सेम्युल फिनले ब्रीज मोर्स की जीवनी | Biography of Samuel Finley Breese Morse in hindi

सेम्युल फिनले ब्रीज मोर्स की जीवनी |

सेम्युल फिनले ब्रीज मोर्स की जीवनी | Biography of Samuel Finley Breese Morse in hindi

मोर्स कोड के आविष्कारक सेम्युल फिनले ब्रीज मोर्स का जन्म सन् 1791 ई० को अमेरिका में हुआ था। उन्होंने मोर्स कोड का आविष्कारक सन 1838 ई० में किया था। 

एक स्थान से दूसरे स्थान तक तार द्वारा संदेश भेजने के लिए मोर्स कोड का इस्तेमाल किया जाता है। इस कोड में डॉट और डैशों द्वारा अक्षरों को व्यक्त किया जाता है। अक्षरों तथा संख्याओं को एक मोर्स कुंजी द्वारा एक स्थान से दूसरे स्थान तक तारों द्वारा भेजा जाता है। 

दूसरे स्थान पर भी मोर्स कुंजी लगी रहती है और वह भी डॉट व डैश के अनुसार टिक-टिक की आवाज करती रहती है। डॉट के लिए मोर्स कुंजी को अल्पसमय के लिए दबाया जाता है और डेश के लिए थोड़ी अधिक देर के लिए दबाया जाता है। आजकल मोर्स कोड को रेडियो तरंगों द्वारा भेज जाता है। एक डॉट में जितना समय लगता था एक डेश में उसका दोगुना समय लगता था। दो डॉटों या दो डैशों के बीच में इतना अंतराल छोड़ा जाता है जितना कि दो डॉटों में होता है। 

सेम्युल ने इसी कोड के आधार पर टेलीग्राफ का भी आविष्कार किया और सन् 1840 ई०, में उन्होंने टेलीग्राफ पेटेंट करवाया। सन् 1843 ई० में बाल्टीमोर से वाशिंगटन तक टेलीग्राफ लाइन बिछाई गई तथा सन् 1844 ई०, में उनको तार द्वारा संदेश भेजने में सफलता मिली।

आज भी अनेक देशों में संदेश टेलीग्राफ द्वारा भेजे जाते हैं और प्राप्त किए जाते हैं। इन सभी में मोर्स कोड होता है। आज की दुनिया में स्वचालित यंत्र बन गए हैं, जिनमें टेलीग्राफ संदेश प्रिन्ट हो जाते हैं, उसे टेलीप्रिंटर कहते हैं। आज टेलीप्रिन्टरों का प्रयोग टेलीग्राफ की तुलना में कहीं अधिक हो गया है। 

पिछले 100 वर्षों में संदेश भेजने की दुनिया में एक विशाल क्रान्ति आ गयी है। आज इलैक्ट्रानिक मेल, फैक्स आदि की सुविधाएँ सारे विश्व में उपलब्ध हैं। इन महान् आविष्कारक की सन् 1872 ई० में मृत्यु हो गयी थी। इस महान् वैज्ञानिक को भुला पाना बहुत ही मुश्किल है। 

आज के युग को इन्फोरमेशन टेक्नोलाजी के नाम से पुकारा जाता है। इन्टरनेट ने आज सारी दुनिया में तहलका मचा दिया है। जिसके द्वारा कोई भी सन्देश पल भर में कहीं भी भेजा जा सकता है।

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