैज्ञानिकों ने शोध से जाना है टाइप टू डायबिटीज रोकने के लिए मैग्निशियम बहुत इंपोर्टेंट है।

मेथी

मेथी डायबिटीज से ग्रसित लोगों के लिए बड़ी गुणकारी औषधि है मेथी का बीज ब्लड मे गुलकोज, इंसुलिन कोलेस्ट्रोल को भी नियंत्रित करने में मदद करता है और हमारे शरीर में अच्छे कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाता है।

एलोवेरा

एलोवेरा की पत्तियां से बनी हुई जूस डायबिटीज के पेशेंट के लिए बहुत लाभकारी है क्योंकि एलोवेरा की पतिया में मौजूद जेली बहुत लाभकारी होता है।

शुगर बीमारी से बचने का उपाय

डायबिटीज होने पर इन चीजों का करें परहेज

  • चीनी का सेवन कम कर दे इसके बदला गुड़(मीठ्ठा) खाएं।
  • मसालेदार, तैलीय पदार्थ तनी भुजी चीजों का सेवन कम कर दे
  • पेय पदार्थ जैसे चाय कॉफी सेवन कम कर दे यदि चाय पीते हैं तो थोड़ा फीका ही पिए।
  • तंबाकू और शराब का सेवन बिलकुल ना ही करें
  • भोजन में जो अधिक कार्बोहाइड्रेट देते हैं जैसे आलू, चावल, ब्रेड, गाजर और केला सेवन कम कर दे

अनेक बीमारियों को उत्पन्न करती है डायबिटीज

डायबिटीज एक प्रकार का साइलेंट जहर या साइलेंट बीमारी है जो हमारे शरीर को धीरे धीरे अनेक बीमारियों से ग्रसित कर देती है। डायबिटीज को समय पर नियंत्रित न किया जाए तो आंखें, किडनी, ह्रदय, तंत्रिकाओं और हमारे शरीर के दूसरे भागों को भी प्रभावित कर सकती है। यह बीमारी साइलेंट डिजीज होने के कारण कभी-कभी हमें इसका पता भी नहीं चलता जब तक कि हमें कोई दूसरी बीमारी ग्रसित ना हो जाए।

डायबिटीज इतना पुराना होगा हमारे शरीर में ब्लड शुगर उतना ही हो अनियंत्रित होते जाता है जिससे हमारे शरीर में अनेक प्रकार की बीमारियां होने लगती है। यदि डायबिटीज को समय होते हुए कंट्रोल ना किया जाए तो यह हमारे शरीर का कोई अंग भी फेल हो सकता है और हमारे जीवन के लिए बहुत बड़ी समस्याएं उत्पन्न कर सकता है।

डायबिटीज के कारण होने वाली प्रमुख बीमारी 

  • हृदय संबंधी समस्याएं
  • पैरों में कमजोरी या पैरों से जुड़ी समस्याएं
  • त्वचा में उत्पन्न रोग
  • दांतो से संबंधित बीमारी
  • आंखों की रोशनी कम होना या आंखों से संबंधित बीमारी
  • अल्जाइमर डिजीज
  • कार्डियोवास्कुलर बीमारी
  • सुनने की क्षमता प्रभावित होना
  • किडनी संबंधी समस्या उत्पन्न होना(नेफ्रोपेथी)
  • हमारे शरीर में तंत्रिकाओं का छती होना(न्यूरोपैथी)

