Daily routine for healthy life in Hindi-स्वास्थ्य जीवन जीने के लिए दैनिक दिनचर्या

Daily routine for healthy life in Hindi

Daily routine for healthy life in Hindi-स्वास्थ्य जीवन जीने के लिए दैनिक दिनचर्या

Daily routine for healthy life in Hindi- सैद्धान्तिक रूप से कोई भी व्यक्ति किसी दूसरे के खान-पान सहन सम्बन्धी दिनचर्या नहीं बता सकता। क्योंकि हर व्यक्ति पाचन शक्ति, कार्य प्रणाली, मानसिक हालत अलग-अलग हैं सकी जानकारी स्वयं व्यक्ति को ही होती है। कोई व्यक्ति निम्नलिखित सर्या को पढकर इसको यथारूप में ही न अपना ले, यह मात्र आपको दिशा निर्देश (इशारा मात्र) हैं। 

स्वस्थ जीवन शैली के टिप्स, healthy lifestyle tips in Hindi

1.रात को जल्दी सोकर, सुबह सूर्योदय से पहले जागे। सबसे पहले बिस्तर पर बैठे-बैठे भगवान् का नाम लें।जो व्यक्ति जिस गुरु या धर्म को मानता हो अपनी-अपनी रुचि के अनुसार पाँच-मिनट, दस-मिनट जितना समय हो अपने ईष्ट का ध्यान सहित नाम-जप करें। 

2.उसके बाद इशारा हो या न हो, सीधा पाखाने के लिये जाएँ। वहाँ थोड़ी देर बैठे, जोर नहीं लगाएँ। अगर अपने आप पेट साफ हो जाता है तो बहुत बढ़िया । सुबह पेट का साफ होना आवश्यक है। क्योंकि सैद्धान्तिक रूप से जब तक पेट साफ न हो तब तक आगे बताए जाने वाले प्राणायाम, योगासन या व्यायाम नहीं कर सकते और न ही कुछ खाया जा सकता है। जैसे कि बैंक में अगर पिछले दिन का खाता (Ledger Account) न मिले तो अगले दिन न कुछ देते हैं और न कुछ लेते हैं। ऐसे ही अगर सुबह उठते ही पेट साफ नहीं होता तो आगे के काम ठीक ढंग से नहीं चल सकते। 

3.प्रतिदिन अपनी-अपनी रुचि के अनुसार कुछ समय प्राणायाम, योगासन, व्यायाम तथा सूर्य स्नान के लिये जरूर निकालें। दस काल। इसके लिये खुली हवा में जाएं। सबसे बढ़िया पार्क या घर की बालकॉनी में जाएं। पहले बताए गये अहिंसक प्राणायाम मा योगासन और अपनी-अपनी शक्ति के अनुसार व्यायाम आदि को कमर के बल लेटकर जैसे छोटा बच्चा टॉगे हिलाता है, ल करें। नंगे पाँव घास पर चलें। अधिक सर्दी या बरसात के मौसम नहींसाधारण चलना (Simple walking) सबसे बढ़िया व्यायाम है। जिनके शरीर का वजन अधिक हो उनको कमर के बल लेटकर पैर हिलाने (Cycling करने) से भी चलने जैसा लाभ मिल जाएगा। चलते-चलते हल्की-सी थकान महसूस होने पर तुरन्त चलना छोड दे |

स्वस्थ जीवन शैली के टिप्स

4.प्रतिदिन ऋतु और रुचि के अनुसार ठण्डे अथवा हल्के गर्म जल से स्नान करें। स्नान करने से पहले अपने हाथ से या तौलिये से अपने शरीर की सूखी मालिश करें। अधिक सर्दियों में पानी को इतना हल्का गर्म करें कि आपको नहाते समय ऐसा लगे जैसे कि सुहाते ठण्डे पानी से नहा रहे हैं। नहाते समय शरीर को साफ करने के लिये किसी भी किस्म का साबुन या शैम्पु आदि का प्रयोग न करें। इसके स्थान पर मोटा पिसा बेसन या मुल्तानी मिट्टी का प्रयोग करें।

