Current Essay topics 2023-इंटरनेट और विश्व गांव की परिकल्पना(Internet and the Concept of World Village)

Current Essay topics 2023-इंटरनेट और विश्व गांव की परिकल्पना (Internet and the Concept of World Village) अथवा क्या हम इंटरनेट की बदौलत एक विश्व गांव में जी रहे हैं? 

महात्मा गांधी का कथन है— “मैं यह नहीं चाहता कि मेरे घर को ऊंची दीवारों से घेर दिया जाए और खिड़कियों को मजबूती से बंद कर दिया जाए। मैं चाहता हूं कि सभी संस्कृतियों का प्रवाह मुक्त रूप से मेरे घर में हो।” बापू के इस कथन में विश्व गांव की परिकल्पना निहित है। नए दौर में यह परिकल्पना आकार लेती दिख रही है। भमंडलीकरण, उदारीकरण और निजीकरण के नए आर्थिक परिदृश्य ने ‘सचना क्रांति’ की मदद से पूरी दुनिया को एक गांव में तब्दील कर दिया है। जिस ‘सूचना क्रांति’ की बात हम कर रहे हैं, उसका मुख्य माध्यम इंटरनेट ही है। इंटरनेट ने दुनिया के एक कोने को दूसरे कोने से जोड़ दिया है और भौगोलिक दूरियों के मायने धुंधले पड़ गए हैं। इससे दुनिया का ज्ञान सर्वसुलभ और साझा हुआ है, तो सभ्यताओं के मध्य संवाद में भी तेजी आई है। सचमुच, इंटरनेट ने दूरिया मिटाकर भौगोलिक सरहदों को पछाड़ने का गैरमामूली कारनामा कर दिखाया है। जिस तरह से एक छोटे से गांव में एक सूचना दूसरों तक अल्प समय में पहुंच जाती है, ठीक उसी प्रकार अब इंटरनेट के जरिए विश्व के एक कोने से दूसरे कोने तक सूचनाओं के पहुंचने में बस कुछ पलों का समय लगता है। यह कहना असंगत न होगा कि इंटरनेट ने दुनिया को मुट्ठी में कर लिया है। इसके अंतर्राष्ट्रीय संजाल ने सूचनाओं के आदान-प्रदान को तो सहज बनाया ही है, संपर्क में भी गतिशीलता को बढ़ाया है। यह भी सत्य है कि संचार और संपर्क की इस सुविधा ने मानव जीवन से जुड़ी महत्त्वपूर्ण गतिविधियों को सकारात्मक रूप से प्रभावित किया है। 

सचमुच, इंटरनेट ने दूरियां मिटाकर भौगोलिक सरहदों को पछाड़ने का गैरमामूली कारनामा कर दिखाया है। जिस तरह से एक छोटे से गांव में एक सूचना दूसरों तक अल्य समय में पहुंच जाती है, ठीक उसी प्रकार अब इंटरनेट के जरिए विश्व के एक कोने से दूसरे कोने तक सूचनाओं के पहुंचने में बस कुछ पलों का समय लगता है। 

हमारे राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी ने जिस सीमा रहित विश्व की परिकल्पना कभी की थी, कुछ मायनों में इंटरनेट ने उसे सार्थक करने की कोशिश की है। विश्व फलक पर सूचना सम्राट के रूप में मजबूती से उभरे इंटरनेट ने सीमाओं को बौना बनाकर विभिन्न देशों को जोड़ने का काम तो किया ही है, आम जनजीवन को सहज और सुविधायुक्त बनाने का काम भी किया है। जिन कामों को अंजाम देने में घंटों लग जाते थे, उन्हें पलों में निपटाना इंटरनेट के जरिए ही संभव हुआ है। इस तकनीक का फलक बेहद विस्तृत है। यही कारण है कि पूरा विश्व एक गांव के रूप में सिमटकर इस तकनीक में समा गया है। 

