भारत में कंप्यूटर क्रांति पर निबंध।Computer Revolution in India in Hindi

भारत में कंप्यूटर क्रांति पर निबंध

कम्प्यूटर क्रान्ति और भारत (Computer Revolution and India) 

कम्प्यूटर-रेडियो तरंगों के लिए सीमा रेखाएं महत्व नहीं रखतीं और 36 हजार किमी. की ऊँचाई से तो राष्ट्रीय सीमाएं वैसे भी अस्पष्ट हो जाती हैं. आने वाले कल का विश्व एक सीमा बंधन से मुक्त संसार होगा. – आर्थर सी. क्लार्क

वर्तमान सूचना तकनीक युग में विश्व के किसी भी राष्ट्र का स्तर इस आधार पर अंकित होने लगा है कि इस राष्ट्र की सूचना तकनीक कितनी मजबूत है. सूचना के क्षेत्र में इस नई क्रान्ति का सूत्रपात 19वीं शताब्दी के टेलीग्राफ के आविष्कार के साथ हो गया था. कम्प्यूटर के बिना सूचना प्रौद्योगिकी के वर्तमान स्वरूप की संकल्पना करना बेमानी है, आज पूरे विश्व में औद्योगिक रूप से विकसित समाज ऐसे सूचना समाज में परिवर्तित होता जा रहा है जो कम्प्यूटर के बिना एक सेकण्ड भी जीवित नहीं रह सकता, सूचना तकनीक अपने विकास के लम्बे सफर के बाद आज इस मुकाम पर पहुंच गई है, जहाँ इसके विस्तार के लिए दुनिया छोटी पड़ रही है, यानि सूचना क्रान्ति ने पूरी दुनिया को समेट कर ग्लोबल विलेज (Global Village) अर्थात “गाँव में बदली दुनिया” की अवधारणा को साकार कर दिया है. 

बीसवीं सदी कम्प्यूटर क्रान्ति की गवाह है जिसमें सूचनाओं के संवाहन और प्राप्ति की गति अविश्वसनीय रूप से तेज है, किन्तु गति से अभिकलन करने के अलावा कम्प्यूटर कुछ तार्किक क्रियाएं अति तीव्र करने में सक्षम है. 

कम्प्यूटर का संक्षिप्त इतिहास 

यांत्रिक संगणक का उद्गम 1642 में 18 वर्षीय ब्लेज पास्कल ने किया था. 1833 में ब्रिटेन के गणितज्ञ चार्ल्स बेबेज ने एक मशीन का अविष्कार किया. जिसको ऐनेलिटिक इंजन का नाम दिया गया. गणन मशीन के क्षेत्र में प्रथम क्रान्ति 1946 में आई जब पहले इलेक्ट्रॉनिक कम्प्यूटर ‘इतियाक’ का अविष्कार हुआ. यह मशीन 5000 जोड़ या घटाव की प्रक्रिया एक सेकण्ड में कर सकती थी. इतियाक में 18000 वैक्यूम ट्यूब थी लगभग 70000 प्रतिरोधक थे, 10000 संधारित थे और 6000 स्विच थे. इसका भार 30 टन था, ये दशमलव पद्धति पर आधारित मशीन थी. डॉ. वॉन न्यूमैन ने कम्प्यूटर क्रान्ति को सही दिशा थी. उन्होंने कम्प्यूटर के कार्य हेतु द्विआयामी पद्धति (Binary System) का प्रयोग किया और संचयित प्रोग्राम का उपयोग किया. 

वर्तमान में जो कम्प्यूटर प्रयोग किया जा रहा है वह चौथे चरण का कम्प्यूटर है. पाँचवें चरण के कम्प्यूटर के विकास के लिए शोध तथा अनुसंधान जारी है. 1944, 1956, 1965 व 1971 में क्रमशः पहली पीढ़ी, दूसरी पीढ़ी, तीसरी पीढ़ी व चौथी पीढ़ी अस्तित्व में आई. अब वैज्ञानिक पाँचवीं पीढ़ी के विकास की दिशा में अग्रसर है. 