संतरा, मौसमी, कीनू, अनार या नींबू के छिलके को छाया में सुखाने के बाद पीस कर रख लें। इसमें मोटा पिसा हुआ बेसन मिला लें। यह पिसा हुआ पाउडर नहाने के लिये उपयोग करें। इसमें थोड़ी दही मिलायी जा सकती है। यह पाउडर मंजन के रूप में भी उपयोग किया जा सकता है। बालों को साफ करने के लिये आँवला-शिकाकाई और रीठा को रात के समय पानी में भिगो दें। सुबह उसे उबाल लें कभी-कभी थोड़ा नीबू का रस मिला सकते हैं। या दही छाछ का उपयोग कर सकते हैं।

5.घड़ी को देखकर न कुछ खाना है, न पीना है। क्योंकि घड़ी को भूख नहीं लगती। कुछ भूख का एहसास हो तो सुबह के नाश्ते में रसाहार जैसे कि हरा नारियल पानी, सफेद पेठे का रस, कच्ची सब्जियों का रस अथवा सूप, फलों के रस बिना नमक, मिर्च-मसालों के उपयोग करें। मधुमेह के रोगियों के लिए गाजर या फलों का रस वर्जित है। कच्ची सब्जियों का रस या सूप लिया जा सकता है। 

health life tips in Hindi

स्वस्थ जीवन शैली

6.दोपहर में भूख का एहसास होने पर फलाहार (मौसम के फल) कच्चे नारियल की गिरी के साथ या मौसम की कच्ची सब्जियाँ (सलाद) हरा धनिया तथा कच्चे नारियल की गिरी के साथ ले सकते हैं। फल और सब्जियों को मिलाकर न लें। क्योंकि फलों को पचाने के लिये अलग किस्म के पाचक रस निकलते हैं और सब्जियों के लिये अलग। इसको लेने के बाद कई घण्टे तक दुबारा से भूख नहीं लगेगी और किसी किस्म की कमजोरी भी नहीं आएगी।

चिन्ता करने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि कच्चे नारियल की गिरी में दूध, घी, तेल, चिकनाहट आदि पौष्टिकता सब कुछ है। इससे कोई नुकसान नहीं होता। आपका मन प्रसन्न होना चाहिए | आपका मन यह कहे कि मैंने सुबह से कुछ नहीं खाया । यह एक प्लेट सलाद या फलों से क्या बनता है। आपके मन में ऐसा भाव रहना चाहिए कि मैंने देवताओं का भोजन लिया है। भगवान की रसोई का खाया है। ऐसा भाव रखने से किसी को कोई दिक्कत नहीं हो सकती। 

7.शाम को 4 बजे के आस-पास चाय-नाश्ता लेने की आदत होने की वजह से कुछ भूख का एहसास हो सकता है।  ऐसी अवस्था में सुबह की तरह रसाहार में से कुछ न कुछ ले लें। 

8.दिन में कम से कम दो बार पेट पर गीली पट्टी का प्रयोग करें। एक या दो बार मेरू दण्ड स्नान करना भी बहुत लाभकारी होगा। 

9.शाम को जब हम दुनिया के कार्यों से निवृत्त हो जाते हैं तो अपना सामान्य भोजन लें। भोजन में संयुक्त रोटी (Composite Chapati) के साथ में उबली या भाप से पकी हुई मौसम की हरी सब्जी ले लें। 

10.सूर्यास्त से पहले भोजन लेना आदर्श है। इस कार्यक्रम को कहते हैं दिन में कच्चा और शाम को पका  अर्थात् दिन में कच्ची सब्जियाँ या पके हुए फल लें तथा शाम को एक समय पकाया हुआ भोजन लें। 