सूचना और संपर्क में क्रांतिकारी बदलाव लाने वाला इंटरनेट ज्ञान और मनोरंजन का खजाना भी है। अब हमें ज्ञान-विज्ञान से जुड़ी सूचनाओं और जानकारियों के लिए मोहताज रहने की जरूरत नहीं है। बस, माउस की एक क्लिक काफी है इसके लिए। प्रशासनिक और सार्वजनिक सेवा का क्षेत्र हो या चिकित्सा और शिक्षा का क्षेत्र हो या व्यापार का, हर जगह इस तकनीक ने मजबूती से पांव जमाकर मानव जीवन को संवारने का काम किया है। इसके जरिये घर में बैठकर दुनिया के संपर्क में बने रहना तथा दुनिया पर नजर रख पाना आसान हुआ है। इस तरह देखा जाए तो इंटरनेट के सूत्रपात ने सूचना और संचार के क्षेत्र में तो क्रांति लाने का काम किया ही है, बौद्धिक क्रांति लाने का भी काम किया है। बौद्धिक स्तर पर दुनियाभर के प्रबुद्ध लोग इस सशक्त माध्यम के जरिए तेजी से जुड़ रहे हैं। एक बेहतर माहौल निर्मित हो रहा है।

यह इंटरनेट की ही देन है कि अब लोग डाकिये का इंतजार नहीं करते हैं। ई-मेल के जरिये पलक झपकते संदेश सात समंदर पार पहंच जाता है। एक साथ कई लोगों को आप सिर्फ संदेश ही नहीं, छवियां भी भेज सकते हैं। दूर बैठे अपने शुभेच्छ और नाते-रिश्तेदारों से बड़ी आसानी से कुशल क्षेम पूछ सकते हैं। अब खत के कागज में कल्पनाशीलता के जरिए अपने अजीज का चेहरा देखने की जरूरत नहीं, क्योंकि अब ‘चिट्ठी आई है’ वाला दौर लद चुका है। अब ई मेल की धूम है। न सीमाएं आड़े आती हैं, न सरहदें। दुनिया सिकुड़ गई है, नजदीकियां बढ़ी हैं। 

ई-बैंकिंग ने कारोबारी क्षेत्रों और लेन-देन की सुविधा को सहज बना दिया है। चंद मिनटों में आप अपने किसी भी परिचित या कारोबारी मित्र को ई-बैंकिंग के जरिए रकम भेज सकते हैं। रेल में रिजर्वेशन के लिए अब लंबी कतार में खड़े होने की जहमत नहीं उठानी पड़ती है। यह काम घर बैठे हो जाता है। किसी भी विभाग या संस्थान के बारे में जानकारी करनी हो तो अब वहां के चक्कर काटने की जरूरत नहीं। बस उसकी वेबसाइट को नेट पर खंगाल डालिए और सूचनाएं एकत्र करिए। आप का सैर-सपाटा करने का मन है और आप को यह जानना है कि जहां आप जा रहे हैं, वहां के मौसम का मिजाज क्या होगा, तो नेट की मदद लीजिए और मौसम की सटीक जानकारी लेकर अपना कार्यक्रम तय करिए। 

यह इंटरनेट की ही देन है कि अब लोग डाकिये का इंतजार नहीं करते हैं। ई-मेल के जरिये पलक झपकते संदेश सात समंदर पार पहुंच जाता है। एक साथ कई लोगों को आप सिर्फ संदेश ही नहीं, छवियां भी भेज सकते हैं। दूर बैठे अपने शुभेच्छु और नाते रिश्तेदारों से बड़ी आसानी से कुशल क्षेम पूछ सकते हैं। 

कहां तक गिनाया जाए। नेट के आयामों में इस कदर तेजी आई है कि इसने जीवन के हर क्षेत्र को समेट लिया है। ग्लोबल विलेज की परिकल्पना को सार्थकता का स्पर्श देने वाले नेट ने छोटे छोटे गांवों तक पहुंच बना ली है। अब ग्रामीण चौपालों में बैठकर हुक्का नहीं गुड़गुड़ाते, बल्कि माउस से खेलते हैं। ई-चौपालों ने ग्रामीण परिवेश को भी अनूठा संस्पर्श दिया है। छोटे-छोटे गांव सीधे विश्वभर से जुड़ गये हैं। किसान का आनलाइन होना बेहद फायदेमंद है। उसे बैठे-बैठाये कृषि जगत से जुड़ी तमाम सूचनाएं तो मिलती ही हैं, मंडी के भावों व अन्य जानकारियों से भी वह वंचित नहीं रहता। इंटरनेट ने दूर-दराज के पिछड़े इलाकों की कूप-मंडूकता को दूर करने का असाधारण काम किया है। आज भारत का किसान ब्रिटेन के किसान से संपर्क साध सकता है। यह सब किसी तिलिस्म जैसा ही है, जो नेट की वजह से मुमकिन हुआ है। ई-प्रशासन ने ग्रामीणों से सीधा संपर्क साधना शुरू कर दिया है। इससे समय और ऊर्जा की बचत तो हुई ही है, सहूलियतें भी बढ़ी हैं। काम-काज में पारदर्शिता भी बढ़ी है और भ्रष्टाचार की गुंजाइश भी कम हुई है। ग्रामीणों को अब छोटे-छोटे कामों के लिए शहर नहीं भागना पड़ता। 

