Bedtime stories in hindi -पहले बूढ़े की कहानी

Bedtime stories in hindi

Bedtime stories in hindi – पहले बूढ़े की कहान

पहले बूढ़े ने अपनी कहानी सुनाते हुए कहा, “तुम्हें मेरे साथ जो हिरण दिख रहा है, वो मेरी पत्नी है।” 

वह आदमी अपनी पत्नी के साथ बहुत खुश था, लेकिन उनके घर कोई संतान नहीं थी। अतः उसने अपने प्रिय गुलाम के बेटे को गोद ले लिया। लेकिन उसकी पत्नी गुलाम औरत और उसके बेटे से बहुत चिढ़ती थी। जब बच्चा दस साल का था, तो वह आदमी किसी काम से दूसरे शहर चला गया। उसने अपनी पत्नी से कहा था कि उस बच्चे और उसकी मां की देखरेख अच्छी तरह करना। 

उसकी पत्नी ने अपने पति के जाने के बाद जादू सीखा और एक दिन बच्चे को घर से दूर ले जाकर उसे बछड़ा बना दिया। उसने उसकी मां को गाय बनाया और अपने खेत में काम करने वाले किसान को देकर कहा कि वह उन्हें अपने यहां पाल ले। 

जब वह आदमी अपने घर वापस लौटा, तो उसकी पत्नी ने बताया कि गुलाम औरत मर गई। 

आदमी ने पूछा, “हमारे बेटे का क्या हुआ?” 

“वह पिछले दो महीने से लापता है। पता नहीं, कहां चला गया?” पत्नी ने कहा। 

वह आदमी अपने बच्चे और उसकी मां का दुख मनाने लगा, लेकिन वह कुछ नहीं कर सकता था। 

कुछ महीने बाद एक उत्सव के लिए दावत की तैयारी होने लगी। उस आदमी ने अपने किसान से कहा कि वह बलि के लिए अपनी गाय ले आए। वह गाय उस बच्चे की मां थी। 

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जब उसने अपने मालिक को देखा, तो वह रोने लगी, अतः वह आदमी उसकी बलि नहीं चढ़ा सका। उसने किसान से कहा कि वह इस काम को पूरा कर दे। 

किसान गाय को मारने के लिए आगे बढ़ा, लेकिन गाय की आंखों में आंसू देखकर उसका मन पसीज गया। 

उसने कहा, “इस गाय की तो हड्डियां निकली हुई हैं।” तब उस आदमी ने किसान से कहा कि वह गाय के बछड़े को ले आए। 

बछड़ा उस आदमी का बेटा था। वह अपने पिता के पैरों के पास गिरकर रोने लगा। उस आदमी ने अपनी पत्नी के लाख कहने पर भी उसकी बलि चढ़ाने से मना कर दिया। उस दिन दूसरे बछड़े की बलि चढ़ाई गई।

कुछ दिनों बाद किसान ने आकर अपने मालिक से कहा, “मेरी बेटी जादू जानती है। कल उसने बछड़े को देखा, तो वह बहुत खुश हुई, मगर फिर रोने लगी। उसने बताया कि वह बछड़े के लिए खुश थी, पर उसे उसकी मां के लिए दुख हो रहा था, जिसे किसी ने मार दिया।” 

जब वह आदमी किसान की बेटी से मिला, तो उसे पता चला कि वह बछड़ा ही उसका बेटा था और उस गाय को उसकी पत्नी ने मौत के घाट उतार दिया था। 

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उस आदमी ने किसान की बेटी से कहा, “क्या तुम बछड़े को मेरे बेटे में बदल सकती हो? मैं दिन-रात अपने बेटे की याद में तड़प रहा हूं। मुझे यह जानकर बहुत दुख हुआ कि मेरी पत्नी ने उस बेचारी औरत को पहले गाय में बदल दिया और फिर मार दिया। वह तो मेरे बेटे को भी जिंदा नहीं रहने देगी। क्या तुम मेरे बेटे की जान बचाने में मदद करोगी?” 

किसान की बेटी बोली, “पहले आपको दो वादे करने होंगे। अपने बेटे से मेरी शादी करनी होगी और ऐसा गलत काम करने वाली दुष्ट औरत को मैं सजा दूंगी, लेकिन आप मुझे कुछ नहीं कहेंगे।” 

उस आदमी ने हामी भर दी। 

किसान की बेटी ने कुछ मंत्र पढ़े और अपने हाथों से बछड़े का स्पर्श करने लगी। ऐसे में बछड़े में बदलाव होना शुरू हो गया। कुछ ही देर में उसका जीता-जागता बेटा उसके सामने खड़ा था। फिर किसान की बेटी ने दुष्ट औरत को हिरण बना दिया। 

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“मेरा बेटा कहीं चला गया है। मैं उसकी खोज में निकला हूं। मैं अपनी पत्नी को कहीं नहीं छोड़ सकता, इसलिए यह मेरे साथ रहती है।” पहले बूढ़े ने अपनी कहानी खत्म की। 

यह एक अच्छी कहानी थी और जिन्न को काफी पसंद आई। 

जिन्न ने कहा, “ठीक है, मुझे तुम्हारी कहानी अच्छी लगी और इसे व्यापारी की कहानी से दिलचस्प माना जा सकता है। चलो, अब दूसरे बूढ़े की कहानी सुनते हैं।” 

