बेंजामिन फ्रैंकलिन की जीवनी |Biography of Benjamin Franklin in Hindi

बेंजामिन फ्रैंकलिन की जीवनी

बेंजामिन फ्रैंकलिन  की जीवनी |Biography of Benjamin Franklin in Hindi

बादलों की बिजली से भवनों की रक्षा करने के लिए तड़ित चालकों का निर्माण करने वाले प्रसिद्ध वैज्ञानिक बेंजामिन फ्रैंकलिन का जन्म 17 जनवरी, सन् 1706 ई० में बोस्टन (अमेरिका) में हुआ था। बेंजामिन सत्ररह बहन-भाई थे, तथा अपने पिता की वे दसवीं सन्तान थे। उनके पिता एक व्यवसायी थे तथा उनका व्यवसाय साबुन और मोमबत्ती का था। उनका बड़ा परिवार था। वह अपने भाई-बहनों में सबसे मेधावी थे। बेंजामिन की विज्ञान में रुचि बचपन से ही थी। उन्होंने विज्ञान के अध्ययन के साथ-साथ नए प्रयोग भी आरम्भ कर दिए थे। बेंजामिन अध्ययन के पश्चात् विद्युत सम्बंधी प्रयोगों को करने में व्यस्त रहे। 

सन् 1752 ई० में उन्होंने एक बड़े रेशमी रुमाल की पतंग तैयार की थी, जो कि देखने में बड़ी विचित्र थी। यह पतंग एक लकड़ी के बने क्रॉस पर बड़ा-सा रेशमी रुमाल लगाकर तैयार की गई थी। लकड़ी की एक खड़ी पट्टी पर लोहे का तार इस प्रकार लगा दिया कि वह पतंग के सिरे से एक फुट बाहर रहें। उन्होंने पतंग उड़ाने के लिए एक डोरी इस्तेमाल की और डोरी के सिरे पर एक रिबन बाँध दिया, डोरी तथा सिल्क के मिलने वाले सिरे पर एक लोहे की चाबी लगा दी। वर्षा ऋतु में आकाश बादलों से घिरा हुआ था, जब पतंग उड़ाने का निश्चिय किया गया था। 

बेंजामिन फ्रैंकलिन अपनी इस अनोखी पतंग को उड़ाने के लिए एक रोड के नीचे जाकर खड़े हो गए। जिससे डोरी के साथ बँधा सिल्क का रिबन बरसात होने पर वर्षा में भीग न जाए, क्योंकि उसके भीगने पर विद्युत का झटका लग सकता था। उन्होंने पतंग उड़ाना शुरू किया और अपनी उँगलियों की गाँठ को पतंग की डोरी में बंधी चाबी के पास रखा, जहाँ से अनेक स्फुलिंग निकल रहे थे। 

उनका पतंग पर किया गया परीक्षण सफल रहा। इस परीक्षण के आधार पर वह इस निष्कर्ष पर पहुँचे कि मेघों की विशाल विद्युत को मेघों से धरती तक लाया जा सकता है। इसी आधार पर बैंजामिन ने ऊँची अट्टालिकाओं को मेघों की विद्युत से सुरक्षा करने के लिए ‘तड़ित चालकों का विकास किया। इसमें इतनी लम्बी लोहे की छड़ ली जाती है, जिसका एक सिरा गीली धरती में तीन-चार फुट नीचे तक चला जाए और उसका दूसरा सिरा ऊँची अट्टालिका के सबसे ऊँचे भाग से छह-सात फुट ऊपर निकला रहे। इस छड़ के ऊपरी सिरे पर एक फुट लम्बा पीतल का ऐसा तार बाँध दिया जाता है जिसका सिरा नुकीला हो। इससे मेघ विद्युत पीतल के नुकीले सिरे द्वारा आकर्षित होकर बिना भवन को क्षति पहुँचाए, धातु की छड़ में से होती हुई, धरती के नीचे पहुँच जाती है। 

