बच्चों की रात की कहानियां-चिड़िया का बदला 

बच्चों की रात की कहानियां-चिड़िया का बदला 

बच्चों की रात की कहानियां-चिड़िया का बदला 

जंगल में एक पेड़ पर चिड़ा और चिड़िया ने अपना घोंसला बनाया। वे उस पेड़ पर मजे से रहने लगे। जल्दी ही चिड़िया ने अंडे दिए। कुछ ही समय में उनके अंडों से बच्चे बाहर आने वाले थे। वे अपने बच्चों के पैदा होने का इंतजार कर रहे थे। 

उस दिन बहुत गर्मी थी। एक हाथी गर्मी | के मारे बौराया हुआ उधर घूम रहा था। वह जंगल में इधर-उधर भागते हुए पेड़ों को पकड़ कर हिला रहा था, झाड़ियों को अपने पैरों के नीचे रौंद रहा था और जोर-जोर से चिंघाड़ें मार रहा था।

अचानक उसने उस पेड़ पर भी धावा बोल दिया, जिस पर चिड़ा और चिड़िया का घोंसला था। उसने वह शाखा ही तोड़ दी, जिस पर उनका घोंसला बना हुआ था। घोंसला टूट कर गिरा, तो सारे अंडे भी चकनाचूर हो गए। बेचारा चिड़ा और चिड़िया अपने बच्चों के लिए रोने लगे। एक कठफोड़वे ने चिड़िया को रोते हुए सुना, तो उसने उससे रोने का कारण पूछा। 

“मेरे सारे बच्चे मारे गए। उस दुष्ट हाथी ने पेड़ पर हमला किया और सब खत्म हो गया। क्या तुम उससे बदला लेने में मेरी मदद कर सकते हो? मैं उसे मारना चाहती हूं,” चिड़िया गुस्से में बोली। 

बच्चों की रात की कहानियां-चिड़िया का बदला 

कठफोड़वे से चिड़िया का दुख देखा नहीं गया, उसने निश्चय किया कि वह उसकी मदद करेगा। वैसे भी यदि उस दुष्ट हाथी का सफाया न किया गया तो वह दूसरे पक्षियों को भी इसी तरह सताता रहेगा इसलिए वह उसे मारने के लिए कोई तरकीब सोचने लगा, जल्द ही उसके दिमाग में एक योजना आ गई।

कड़फोड़वे ने अपने बड़े-बूढ़ों से सुना हुआ था कि शत्रु यदि ज्यादा शक्तिशाली हो, तो उसे मिल-जुलकर मिटाया जा सकता है। बस, एक सुनिश्चित योजना की जरूरत होती है इसके लिए। ऐसे में, अपना काम करते हुए योजना के प्रति प्रत्येक व्यक्ति को सावधान रहना भी आवश्यक होता है। 

इस काम को पूरा करने के लिए उसे अपने तीन दोस्तों की मदद की जरूरत थी- मक्खी, मेंढ़क और चिड़िया। सारे दोस्तों ने मिल कर तय किया कि उन्हें ऐसा क्या करना चाहिए कि हाथी को उसके किए की सजा दी जा सके। उन्होंने हाथी को मारने का निश्चय कर लिया। 

कठफोड़वे ने मक्खी से कहा कि वह हाथी के पास जा कर भिनभिन की मधुर आवाज करे, ताकि उसे नींद आ जाए। 

योजना के अनुसार चिड़िया और कठफोड़वा अपनी कठोर नन्ही चोंच से उस पर धावा बोल देंगे और उसकी दोनों आंखों पर एक साथ वार करेंगे। जब हाथी अंधा हो कर दर्द से कराहने लगेगा, तो वह लड़खड़ा कर इधर-उधर भागेगा। तब उसे कुछ दिखाई भी नहीं देगा। ऐसे में वह अपनी आंखों को ठंडक देने के लिए कोई उपाय ढूंढ़ेगा। 

उस समय, मेंढ़क दलदल से भरे गड्ढे के पास बैठ कर टर्र-टर्र करेगा, जिससे हाथी को लगेगा कि वहां पानी है। वह उस आवाज के पास जाएगा, फिर मेंढक वहां से हट जाएगा। फलस्वरूप वह अंधा हाथी दलदल में फंस जाएगा और फिर उससे कभी बाहर नहीं निकल सकेगा। 

“क्या यह योजना सबको समझ आ गई। सबको अपना-अपना काम पता है?” कठफोड़वे ने पूछा।

 “हां,” सबने एक साथ कहा, “हम जानते हैं कि हमें कब क्या करना है।” 

इस तरह सारा दल योजना पर काम करने लगा। मक्खी भिनभिन करने लगी, जिसे सुन कर हाथी को नींद आ गई। 

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दोनों पक्षियों ने उसकी आंखों पर एक साथ वार किया। घायल हाथी दर्द से बुरी तरह लड़खड़ाने लगा। वह इधर-उधर भागने लगा। मेंढ़क की आवाज सुन कर हाथी उसी ओर भागता हुआ आया और दलदल को ही नदी समझ कर उसमें कूद पड़ा। कुछ देर दलदल में हाथ-पैर मारने के बाद उसकी मौत हो गई। इस तरह उन सबने उस दुष्ट हाथी से छुटकारा पा लिया। चिड़ा और चिड़िया के बच्चे तो वापस नहीं आ सकते थे परंतु उन्होंने दुष्ट हाथी से बदला ले लिया था। पेड़ों पर रहने वाले सारे पक्षियों ने उन्हें इस काम के लिए धन्यवाद दिया।

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