मीडिया का क्षेत्र हो या मनोरंजन का, हर जगह इंटरनेट का दखल बढ़ा है। विश्व के किसी भी गायक को आप सुन सकते हैं तथा विश्व सिनेमा की हलचलों से जुड़ सकते हैं। इंटरनेट की बदौलत विदेशी फिल्में, भाषा, साहित्य, खान-पान, वेशभूषा, आचार-व्यवहार सब आपस में घुलने-मिलने लगे हैं। मीडिया के क्षेत्र में तो क्रांति ही आ गई है। अब ऑनलाइन न्यूज पेपर की सुविधा नेट पर उपलब्ध है। मन पसंद अखबार पत्र-पत्रिकाओं के लिए बुक स्टालों पर भटकने की जरूरत नहीं। इन्हें नेट पर पढ़ा जा सकता है। आनलाइन मीडिया का प्रभुत्व दिनों-दिन बढ़ता जा रहा है। इंटरैक्टिव, डिजिटल और मल्टीमीडिया का वर्चस्व बढ़ा है।

शिक्षा के क्षेत्र में तो इंटरनेट ने अपने प्रभाव को जबरदस्त तरीके से बढ़ाया है। सचमुच, यह वरदान साबित हो रहा है। शिक्षा के क्षेत्र में भी इसने हमें सीमाओं के बंधन से मुक्त कर दिया है। हिन्दुस्तान का छात्र घर बैठे अमेरिका के शिक्षण संस्थाओं की जानकारी हासिल कर रहा है। आनलाइन एजुकेशन ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर की शिक्षा और शैक्षणिक जानकारियां उपलब्ध करवाने का काम बखूबी किया है। अब जमाना पाटी और चाक का नहीं रहा, लैपटॉप बच्चों के हाथ में दिखता है। हमारी शैक्षणिक परियोजनाओं में लैपटॉप शामिल हो चुका है। शिक्षा के प्रचार-प्रसार में इंटरनेट ने क्रांतिकारी बदलावों को जन्म दिया है। इससे आर्थिक और सामाजिक विकास में भी गति आई है। आज ब्रिटेन में हो रहे किसी जटिल ऑपरेशन को भारत का चिकित्सा छात्र देख सकता है और बारीकियों को जान सकता है। विश्व की बड़ी लाइब्रेरियों से जड़ना इंटरनेट की बदौलत ही आसान हुआ है। विशेषज्ञों से उनकी विशेषज्ञता के क्षेत्र से जुड़े मशवरे आप घर बैठे ले सकते हैं। ई-लर्निंग और ई-एजूकेशन ने क्रांति ला दी है। कहां तक गिनाया जाय, ‘हरि अनंत हरि कथा अनंता’ की तर्ज पर कह सकते हैं कि ‘नेट अनंत. नेट कथा अनंता’। यकीनन इस तकनीक ने भूमंडलीकरण व वैश्वीकरण को ना सिर्फ बढ़ाया है, बल्कि उसे एक लोकतांत्रिक ढांचा मुहैया करवाने का काम भी बड़ी शिद्दत से किया है। देशों के सामाजिक और सांस्कृतिक ताने-बाने को भी इंटरनेट ने गहरे से प्रभावित किया है। आज इंटरनेट से समाज का हर वर्ग लाभान्वित हो रहा है। इसके प्रयोक्ता भी उच्च वर्ग तक ही सीमित नहीं रहे हैं। यह आम आदमी की पहुंच में है। 

पिछले कुछ वर्षों में इंटरनेट ने दुनिया को जोड़ने का काम तेजी से किया। हालांकि सुरक्षा के दृष्टिकोण से सूचनाओं के संग्रहण के लिए 70 के दशक में अमेरिका की सुरक्षा एजेंसियों से जुड़े वैज्ञानिकों ने इस तकनीक को विकसित कर लिया था, मगर इसकी व्यापकता 80 के दशक में बढ़ी। फिर देखते-देखते इसने दुनिया को इस कदर मुट्ठी में किया कि आज विश्व फलक पर इसकी हैसियत सूचना सम्राट की बन गई। न सिर्फ भारत में, बल्कि पूरे विश्व में इसके प्रयोक्ताओं की संख्या तेजी से बढ़ी। आने वाले दिनों में दुनिया पर पूरे तौर पर यह तकनीक आच्छादित हो जाएगी। 

