क्रिस्टोफर लैथम शोल्स की जीवनी |Biography of Christopher Latham Sholes in Hindi

Biography of Christopher Latham Sholes in Hindi

क्रिस्टोफर लैथम शोल्स की जीवनी |Biography of Christopher Latham Sholes in Hindi

क्रिस्टोफर लैथम शोल्स का जन्म सन् 1819 ई० को अमेरिका में हुआ था। उनकी शिक्षा-दीक्षा बढ़िया स्कूल में हुई। आरम्भिक जीवनकाल में वे एक प्रिटिंग फैक्टरी में प्रकाशक का काम करते थे।

सन् 1864 ई० में उन्होंने निश्चय किया कि वे बाकी जिन्दगी प्रिंटिंग मशीन के सुधारों में व्यतीत करेंगे। इसके चार साल बाद उन्होंने एक टाइपराइटर का मॉडल प्रस्तुत किया, जिससे केवल बड़े अक्षर ही टाइप हो सकते थे। उसमें बैक स्पेस देने का कोई प्रावधान नहीं था। सन् 1872 ई० में उन्होंने अपनी बनाई मशीन को बाजार में बेचने के लिए रखा।

इसके एक वर्ष पश्चात् उन्होंने रेमिंगटन कम्पनी के साथ अपने टाइपराइटर को पेटेंट कराया। रेमिंगटन कम्पनी ने प्रथम टाइपराइटर एक सौ पच्चीस डॉलर में बाजार में बेचना आरम्भ किया।

मार्क ट्वेन पहले लेखक थे, जिन्होंने इस मशीन को अपनी पुस्तक ‘Life at Missisippi’ टाइप करने के लिए प्रयोग किया। यह सन् 1883 ई० की बात है। मार्क ट्वेन रेमिमटन ने प्रथम मॉडल का उपयोग किया था।

शोल्स का विचार था कि स्त्रियों के लिए विकसित किए गए टाइपराइटर उनके लिए अधिक उपयोगी सिद्ध होंगे, क्योंकि उनके विचार से स्त्रियों के लिए सख्त काम करना ज्यादा कठिन था। निश्चय ही टाइपराइटर के आविष्कार ने महिलाओं के कार्यकलापों में सरलता पैदा कर दी।

इस चमत्कारी मशीन के आविष्कारक शोल्स का सन् 1890 ई० में देहान्त हो गया। मगर शोल्स द्वारा विकसित टाइपराइटर सारी दुनिया में मशहूर है।

यद्यापि आज कम्प्यूटर के आविष्कार के बाद टाइपराइटरों का चलना कुछ कम हो गया है, किन्तु कम्प्यूटर के उद्देश्य से पूर्व टाइपराइटर बिजनेस और कार्यालयों में पूरी तरह से छाए हुए थे। इन्हीं से कार्यालयों के पत्र और दूसरे दस्तावेज टाइप किए जाते थे।

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