चेचक के लक्षण, कारण और घरेलू इलाज : Home Remedies for Chickenpox (Small pox) | chechak Rog ka ilaaj 

चेचक के लक्षण, कारण और घरेलू इलाज

चेचक के लक्षण, कारण और घरेलू इलाज : Home Remedies for Chickenpox (Small pox) 

चेचक  रोग की उत्पत्ति 

वायु में चेचक रोग के कीटाणु फैले रहते हैं जो सांस द्वारा बच्चे के शरीर में पहुंच जाते हैं। इसके अलावा रोगी बालक की नाक, थूक, कपड़ों, बरतन, चारपाई आदि से भी यह रोग स्वस्थ बच्चे को लग जाता है। यह एक विशेष प्रकार का तेज संक्रामक रोग है। 

चेचक  रोग के लक्षण 

इसमें शरू में बडे जोर का बुखार आता है। बुखार के साथ ही रोगी के सिर में दर्द तथा गले में खराश होती है। तीसरे दिन मंह और हथेली पर छोटे-छोटे लाल दाने निकल आते हैं जो सारे शरीर में फैल जाते हैं। पांचवें या छठे दिन इन दानों में पानी भर जाता है। दानों के कारण रोगी का मुंह सूज जाता है। सूजन के कारण रोगी को 

आंखें खुली रखने में बड़ा कष्ट होता है। साधारणतया ये दाने दसवें दिन सूखने लगते हैं। फिर खुरंट बनकर गिर जाते हैं। खुरंट के बाद छोटे-छोटे निशान बन जाते हैं जो बड़ी मुश्किल से जाते हैं। 

चेचक  घरेलू निदान 

मेंथाल 30 बूंद, डिटॉल 15 बूंद, दालचीनी का तेल 2 बूंद तथा नारियल का तेल 30 बूंद-इन सबको मिलाकर एक शीशी में रख लें। फिर फाहे से रोगी के दानों पर दिन में चार बार लगाएं। 

सत्यानाशी के कोमल पत्ते गुड़ के साथ खिलाने से चेचक नहीं होती। यदि दाने निकल आते हैं तो इस दवा से शीघ्र ही बैठ जाते हैं। 

अपामार्ग की ताजा जड़ को पानी में चन्दन की तरह घिसकर फरेरी द्वारा चेचक के दानों पर लगाएं। 

तुलसी के पत्तों के साथ थोड़ी-सी अजवायन पीसकर रोगी को दिन में दो बार दें। 

चेचक के रोगी को मुनक्का तथा किशमिश खिलाएं। इससे दाने सूखने लगते हैं। 

नीम के रस में 5 ग्राम आक का रस मिलाकर चेचक के दानों पर रूई के फाहे से लगाएं। 

बच्चे को शहद चटाएं तथा फफोलों पर भी शहद लगाएं। 

धनिया तथा जीरा-दोनों 5-5 ग्राम लेकर मिट्टी के बरतन में भिगो दें। सुबह उसे छानकर उसमें थोड़ी-सी मिश्री मिलाएं। यह पानी बच्चे को नित्य सेवन कराएं। चेचक की गर्मी शान्त हो जाएगी। 

चेचक के रोगी को किशमिश तथा  मुनक्का खिलाएं            

चेचक के दागों पर दिन में तीन-चार बार नारियल का तेल लगाएं।

एक चम्मच करेले के पत्तों के रस में आधा चम्मच पिसी हल्टी मिलाकर सुबह-शाम चटाएं।

नीम की हरी पत्तियों को पीसकर दानों पर लेप करें।

नीम की पत्तियां उबालकर उसका पानी दें।

यदि चेचक के दानों के घाव बन गए हों तो हल्दी और कत्था पीसकर घावों पर चूर्ण की तरह बुरकें।

बादाम की गिरी पानी में घिसकर चेचक के दागों पर लगाएं।

नीम की निबौलियों का गूदा चेचक के दानों पर लगाएं। 

चेचक का  होमियोपैथिक चिकित्सा 

चेचक का टीका लगाने से रोग ठीक हो जाता है। यदि टीका लगाने के बाद रोगी ठीक न हो तो कॉलि म्यूर, साइलीशिया तथा थूजा-तीनों मिलाकर दें। 

यदि चेचक का रोग फैला हो तो वैरियोलिनम 30 का प्रयोग करें।

चेचक की उत्तम प्रतिरोधक दवा सैरासिनिया है।

यदि चेचक के दाने घने हों तो कारिम्बोज दें। यदि दाने आपस में सटे हों और हल्का दर्द हो तो कानफलूएन्टा का उपयोग करें।

चेचक से रोगी को कष्ट होने पर कैम्फर का प्रयोग करें।

दानों के पक जाने पर हिपर सल्फ का सेवन कराएं।

यदि छालों तथा दानों में पीप भर गई हो तो मर्क सोल दें। 

चेचक का  बायोकैमिक चिकित्सा 

यदि दानों से पपड़ी उतर रही हो तो कॉलि सल्फ 12x दें। 

रोगी के शरीर को भीगे कपड़े से धीरे-धीरे पोंछे। पानी में कॉलि म्यूर तथा कॉलि सल्फ 3x मिलाकर दें।

यदि चेचक होने के बाद कमजोरी हो तो कैल्केरिया फॉस 3x या 12x और नैट्रम म्यूर 3x मिलाकर दें।

दानों से पपड़ी निकलने एवं दर्द होने पर कॉलि सल्फ 6x का प्रयोग करें। 

यदि चेतना लुप्त हो गई हो, लार अत्यधिक गिरती हो, जीवनी-शक्ति घट गई हो अथवा खाल उधड़ने के बाद रस निकलता हो तो नैट्रम म्यूर 6x का सेवन करें। 

फेरम फॉस 12x, कॉलि म्यूर 3x तथा कॉलि सल्फ 3x-तीनों मिलाकर 3-3 घंटे बाद दें।

यदि दानों से मवाद निकले, दुर्गंध आए और रोगी मूर्च्छित होने वाला हो तो कॉलि फॉस 12x दें। 

यदि चेचक निकल आने के साथ-साथ बुखार हो, दानों में मवाद हो और शरीर से खट्टी गंध आती हो तो फेरम फॉस 6x का प्रयोग काफी लाभदायक रहता है। 

रोग फैलने के समय तीव्र ज्वर, नाड़ी तेजी से चले, खांसी तथा जीभ पर मैल आदि लक्षणों में फेरम फॉस 6x तथा कॉलि म्यूर 6x का उपयोग करें। 

चेचक  रोग के  एलोपैथिक दवा

– यहां दी जा रही दवाएं बच्चों को खिलाई जाती हैं-मॉक्स (Mox), सेप्टीनिक्स (Septinix), एम्पीलॉक्स (Ampilox) तथा सेपलीक्सिन (Cepleixin)। 

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