मारिया मिचेल की जीवनी |Biography of Maria Mitchell in Hindi

Biography of Maria Mitchell in Hindi

मारिया मिचेल की जीवनी |Biography of Maria Mitchell in Hindi
आधुनिक संसार में खगोलीय पिण्डों के अध्ययनों के लिए जिस प्रकार के यंत्र उपलब्ध हैं आज से 100 वर्ष पहले ऐसे यंत्रों का नाम भी नहीं था। मेरिया मिचेल ऐसे ही समय मे पैदा हुई जब आशुनिक प्रकार के यंत्र बने ही नहीं थे। लेकिन उन्होंने उस समय उपलब्ध अमेरिकी यंत्रों से ही ऐसे अध्ययन किए जिनसे उनका नाम दुनिया में छा गया।

अमेरिकी खगोल वैज्ञानिक महिला मेरिया मिचेल का जन्म 1 अगस्त को सन् 1818 ई० में नैन्टकेट (अमेरिका) में हुआ था। सन् 1847 ई० में इस माहिला ने खगोल विज्ञानी में ऐसे धूमकेतु का पता लगाया जिसका उस समय तक पता ही नहीं था। सन् 1850 में उन्हें अपने कार्यों के लिए ‘एसोसिएशन फॉर द एडवान्समेन्ट ऑफ साइसिज’ का सदस्य चुना गया।

धूमकेतु पूँछ वाले ऐसे तारें होते हैं जो दूसरे तारों से अलग होते हैं। इनकी पूँछ धूल, गैस के कणों से मिलकर बनी होती है। यह पूँछ सूरज के प्रकाश से चमकती हैऔर हमेशा ही सूरज के विपरीत दिशा में दिखाई देती है। यह पूँछ हजारों मील लम्बी होती है। कुछ धूमकेतु बहुत चमकीले होते हैं, लेकिन दूसरे कुछ धूमकेतु की चमक कम होती है।

सन् 1847 ई० में इस महिला ने जिस धूमकेतु का पता लगाया उसके आविष्कार के लिए डेनमार्क के राजा ने उन्हें स्वर्ण पदक प्रदान किया। उन्हें इस खोज के लिएऔर भी बहुत-से पुरस्कार प्राप्त हुए।

मेरिया के पिता की रुचि खगोल विज्ञान में बहुत अधिक थी इसलिए उन्हें भी खगोल विज्ञान में रुचि पैदा हो गई। उनकी प्रतिभा पर उनके पिता का गहरा प्रभाव पड़ा।

अपनी शिक्षा समाप्त करके उन्होंने 20 वर्ष की अवधि तक पुस्तक कार्यालय में नौकरी की। अपने खाली समय में ये खगोल विज्ञान का अध्ययन करती थीं। अपने प्रयासों से उन्होंने एक दूरदर्शी द्वारा एक नये धूमकेतु की खोज कर ही ली।

मेरिया जिन दिनों न्यूयार्क में खगोल विज्ञान के प्रोफेसर और वेधशाला के निदेशक पद पर काम कर रही थीं, उसी दौरान सन् 1865 ई० में उनकी मृत्यु हो गई गई। 28जून, सन् 1889 ई० में मेरिया का देहान्त हो गया। उनकी मृत्यु के पश्चात् वासर कॉलेज में एक चेयर स्थापित की गयी। सन् 1905 में उनका नाम हॉल ऑफ फेम फॉर ग्रेट अमेरिकन्स के लिए चुना गया। ऐसे महान् वैज्ञानिकों को हम जीवन-भर भी नहीं भुला सकते। उनके योगदान ने विज्ञान की ज्ञान-वृद्धि में चार चाँद लगा दिये।

चाँद-तारों की दुनिया बड़ी रंगीन और विचित्र है। इसमें हम सूरज, चाँद, तारों ग्रह, उपग्रह, उल्काएँ, धूमकेतु आदि को जानने का प्रयास करते हैं। इन सबके अध्ययन को खगोल विज्ञान का अध्ययन कहते हैं। खगोल विज्ञान के इन रहस्यों की जानकारी के लिए हम शाक्तिशाली प्रकाशीय दूरदर्शी, रेडियो दूरदर्शी और अन्तरिक्ष में छोड़े गये दूरदर्शियों का इस्तेमाल करते हैं। आकाशीय पिण्डों के अध्ययन के लिए दुनिया भर के सभी देशों में बड़ी-बड़ी वेधशालाएँ बनी हुई हैं। इन्हीं वेधशालाओं से खगोलज्ञ भाँति-भाँति के अध्ययन करते हैं।

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