11.दोपहर में भोजन के रूप में सलाद के साथ अंकुरित दालें (मूंग, मोठ, राजमा, मूंगफली आदि) कम मात्रा में, कच्चे नारियल की गिरी के साथ लें अथवा मौसम के फलों के साथ पाँच या सात भीगे हुए मेवे बादाम, अखरोट गिरी, अंजीर आदि ले सकते हैं। मिठास के लिए फलों के साथ दो या तीन खजूर ले सकते हैं। 

12.अगर दिन में भोजन करने के बाद कुछ आराम करने का समय मिलता हो तो वे अपना सामान्य भोजन रोटी, चावल आदि ले सकते हैं। 

13.स्कूल जाने वाले बच्चे (5 से 25 वर्ष) दिन में तीन बार अनाज ले सकते हैं। उनके लिए अंकुरित अनाज, भीगे हुए मेवे विशेष उपयोगी हैं। 

14.दिनचर्या के साथ-साथ रात्रिचर्या भी सीखनी है। जैसे हम सोने से पहले अपना कोट-पेंट, जेवर इत्यादि उतारकर शरीर को ढीला छोड़कर सोते हैं। ठीक ऐसे ही शरीर के साथ-साथ मन को भी शान्त करके  सोएं। इसके लिये रात को सोने से पहले बिस्तर पर बैठकर आँख बन्द कर के थोड़ी देर के लिए; दिन भर जिन-जिन लोगों से सार्क हआ उनमें से किसी को ऊँचा बोला होगा या किसी का कार्य नहीं किया होगा, एक-एक करके सभी से मानसिक रूप से ही माफी माँग लें सभी को माफ कर दें। मानसिक शान्ति का सबसे सरल नियम है-. 

“सभी को माफ कर दें, सभी से माफी माँग लें।”

 “दूसरों के दुःख में दुःखी, दूसरों के सुख में सुखी।।” 

रात्रि को ऐसा करने से, यह सब दिन में हमारे व्यवहार में उतरना शुरु हो जाएगा। परिणामस्वरूप जितने भी भावनात्मक रोग (Psychosomatic Discase) हैं वे सब ठीक हो जाएंगे। 

डेली रूटीन इन हिंदी

मन्द रोग की अवस्था में भोजन दिनचर्या 

मन्द रोग की अवस्था में अन्य गति विधियों को करते हुए यह विशेष ध्यान रखना है कि भोजन भूख लगने पर लेना है। 

सुबह का नाश्ता- कच्ची सब्जियों का रस (सफेद पेठा इत्यादि) या हरा नारियल पानी। 

दोपहर का भोजन- कच्चे सलाद, हरा धनिया तथा कच्चे नारियल की गिरी के साथ या मौसम के फल । थोड़ी देर आराम करना। 

शाम का नाश्ता- कच्ची सब्जियों का रस (सफेद पेठा इत्यादि) या हरा नारियल पानी डाब। 

रात का भोजन- उबली हुई मौसम की कच्ची सब्जी और चोकर सहित आटे की पत्ते वाली कच्ची सब्जी (पालक आदि) मिलाकर बनी हुई सयुक्त रोटी (Composite Chapati) रात्रि 8 बजे से पहले लेना है । यदि रोटी सब्जी दोपहर में लेनी हो तो रात को केवल फल ले लें। 

इस कार्यक्रम में रोग की अवस्था में पाँच पदार्था से परहेज करना है:

  1. दूध और दूध से बने पदार्थ 100% बन्द ।
  2. चीनी और चीनी से बने पदार्थ 100% बन्द । 
  3. नमक, 
  4. मिर्च और 5. अनाज कम से कम मात्रा में। . 

इन पाँच पदार्थो को पचाने में हमारी जीवनी शक्ति अधिक खर्च होती है। इसलिए आप अपनी सहज बुद्धि (Common sense) से निर्णय लें। 

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