सामान्य ज्ञान-बरमूडा ट्राइएंगल को रहस्यमय क्यों माना जाता है?

बरमूडा ट्राइएंगल को रहस्यमय क्यों माना जाता है?

सामान्य ज्ञान-बरमूडा ट्राइएंगल को रहस्यमय क्यों माना जाता है?

अटलांटिक महासागर में एक ऐसा रहस्यमय त्रिकोण, एक त्रिभुजाकार क्षेत्र है, जिसमें पिछले दो सौ वर्षों में अब तक पचास से भी ज्यादा जलयान और बीस से अधिक वायुयान गायब हो चुके हैं, अटलांटिक महासागर के इस रहस्यमय क्षेत्र को ‘बरमूडा ट्राइऐंगल’ या ‘डेविल ट्राइएंगल’ के नाम से भी जाना जाता है। 

बरमूडा ट्राइएंगल को रहस्यमय क्यों माना जाता है?

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इस रहस्यमय क्षेत्र के एक ओर फ्लोरिडा, दूसरी ओर प्यूर्टोरिको तथा तीसरी ओर बरमूडा नामक स्थान है। यह क्षेत्र 25 डिग्री से 40 डिग्री उत्तरी अक्षांश और 55 डिग्री से 85 डिग्री पश्चिमी देशांतर रेखाओं के बीच में फैला हुआ है। इस रहस्यमय क्षेत्र का क्षेत्रफल 15 लाख वर्ग मील है। 

कहा जाता है कि समुद्र के इस हिस्से में जैसे ही कोई जहाज पहुंचता है, वैसे ही उससे आने वाले रेडियो संकेत टूट जाते हैं, परिणाम स्वरूप उससे संपर्क समाप्त हो जाता है। इस क्षेत्र में जहाज रहस्यमयी तरीके से डूब जाता है। सन् 1960 में अमरीका की परमाणु शक्ति से चलने वाली स्कॉरपियन नाम की पनडुब्बी इस क्षेत्र में एकाएक गायब हो गई।

इससे पूर्व दिसंबर 1945 में पांच बमवर्षक वायुयान उड़ते हुए इसमें डूब गए थे। उन्हें बचाने के लिए गया जहाज भी इस क्षेत्र की ओर खिंचकर समुद्र में विलीन हो गया। इस तरह अब तक इस बरमूडा त्रिभुज क्षेत्र में एक हजार से भी अधिक लोगों की जानें जा चुकी हैं। 

बरमूडा ट्राइएंगल को रहस्यमय क्यों माना जाता है?

बरमूडा त्रिभुज के रहस्यमय क्षेत्र के बारे में वैज्ञानिकों ने खोज और जांच की, मगर अभी तक वे इस रहस्य को खोज नहीं पाए कि इस क्षेत्र में ही ऐसा क्यों होता है। उनके अनुसार हो सकता है कि इस क्षेत्र में वायु की विशाल तूफानी धाराएं नीचे की दिशा में बहती हों, जो किसी भी जलयान को समुद्र में डूबो देती हैं। डूबने के बाद समुद्री धाराएं उनको दूसरी दिशाओं में बहा ले जाती हों, ऐसा हो सकता है, लेकिन कुछ वैज्ञानिकों के अनुसार यहां एक विशाल चुंबकीय क्षेत्र है, जो रेडियो संकेतों को काट देता है। 

वैज्ञानिकों द्वारा बरमूडा त्रिकोण के रहस्य के बारे में कुछ भी तर्क और सिद्धांत प्रस्तुत किए जाएं, मगर यह बात तो तय है कि वे अभी इस रहस्यमय त्रिभुजाकार क्षेत्र के रहस्य को भेदने में सफल नहीं हो सके हैं, हालांकि इस दिशा में उनके प्रयास जारी हैं। 

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