Classical story in Hindi-अस्सी दिन में दुनिया की सैर की कहानी

अस्सी दिन में दुनिया की सैर की कहानी

Classical story in Hindiअस्सी दिन में दुनिया की सैर की कहानी

बहुत समय पहले की बात है। लंदन में फिलियास फॉग नामक एक आदमी रहता था। वह एक अच्छे सामाजिक संगठन ‘रिफॉर्म क्लब’ का सदस्य था। वह बहुत सीधा-सादा, व्यवहार कुशल, समय की कद्र करने वाला और अनुशासन पर चलने वाला इन्सान था। 

एक दिन फॉग ने क्लब के सभी सदस्यों से कहा कि वह अस्सी दिन में दुनिया की सैर कर सकता है। सभी सदस्य उसका मजाक उड़ाने लगे, क्योंकि तब तक विमान का आविष्कार नहीं हुआ था। लोग केवल नावों और रेलगाड़ियों से लंबी दूरी की यात्रा करते थे। 

क्लब के एक सदस्य जोसफ कैन ने कहा, “असंभव! तुम अस्सी दिन में पूरी दुनिया की सैर नहीं कर सकते।” 

फॉग ने कहा, “श्रीमान, मैं बीस हजार पाउंड की शर्त लगाने को तैयार हूं-हमारे बीच यह शर्त रही।” सभी सदस्यों ने भी हामी भर दी। 

फॉग ने दुनिया का नक्शा लिया और गणना करने के बाद यह नतीजा निकाला कि पूरी दुनिया की सैर करने के लिए अस्सी दिन का समय बहुत है। फिर वह शीघ्र ही अपने 

एक सहायक पासीपर्टआउट के साथ रवाना हो गया। वे लंदन से स्वेज पहुंचे, जिसे रेल और स्टीमर द्वारा सात दिनों में तय किया गया था। 

Classical story in Hindi

अब तक फॉग की शर्त के बारे में पूरे लंदन के समाचार पत्रों में प्रकाशित हो चुका था। उन्हीं दिनों इंग्लैंड के एक बैंक में हीरों की भारी चोरी हुई। चोर का चेहरा फॉग से मिलता-जुलता था, इसलिए स्कॉटलैंड यार्ड के एक गुप्तचर फिक्स को उसके पीछे जासूसी करने के लिए लगा दिया गया। 

फॉग को हीरों की चोरी के बारे में कुछ पता नहीं था। वह स्वेज से स्टीमर द्वारा बंबई (अब मुंबई) के लिए रवाना हुआ। यह तेरह दिन की यात्रा थी। स्टीमर समय से दो दिन पहले बंबई पहुंच गया।

फॉग और उसके सहायक को बंबई घूमने के लिए थोड़ा समय मिल गया था। भारत देश उनके लिए किसी अजूबे से कम नहीं था। भारत में दो दिन का समय घूमने के लिए काफी था, अतः फॉग के सहायक ने सोचा कि क्यों न इजाजत मांग ली जाए | और घूमा जाए। उसने फॉग से इजाजत मांग ली और रेलवे स्टेशन के आसपास के इलाके में घूमने लगा। शीघ्र ही वे बंबई से कलकत्ता (अब कोलकाता) की ओर जाने वाली ट्रेन की प्रतीक्षा कर रहे थे। ट्रेन दो-तीन घंटे लेट थी। अतः फॉग अपने सहायक के साथ रेलवे स्टेशन के बाहर निकल आया और एक हिंदू मंदिर में चला गया। ईसाई होने के कारण वे हिंदू मान्यताओं के बारे में कुछ नहीं जानते थे। वे जूते पहने हुए ही मंदिर में घुस गए, इसलिए उन्हें पुजारियों के कोप का सामना करना पड़ा और वे बड़ी मुश्किल से रेलवे स्टेशन वापस आए। 

 

रेलगाड़ी में उन दोनों की भेंट एक अंग्रेज व्यक्ति सर फ्रांसिस से हुई, जो भारत में रहते थे। बदकिस्मती से गाड़ी अपनी मंजिल से 50 मील पहले ही रुक गई। अब लोगों को आगे का रास्ता खुद तय करना था। फॉग और उसके सहायक को अगली गाड़ी इलाहाबाद से मिल सकती थी। 

इलाहाबाद तक जाने के लिए किसी वाहन की आवश्यकता थी। फॉग अपनी सैर का पूरा आनंद लेना चाहता था। उसे भारतीय हाथी बहुत पसंद थे, अतः उसने फैसला किया कि वह हाथी की सवारी करेगा। 

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तब फॉग ने एक हाथी खरीदा और एक पारसी गाइड नियुक्त किया। उनके साथ सर फ्रांसिस भी थे। वे हाथी पर सवार होकर आगे बढ़ने लगे। फिर उन्होंने एक जगह डेरा डालकर रात काटी। अगली सुबह उन्हें एक जगह काफी भीड़ दिखाई दी। कुछ लोग एक युवती को सती करना चाहते थे, क्योंकि उसके पति राजकुमार की मौत हो गई थी। ऐसी स्थिति में उन्होंने युवती को बचाने का निर्णय किया। 

फॉग के सहायक ने किसी तरह मृत राजकुमार की चिता पर उस युवती के बजाय स्वयं लेटने का प्रबंध कर लिया। जब उसे जलाया जाने लगा, तो वह उस चिता से लकड़ियां हटाकर बैठ गया। यह देखकर सब लोगों ने उसे भूत समझा और वहां से भाग खड़े हुए। इसके बाद वे लोग जल्दी-जल्दी इलाहाबाद रेलवे स्टेशन पहुंचे। अब वह युवती भी उनके साथ थी, जिसकी उन्होंने जान बचाई थी। उसका नाम आउदा था। आउदा फॉग की आभारी थी कि उसने उसकी जान बचाई, वरना वे लोग उसे उसके पति के साथ जिंदा जला देते। 

