ग्रामीण विकास में नई खोजों और तकनीक का योगदान |आधुनिक तकनीक भारतीय ग्रामीण जीवन को किस प्रकार रूपान्तरित कर सकती है पर निबन्ध

ग्रामीण विकास में नई खोजों और तकनीक का योगदान 

ग्रामीण विकास में नई खोजों और तकनीक का योगदान |आधुनिक तकनीक भारतीय ग्रामीण जीवन को किस प्रकार रूपान्तरित कर सकती है पर निबन्ध

ग्रामीण विकास में नई खोजों और तकनीक का विशेष योगदान सदैव रहा है। नई खोजों और तकनीक के जरिए जहां हम उन्नत कृषि की तरफ बढ़कर विकास को उच्च आयाम देते हैं, वहीं इस प्रकार ग्रामीण पुनर्निमाण की प्रक्रिया को भी सतत् बनाए रखते हैं। कृषि क्षेत्र में नई खोजों और तकनीक को अपनाए जाने का सिलसिला नया नहीं है। यह आदिकाल से होता आया है। ‘आवश्यकता आविष्कार की जननी होती है’ कहावत के अनुसार हमने आवश्यकता के अनुरूप कृषि क्षेत्र में नई खोजें कीं, नई तकनीकें ईजाद की और कृषि की अड़चनों को दूर कर इसे सहज, सुगम और अधिक उत्पादक बनाया। मानव मस्तिष्क बहुत ही रचनात्मक होता है और जीवन को सहज और सुगम बनाने के लिए वह सृजन किया करता है। कृषि क्षेत्र में हल से लेकर ट्रैक्टर तक का आविष्कार मानव मस्तिष्क की इसी रचनात्मकता की देन है। 

ग्रामीण विकास में नई खोजों और तकनीकों का महत्त्व इतना बढ़ गया है कि अब खेती-किसानी का परम्परागत स्वरूप पीछे छूटने लगा है और एक प्रौद्योगिकी के रूप में कृषि विकास के पायदानों पर आगे बढ़ रही है। संचार एवं सूचना के क्षेत्र में आई क्रांति से तो इस विकास को पर लग गए हैं। कृषि क्षेत्र में हो रहे नवाचारों एवं नवप्रवर्तन ने ग्रामीण क्षेत्र का चेहरा बदल कर रख दिया है। ये नवाचार एवं नवप्रवर्तन सिर्फ अभियांत्रिकी तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि इन्होंने उत्पादकता और गुणवत्ता को भी बढ़ाया है। इतना ही नहीं, ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य, शिक्षा, चिकित्सा एवं यातायात के स्तरों पर भी बदलाव आया है। ग्रामीण क्षेत्र में नवप्रवर्तन के महत्त्व को समझते हुए ही सरकार ने ‘नेशनल इनोवेशन फाउंडेशन’ (राष्ट्रीय नवप्रवर्तन प्रतिष्ठान) की स्थापना की है, जो कि न सिर्फ नवप्रवर्तकों की खोज करता है, बल्कि उन्हें सम्मानित और पुरस्कृत भी करता है। 

वस्तुतः अभिनव तकनीकें एवं खोजें कृषि को आधुनिक एवं नतन बना रही हैं। इनसे कृषि प्रौद्योगिकी सशक्त, समृद्ध एवं उन्नतशील हई है। उत्पादकता और दक्षता बढ़ी है, तो कृषि कार्य सुगम हुए हैं। नई खोजों एवं तकनीकों के कारण गांवों का परिदृश्य बदल गया है। अब गांव की पंचायतों में बैठकर किसान हुक्का नहीं गुड़गुड़ाते, बल्कि उनके हाथ कम्प्यूटर के माउस पर होते हैं। गांवों में संचार सुविधाओं की पहुंच बढ़ने से किसानों का रुझान ई-खेती के प्रति बढ़ा है। जागरूक किसान ई-खेती से लाभान्वित हो रहा है, तो सरकार भी इसे प्रोत्साहित कर रही है। किस फसल में कितनी मात्रा में पानी और कब खाद एवं उर्वरक का प्रयोग करना है, आज यदि ये सभी सूचनाएं किसान को एक पल में उपलब्ध हो रही हैं, तो यह ई-खेती के जरिए ही संभव हुआ है। ई-खेती के जरिए यह प्रयोग भी किया जा रहा है कि कम से कम पानी में खेती कैसे की जाए। इंटरनेट से जुड़े होने के कारण एक निश्चित क्षेत्र के किसानों की जो भी समस्या होती है, उसकी जानकारी कृषि वैज्ञानिकों तक तुरंत पहुंच जाती है और वे तत्काल इसका समाधान प्रस्तुत कर देते हैं। इसी प्रकार किसानों को अपने प्रश्नों का उत्तर भी तुरंत मिल जाता है। आज इंटरनेट पर ऐसी अनेक वेबसाइट्स उपलब्ध हैं, जो कृषि ज्ञान, महत्त्वपूर्ण जानकारियों एवं सूचनाओं से भरी पड़ी हैं। किसान इनसे लाभान्वित हो रहे हैं। 