कम्प्यूटर पद्धति 

कम्प्यूटर एक उच्च तकनीक पर आधारित उपकरण है जिसके द्वारा बहुत सारे काम उसकी क्षमता के अनुरूप किए जा सकते हैं. गौरतलब है कि यह एक ऐसी गणन मशीन है जो शीघ्रतापूर्वक संक्रिया करती है. इसमें ‘डाटा’ के संचयन तथा ‘प्रोसेसिंग’ की सुविधा रहती है तथा संचयित प्रोग्राम की मदद से ‘आउटपुट’ रिजल्ट दिया जा सकता है. सामान्यतः प्रयोग में लाए जाने वाले कम्प्यूटर को ‘इलेक्ट्रॉनिक डिजिटल पर्सनल कम्प्यूटर’ कहते हैं. इसकी निम्न लिखित तीन श्रेणियाँ हैं 

अनुरूप कम्प्यूटर (Analogue Computer) 

यह कम्प्यूटर भौतिक राशियों, जैसे- ताप, दाब, वोल्टेज इत्यादि को नापकर या मापकर अपना कार्य करता है. इसका उपयोग मुख्यतः अभियान्त्रिकी एवं वैज्ञानिकी कार्यों में किया जाता है. अंकीय कम्प्यूटर (Digital Computer) 

ये कम्प्यूटर सभी प्रकार की गणनाओं को गिनकर (जोड़कर) कार्य करते हैं. ये दो प्रकार के होते हैं (क) विशेष प्रयोजन वाले (ख) सामान्य प्रायोजन वाले. 

संकर कम्प्यूटर (Hybrid Computer) 

इस कम्प्यूटर द्वारा अंकीय और अनुरूप दोनों कम्प्यूटरों की विशेषताओं का फायदा उठाया जाता है. इसका उपयोग स्वचालित उपकरणों में बहुतायत में किया जाता है. 

सुपर कम्प्यूटर (Super Computer) 

इस प्रकार के कम्प्यूटर की चाल बहुत तीव्र होती है. अधिकांशतः इसका उपयोग रक्षा, मौसम, अनुसंधान और विभिन्न वैज्ञानिक कार्यों में किया जाता है. पहला सुपर कम्प्यूटर ILLIAC-IV है.

भारत के संदर्भ में कम्प्यूटर क्रान्ति 

यह महज संयोग है कि माइक्रोसाफ्ट कम्पनी के प्रमुख एवं दुनिया के सबसे अमीर बिल गेट्स का दिल्ली (1997) आगमन और यहाँ भारत का पहला एप्पल पब्लिशिंग टेक्नालॉजी सेंटर (ए.पी.टी.सी.) खोलने की घोषणा एक दिन हुई माइक्रोसाफ्ट और एप्पल दोनों ही कम्पनियों का मानना है कि भारत में कम्प्यूटर का भविष्य असीमित है. 1997 में भारत में तीन लाख 65 हजार पर्सनल कम्प्यूटर लोगों ने खरीदे थे यह उत्साहजनक आँकड़ा निरन्तर तूफान की तरह बढ़ रहा है जिसकी वजह से बेशक बिल गेट्स और जेफ की तुलना नहीं की जा सकती है, पर दोनों ही आए हैं भारत में एक विस्तृत बाजार तलाशने पुणे के सी-डैक (सेंटर फॉर डेवलपमेन्ट ऑफ एडवांस कम्प्यूटिंग) के वैज्ञानिकों ने 28 मार्च, 1998 को प्रति सेकण्ड एक खरब गणना करने की क्षमता से युक्त कम्प्यूटर परम-10000 का निर्माण किया. सुपर कम्प्यूटर ‘परम 10000′ के विकास का श्रेय सी डेक के कार्यकारी निदेशक डॉ. विनय पी. भास्कर को जाता है. 

परम का विकास 8000, 8600 तथा 9000 की तीन श्रृंखलाओं में किया गया है. पहली दो श्रृंखलाएं की शिखर निष्पादन क्षमता क्रमशः 1100 तथा 1220 मेगाफ्लॉप है, जबकि परम 9000 की क्षमता 2400 मेगाफ्लाप है. मेगाफ्लापों की क्षमता वाले सुपर कम्प्यूटर के विकास के बाद भारतीय वैज्ञानिकों ने गीगाफ्लाप वाली श्रृंखला पर काम शुरू किया इसकी सफलता के बाद वैज्ञानिक एक टेराफ्लॉप क्षमता वाले कम्प्यूटर के विकास की योजना बना रहे हैं. 

