भारतीय कृषि के विकास में सूचना प्रौद्योगिकी का योगदान | कृषि के क्षेत्र में विज्ञान का योगदान निबंध

भारतीय कृषि के विकास में सूचना प्रौद्योगिकी का योगदान

भारतीय कृषि के विकास में सूचना प्रौद्योगिकी का योगदान |कृषि के क्षेत्र में विज्ञान का योगदान निबंध अथवा कृषि और विज्ञान (यूपी लोअर सबॉर्डिनेट मुख्य परीक्षा, 2013) 

कृषि और विज्ञान की जुगलबंदी से कृषि का उन्नयन हुआ है। विशेष रूप से भारतीय कृषि के विकास एवं उन्नयन में सूचना प्रौद्योगिकी ने महत्त्वपूर्ण योगदान दिया है। यह कहना असंगत न होगा कि कृषि प्रौद्योगिकी को सशक्त, समृद्ध एवं उन्नतशील बनाने में सूचना प्रौद्योगिकी ने असाधारण भूमिका निभाई है। सच तो यह है कि ऑन लाइन शिक्षा, कम्प्यूटर एवं इंटरनेट, रेडियो, उपग्रह, मोबाइल एवं दूरदर्शन जैसे आधुनिक संचार माध्यमों ने भारतीय कृषि को एक नूतन स्पर्श दिया है। इससे जहां भारतीय कृषि के परम्परागत स्वरूप में बदलाव आया है, वहीं उत्पादकता एवं दक्षता बढ़ी है। सूचना प्रौद्योगिकी ने जहां कृषि से जुड़े अनेक कामों को सहज एवं सरल बनाया है. वहीं भारतीय किसान को जागरूक बनाने का काम भी किया है। यह कहना उचित होगा कि सूचना प्रौद्योगिकी ने अपने ‘सन्तांत्रिक प्रभाव’ से भारतीय कृषि को आच्छादित किया है। यह प्रौद्योगिकी भारतीय कृषि को आधुनिक बनाने की दिशा में तत्पर है। 

सूचना प्रौद्योगिकी अनेक स्तरों से भारतीय कृषि के विकास एवं संवर्धन में अपना योगदान दे रही है। आज का भारतीय किसान ‘किसान कॉल सेंटर’ की सुविधा से लाभान्वित हो रहा है। यह सुविधा सूचना प्रौद्योगिकी की ही देन है। इस सुविधा के मिलने से भारतीय किसान को अब अपनी समस्याओं के समाधान एवं इससे संबंधित सुझावों के लिए किसी का मुंह ताकना नहीं पड़ता। टोल फ्री नंबरों 1551. 180.1800 पर काल करते ही उसे अपनी समस्या का समाधान मिल जाता है। इससे उसके काम आसान हो जाते हैं और वह बेहतर कृषि की दिशा में आगे बढ़ता है। महत्त्वपूर्ण बात यह भी है कि निःशुल्क फोन की यह सुविधा सातों दिन प्रातः 6 बजे से रात्रि 10 बजे तक जारी रहती है तथा इस सुविधा को धीरे-धीरे राष्ट्रव्यापी आधार प्रदान किया जा रहा है। किसानों के प्रश्नों का उत्तर देने के अलावा किसान काल सेंटर कृषि एवं उससे जुड़े हुए क्षेत्रों में एसएमएस सेवा प्राप्त करने के लिए किसानों को पंजीकरण कराए जाने की भी सुविधा प्रदान करता है। इसके लिए किसान अपनी पसंद की फसलों अथवा गतिविधियों से जुड़े विकल्प दे सकते हैं। इसमें कृषि तथा बागवानी के अतिरिक्त पशुपालन, मत्स्य पालन एवं डेरी उद्योग आदि भी शामिल किए गए हैं। सरकार ने इफ्को किसान संचार लिमिटेड को किसान संचार काल सेंटर योजना के सेवा प्रदाता के रूप में नियुक्त किया है। 

इंटरनेट और कम्प्यूटर ने तो कृषि जगत को एकदम बदल कर रख दिया है। सूचना प्रौद्योगिकी की इन सुविधाओं ने भारतीय कृषि को एक नया चेहरा प्रदान किया है। इन सुविधाओं के मिलने से आज का भारतीय किसान विश्व के किसी भी कोने में बैठे कृषि विशेषज्ञों, कृषि वैज्ञानिकों एवं किसानों से सम्पर्क साध कर उपयोगी जानकारियां साझा कर सकता है, महत्त्वपूर्ण सुझाव प्राप्त कर सकता है एवं अपनी समस्याओं का हल तलाश सकता है। इन सारी बातों का लाभ उठाकर भारतीय कृषक कृषि के विकास का उपक्रम करता है। यह एक तरह से उस ई-एग्रीकल्चर का सूत्रपात है, जिसे भारतीय कृषि के लिए लाभकारी माना जा रहा है। यह आकारण नहीं है कि भारत सरकार द्वारा अपने ‘डिजिटल इंडिया’ अभियान में ई-एग्रीकल्चर को वरीयता प्रदान की गई है। 

