पित्त शूल रोग का इलाज | पित्त संबंधी शूल: इसे कैसे पहचानें और इसका इलाज कैसे करें

पित्त शूल रोग का इलाज

पित्त शूल रोग का इलाज | पित्त संबंधी शूल: इसे कैसे पहचानें और इसका इलाज कैसे करें

पित्त शूल  रोग की उत्पत्ति 

यदि किसी कारणवश पित्त निकलने में बाधा उत्पन्न हो तो पित्तशूल होने लगता है। शारीरिक परिश्रम की कमी या मानसिक परिश्रम की अधिकता से भी पित्तशूल हो जाता है। जो जोग दिनभर बैठे रहते हैं तथा नाइट्रोजन एवं चर्बीयुक्त खाद्य पदार्थों का अधिक सेवन करते हैं, उनको यह रोग अधिक होता है। सौ में से दस-पन्द्रह लोगों को यह रोग अधिक सोचने या व्यर्थ के खाद्य पदार्थों से पेट भरने के कारण हो जाता है। कहते हैं कि ‘बी कोलाई’ नामक कीटाणु से भी यह रोग फैलता है। टायफाइड के कीटाणु पित्ताशय में सूजन उत्पन्न करते हैं जिसके परिणाम स्वरूप पथरी बनकर भी पित्तशूल हो जाता है। 

पित्त शूल रोग के लक्षण 

यह दर्द दाई कोख से शुरू होकर दाएं कंधे और पीठ तक फैल जाता है। दर्द के समय उल्टी, ठंडा पसीना, नाड़ी का धीमा चलना, हिमांग, कामला, श्वास कष्ट, मूर्छा आदि लक्षण दिखाई देते हैं। यह दर्द कुछ घंटों तक रहता है या फिर कई दिनों तक रुक जाता है। 

पित्त शूल  घरेलू निदान 

फिटकरी का फूला, सुहागे का फूला, सत्व गिलोय, लौह भस्म एवं शंख भस्म 1-1 तोला, शुद्ध गंधक तथा एलुआ 2-2 तोला–सभी चीजें घृतकुमारी के रस में 12 घंटे तक घोटें। फिर मटर के बराबर गोलियां बना लें। एक एक गोली दिन में तीन बार कुमार्यासव से लें। यह हर प्रकार के पित्तशूल में रामबाण है। 

ककड़ी के बीजों को मिश्री के साथ घोट-पीसकर खाएं। 

कलमी शोरा 3 ग्राम और तेलिया सुहागा 3 ग्राम-दोनों को पीसकर एक कप पानी तथा एक कप दूध में मिलाकर कुछ दिनों तक सेवन करें। 

आधा लीटर गाय के दूध या मढे में 10 ग्राम जवाखार डालकर 3-4 दिनों तक नियमित रूप से पिएं। 

25 ग्राम पिसी हल्दी, 50 ग्राम पुराना गुड़ तथा 100 ग्राम चावलों की कांजी-तीनों मिलाकर लें। 

ककड़ी के बीज लाभकारी हैं

पित्तशूल में लाल इलायची, शिलाजीत तथा पीपल–तीनों 5-5 ग्राम पीसकर चूर्ण बना लें। फिर इसमें थोड़ी-सी मिश्री मिलाकर एक-एक चम्मच चूर्ण सुबह-शाम सेवन करें। 

3 ग्राम अजमोद और दो चम्मच मूली का रस-दोनों को मिलाकर प्रतिदिन उपयोग करें।

अंगूर के दो ताजे पत्ते लेकर उनको नीबू के रस में खरल करके सेवन करें। 03 ग्राम फिटकरी का फूला मढे के साथ लें। 

कलमी शोरा 1% ग्राम तथा फिटकरी का फूला 172 ग्राम-दोनों को बूरा में मिलाकर प्रयोग करें।

प्रतिदिन चन्दन के तेल की 10 बूंदें बताशे में डालकर खाएं। 

गाजर के बीज, शलजम के बीज तथा मूली के बीज-तीनों को मिलाकर पीस लें। इसमें से आधा चम्मच चूर्ण पानी के साथ सेवन करें। पेशाब आने के बाद रोगी का दर्द शान्त हो जाएगा। 

सूखे आंवले का चूर्ण कच्ची मूली में लगाकर खाएं। । मौसम के अनुसार दो कप खरबूजे का रस नित्य पिएं। 

मौलसिरी के फूलों का शरबत एक कप प्रतिदिन सुबह के समय सेवन करें। – अंगूर का रस एक कप, पुराना घी एक चम्मच तथा केसर आधा ग्राम–तीनों को मिलाकर प्रयोग करें। 