सर्वप्रथम “नेशनल एयरोनॉटिक्स लेबोरेटरिज” (बंगलौर) में फ्लोसाल्वर नामक सुपर कम्प्यूटर का विकास करने में सफलता पाई थी. इसके अतिरिक्त 128 माइक्रोप्रोसेसर से युक्त ‘पेस’ नामक सुपर कम्प्यूटर का विकास हैदराबाद की एक निजी कम्पनी ने किया. परम, फ्लोसाल्वर तथा पेस के अलावा भी भारत में कई सुपर कम्प्यूटरों का भी विकास किया गया. बंगलौर की सी-डॉट संस्थान ने ‘चिप्स-16’ तथा भारतीय विज्ञान संस्थान ने मल्टी माइक्रो नामक सुपर कम्प्यूटर का निर्माण किया. मुम्बई के भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान ने ‘मैक’ नामक सुपर कम्प्यूटर बनाया. 

भाभा परमाणु अनुसंधान केन्द्र मुम्बई ने पैरेलल सुपर कम्प्यूटर ‘अनुपम’ का विकास किया. चौसठ अभिकलन अवयवों वाली इस पैरेलल मशीन की शिखर निष्पादन क्षमता 400 मेगाफ्लॉप है. 

देश का सबसे शक्तिशाली कम्प्यूटर परम पदम का विकास सेंटर फॉर डेवलेपमेंट ऑफ एडवांस कम्प्यूटर’ (सी डेक) ने किया है.. 

इस कम्प्यूटर के लांच के साथ ही भारत उन देशों की श्रेणी में पाँचवें स्थान पर आ गया. जिनके पास अगली पीढ़ी के उच्च क्षमता युक्त सुपर कम्प्यूटिंग कलास्टर है. परम पदम अपने पूर्ववर्ती परम की अपेक्षा दस गुना शक्तिशाली है. 

दृष्टिहीनों के लिए विशेष प्रकार से निर्मित दुनिया का पहला मोबाइल टाकिंग कम्प्यूटर अब भारत में उपलब्ध हो गया है. इसका नाम पैकमेट है. पैकमेट अल्ट्रा लाइट के सहारे हाथ में रखने योग्य अर्थात् मोबाइल कम्प्यूटर है. भारत सरकार द्वारा सूचना तकनीक के विकास के लिए व्यापक अध्ययन कर सुझाव देने के लिए गठित टास्क फोर्स का अनुमान है कि यदि उसकी योजनाओं पर अमल किया जाए, तो सन् 2008 ई. तक विश्वस्तरीय सूचना तकनीक उद्योग में भारत की हिस्सेदारी लगभग 50 बिलियन डॉलर की होगी. आशा की जाती है कि उस समय तक इस उद्योग का वैश्विक आकार लगभग 2 ट्रिलियन डॉलर होगा. भारत में सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में 2005 तक खर्च में 9 प्रतिशत से बढ़कर 12 से 15 प्रतिशत तक पहुँचने की सम्भावना है.

भारत में इंटरनेट क्रान्ति और विस्तार 

इंटरनेट एक तरह से विश्वव्यापी कम्प्यूटरों का नेटवर्क है जो एक-दूसरे को किसी भी तरह की सूचना चाहे वह टेक्स्ट हो. ओडियो विडियो सिग्नल हो या डाटा सभी का स्क्रीन एवं कॉपीयर के माध्यम से आदान-प्रदान सम्भव बना देता है. इंटरनेट सूचना राजपथ (Information Highway) के नाम से भी जाना जाता है. 

भारत में इंटरनेट सुविधा की शुरूआत 15 अगस्त, 1995 में हुई. बाद में 4 नवम्बर, 1997 का भारत में निजी कम्पनियों को इंटरनेट सेवा उपलब्ध कराने की अनुमति दे दी. देश का पहला व्यापारिक ई-मेल सेवा 11 फरवरी, 1994 को नई दिल्ली में शुरू की गई. यह सेवा चेन्नई स्थित आई. सी. एन.ई. ही नामक निजी कम्प्यूटर फार्म द्वारा स्थापित की गई. 

