जेम्स क्लर्क मैक्सवेल की जीवनी |Biography of James Clerk Maxwell in Hindi

Biography of James Clerk Maxwell in Hindi

जेम्स क्लर्क मैक्सवेल की जीवनी |Biography of James Clerk Maxwell in Hindi

प्रकाश का विद्युत चुम्बकीय सिद्धान्त का प्रणेता जेम्स क्लर्क मैक्सवेल का जन्म 13 जून, 1831 ई० में स्कॉटलैण्ड, एडिनबर्ग (ब्रिटेन) में हुआ था। उनके पिता ग्लैनेयर सम्पन्न व्यक्ति थे। आठ वर्ष की अल्पावस्था में माता का स्नेहांचल उनके सिर से उठ गया। फिर पिता से ही माता का स्नेह भी मिला। वह बचपन में बहुत ही सीधे-सादे थे। वह सरल प्रवृत्ति के व्यक्ति थे, तथा वस्त्र भी साधारण धारण करते थे। सादा जीवन और उच्च विचार के वे कायल थे। विद्यालय में उनको सहपाठी मूर्ख कहकर चिढ़ाया करते थे। 

उनको शैशवावस्था से ही प्रकृति से विशेष लगाव था। झील, पर्वत श्रेणियां और झरनों को देखने की बड़ी ललक थी। प्राकृतिक रंग-बिरंगे दृश्यों को देखकर आत्म-विस्मृत हो जाते थे। घंटों उनके विषय में सोचते रहते थे। सम्भवतः प्रकृति के रंग-बिरंगे दृश्यों ने ही उनकी प्रतिभा को विकसित करके में विशेष भूमिका निभाई। 

वह बचपन से ही मेधावी थे। उन्होंने विद्वता का परिचय 15 वर्ष की किशोरावस्था में ही दे दिया था। इस अल्पावस्था में उन्होंने ‘काटीशियन ओवल’ बनाने की एक यांत्रिक विधि आविष्कृत की थी। यह ज्यामिति में एक खास तरह का वक्र होता है। इस यांत्रिक विधि के संबंध में एक शोध पत्र तैयार किया। जिसका वाचन रॉयल सोसायटी में हुआ। 18 वर्ष की अवस्था में उन्होंने रोलिंग कर्व और लचीले ठोसों की समस्या के क्षेत्र में महत्त्वपूर्ण अनुसंधान किए। उन्होंने शनि के छल्लों के विषय में एक सारगर्भित निबंध लिखा था जिस पर उनको ‘एडम पुरस्कार’ मिला था। 

उनकी प्रतिभा स्काटिश वैज्ञानिक निकोल के सम्पर्क में आते ही विकसित हो उठी। उन्होंने निकोल प्रिज्म पर शोध कार्य शुरू किया जिससे शोध करने की उनकी स्वाभाविक प्रकृति अधिक विकसित हुई। अपने महान गुरु निकोल के साथ उन्होंने 1855 ई० में ‘वर्णान्धता’ पर शोध पत्र प्रकाशित किए। प्रकाश का विद्युत् चुम्बकीय सिद्धान्त उनकी सबसे महत्त्वपूर्ण खोज थी। इसकी प्रेरणा उनको माइकल फेराडे ने दी थी। उन्होंने उसकी प्रकृति को समझने के लिए अनेक प्रयोग किए और इसे गणितीय रूप में तैयार किया। इससे संबंधित तथ्यों को वह प्रकाश में लाए और आठ वर्ष के उपरान्त उन्होंने ‘ट्रिटाइज ऑन इलेक्ट्रिसिटी एण्ड मैग्नेटिज्म’ नामक ग्रन्थ की रचना की। उनकी विद्युत्-चुम्बकीय तरंगें ईथर के लचीले माध्यम से संचरित होती थीं, लेकिन बाद में ईथर की संकल्पना निराधार लगी। पर उनका विद्युत् चुम्बकत्व सिद्धान्त आज भी हर कसौटी पर खरा उतरता है।

 इसके साथ ही उन्होंने एक चकती का भी आविष्कार किया जो ‘मैक्सवेल चकती’ के नाम से प्रसिद्ध हुई। तत्पश्चात् उन्होंने गैसों के गतिज ऊर्जा सिद्धान्त, औसत मुक्त पथ तथा मैक्वेल-बोल्ट्रजमैन सांख्यिकी पर भी कार्य किए। उन्होंने विश्वविख्यात में कैम्ब्रिज की कैवेण्डिश प्रयोगशाला में भी कार्य किया। वह कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में विश्व के प्रथम कैवेण्डिश प्रोफेसर नियुक्त हुए। उन्होंने विज्ञान को जनसाधारण तक पहुँचाने का सफल प्रयास किया। 

वह अच्छे वैज्ञानिक के साथ-साथ कवि, तैराक, घुड़सवार व जिम्नास्टिक में भी दक्ष थे। इस महान् पुरुष का निधन मात्र 48 वर्ष की आयु में सन् 1879 ई०, को कैम्ब्रिज में हुआ।

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