भारतीय कृषकों के ज्ञानवर्धन एवं उनमें जागरूकता बढ़ाने में भी सूचना प्रौद्योगिकी सहायक सिद्ध हुई है। आज इंटरनेट पर ऐसी अनेक वेबसाइटें उपलब्ध हैं जो कृषि ज्ञान, महत्त्वपूर्ण जानकारियों एवं सूचनाओं से भरी पड़ी हैं। देश के कृषि विश्वविद्यालयों की अपनी वेबसाइटें हैं, तो अनुसंधान संस्थाओं की अपनी वेबसाइटें हैं। ये सभी ज्ञान एवं सूचनाओं के खजानों जैसी हैं। भारतीय किसान इससे अपने उपयोग की जानकारी प्राप्त कर लाभान्वित हो रहा है तथा कृषि को उन्नत बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इस प्रकार वह दक्ष किसान बन कर उत्पादकता को बढ़ा रहा है। 

संचार के माध्यम रेडियो एवं दूरदर्शन से भी भारतीय किसान लाभान्वित हो रहा है। ये माध्यम भारतीय किसानों को सिर्फ मनोरंजन ही नहीं उपलब्ध करवाते हैं बल्कि संवर्धित कृषि के लिए उनका ज्ञानवर्धन एवं मार्गदर्शन भी कराते हैं। रेडियो एवं दूरदर्शन पर कृषि विशेषज्ञों की मदद से किसानों की आवश्यकताओं, समस्याओं एवं मार्गदर्शन को ध्यान में रखकर अनेक कार्यक्रम तैयार करवाए जाते हैं, जो इनके लिए अत्यंत उपयोगी होते हैं। इन कार्यक्रमों से जुड़ कर भारतीय किसान अपनी समस्याओं का समाधान तो प्राप्त ही कर रहा है, अन्य उपयोगी जानकारी भी उसे घर बैठे मिल रही है। 

किसानों की बेहतरी एवं उन्हें उपयोगी जानकारियों से लैस कराने के उद्देश्य से कृषि जगत से जुड़े विभिन्न शोध एवं अनुसंधान संस्थानों तथा कृषि विश्वविद्यालयों द्वारा मोबाइल फोन पर ‘एसएमएस’ सेवाएं उपलब्ध करवाई जा रही हैं। ‘एसएमएस’ के जरिए किसानों को उपयोगी जानकारियां उपलब्ध करवाई जाती हैं, जिनसे वे लाभान्वित होते हैं। उल्लेखनीय है कि ‘भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद’ (ICAR) द्वारा अभी हाल में विकसित की गई मृदा परीक्षक डिजिटल मोबाइल मात्रात्मक मिनीलैब को एक ऐसी प्रणाली से संबद्ध किया गया है, जिसके जरिए फसल एवं मृदा विशिष्ट उर्वरकों से जुड़ी महत्त्वपूर्ण जानकारियां एवं अनुशंसाएं सीधे किसानों को एसएमएस के माध्यम से उनके मोबाइल पर उपलब्ध हो जाती हैं। इस प्रकार मोबाइल फोन भी किसानों के लिए लाभकारी सिद्ध हो रहा है और उसे मोबाइल फोन लेकर खेतों में चहलकदमी करते देखा जा सकता है। 

कृषि को संचार माध्यमों से उन्नत बनाने के उद्देश्य से नई-नई सुविधाओं की शुरुआत की जा रही है। कुछ समय पहले किसानों को उपलब्ध करवाई गई ‘ग्रीन फैबलेट’ सुविधा को अत्यंत महत्त्वपूर्ण माना जा रहा है। ग्रीन फैबलेट, टैबलेट कम्प्यूटर एवं फोन का ऐसा कस्टमाइज्ड संयोजन है, जो कि न सिर्फ अत्यंत किफायती है, बल्कि टूट-फूट एवं धूल से भी सुरक्षित है। यह उपकरण किसानों को ऐसी उपयोगी सूचनाएं प्रदान करता है, जिनसे उन्हें कम खर्च पर उपयोगी सामग्री खरीदने, उत्पादन की अच्छी कीमत प्राप्त करने तथा बाजार से जुड़ने में मदद मिलती है। यह मोबाइल की तरह काम करता है। इसमें प्रयुक्त ग्रीन सिम एक ऐसा विशेष सिम कार्ड है, जो किसी भी मोबाइल फोन में इस्तेमाल किया जा सकता है। इस उपकरण से किसानों को मौसम और कीट समस्याओं के बारे में मुफ्त जानकारी तो मिलती ही है, शोधकर्ताओं से भी वे उपयोगी जानकारियां प्राप्त कर सकते हैं। 

