सामान्य ज्ञान प्रश्नोत्तरी-भविष्य फल में राशियां 12 ही क्यों होती हैं? 

भविष्य फल में राशियां 12 ही क्यों होती हैं?

भविष्य फल में राशियां 12 ही क्यों होती हैं? 

सामान्य ज्ञान प्रश्नोत्तरी खगोल को 360 अंशों में विभाजित किया गया है। इसे भचक्र कहते हैं, जो कि क्रांतिवृत (सूर्य का आभासीत मार्ग) के नौ अंश उत्तर एवं नौ अंश दक्षिण तक फैला हुआ है। चंद्रमा और सारे ग्रह इसी पट्टी के अंदर भ्रमण करते दिखाई देते हैं, भचक्र को बारह मासों के आधार पर 12 भागों में बांटा गया है। इस 

भचक्र को 360 अंश के वृत्त के 12 बराबर भागों में बांटने पर प्रत्येक भाग ही राशि कहलाता है। सूर्य एक दिन में लगभग एक अंश चलता हुआ एक राशि को एक महीने में भोग लेता है। इस प्रकार एक वर्ष में 30 अंश की प्रत्येक राशि को बारह महीनों यानि एक वर्ष में एक बार वह भोग लेता है। आकाश में तारों के समूह की परिचित आकृतियों के आधार पर इन राशियों का नामकरण किया गया है। इस प्रकार बारह राशियां बनती हैं। 

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भारतीय ज्योतिष में जन्म के समय चंद्रमा जिस राशि में होता है, वह जन्म की राशि कहलाती है, जबकि पश्चिम की मान्यता है कि जन्मकालीन सूर्य जिस राशि में होता है, वह जन्म की राशि मानी जाती है। बारह राशियां मेष से आरंभ होकर मीन तक मानी जाती हैं और पूरे विश्व में इनका क्रम यही है, चाहे इसका आधार सूर्य हो या चंद्रमा। 

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