हमारे देश में सन् 1984 में कम्प्यूटर नीति की घोषणा की गई. इसी घोषणा संदेश से देश में कम्प्यूटर क्रान्ति का सूत्रपात हुआ.

भारत में पहले कम्प्यूटर साक्षर गाँव बनने का श्रेय केरल के मालाप्यूरम जिले के चमरावत्तम गाँव को जाता है. यह सफलता अक्षय योजना के तहत किए गए प्रयासों से मिली. इस तरह भारत का हर गाँव, कस्वा और शहर तीव्र गति से कम्प्यूटर से जुड़ रहा है. प्रधानमंत्री वाजपेयी ने 11 जून, 2003 को विद्यालयों को कम्प्यूटरीकृत करने वाली ‘विद्या वाहिनी कार्यक्रम का शुभारम्भ किया. इसके तहत 60000 सरकारी विद्यालयों तथा वित्तपोषित विद्यालयों को इंटरनेट तथा इंट्रानेट से जोड़ा जाएगा. इसमें प्रत्येक विद्यालय में 10 लाख रुपए की लागत वाला हार्डवेयर युक्त कम्प्यूटर प्रयोगशाला होगी.

मल्टी-मीडिया 

मल्टी-मीडिया एक तकनीक है जो वर्तमान में आधुनिक कम्प्यूटर का एक आवश्यक अंग बन चुका है. इस शब्द का अर्थ एक ही कम्प्यूटर टेक्स्ट, ग्राफिक्स, एनीमेशन, ऑडियो विडियो इत्यादि सुविधाओं के प्राप्त होने से लगाया जाता है. उत्पादन सूचना, मनोरंजन, शिक्षा तथा सृजनात्मक कार्यों में मल्टी-मीडिया का जबरदस्त उपयोग है. 

भारत सरकार ने भी ई-मेल, ई कॉमर्स तथा इंटरनेट के बढ़ते हुए प्रयोग को देखकर एक सार्थक पहल करते हुए गत 16 मई, 2000 को लोक सभा द्वारा सूचना प्रौद्योगिकी विधेयक 2000 पारित कर कानून बनाया है, ताकि बढ़ रहे साइबर अपराधों पर कठोर दण्ड की वजह से रोक लगाई जा सके. कम्प्यूटर क्रान्ति से विशेषकर शिक्षा जगत को लाभ पहुँचा. इस प्रकार नवीन वैज्ञानिक अनुसंधानों, नवीनतम यंत्रों एवं बड़े औद्योगिक परिसरों के संचालन एवं विकास में कम्प्यूटर क्रान्ति का विशेष अवदान परिलक्षित हो रहा है. 

नासकाम द्वारा करवाए गए ताजा सर्वेक्षण के अनुसार देश में वर्तमान में इंटरनेट कनेक्शनों की कुल संख्या करीब 80 लाख हो जाने की सम्भावना है. देश में सॉफ्टवेयर उद्योग का कुल कारोबार 2001 से 38,500 करोड़ था जो आज 50,000 करोड़ से ज्यादा होगा. 

इस तरह कम्प्यूटर के नेटवर्क के जाल की भारत में चहुँमुखी फैलाव आश्चर्यजनक प्रगति की राह पर है. 

संक्षेप में यह कहा जाना होगा कि आने वाले वर्षों में कम्प्यूटर क्रान्ति को भारत में जबरदस्त विस्तार मिलने की अपार सम्भावना है, क्योंकि वर्तमान सूचना युग में वह देश समृद्ध तथा शक्तिशाली माना जाता है जिसकी सूचना प्रौद्योगिकी पर अधिकार अधिक-से अधिक हो. वैश्वीकरण की दौड़ में आज सूचना तकनीक सर्वोपरि हथियार है. इसलिए भारत इसे अपनाकर साधन सम्पन्न बनने की मुराद में है. बहरहाल करीब 5-7 सालों में कम्प्यूटर के क्षेत्र में अकल्पनीय सफलता भारत ने हासिल की है जो एक क्रान्ति की दौड़ में अति सराहनीय है. और भारत ने विश्व-बिरादरी में अपनी अलग पहचान बनाई है. 

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