अकबर बीरबल की श्रेष्ठ कहानियां?-चूड़ियों की गिनती

अकबर बीरबल की श्रेष्ठ कहानियां?

अकबर बीरबल की श्रेष्ठ कहानियां?-चूड़ियों की गिनती

अकबर हमेशा बीरबल से ऐसे सवाल पूछते रहते जिनका उत्तर देना सबके वश की बात नहीं थी। सारे दरबारी उन प्रश्नों को सुन कर एक दूसरे का मुंह ताकते रहते पर बीरबल के पास अकबर के हर प्रश्न का उत्तर पहले से तैयार होता था। अब तो दरबार में सबको यकीन हो गया था कि ऐसा कोई प्रश्न हो ही नहीं सकता जिसका उत्तर बीरबल के पास न हो पर अकबर भी कहां कम थे। वे भी तरह-तरह के प्रश्न खोज ही लाते।

एक शाम, अकबर ने बीरबल से पूछा, “यह तो सभी जानते हैं कि तुम कितने हाजिरजवाब और चतुर हो। हम चाहते हैं कि तुम दरबार में आज फिर से अपनी चतुराई साबित करके दिखा दो। मैं तुमसे एक सवाल पूछता हूं, तुम्हें उसका जवाब देना है। बोलो तैयार हो?”

अकबर बीरबल की श्रेष्ठ कहानियां?

बीरबल बोले, “क्यों नहीं जहांपनाह, मुझे आपके लिए ऐसा करके खुशी होगी।” अकबर ने कहा, “बीरबल! मुझे यह बताओ कि तुम्हारी पत्नी हाथ में कितनी चूड़ियां पहनती है?” 

यह सुन कर तो बीरबल दंग रह गए। उनके पास इस सवाल का कोई जवाब नहीं था। फिर वे बोले, “जहांपनाह! यह सवाल मुश्किल तो नहीं है पर इसका जवाब देना थोड़ा मुश्किल है इसलिए मैं आपके आगे यह कबूल करता हूं कि मैं इस सवाल का जवाब नहीं जानता।”

अकबर अपने प्रिय मंत्री के मुंह से यह बात सुन कर हैरान रह गए कि उनके पास इस सवाल का जवाब नहीं था। सभी दरबारी भी आज तक बीरबल को सबसे चतुर और अक्लमंद व्यक्ति के ही रूप में देखते आए थे। अकबर हंस कर बोले, “कितनी हैरानी की बात है कि मेरे सबसे समझदार और हाजिरजवाब मंत्री के पास मेरे सबसे आसान से सवाल का जवाब नहीं है। क्या तुमने कभी अपनी पत्नी की चूड़ियों को नहीं देखा? वह तुम्हें हर रोज उन्हीं हाथों से भोजन परोसती है। क्या तब भी उसकी चूड़ियों की गिनती नहीं की?” 

बीरबल बोले, “महाराज! मैं आपको इस प्रश्न का उत्तर देना चाहूंगा पर इससे पहले आपको मेरे साथ महल के बगीचे में चलना होगा।” 

अकबर बीरबल की श्रेष्ठ कहानियां?

अकबर मान गए और वे दोनों बगीचे में जा पहुंचे। अकबर ने कहा, “बीरबल! तुम मुझे यहां क्यों लाए हो? क्या तुम्हें उन सब लोगों के सामने सवाल का जवाब देने में संकोच हो रहा था?”

बीरबल बोले, “नहीं जहांपनाह, आप जो सोच रहे हैं, वह बात नहीं है। कृपया मेरे एक प्रश्न का उत्तर दें। हम अभी सीढ़ियां चढ़ कर बाग में आए हैं। क्या आप बता सकते हैं कि हमने अभी कितनी सीढ़ियां चढ़ी हैं?” 

अकबर उलझन में पड़ गए और कोई जवाब नहीं दे सके। बीरबल बोले, “जहांपनाह। आप तो हर रोज बगीचे में आते हैं। आपको इस आसान से सवाल का जवाब पता होना चाहिए।” अकबर बोले, “नहीं बीरबल! मैं इसका जवाब नहीं जानता।”

बीरबल ने कहा, “जहांपनाह! मैं जानता हूं कि इस सवाल का जवाब देना आसान नहीं है। हम हर रोज जाने कितनी चीजें देखते हैं और करते हैं पर उन्हें इतना महत्व नहीं देते। हमें दूसरों से ऐसे प्रश्न नहीं पूछने चाहिए, जिनके उत्तर हमें स्वयं । न पता हों।” अकबर जान गए कि बीरबल क्या कहना चाह रहे थे इसलिए उन्होंने माना कि उनके प्रश्न का कोई महत्व नहीं है। इसके बाद वे दोनों दरबार में लौट आए। 

 

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