बीमारियों से जुड़ी रोचक जानकारी- Bimariyon se Judi Rochak jankari 

बीमारियों से जुड़ी रोचक जानकारी

बीमारियों से जुड़ी रोचक जानकारी- Bimariyon se Judi Rochak jankari 

1.बीमारियां अफ्रीका का फ्रेजी गिरिजर नामक 16 वर्षीय युवक ‘प्रोजिरिया रोग से ग्रस्त था। यह दुर्लभ बीमारी अस्सी लाख बच्चों में से सिर्फ एक में पायी जाती है। आज तक इसके सिर्फ 85 रोगियों के बारे में चिकित्सा विज्ञान को पता चला है। गिरिजर अफ्रीका में अकेला ऐसा व्यक्ति था, जो इस रोग से ग्रस्त था। इस बीमारी में मनुष्य बौना रह जाता है, उसके बाल उड़ जाते हैं, चेहरे पर विकतियां पैदा हो जाती हैं। प्रत्येक बढ़ते वर्ष के साथ रोगी बालक की उम्र डॉक्टरों की निगाहों में 10 वर्ष बढ़ती जाती है।

वैसे तो गिरिजर की उम्र सिर्फ 16 वर्ष थी, परंतु उसका शरीर और हृदय किसी 160 वर्ष के व्यक्ति की भांति बूढ़ा हो चला था। उसे कई बार दिल का दौरा पड़ चुका था। गिरिजर की इस दुर्लभ और खतरनाक बीमारी को देखते हुए अफ्रीका सरकार ने इस 16 वर्ष के तरुण (या 160 वर्ष के बूढ़े) के लिए पेंशन देने की घोषणा की थी, परंतु सरकारी सहायता भी उसे मौत के मुंह में जाने से नहीं रोक पाई। (टाइम्स ऑफ इंडिया, 21-2-89 एवं 3-1-90) 

2.युगांडा के दक्षिण-पश्चिमी गांव मसाका में एक औरत द्वारा दी जाने वाली कथित चमत्कारी दवा को लेने के लिए रोगियों की तीन किलोमीटर लंबी लाइन लगने की घटना प्रकाश में आई है। कहा जाता है कि यह महिला एड्स’ से ग्रस्त रोगियों के लिए कोई चमत्कारी दवा बांटती है। यह देखा गया है कि कोई 20,000 व्यक्ति इस दवा के लिए 50 टन से अधिक मिट्टी पानी में घोलकर पी गए।  (टाइम्स ऑफ इंडिया, 2-11-89) 

3.पार्नेला नामक एक ईसाई पादरी जब चाहे अपने शरीर से पसीना निकाल सकता था। कहा जाता है कि इच्छा करते ही उसके शरीर से पसीना टप-टप गिरने लगता था। 

4.इसी तरह फ्रांस के नैनटिस नगर का पियरीमैसी इच्छानुसार बालों को खड़ा कर सकता था और गिरा सकता था। वह जब चाहे सिर के एक हिस्से के बाल खड़े कर लेता पर उस समय दूसरे हिस्से के बाल नीचे गिरे रहते।  (नवभारत टाइम्स, 25-10-87) 

5.’पोरिफाइरिया’ रोग से ग्रस्त व्यक्ति को सूर्य के प्रकाश से एलर्जी हो जाती है। वह अंधेरे में रहना पसंद करता है, उसका शरीर बदनुमा काले चकत्तों से घिर जाता है। त्वचा काली हो जाती है तथा ललाट और गालों पर बालों की लंबाई काफी बढ़ जाती है। कन्जीनियल इरिथोपायटिक पोरिफाइरिया से ग्रस्त व्यक्ति रक्त पिपासु हो सकता है, बचपन में रोगी का मूत्र गुलाबी रंग का होता है, दांतों पर ललाई छाने लगती है, हाथ की विकृति बढ़कर पंजों की शक्ल धारण कर लेती है, नाखून मुड़ने लगते हैं और वह कुल मिलाकर हमारे काल्पनिक ड्रैकुला की भांति हो जाता है। इस दुर्लभ बीमारी के एक सौ से ज्यादा मरीजों के बारे में पता नहीं चल पाया है। 

6.सन् 1884 में प्रकाशित अपनी पुस्तक ‘आर्काइव्ज ऑफ एंथ्रोपलोजी’ में बोरोटेल्स ने मध्य अफ्रीका में रहने वाली ‘निआम निआम्स’ कबीले के लोगों की 2 से 10 इंच लंबाई की चिकनी पूंछ होने के बारे में लिखा है। ब्योरे के अनुसार लेखक ने 116 व्यक्तियों का सर्वे किया था, जिनमें 76 पुरुष तथा 40 पूंछ वाली महिलाएं थीं। इस बात की रिपोर्ट भी मिलती है, जिसके अनुसार ईस्ट इंडीज में पूंछ वाली नस्ल के मनुष्यों की बहुत बड़ी संख्या थी। इनकी सुविधा के लिए छेद वाली कुर्सियां और बैंचें बनवाई जाती थीं, ताकि वे आराम से पूंछ को छेद में घुसाकर बैठ सकें।  (बालहंस, 2-12-90) 

7.इटली की रोसाना बेन्जी अंततः 4 फरवरी, 1991 को गुजर गई। 43 वर्षीया इस महिला ने अपने जीवन के 29 वर्ष लोहे से बने फेफड़ों के सहारे व्यतीत किए थे । रोसाना बेन्जी 14 वर्ष की आयु में लकवे का शिकार हो गई थी। तभी से श्वास लेने में दिक्कत होने के कारण 20)उसे लोहे के फेफड़े लगाए गए थे । 