यह अभिनव तकनीकों एवं खोजों की ही देन है कि आज का भारतीय किसान ‘किसान कॉल सेंटर’ की सुविधा से लाभान्वित हो रहा है। सूचना प्रौद्योगिकी की इस अभिनव देन से किसान को अब अपनी समस्या के समाधान एवं इससे संबंधित सुझावों के लिए किसी का मुंह ताकना नहीं पड़ता। टोल फ्री नंबरों पर काल करते ही उसे अपनी समस्या का समाधान मिल जाता है। इससे उसके काम आसान हो जाते हैं और वह बेहतर कृषि की दिशा में आगे बढ़ता है। यहां यह रेखांकित करना समीचीन रहेगा कि इंटरनेट ने कृषि क्षेत्र में शैक्षिक विकास को भी प्रोत्साहित किया है। इसके अलावा सरकारी योजनाओं के लाभ को जल्द एवं पारदर्शी ढंग से किसानों तक पहुंचाने में मदद की है, जिससे किसानों का जीवन स्तर बेहतर हुआ 

पहले भू-अभिलेखों का समुचित रखरखाव एक चुनौतीपूर्ण कार्य हुआ करता था, किंतु अब कम्प्यूटरीकरण के कारण यह काम न केवल आसान हुआ है, बल्कि इसकी गुणवत्ता में भी सुधार आया है। भूमि के उपयोग, उसकी प्रकृति, स्वामित्व की प्रकृति तथा खेती हेतु भूमि की उपयोगिता का स्तर व गुणवत्ता इत्यादि विवरणों को एक ही स्थान पर समायोजित करने में इंटरनेट का उपयोग किया जा रहा है। इससे पारदर्शिता बढ़ी है। अब एक सामान्य किसान भूमि संबंधी जानकारियों को न सिर्फ कम्प्यूटर पर देख सकता है, बल्कि आवश्यकता पड़ने पर उसकी कॉपी भी प्राप्त कर सकता है। इंटरनेट के माध्यम से देशभर में कृषि विविधीकरण कार्यक्रम से किसानों को लाभान्वित किया जाना संभव हुआ है। इंटरनेट के जरिए ही राष्ट्रीय कृषि बाजार की परिकल्पना साकार हुई है। हमारे देश में राष्ट्रीय कृषि बाजार हेतु ई-व्यापार प्लेटफार्म (e-trading Platform for National Agriculture Market) का शुभारंभ किया जा चुका है। यह ई-मंडी की दिशा में एक अभिनव पहल है। इस पोर्टल के जरिए किसान अपनी शर्तों पर अपनी उपज को पारदर्शिता के साथ बेच सकेगा। राष्ट्रीय कृषि बाजार का यह ई-व्यापार प्लेटफार्म कृषि विपणन क्षेत्र में सुधारों को प्रोत्साहित करेगा। इसके माध्यम से किसानों को विपणन संबंधी सूचनाओं तक बेहतर पहुंच उपलब्ध होगी और उनके पास अपने उत्पादों की बेहतर कीमत पाने के लिए कुशल, पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी विपणन मंच होगा। बिचौलियों का वर्चस्व खत्म होगा और ‘एक राष्ट्र एक बाजार’ की संकल्पना विकसित होगी। 