बेंजामिन फ्रैंकलिन जब इस नए परीक्षण की ओर जुटे हुए थे, उन्हीं दिनों प्रोफेसर रिचमैन भी मेघों की तड़ित से संबंधित परीक्षण में जुटे हुए थे। रिचमैन ने भी मेघों से प्राप्त विद्युत का अध्ययन करने के लिए एक उपकरण तैयार किया था। जब बिजली के कड़कने की सम्भावना थी, तभी वे इस उपकरण का निरीक्षण करने के लिए गए। यह उपकरण उनके सिरे में लगभग एक फुट ऊपर था। जैसे ही बिजली कड़की, आग का एक नीला गोला उपकरण से निकलकर प्रोफेसर रिचमैन के सिर की ओर गया। गोले के फूटने से, रिवाल्वर से गोली चलने जैसी ध्वनि निकली, और उस उपकरण के टुकड़े कक्ष में बिखर गए। इतना ही नहीं, उस कक्ष का द्वार भी टूटकर अलग जा गिरा। प्रोफेसर रिचमैन भी इस प्रयोग के साथ ही संसार से विदा हो गए। यह भाग्य की ही बात है, कि बेंजामिन फ्रैंकलिन अपने प्रयोग के बीच सुरक्षित रह गए थे।

इस परीक्षण के बाद अमेरिका में असंख्य ‘तड़ित चालक’ बनाए गए। ये सभी ‘फ्रैंकलिन छड़’ के नाम से प्रसिद्ध हुए। सन् 1760 ई० में ऐसी ही छड़ के माध्यम से एडिस्टोन लाइट हाउस सुरक्षित किया गया था। इन तड़ित चालकों को तैयार करने के लिए बेंजामिन का ही परामर्श लिया जाता था। सन् 1769 ई० में ऊँची अट्टालिकाओं को मेघ विद्युत के प्रभावों से बचाने के लिए लन्दन में एक समिति का निर्माण किया गया, जिसके बैंजामिन फ्रैंकलिन प्रमुख सदस्य थे। सन् 1772 ई० में जब इटली का बारूद घर मेघविद्युत द्वारा नष्ट हो गया तब परफ्लीट में ब्रिटिश बारूदघर को सुरक्षित रखने हेतु एक समिति का गठन हुआ जिसमें एक सदस्य के रूप में बेंजामिन मनोनीत किए गए। 

उनकी रुचि विज्ञान में यही तक सीमित नहीं रही। उन्होंने अंध महासागर में गर्त धारणा की गति का भी अध्ययन किया, जिससे उनका अधिकांश समय इस धारा के तापमान, वेग और गहराई, मापन में व्यय हो गया। उन्होंने नौसेना अधिकारियों तथा वैज्ञानिकों के समक्ष यह स्पष्ट कर दिया कि उथल-पुथल वाले महासागर को भी नाविक तेल डालकर शान्त कर सकता है।

इनके अलावा भी विश्व, अन्य आविष्कारों के लिए बैंजामिन फ्रैंकलिन का आभारी है। उनके द्वारा आविष्कृत स्टोव ईंधन प्रयोग करने पर दुगुनी उष्मा पैदा की जा सकती है। उन्होंने बाईफोकल नेत्र लैंसों का भी आविष्कार किया था। उन्होंने यह भी सिद्ध कर कर दिया कि जिन भवनों में रोशनदान व खिड़कियों का उचित प्रबन्ध नहीं होता हैं, उस जगह पर बीमारियां तेजी से फैलती हैं। इसके साथ ही यह भी सिद्ध किया कि अम्लीय धरती को चूने के प्रयोग के द्वारा ठीक किया जा सकता है।

 बेंजामिन फ्रैंकलिन का इरादा अपने आविष्कारों के द्वारा धन बटोरना कभी भी नहीं था। उन्होंने जनकल्याण के लिए केवल इन परीक्षणों को किया। 

बेंजामिन फ्रैंकलिन को लंदन की रॉयल सोसायटी में सम्मानित सदस्य बनाया गया। वह एक वैज्ञानिक ही नहीं, बल्कि एक प्रसिद्ध राजनीतिज्ञ भी थे। अमेरिका के स्वतंत्रता संग्राम में दिया गया उनका योगदान काफी सराहनीय है। 4 जुलाई, सन् 1766 ई० के प्रसिद्ध घोषणा पत्र पर जिन पाँच राजनीतिज्ञ उपनिवेशों ने हस्ताक्षर किए थे, उनमें से बैंजामिन भी एक थे। संयुक्त राज्य अमेरिका की नींव तभी रखी गई थी। सन् 1787 ई० में अमेरिका के संविधान के निर्माण में उनका काफी योगदान रहा। 17 अप्रैल, सन् 1790 ई० में फिलडेल्फिया (अमेरिका) में हमेशा-हमेशा के लिए उसने अपनी आँखें बंद कर लीं। 

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