क्रिश्चियन हाइगेन्स की जीवनी |Biography of Christiaan Huygens in Hindi

Biography of Christiaan Huygens in Hindi

क्रिश्चियन हाइगेन्स जीवनी |Biography of Christiaan Huygens in Hindi

प्रकाशकी के प्रसिद्ध वैज्ञानिक क्रिश्चियान हाइगन्स् का जन्म सन् 1629 ई० डच में हुआ था। उन्होंने गणित, भौतिक विज्ञान और खगोल विज्ञान का अध्ययन किया। उनकी भौतिक विज्ञान में विशेष रुचि थी। उन्होंने अनुसंधानों की अवधि में प्रकाश में काफी रुचि ली और विश्व का सबसे बड़ा दूरदर्शी बनाया। क्रिश्चियान हाइगन्स् ने अपने बनाए दूरदर्शी से शनि के चन्द्रमाओं और शनि के वलयों को देखा। 

सन् 1657 ई० में उन्होंने प्रथम पैण्डुलम घड़ी बनायी।

 हाइगन्स् प्रकाश का तरंग सिद्धान्त देने के लिए अपने जीवन काल में बहुत प्रसिद्ध हुए। उन्होंने कहा कि प्रकाश तरंगों के रूप में चलता है और प्रत्येक तरंग के बिन्दुओं से द्वितीय तरंगें पैदा होती हैं। हाइगन्स् का सिद्धान्त वर्तमान काल में भी छात्रों को पढ़ाया जाता है। डिफ्रेक्शन और इन्टर फियरेन्स जैसे तथ्यों का हाइगन्स् के तरंग सिद्धान्त द्वारा ही समाधान किया गया। उदाहरण के लिए जब प्रकाश किसी पतली-सी स्लिट से गुजरता है, तो डिफेक्शन का प्रभाव देखने को मिलता है।

हाइगन्स् अपने आविष्कारों के लिए सारी दुनिया में प्रसिद्ध हो गए। उनका तरंग सिद्धान्त भी बहुत प्रसिद्ध हुआ। आज उनके द्वारा प्रतिपादित तरंग सिद्धान्त भारत में बारहवीं कक्षा के विद्यार्थियों को पढ़ाया जाता है।

भौतिकी में प्रकाश पढ़ने वाले सभी विद्यार्थी क्रिश्चियान हाइगन्स् के नाम से परिचित हैं। हाइगन्स् ने प्रकाशकी में बहुत से नए विचार प्रस्तुत किए। इन्होंने पालेराइजेशन का आविष्कार किया था। यह उनका महानतम् आविष्कार था। 

विज्ञान की सेवा करते हुए इस महान वैज्ञानिक का सन् 1695 ई० में देहान्त हो गया। उस समय उनकी आयु 66 वर्ष थी। 

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