बिजली कैसे बनती है-Bijali kaise banti hai

बिजली कैसे बनती है

बिजली कैसे बनती है(Bijali kaise banti hai)

बिजली कैसे बनती है बिजली की उपयोगिता से तो आप भलीभांति परिचित ही होंगे। कुछ पलों के लिए बिजली चले जाने से कितने कार्य रुक जाते हैं। यदि आप टी. वी. पर पिक्चर देख रहे हों और अचानक बिजली चली जाए तो गुस्सा भी आता है। कुल मिलाकर बिजली हमारे जीवन का एक महत्वपूर्ण अंग है, किंतु आपको शायद मालूम न हो कि बिजली बनती कैसे है? तो आइए, जानें इस प्रक्रिया को।

Bijali kaise banti hai)

कृत्रिम तरीकों से बिजली पैदा करने और उसे अपने कार्य में प्रयोग में करते हुए मानव को अभी 125 वर्ष के लगभग ही हुए हैं। आकाशीय विद्युत का पता लगाने का कार्य सबसे पहले बेंजामिन फ्रेंकलिन ने किया था। तेज वर्षा में पतंग उड़ाते समय उसकी डोर में बंधी धातु की चाबी से उन्होंने पहली बार विद्युत शक्ति का अनुभव किया था। 

लगभग 170 साल पहले इटली के एक वैज्ञानिक वोल्टा ने विद्युत धारा पैदा करने की युक्ति का आविष्कार किया था। उन्होंने तांबे और जस्ते की छड़ को गंधक के हल्के अम्ल में डूबो कर विश्व की सबसे पहला विद्युत सेल बनाया था। 

सन् 1831 में ब्रिटेन के माइकल फेराडे ने विद्युत चुम्बकीय प्रेरणा का आविष्कार करके बिजली उत्पन्न करने वाले एक जनरेटर का निर्माण किया। विद्युत का वास्तविक रूप में उपयोग माइकल फेराडे के इसी आविष्कार के बाद से होना आरंभ हुआ। 

बिजली

जनरेटर चुम्बक और तार की कुंडलियों से बना होता है। जनरेटर में एक चुम्बक होता है, जिसके ध्रुवों के बीच में तार की एक कुंडली तेजी से घूमती है। इससे तार की कुंडली में विद्युत उत्पन्न होती है। जनरेटर को चलाने के लिए ऊंचाई से गिरते पानी या भाप का इस्तेमाल किया जाता है-वैसे जनरेटर को पेट्रोल या डीजल वाले इंजन से भी चलाया जाता है।

पानी से जनरेटर चलाकर विद्युत उत्पन्न करने के लिए बांधों तथा झरनों के पास बिजली घर बनाए जाते हैं। गिरते पानी की धार से बड़ी-बड़ी टर्बाइनों के पहियों को घुमा कर जनरेटर की तारों की कुंडली को घुमाया जाता है, जिससे विद्युत उत्पन्न होती है।

बिजली क्या है?

बिजली क्या है? इसे सरल रूप में ऐसे समझा जा सकता है-विश्व के सभी पदार्थ बहुत सूक्ष्म कणों के बने होते हैं। इन कणों के छोटे-छोटे कण इलेक्ट्रोन, न्यूट्रोन, प्रोटोन आदि होते हैं। इलेक्ट्रोन एक नाभिक (न्यूक्लियस) के इर्द-गिर्द कुछ निश्चित कक्षाओं में चक्कर लगाते हैं। प्रोटोन और न्यूट्रोन से मिलकर नाभिक बनता है। न्यूट्रोन और प्रोटोन अपने केंद्र में स्थित रहते हैं, परंतु चारों ओर घूमने वाले इलेक्ट्रोन को जब तेजी से धक्का दिया जाता है, तो ये उछल कर एक से दूसरे परमाणु में जा पहुंचते हैं। विद्युत की उत्पत्ति में यही क्रिया होती है। विद्युत धारा किसी पदार्थ में दौड़ते हुए इलेक्ट्रोन्स का ही परिणाम है। 

दो पदार्थों की घर्षण क्रिया में भी यही होता है। एक पदार्थ के इलेक्ट्रोन रगड़ से उत्तेजित होकर दूसरे पदार्थ में पहुंच जाते हैं। वास्तव में इलेक्ट्रोन पर ऋणात्मक आवेश होता है और इस आवेश की गतिशीलता ही विद्युत धारा की जननी है। 

सभी धातुओं में तांबा विद्युत धारा का एक अच्छा सुचालक है। इसलिए तांबे के तारों का प्रयोग किया जाता है, क्योंकि इससे होकर विद्युत धारा तेजी से दौड़ाई जा सकती है। लेकिन सुचालक पदार्थों के साथ कुचालक पदार्थों की भी आवश्यकता पड़ती है, क्योंकि सुचालक पदार्थ बिजली के लिए रास्ता बनाते हैं और कुचालक पदार्थ उसे इधर-उधर बिखरने से रोकते हैं। तांबे के तार पर एक कुचालक पदार्थ की परत चढ़ाई जाती है। 

विद्युत धारा मापने के लिए एम्पियर इकाई का उपयोग किया जाता है। इसे एमीटर कहते हैं। विद्युत विभवांतर को मापने के लिए वोल्ट पैमाने का उपयोग किया जाता है। इस उपकरण को वोल्ट मीटर कहते हैं। विद्युत व्यय को मापने के लिए वोल्ट मीटर का प्रयोग होता है, जो यह बताता है कि कितनी विद्युत शक्ति काम में आई है। 

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