जब वे चारों कलकत्ता पहुंचे, तो उन्हें वहीं बंदी बना लिया गया। पहले उन्होंने सोचा कि युवती आउदा की जान बचाने के लिए उन्हें गिरफ्तार किया गया है, लेकिन उनके गाइड ने बताया कि बंबई के मंदिर में जूतों सहित जाने की वजह से उन्हें बंदी बनाया गया है।

फॉग ने भारी धनराशि देकर जमानत करवाई। फिर वे हांगकांग जाने वाले स्टीमर पर सवार हो गए। गुप्तचर फिक्स लगातार उनका पीछा कर रहा था। 

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भयंकर तूफान की वजह से उन्हें हांगकांग पहुंचने में देर हुई, लेकिन सौभाग्यवश अभी जापान जाने वाला जहाज नहीं छूटा था। हांगकांग की यात्रा में भी आउदा साथ थी। उसे वहां उसके किसी संबंधी के पास छोड़ना था। तभी यह पता चला कि आउदा का वह संबंधी अब हॉलैंड में रहने लगा है। अतः आउदा ने फैसला किया कि वह फॉग के साथ यूरोप जाएगी। यह सुनकर फॉग को अच्छा लगा कि अब आउदा उसके साथ ही यात्रा करेगी। वस्तुतः फॉग मन-ही-मन में आउदा से अपार प्रेम करने लगा था। 

स्कॉटलैंड यार्ड का गुप्तचर फिक्स यह नहीं चाहता था कि वे लोग हांगकांग से बाहर जाएं। अतः वह फॉग के सहायक को एक सराय में ले गया। फिर शराब में नशीली दवा मिलाकर फॉग के सहायक को पिला दिया, जिससे वह बेसुध हो गया। अब वह कहीं आने-जाने लायक नहीं था। 

अगली सुबह फॉग को पता चला कि उसका सहायक नहीं है और स्टीमर जा चुका है। ऐसे में उसने एक नाव किराये पर ली और शंघाई के लिए रवाना हो गया, ताकि वह योकोहामा (जापान) जाने वाले स्टीमर पर सवार हो सके। आउदा उसके साथ ही थी। 

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इस दौरान फॉग का सहायक भी किसी तरह योकोहामा पहुंच गया। उसके पास पैसा नहीं था, अतः उसने किराया जमा करने के लिए सरकस में काम किया और इस तरह अपने मालिक फॉग से जा मिला। 

अंततः वे सैन फ्रांसिस्को जाने वाले स्टीमर पर सवार हुए। फॉग को न्यूयॉर्क होते हुए अगले सोलह दिनों में लंदन पहुंचना था। जब वे लोग न्यूयॉर्क पहुंचे, तो लिवरपूल (इंग्लैंड) जाने वाला स्टीमर रवाना हो चुका था। उन्हें पहुंचने में काफी देर हो गई थी। ऐसी स्थिति में फॉग ने मालवाहक जहाज के मालिक को पैसा दिया और कहा कि वह उन्हें इंग्लैंड पहुंचा दे। जब वे तीनों इंग्लैंड पहुंचे, तो स्कॉटलैंड यार्ड के गुप्तचर फिक्स ने फॉग को बैंक डकैती के इल्जाम में बंदी बना लिया। 

अब फॉग निराश हो गया था। वह समझ गया कि शर्त के अनुसार समय पर लंदन पहुंचना लगभग असंभव है। लेकिन शीघ्र ही गुप्तचर फिक्स को पता चल गया कि हीरों का असली चोर तो तीन दिन पहले ही पकड़ लिया गया है। इसलिए उसने फॉग को तत्काल मुक्त कर दिया। 

अस्सी दिन में दुनिया की सैर की कहानी

शीघ्र ही फॉग, आउदा और फॉग का सहायक एक्सप्रेस गाड़ी से लंदन रवाना हुए। लेकिन जब वे लंदन पहुंचे, तो कुछ मिनट लेट हो गए थे। फॉग का मन टूट गया। आउदा ने फॉग से अपने प्यार का इजहार किया और फॉग का सहायक उनके विवाह का प्रबंध करने के लिए चल दिया। अगली सुबह सोमवार को विवाह होना तय हुआ था। 

तभी फॉग को एहसास हुआ कि अगले दिन तो रविवार है। फॉग ने समय की सही गणना करने में गलती की थी। उसके पास अब भी शर्त जीतने के लिए पर्याप्त समय था। पूर्व की ओर यात्रा करने की वजह से उसके पास कुछ समय बच गया था। 

वे दोनों तेजी से रिफॉर्म क्लब की ओर भागे और सबको बताया कि वे सही वक्त पर दुनिया की सैर करके वापस आ गए हैं। शर्त की धनराशि पाकर उन्हें बहुत खुशी हुई, लेकिन फॉग को असली खुशी इस बात की थी कि उसे आउदा जैसी जीवन-संगिनी मिल गई थी। 

अस्सी दिन में दुनिया की सैर की कहानी

अगले दिन सोमवार को फॉग और आउदा का विवाह बहुत धूमधाम से संपन्न हुआ, क्योंकि फॉग को शर्त जीतने के कारण बीस हजार पाउंड मिल गए थे। उसने उस धनराशि का कुछ भाग अपने सहायक को दे दिया, जिसने उसकी काफी मदद की थी। विवाह के बाद भी फॉग अपनी पत्नी आउदा के साथ दुनिया के अलग-अलग हिस्सों की सैर करने के लिए जाता रहा। उसे दुनिया की सैर करने में बहुत आनंद आने लगा था। 

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