जोहांस केपलर की जीवनी |Biography of Johannes Kepler in hindi

जोहांस केपलर की जीवनी

जोहांस केपलर की जीवनी |Biography of Johannes Kepler in hindi

 विश्व के सुप्रसिद्ध खगोलशास्त्री जोहांस केपलर का जन्म 27 दिसम्बर, सन् 1571 ई० को वेल वर्टेम्बर्ग (जर्मनी) में हुआ था। केपलर एक गरीब घर का बच्चा था। उनकी शिक्षा-दीक्षा टुबिगन विश्वविद्यालय में हुई। वहाँ पर उन्होंने धर्मशास्त्र का अध्ययन किया। केपलर अध्ययन के पश्चात् टाइको ब्राहे की देखरेख में अनुसंधान करने के लिये प्राग गए जो कि अब चेकोस्लोवाकिया में स्थित है। 

सन् 1601 ई० में ब्राहे की मृत्यु के उपरान्त वहाँ के बादशाह रुडोल्फ के गणितज्ञ बन गए। उनके पास धन का अभाव अब भी पहले जैसा ही था। अपनी तीक्ष्ण दृष्टि 

और कॉपरनिकस की मान्यताओं के आधार पर उन्होंने गणित के जटिल सूत्रों का प्रयोग करके ग्रहों की गति से संबाधित तीन नियम प्रतिपादित किये। ये नियम इस प्रकार हैं 

(i) परिक्रमा कक्षाओं का नियम-इस नियम के अनुसार सौरमण्डल के सभी ग्रह सूर्य के चारों ओर अण्डाकर या दीर्घवृतीय कक्षाओं में घूमते हैं। वे वृत्तीय कक्षाओं में नहीं घूमते, सूर्य इस दीर्घ वृत का केन्द्र है। 

(ii) क्षेत्रफल का नियम-सूर्य से ग्रह तक खींची गई रेखा समान समय में समान क्षेत्रफल तय करती है। इस नियम से यह स्पष्ट होता है कि किसी भी ग्रह का वेग उसकी सूर्य से दूरी के अनुपात के अनुसार होता है। जब कोई ग्रह सूर्य के पास होता है तो उसका वेग तीव्र होता है लेकिन जैसे-जैसे ग्रह की दूरी सूर्य से बढ़ती जाती है इसकी गति धीमी में होती जाती है। 

(iii) अवधि का नियम-सूर्य के चारों ओर घूमने में ग्रह द्वारा लिए गए समय का वर्ग उसकी सूर्य से दूरी के धन के समानुपाती होता है। इस नियम को इस प्रकार समझा जा सकता है सूर्य का एक चक्कर लगाने में धरती को 36514 दिन लगते हैं और बुद्ध ग्रह को 88 दिन लगते हैं। इन दोनों संख्याओं का लगभग वर्ग क्रमशः 133225 तथा 7744 है। पहली संख्या दूसरी से लगभग 17 गुनी है अर्थात् इन दोनों का अनुपात 17:1 हुआ। धरती से सूर्य की दूरी लगभग 9.3 करोड़ मील है और बुध लगभग 3.6 करोड़ मील दूर है। इन दोनों संख्याओं का धन 804357 और 46656 हुआ। इन दोनों संख्याओं का अनुपात भी लगभग 17:1 ही है। 

इन तीनों नियमों के प्रतिपादन के बाद केपलर विश्व प्रसिद्ध खगोल-शास्त्री बन गए। उनके इन्हीं नियमों के आधार पर उन्हें टाइको ब्राहे ने अपना सहयोगी बनाया था जिसका विवरण पहले दिया जा चुका है। 

केपलर विश्व प्रसिद्ध वैज्ञानिक गैलीलियो के समकालीन थे। ये दोनों वैज्ञानिक एक-दूसरे से अपनी खोजों के विषय में पत्र-व्यवहार द्वारा विचारों का आदान-प्रदान करते थे। केपलर एक धार्मिक रुचि का व्यक्ति था। उनका ऐसा मानना था कि ईश्वर द्वारा निर्मित की गई वस्तुओं में एक विशेष नियमितता है। 

15 नवम्बर, सन् 1630 ई०, को रेजेनबर्ग नामक शहर में इस महान् वैज्ञानिक की मृत्यु हो गई। वे मरते दम तक विज्ञान की सच्ची सेवा करते रहे। केपलर की विश्व के महान् खगोलशास्त्रियों में गिनती की जाती है। वे पहले वैज्ञानिक थे जिन्होंने ग्रहों की गति से सम्बन्धित नियम प्रतिपादित किए। इसी खोज के कारण उनकी प्रसिद्धि पूरे विश्व में फैल गई।

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