डायबिटीज के कारण गर्भवती महिलाओं को होने वाली समस्याएं

  • जहां तक देखा जाए तो डायबिटीज से ग्रसित महिला स्वस्थ बच्चे को जन्म दे सकती है लेकिन ब्लड में शुगर की मात्रा को नियंत्रित ना किया जाए तो यह मां और बच्चे दोनों के लिए समस्या उत्पन्न कर सकती है।
  • जिस गर्भवती महिलाएं में डायबिटीज होता है उनके बच्चे को आगे चलकर मोटापा या टाइप टू डायबिटीज होने का खतरा बना रहता है।
  • गर्भवती महिला को डायबिटीज होने से जन्म के समय बच्चों को सांस की तकलीफ, उसको शुगर लेवल बढ़ सकता है या उसे पीलिया भी हो सकती है।
  • महिलाओं के प्लेसेंटा से  अतिरिक्त ग्लूकोज निकालकर  बच्चे के अग्नाशय में जा सकता है जिसके कारण बच्चे के आकार और भार में वृद्धि हो सकती है बच्चे की इस स्थिति को मैक्रोसोमिया कहते हैं। इसके कारण महिलाओं में सामान्य प्रसव के दौरान बहुत सी समस्याएं उत्पन्न हो सकती है।
  • गर्भावस्था के समय रक्त में शुगर की मात्रा को नियंत्रित ना किया जाए तो महिलाओं को गर्भपात भी हो सकता है। गर्ब में ही या जन्म के तुरंत बाद ही बच्चों की मृत्यु भी हो सकती है।

डायबिटीज के कारण शरीर में होने वाली बीमारियों के इलाज में बढ़ सकती है जटिलताएं

डायबिटीज में बहुत बड़ा गुण है हमारे शरीर में कभी अकेले नहीं आती यह अपने साथ अनेक बीमारियों को भी लेकर आती है,इसके कारण हमारे शरीर में अनेक गंभीर समस्याएं भी उत्पन्न हो जाती है।अगर हमारे शरीर में कहीं चोट लगने के कारण भाव उत्पन्न हो जाए तो उसे ठीक होने में बहुत समय लग जाएगा। अगर हमारे दांत में कीड़े लग जाए और दांत में गंभीर दर्द हो डॉक्टर हमारे दांत को तब तक नहीं निकालेगा जब तक हमारे शरीर में शुगर कंट्रोल ना हो जाए।

डायबिटीज के रोगी को सामान्य होगी की तुलना में ऑपरेशन के समय ज्यादा खतरा बना रहता है।इस जटिलताओं से बचने के लिए डॉक्टर रोगी को 2 से 3 दिन पहले भर्ती करा लेता है ताकि उसके रक्त में शुगर की मात्रा को नियंत्रित कर सके और सर्जरी करने में कोई खतरा न हो। 

WHO डायबिटीज को वैश्विक महामारी घोषित कर चुके हैं  

डब्ल्यूएचओ के द्वारा पूरी दुनिया में लगभग 34 करोड़ 10 लाख लोग इस बीमारी से ग्रसित है। बहुत समय पहले यह बीमारी सिर्फ वयस्कों तक सीमित थी लेकिन आजकल यह बीमारी युवा में भी तेजी से फैल रहा है।विश्व स्तर पर देखा जाए तो डायबिटीज से ग्रसित सबसे ज्यादा व्यक्ति भारत में ही है। डायबिटीज फाउंडेशन के अनुसार हर 5 में से डायबिटीज ग्रसित व्यक्ति एक भारतीय भी है पिछले कुछ वर्षों से भारत में डायबिटीज की संख्या में बढ़ोतरी हुई है।

तथ्य और आंकड़े

  • डायबिटीज को साइलेंट बीमारी भी कहते हैं क्योंकि 15 से 20% लोगों में इसका लक्षण दिखाई भी नहीं पड़ता जब तक कि उन्हें कोई दूसरी बीमारी ना हो जाए।
  • डायबिटीज से ग्रसित व्यक्ति को हार्ट स्ट्रोक का खतरा 4 गुना बढ़ जाता है
  • डायबिटीज से ग्रसित हर 10 में से एक व्यक्ति को फुट अल्सर भी हो सकता है।
  • जो व्यक्ति डायबिटीज से अधिक दिनों से ग्रसित है उनकी 60 से 70% तंत्रिकाए किसी न किसी रूप में क्षतिग्रस्त हो ही जाती है।
  • अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के अनुसार हर 8 भारतीयों में से एक 1 भारतीयों को या तो डायबिटीज है या डायबिटीज होने का खतरा बना रहता है
  • डायबिटीज के 50% पेशेंट हार्ट  की बीमारी या तो हार्ट स्ट्रोक से मर जाते हैं।

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