पागलपन के कारण, लक्षण और घरेलू नुस्खे-Insanity Mania In Hindi

पागलपन का इलाज क्या है

पागलपन (उन्माद)  के कारण, लक्षण और घरेलू नुस्खे-Insanity causes, symptoms and home remedies

रोग की उत्पत्ति 

जब कभी मन की प्राकृतिक स्थिति में किसी तरह की गड़बड़ी उत्पन्न हो जाती है तो उसे उन्माद (पागलपन) कहते हैं । यह रोग अधिक मेहनत करने, अधिक भोजन ग्रहण करने, अधिक शराब या गांजा पीने, निराशा या मिरगी आदि के कारण हो जाता है। कुछ लोगों को पूर्वजों के रोग की पुनरावृत्ति के कारण उन्माद की बीमारी हो जाती है। कई बार गर्मी दिमाग पर चढ़ने, मस्तिष्क या मेरुदंड की यांत्रिक बीमारी, शरीर में गहरी चोट लगने, गलत शिक्षा, सदा भयानक घटनाओं को देखने आदि के कारण भी यह रोग हो जाता है। इस बीमारी की वजह व्यापार में घाटा, बेकारी, पारिवारिक कष्ट आदि भी हो सकती है। 

रोग के लक्षण 

रोगी की भूख बढ़ जाती है। जीभ पर सफेद लेप-सा चढ़ा रहता है। सांस में बदबू आती है। होंठ सूखे एवं कटे-फटे हो जाते हैं। आंखें चमकीली और हिंसक हो जाती हैं। वह बात-बात पर आक्रामक हो सकता है। इस अलावा बहकी-बहकी बातें करना, गंदा रहने की इच्छा, कब्ज, अनिद्रा आदि लक्षण दिखाई देते हैं। 

पागलपन की घरेलू  इलाज

 प्रतिदिन काशीफल (कद्दू) का मीठा हलवा बनाकर खाएं। यह मानसिक शक्ति को स्वस्थ करता है। 

सुबह-शाम चने की दाल भिगोकर उसका पानी पिएं।

3 ग्राम ब्राह्मी की कोमल पत्तियां और आठ-दस कालीमिर्च के दाने-दोनों को पानी में पीसकर एक गिलास पानी में घोलकर नित्य दो बार रोगी को पिलाएं। 

15 ग्राम गुलाब के फूल और 15 ग्राम अनार के पत्ते-दोनों वस्तुओं को आधा लीटर पानी में उबाल-छानकर सेवन करें। 

आधा लीटर पानी में थोड़ी-सी सौंफ उबालें। फिर पानी को छानकर उसमें थोड़ी-सी शक्कर और दूध मिलाकर रोगी को दें। 

प्रतिदिन 250 ग्राम मीठे अमरूद उबालकर खाएं। कद्दू का हलवा उन्माद रोग को ठीक करता है 

पेठे के बीजों की गिरी निकालकर चीनी या शहद के साथ सेवन करें।

रात को सोने से पूर्व एक गिलास गुनगुने पानी में नीबू निचोड़कर पिएं। 

पागलपन का होम्योपैथिक इलाज

2 हर समय बेचैनी, मृत्यु का भय, अंधेरे से डर, चमकती चीज तथा पानी देखकर भय, उल्टी-सीधी बातें करना, गाली देना, मारना, कपड़े फाड़ना, स्त्रियों को हिस्टीरिया, मिरगी आदि लक्षणों में कैरिसिंकम एनम मदर टिंचर का सेवन कराएं। 

पागलपन की हालत में हर समय मैले तथा गंदे वस्त्र पहनना, उस दशा में अपने को धनवान समझना, मृत्यु से भय आदि लक्षणों में सल्फर 1M दें। 

पागलपन के दौरे पड़ने पर प्लाटिना 1M एक अच्छी दवा है। 

छूने पर भड़क जाने की हालत में अर्निका 1M का उपयोग करें।

सदैव पागलपन में डूबे रहने के लक्षण में हायोसायमस 200 का प्रयोग कराएं।

यदि स्त्री प्रसूति के बाद पागल हो जाए तो वेरेट्रम एल्ब 30 दें।

अगर गलत दवा या अधिक गरम दवा खा लेने के फलस्वरूप पागलपन हो तो थूजा का सेवन कराएं।

यदि मासिक धर्म बंद हो जाने के कारण उन्माद हो तो थायराइडिन दें।

यदि पागलपन का तेज दौरा पड़ता हो और चेहरा लाल हो जाता हो तो बेलाडोना 30 लें। 

बायोकैमिक चिकित्सा 

मानसिक परिश्रम अधिक करने तथा थकान आदि के कारण चित्त स्थिर न रहने, पागलपन के दौरे के कारण कमजोरी, कभी-कभी उत्साहित हो जाना, फिर थककर लेट जाना आदि लक्षण में साइलीशिया 12x या 30x दें। 

पागलपन के कारण हर समय कुछ सोचते रहना, नींद न आना, थोडी देर तक बोलने के बाद थकावट हर समय मन में इधर-उधर की बातें आना आदि लक्षणों में नैट्रम म्यूर 6x या 12x का प्रयोग कर। 

स्नायविक कमजोरी के साथ दिमाग में दर्द हो, कम्पन. कमजोरी आदि लक्षणों में मैगनेशिया फॉस 6x ले। 

पागलपन का दौरा पड़ने पर नैट्रम म्यूर 30x तथा कॉलि फॉस 30x-दोनों दवाओं को 2-2 घंटे बाद अदल बदलकर सेवन कराएं। 

मानसिक दुर्बलता दूर करने के लिए कॉलि फॉस 6x या 12x का प्रयोग करें। 

पागलपन की अंग्रेजी दवा (एलोपैथिक चिकित्सा )

अपने डॉक्टर से सलाह लेकर निम्नलिखित खाने की दवा ले सकते हैं। इन दवाओं के साथ अन्य औषधियां नहीं खानी चाहिए-बारमिन (Barmin), कामपोज (Calmpose), ट्रिका (Trika), एल्परैक्स (Alprex), ड्रेपेन (Drapen), नाइट्रोजुन (Nitrogune) तथा एल्जोलम (Alzolam)। 

प्रसिद्ध फार्मेसियों की पेटेन्ट दवाएं (पागलपन की आयुर्वेदिक दवा)

गर्ग –ब्राह्मी शंखपुष्पी गोली, ब्राह्मी शंखपुष्पी सीरप।

हिमालय –सर्पिना गोली। गुरुकुल कांगड़ी ब्राह्मी शरबत।

बैद्यनाथ –दिमाग दोषहरी गोली।

मार्तण्ड- सपैन्थिन गोली।

बुन्देलखंड –चोबचीनी, म्लेच्छ फल।

प्रताप –निडोरिन।

विभिन्न फार्मेसी- उन्माद गजकेसरी रस, सूतशेखर रस, भूतभैरव रस, रजत भस्म, स्वर्ण भस्म, अभ्रक भस्म, त्रैलोक्य विजय वटी, सारस्वतारिष्ट, पंचगक घृत, महाचैतस घृत। 

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