अभिनव कृषि खोजों एवं तकनीकों से ही ‘परिशुद्ध’ खेती’ की परिकल्पना साकार हुई है, जिससे हम लाभान्वित हो रहे हैं। परिशुद्ध खेती सूचना प्रौद्योगिकी पर आधारित कृषि विज्ञान की वह आधुनिक अवधारणा है, जो पर्यावरण हितैषी है तथा किसानों के लिए उपयोगी एवं उत्पादन बढ़ाने की संभावनाओं के साथ-साथ प्राकृतिक संसाधनों के ऊपर से दबाव को कम करने में सहायक है। इसमें खेत की स्थानीय जानकारी जुटाने के लिए अत्याधुनिक तकनीकों जैसे जीआईएस, जीपीएस, रिमोट सेंसिंग पद्धति एवं सूचना तकनीक आदि का प्रयोग किया जाता है। इन आधुनिक तकनीकी तंत्रों से जुटाई गई सूचनाओं के आधार पर लागत साधनों की मात्रा निर्धारित की जाती है। इससे जहां लागत संसाधनों की बचत होती है, वहीं खाद, उर्वरक, सिंचाई, कीटनाशियों, शाकनाशियों आदि के आवश्यकतानुसार इस्तेमाल से जहां पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुंचता, वहीं जल और मृदा का संरक्षण भी होता है। कृषि में तकनीक के लाभ को बढ़ाने के उद्देश्य से ही केंद्र सरकार द्वारा ‘किसान एसएमएस पोर्टल’ नाम से किसानों के लिए एक एसएमएस पोर्टल की शुरुआत की गई है। इसके माध्यम से किसान अपनी आवश्यकताओं, स्थान और अपनी भाषा के अनुरूप सलाह व सूचनाएं प्राप्त कर सकते हैं। 

आधुनिक तकनीक का एक नया स्वरूप ‘डिजिटलाइजेशन’ यानी डिजिटलीकरण भी है। तकनीक का यह नया चेहरा देश के गांवों का कायाकल्प कर सकता है। ‘डिजिटल इंडिया’ कार्यक्रम के माध्यम से हमने इस दिशा में कदम आगे बढ़ाए भी हैं। इससे यकीनन गांवों की तस्वीर बदलेगी। इससे जहां ग्रामीण क्षेत्रों में ई-प्रशासन का पथ प्रशस्त हो रहा है, वहीं केंद्र व राज्य सरकारों की सेवाओं सुविधाओं की पहुंच ग्रामीण क्षेत्रों में सुनिश्चित करने में मदद मिल रही है। हमारे गांव इस तकनीक से ज्ञान अर्थव्यवस्था की लघु इकाई साबित हो रहे हैं। ई-प्रशासन ने ग्रामीणों से सीधा संपर्क साधना शुरू कर दिया है। इससे समय और ऊर्जा की बचत के साथ-साथ काम में पारदर्शिता बढ़ी है, तो भ्रष्टाचार की गुंजाइश भी कम हुई है। भाग दौड़ भी कम हुई है, क्योंकि अब ग्रामवासियों को अपने छोटे-छोटे कामों के लिए शहरों का रुख नहीं करना पड़ता। 

सारतः यह कहा जा सकता है कि ग्रामीण विकास और कृषि के उन्नयन में नई खोजों और तकनीकों ने अनेक स्तरों पर केंद्रीय भूमिका निभाकर जहां भारतीय कृषि के पिछड़ेपन को दूर किया है, वहीं उत्पादकता, दक्षता, कुशलता एवं गुणवत्ता को भी नए आयाम दिए हैं। परम्परागत कृषि से भिन्न आज भारतीय कृषि का जो नया चेहरा हमें देखने को मिल रहा है, वह नई खोजों और तकनीक की ही देन है। कृषि के इस अधुनातन स्वरूप से हम विकास की नई ऊंचाइयों का स्पर्श करेंगे, यह उम्मीद निराधार नहीं है। 

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