जहां इंटरनेट ने विश्व स्तर पर मानवीय गतिविधियों में सहयोगी के रूप में शामिल होकर मानवता को सजाने-संवारने का काम किया | है, वहीं इसके कुछ दुष्प्रभाव भी सामने आए हैं। इससे जुड़ी कुछ | चनौतियां भी सिर उठा रही हैं, जिनकी वजह से आने वाले दिनों में जटिलाएं भी बढ़ेगी। नेट पर बहुत कुछ ऐसा भी परोसा जा रहा है, जो न तो श्लील है और न ही भद्रलोक के लिए मर्यादित। अश्लील और वीभत्स वेबसाइटों का मकड़जाल है, तो अश्लील संदेशों और लतीफों की भरमार भी है। ब्लू लिटरेचर और ब्लू फिल्में इस पर आसानी से उपलब्ध हैं। सुविधाओं के साथ-साथ भद्रलोक को ये विद्रूपताएं भी झेलनी पड़ रही हैं। वैश्विक गांव की परिकल्पना का सार्थकता प्रदान करने वाले इंटरनेट ने एक वैश्विक अपसंस्कृति का ता जन्म दिया ही है, वैचारिक प्रदूषण को भी बढ़ाया है। इसके कुप्रभाव भी  सामने दिख रहे हैं। संवेदना का ह्रास तो हुआ ही है, बेकारी भी बढ़ी है, क्योंकि इंटरनेट ने वैश्विक स्तर पर मशीनीकरण के प्रभाव को बढ़ाकर इंसान के पेट पर लात मारने का भी काम किया है। 

इंटरनेट ने सुरक्षा में भी सेंध मारी है। साइबर क्राइम में इजाफा हुआ है। अपराध के नए-नए तौर-तरीके सामने आ रहे हैं। सुरक्षा में सेंधमारी को लेकर विश्वभर की सुरक्षा एजेंसियां चिंताग्रस्त हैं। अब विमान हाईजैकरों की तर्ज पर कम्प्यूटर हाईजैकर अस्तित्व में आ गए हैं। हेराफेरी और धोखा-धड़ी की घटनाएं तो बढ़ी ही हैं, इंटरनेट पर ‘चीरहरण’ भी चला करता है। जाहिर है कि ‘विश्व गांव’ की नजदीकियों के साथ-साथ अपराधों और विद्रूपताओं से भी नजदीकियां बढ़ी हैं, जो एक दागदार पहलू है। 

बहरहाल, विद्रूपताएं और विसंगतियां अपनी जगह, मगर इंटरनेट के फायदे अपनी जगह। इंटरनेट की सकारात्मकता का पलड़ा इसकी नकारात्मकता पर भारी है। सारा विश्व आज इंटरनेट मय हो चुका है। इसका जादुई असर सर्वत्र परिलक्षित हो रहा है। सारी दुनिया इंटरनेट की बांहों में सिमट आई है। एक नई इंटरनेट संस्कृति का सूत्रपात हो चुका है, जिसने दुनिया को बदल कर रख दिया है। यह कहना बेजा न होगा कि इस नई संस्कृति के आगे विश्व के मुख्तलिफ देशों की संस्कृतियां बौनी नजर आ रही हैं। इसका उजला प्रभाव दिनोंदिन बढ़ रहा है। 

भूमण्डलीकरण और वैश्वीकरण को लोकतांत्रिक तरीके से विस्तार दे रहे इंटरनेट ने सीमाओं की संकीर्णता से हमें उबार कर एक-दूसरे के बेहद कराब ला दिया है। एक गांव के बाशिंदों की तरह अब दुनिया के तमाम लोग करीब आए हैं, उनमें आदान प्रदान बढ़े हैं, संपर्क और घनिष्ठता बढ़ी है, बौद्धिकता का भी समागम बढ़ा है, बेगानापन कम हुआ है, सूचना और संचार के क्षेत्र में क्रांति आई है, सुविधाओं का विस्तार हुआ है। कहना पड़ेगा कि इंटरनेट ने दूरियों को इस कदर घटाया है कि विश्व सिमट चुका है और उसके साथ गांव जुड़ चुका है। हम नेट की बदौलत अब विश्व गांव में जी रहे हैं। 

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