(राजस्थान पत्रिका, 15-2-91) 

8.सन् 1907 में प्रकाशित एक खबर के अनुसार क्लेअर (उत्तरी आयरलैंड) का जेम्स थांपसन नामक व्यक्ति अपने बिस्तर से 29 वर्ष बाद पहली बार उठा। सन् 1877 के बाद से उसे अपने घर के बाहर कभी नहीं देखा गया था। थांपसन का मजबूर होकर उठने का कारण यह था, कि उसकी 80 वर्षीया बूढ़ी मां अब उसकी अधिक सेवा-सुश्रुषा नहीं कर सकती थी। डॉक्टरों की राय के अनुसार वह ‘क्रोनिक लिथी (आलस्य) के ऐसे रोग से पीड़ित था, जिसे बिजली के झटकों से भी ठीक नहीं किया जा सकता था। (द हिंदू , 24-6-90) 

9.अस्पताल में एक-दो सप्ताह या एक-दो वर्ष नहीं, एक सदी गुजारना, अपने आपमें एक अद्भुत बात है। मिस मार्था नेल्सन को कोलंबस स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फीबल माइंडेड, ओहियो (अमरीका) में तीन वर्ष की आयु में सन् 1857 में भरती कराया गया था । मस्तिष्क रोगी यह महिला लगभग सौ वर्षों तक अस्पताल में भरती रही। (हिंदुस्तान टाइम्स, 24-11-90) 

10.लीन लेविन सिंड्रोम या पीरियोडिक इंसोम्निया भी नींद की बीमारी है, जिसके रोगी कुछ दिनों या हफ्तों तक लगातार सोते रहते हैं और फिर उतने ही समय लगातार जागते रहते हैं। जागते समय ऐसे व्यक्ति सामान्य होते हैं, परंतु सोते समय इनकी भूख बढ़ जाती है तथा इन्हें कई मानसिक विकार हो जाते हैं। कुंभकर्ण संभवतः इसी रोग से ग्रस्त रहा होगा। 

11.युगोस्लाविया का 55 वर्षीय स्टाजकोबिक संसार के उन गिने-चुने व्यक्तियों में है, जो एक्वाजीन पुरिटस से ग्रस्त हैं। ऐसे व्यक्तियों को पानी से एलर्जी होती है। वे पानी से नहाना तो दूर इसे पी तक नहीं सकते। स्टाजकोबिक अपने शरीर की सफाई के लिए. अल्कोहल का प्रयोग करता है। (टाइम्स ऑफ इंडिया, 10-3-88) 

12.मलेशिया के उत्तर में केडाह राज्य का छः वर्षीय बालक थिगुराजन पेट्रोल पीता है और नहीं मिलने पर बैचेन हो जाता है। डॉक्टरों के अनुसार अभी वह पूर्णतः स्वस्थ है। वह खड़े वाहनों की टंकियों में नली डालकर सीधे ही पेट्रोल उदरस्थ कर जाता है। (टाइम्स ऑफ इंडिया, 26-9-89) 

13.जाहार बेरु (मलेशिया) का 33 वर्षीय गेन केन चुंग बैडमिंटन खेल रहा था। तभी वह फिसल गिर पड़ा और एक ही झटके में उसके नकली दांतों का जबड़ा फिसलकर श्वास नली में पहुचा। जब तक उसके मित्र बुंग को अस्पताल लेकर पहुंचे, उसकी मृत्यु हो चुकी थी। (मिरर, जुलाई, 88) 

14.रात्रि को आए एक सपने ने द्वितीय विश्वयुद्ध के योद्धा आर्ख मैक्सीमेंको की खोई हुई आवाज लौटा दी। युद्ध के दौरान इनके बोलने व सुनने की क्षमता चली गई थी। पिछले दिनों मैक्सीमेंको ने सपने में देखा कि वह पुनः मोर्चे पर है, नाजी-टैंक व सिपाही उसकी ओर बढ़ते चले आ रहे हैं, लेकिन लड़ने के लिए उसके पास कोई असला नहीं है। इस हालत में भी वह युद्ध के नारे लगाता मैदान में कूद पड़ा। तभी उसकी आंख खुल गयी और पाया कि वह पुनः स्वस्थ है। स्वप्नावस्था के दौरान महसूस किया गया मानसिक दबाव ऐसा इलाज बन गया जो चिकित्सक भी नहीं कर सकते थे। 

15.कुछ रोगियों की त्वचा इतनी लचीली होती है, कि वह एक फुट तक खींची जा सकती है और छोड़ने पर वापस अपनी जगह चली जाती है। यह एक बीमारी है, जिसे ‘क्यूटस हाइपर प्लास्टिका’ कहा जाता है। 

16.जिन दिनों फ्रांस में क्रांति चल रही थी, उन्हीं दिनों वहां ज्यूफ नामक एक बालक का जन्म हुआ। इस बालक के शरीर पर जन्म से ही सात रंग मौजूद थे। ये रंग इतने सजीव और सघन थे, ऐसा लगता था मानो उसने कोई रंगीन वस्त्र पहन रखा हो। कुशाग्र बुद्धि वाला यह बालक ग्यारह ही वर्ष तक जीवित रह पाया। कहा जाता है कि भगवान कृष्ण के शरीर पर भी नीलिमा हो गई थी। समझा जाता है कि त्वचा का ऐसा रंग एक प्रकार के जन्मगत हृदय रोग ‘सायनोसिस’ के कारण होता है।