दो चम्मच प्याज के रस में थोड़ी-सी पिसी मिश्री मिलाकर चाटें।

गाजर का रस तथा नारियल का पानी पिएं। 

सहिजन की जड़ का काढ़ा बनाकर गरम-गरम प्रयोग करें। 

पित्त शूल आयुर्वेदिक चिकित्सा 

पाषाणभेद, वरुण की छाल, गोखरू, एरंड की जड़, दोनों भटकटैया तथा तालमखाना-सब 10-10 ग्राम लेकर महीन पीस डालें। इसमें से 3-3 माशा चूर्ण सुबह-शाम शहद के साथ खाएं। 

शुन्ठयादि क्वाथ, एलादि क्वाथ, वरुणादि क्वाथ आदि में से एक क्वाथ (काढ़ा) दो चम्मच की मात्रा में पानी में मिलाकर सेवन करें। 

सोंठ, बरुना, गेरू, पाषाणभेद तथा ब्राह्मी-सबको थोड़ा-थोड़ा लेकर काढ़ा बनाएं। फिर इस काढ़े में 2 माशा जवाखार तथा जरा-सा गुड़ मिलाकर पिएं। 

पुनर्नवा मंडूर, ताम्र पर्पटी, रोहिकारिष्ट, सुवर्ण बसंत मालती आदि भी लाभप्रद योग हैं। ये सब दवाएं बनी बनाई बाजार में मिल जाती हैं। मात्रा तथा सेवन विधि के लिए दवा के साथ पत्र होता है। 

पित्त शूल  होमियोपैथिक चिकित्सा 

यदि पित्ताशय में दर्द के साथ गाढ़ा पेशाब आए तो सार्सापेरिला का प्रयोग करें।

पित्ताशय का दर्द शुरू में हल्का और बाद में तेज होने पर बेलाडोना तथा कैमोमिला का सेवन करें। 

पित्ताशय का साधारण दर्द हाईड्रेजिया से दूर हो जाता है।

तेज दर्द, पित्ताशय में पथरी होने का भ्रम, बेचैनी आदि की हालत में चायना 6 दें।

यदि मूत्राशय में दर्द हो तो यूवाउस मूलार्क की 3-4 बूंदें पानी में मिलाकर लें। 

बरिस वल्गेरिस मूलार्क की कुछ बूंदें पानी में डालकर पिलाएं। 

 पित्त शूल बायोकैमिक चिकित्सा 

पेशाब ठीक से न आए, पित्त की थैली में दर्द, बेचैनी आदि लक्षणों में नैट्रम म्यूर 6x तथा नैट्रम सल्फ 6x का प्रयोग करें। 

जलन, दर्द, व्याकुलता आदि लक्षणों में फेरम फॉस 6x तथा मैगनेशिया फॉस 6x का सेवन करें।

पित्ताशय में दर्द तथा मूत्र निकलने में कठिनाई होने पर कॉलि फॉस 6x तथा कैल्केरिया फॉस 6x दें।

कैल्केरिया फॉस 30x भी पित्ताशय के दर्द की अच्छी दवा है। 

फेरम फॉस 6x, मैगनेशिया फॉस 3x तथा कॉलि फॉस 3x-तीनों दवाओं को मिलाकर उस समय दें, जब रोगी को बहुत बेचैनी और दर्द हो। तीनों दवाओं को खरल में घोट लें। फिर 5-5 ग्रेन की मात्रा में हर 20 मिनट बाद गरम पानी से दें। दर्द रुकने के बाद भी दवा जारी रखें। 

यदि प्यास अधिक लगती हो, दर्द के कारण बेचैनी तथा जलन हो तो रोगी को फेरम फॉस 6x और कॉलि म्यूर 6x का सेवन कराएं। 

यदि पित्ताशय में पथरी की आशंका हो और बेचैन कर देने वाला दर्द हो तो कैल्केरिया फॉस 3x या 12x, मैगनेशिया फॉस 3x तथा नैट्रम सल्फ 3x-तीनों दवाओं को मिलाकर दें। 

पित्त शूल  एलोपैथिक चिकित्सा 

यहां दी जा रही दवाएं पित्तशूल होने पर दें। दवा देने से पूर्व अपने डॉक्टर से अवश्य पूछ लें-सिसटोन (Cystone) टैबलेट, स्टोनीयॉन (Stoniyon) कैप्सूल, सिटाल (Cital) तथा सिट्रासॉल (Citrasole) लिक्विड। 

प्रसिद्ध फार्मेसियों की पेटेन्ट दवाएं 

डाबर –आरोग्य वर्धिनी, पुनर्नवा मंडूर, ताम्र भस्म।

गुरुकुल कांगड़ी- नवायस लौह, प्लीहान्तक गुटिका, पुनर्नवादि गुग्गुल, शंखद्राव।

झंडु –सुवर्ण बसंत मालती, अश्वकंचुकी रस, इच्छाभेदी रस, पुनर्नवादि रस।

हमदर्द –माजून हिजरुल यहूद, कुर्स कुश्ता हिजरुल यहूद। 

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