फसलों को आने वाले संकटों से बचाने, फसलों की सेहत को सही बनाए रखने, मानसून के सटीक पूर्वानुमान, ओला-पाला जैसी प्राकृतिक आपदाओं एवं भौगोलिक व जलवायु संबंधी सटीक सूचनाएं और जानकारियां उपलब्ध करवाने की दृष्टि से उपग्रह प्रणाली अत्यंत कारगर साबित हो रही है। इस प्रणाली से किसानों को लाभान्वित करने के उद्देश्य से भारतीय किसान उर्वरक सहकारी संगठन’ (इफ्को) एवं ‘भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने मिलकर देश के किसानों एवं सहकारी संस्थाओं के लिए सूचना प्रौद्योगिकी सेवाएं शुरू की हैं, जिससे कृषि कार्यों में बेहतरी आना तय है। 

सूचना प्रौद्योगिकी से जुड़ी सुविधाओं के क्रम में ‘साइबर ढाबा’ एवं ‘ई-चौपाल’ जैसे नवाचारों का भी विशेष महत्त्व है। सूचना – प्रौद्योगिकी के कारण गांवों तक इंटरनेट की पहुंच बढ़ी है, जिससे साइबर ढाबा की परिकल्पना साकार हुई है। अब गांवों में साइबर ढाबे खलने लगे हैं, जो कि किसानों के लिए उपयोगी सचनाओं के महत्त्वपूर्ण केंद्र साबित हो रहे हैं। इनके माध्यम से छोटे-छोटे गांव वैश्विक संपर्क में आ चुके हैं। यह सूचना प्रौद्योगिकी का ही कमाल है कि आज गांव की चौपालों का परिदृश्य एकदम बदल चुका है। अब गांव की चौपालों में बैठकर ग्रामीण हुक्का नहीं गुड़गुड़ाते, बल्कि उनके हाथ में कम्प्यूटर का माउस होता है। यह परिवर्तन उन ‘ई चौपाल’ के कारण आया है, जिसकी सुविधा किसानों को प्रदान की गई है। इसके जरिए किसानों को बैठे-बैठाए बाजारों की दैनिक कीमतों, अंतर्राष्ट्रीय कीमतों, बीज-खाद की कीमतों तथा आधुनिक तकनीकों का ब्यौरा मिल जाता है, जो कि उनके लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होता है। इससे उन्हें बाजार मध्यस्थता में भी सहायता मिलती है। 

कम्प्यूटर नियंत्रित मशीनों से सूचना प्रौद्योगिकी का व्यापक लाभ किसानों को मिल रहा है। बड़े खेतों की जुताई, खेतों का समतलीकरण, बुवाई, निराई, गुड़ाई, सिंचाई, कीटनाशक-रोगनाशक दवाओं व रसायनों का छिड़काव एवं खेतों को खाद देने जैसे महत्त्वपूर्ण कृषि कार्य आज कहीं बेहतर ढंग से कम्प्यूटर नियंत्रित आधुनिक मशीनों द्वारा किए जा रहे हैं, जिससे कृषि कार्यों की गुणवत्ता एवं सटीकता बढ़ी है। कम्प्यूटर नियंत्रित मशीनें पॉलीहाउस के अंदर फूलों, फलों एवं सब्जियों की संरक्षित खेती को भी उन्नत बनाने में सहायक सिद्ध हो रही हैं। इन मशीनों से जहां नमी, पानी एवं खाद आदि की मात्रा का सटीक और संतुलित निर्धारण किया जाता है, वहीं ये उत्पादों की बेहतर पैकेजिंग में भी सहायक सिद्ध होती हैं। उपज को बेचने के लिए सही मंडियों के चयन में भी ये | किसानों का मार्गदर्शन करती हैं। 

कुल मिलाकर हम यह कह सकते हैं कि भारतीय कृषि के विकास में सूचना प्रौद्योगिकी ने महत्त्वपूर्ण योगदान देते हुए इसका एक नया चेहरा गढ़ने का असाधारण काम किया है। भारतीय कृषि के परम्परागत स्वरूप में महत्त्वपूर्ण बदलाव आए हैं। यह अधुनातन हुई है, तो इसमें नवाचार भी देखने को मिल रहे हैं। सूचना प्रौद्योगिकी की बदौलत जहां भारतीय कृषि सुगम और सरल हुई है, वहीं किसी हद तक वह कृषि आपदाओं से निपटने में सक्षम भी हुई है। सूचना प्रौद्योगिकी ने कृषि जगत में लाभकारी स्थितियों को जन्म दिया है। इसके लाभ उत्पादकता, दक्षता, कुशलता, गुणवत्ता, जानकारी एवं जागरूकता की वृद्धि के रूप में साफ दिख रहे हैं, जिससे विकास को बल मिला है, तो भारतीय कृषि का पिछड़ापन दूर हुआ है। सारतः यह कहा जा सकता है कि भारतीय कृषि के परिप्रेक्ष्य में सूचना प्रौद्योगिकी अत्यंत किसानोपयोगी सिद्ध हुई है तथा इसने कृषिक विकास को नए आयाम प्रदान किए हैं। यह कहना असंगत न होगा कि विज्ञान ने भारतीय कृषि को मजबूत आधार प्रदान किया है, जिससे वह उन्नतशील हुई है। 

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