Childhood Story in Hindi-कुम्हार की लड़ाई

Childhood Story in Hindi

Childhood Story in Hindi-कुम्हार की लड़ाई

बहुत समय पहले की बात है। किसी गांव में एक कुम्हार रहता था। वह बहुत सुंदर बर्तन बनाता था, बस उसमें एक ही बुराई थी कि वह समझदार नहीं था। शराब पीने के बाद तो वह ऐसी उल्टी-सीधी हरकतें करने लगता जिन पर विश्वास करना मुश्किल हो जाता। 

एक बार उसने थोड़ा ज्यादा नशा कर लिया। जब वह घर वापस आया तो उसे कोने में रखे मिट्टी के मटके दिखाई नहीं दिए। वह लड़खड़ाया और उनके ऊपर ही जा गिरा। जोर के झटके से सारे मटके टूट गए और वह उनके बीच पड़ा रहा। होश आने पर वह जब वहां से उठा तो उसे लगा उसके माथे पर गहरा घाव हो गया था, जिसमें से खून निकल रहा था। 

वह गांव के हकीम से जा कर अपने घाव की दवा ले कर आया। कुछ दिन तक पट्टी करवाने और दवा लेने से घाव ठीक हो गया लेकिन माथे पर एक बदसूरत पक्का निशान बन गया। 

कुछ समय के बाद गांव में भयानक अकाल पड़ा। अब कुम्हार के पास कोई काम नहीं था। गांव वाले उससे मिट्टी के बर्तन या सामान खरीदने नहीं आते थे। उनके पास अपना पेट भरने तक के पैसे नहीं थे। कुम्हार भी भोजन न मिलने के कारण बहुत ही कमजोर और दुबला होता जा रहा था। बहुत से लोग गांव छोड़ कर दूसरे स्थानों पर जा रहे थे। वे कहीं और काम करना चाहते थे ताकि परिवार का गुजारा चलाया जा सके। उनमें से कुछ लोग राजा के दरबान भी बन गए। कुम्हार ने तय किया वह भी वहीं चला जाएगा। 

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वह महल में काम मांगने गया तो राजा ने उसके माथे पर घाव का बड़ा-सा निशान देख कर अपने मन में सोचा, “यह चोट का निशान किसी लड़ाई में ही आया होगा। यह आदमी बहादुर लगता है इसलिए इस योद्धा को महल में ही अच्छा पद दिया जाना चाहिए।” इस तरह राजा ने कुम्हार को ऐसा पद दे दिया, जो अनुभवी सैनिकों व राजकुमारों के पद के बराबर था।

कुम्हार बहुत खुश हुआ क्योंकि अब उसे बहुत मान-सम्मान मिलने लगा था। वह बड़े ही आराम से जिंदगी बिताने लगा। उसका तो मानो भाग्य ही चमक गया था। 

पर दरबार में कुछ लोग ऐसे भी थे जो उस योद्धा बने कुम्हार से जलते थे। लेकिन राजा से डरने के कारण वे मुंह खोल कर कुछ नहीं कह पाते थे, परंतु उन्हें लगता था कि राजा ने अयोग्य व्यक्ति को इतना ऊंचा पद व सम्मान दे कर अच्छा नहीं किया है। 

एक दिन राजा को ज्ञात हुआ कि पास के राज्य की सेना उस पर हमला बोलने वाली है। राजा लड़ाई के लिए तैयारी करने लगा। उसने घोषणा की कि युद्ध में वीरता दिखाने वाले सैनिकों को धन के रूप में पुरस्कार दिया जाएगा तथा अन्य विशेष सुविधाएं भी मिलेंगी। 

सेनापति ने अपनी सेना को तैयार रहने की घोषणा कर दी। राजा अपनी सेना के अस्त्र-शस्त्रों का निरीक्षण कर रहे थे। तभी उनकी नजर कुम्हार पर पड़ी। वे समय बिताने के लिए उससे बात करने लगे। उन्होंने पूछा, “तुम्हारे माथे पर यह घाव का निशान है, कैसे यह चोट लगी?” 

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कुम्हार यह सुन कर बहुत डर गया। वह तो लड़ाई के नाम से ही अधमरा हो रहा था। उसे लग रहा था कि अगर लड़ाई में जाना पड़ा, तो उसका क्या हाल होगा। उसने सच उगल दिया, “हुजूर! मैं तो एक कुम्हार हूं। एक दिन शराब पीकर मटकों पर गिर पड़ा था। उनके टुकड़े चुभने से ही यह घाव हो गया था।” । 

उसकी बात सुन कर राजा को बहुत गुस्सा आया। उन्होंने उसी समय कुम्हार को सेना और महल से बाहर निकाल दिया। मूर्ख कुम्हार अपना-सा मुंह ले कर गांव वापस आ गया।

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