दूसरे बूढ़े की कहानी

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दूसरे  बूढ़े ने कहा-मेरी कहानी भी इसी तरह हैरान कर देती है। ये दोनों कुत्ते मेरे बड़े भाई हैं। मेरे पिता जी इस दुनिया से चले गए और हम तीनों के लिए सोने के एक-एक हजार सिक्के छोड़ गए। इस तरह हम व्यापारी बन गए। 

मेरा बड़ा भाई व्यापार करके बहुत अमीर आदमी बनना चाहता था। वह अपना सब कुछ बेचकर दूसरे शहरों में व्यापार करने निकल गया। लेकिन जब वह वापस आया, तो उसके पास कुछ नहीं था। उसने अपना सारा धन गंवा दिया था। 

इस दौरान मेरी दौलत दुगनी हो गई थी, इसलिए मैंने आधा धन अपने भाई को दे दिया। 

कई साल बाद मेरी भेंट अपने दूसरे भाई से हुई। वह भी कई स्थानों की यात्रा करके आया था। उसने भी व्यापार में अपना सारा धन गंवा दिया था। मुझसे उसकी हालत देखी नहीं गई। मैंने उसकी भी मदद की। उसे दुकान खोलने के लिए रुपया दिया। 

कुछ दिनों बाद मेरे भाइयों ने फिर कहा कि वे दूसरे शहरों में जाकर बहुत माल कमाना चाहते थे, लेकिन मैंने उनकी मदद करने से इन्कार कर दिया। मैं देख ही चुका था कि पहले उनका क्या हाल हुआ था। जब वे लगातार पांच साल तक अपनी जिद पर अड़े रहे, तो मैं उनके साथ जहाज में जाने के लिए तैयार हो गया। 

मेरे पास छः हजार सोने के सिक्के थे। मैंने आधे सिक्के घर के एक कोने में गाड़ दिए और बाकी अपने भाइयों के साथ बांट लिए। फिर हम लोग दूसरे देशों में व्यापार के लिए जहाज से रवाना हो गए। 

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हम लोगों ने अलग-अलग देशों में बहुत-सा माल खरीदा और बेचा। इस बार हम तीनों भाइयों को व्यापार में बहुत मुनाफा हुआ। 

फिर एक स्त्री ने मेरे पास आकर विनती की कि मैं उससे शादी कर लूं। मैं बड़ा हैरान हुआ और विनम्रता से उसे मना कर दिया, लेकिन वह नहीं मानी। उसने मुझसे कहा, “मैं बहुत समय से किसी नेकदिल इन्सान की खोज में थी। मुझे आप जैसे ही किसी आदमी से शादी करनी है। आप मुझसे निकाह कर लें।”

मेरे लिए उसे एकदम कोई जवाब देना मुश्किल था। फिर मेरे भाई भी साथ थे। वे नहीं चाहते थे कि मैं किसी अनजान जगह की स्त्री से शादी करने के लिए हामी भर दूं। 

लेकिन वह स्त्री अपनी जिद पर अड़ी रही। वह हमारे साथ ही आना चाहती थी, इसलिए हमने उसे मना नहीं किया। 

अंततः हम उसे भी अपने साथ लेकर जहाज पर चल पड़े। वह एक समझदार और दयालु स्त्री थी। मुझे उससे प्यार हो गया था और मैंने उससे शादी कर ली थी। 

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लेकिन मेरे दोनों भाइयों को मुझसे बहुत जलन होती थी। एक दिन उन्होंने मुझे और मेरी पत्नी को समुद्र में फेंक दिया। 

लेकिन मेरी पत्नी, जो वास्तव में एक परी थी, ने अपनी जादुई ताकतों से मुझे बचाया और एक टापू पर ले गई। वह मेरे भाइयों के बर्ताव से सख्त नाराज थी। उसने कसम खाई कि वह उन्हें खत्म कर देगी।

मैंने उससे विनती की कि वह मेरे भाइयों की जान न ले, तो वह मान गई और उसने मुझे मेरे घर पहुंचा दिया। जब मैंने छिपाए गए अपने तीन हजार सिक्के निकालकर संभाल लिए, तो वह ओझल हो गई।

अब मेरे समझ में यह बात आ गई थी कि वह स्त्री मुझसे शादी क्यों करना चाहती थी। उस पर किसी के शाप का प्रभाव था, जो किसी इन्सान से शादी करने पर ही दूर हो सकता था। उसने मेरी जान बचाई और मेरा जीवन संवार दिया। 

दूसरे दिन जब मैं अपनी दुकान पर गया, तो बाहर दो कुत्तों को बैठा पाया। परी ने आकर बताया कि उसने दोनों भाइयों को दस साल की सजा दी है और अब वह मुझसे दस साल बाद मिलेगी। 

इसके बाद कहानी खत्म हो गई। पहले बूढ़े ने दूसरे बूढ़े से पूछा, “अब तुम कहां जा रहे हो, दोस्त?” 

दूसरा बूढा बोला, “दस साल पूरे होने वाले हैं। मैं अपने दोनों भाइयों को साथ लेकर परी के पास जा रहा हूं।” 

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जिन्न ने इस कहानी को भी काफी पसंद किया और ठहाके मारकर हंसने लगा। वह बड़ी देर तक खिलखिलाता रहा। इसके बाद उसने व्यापारी को माफ कर दिया और वहां से ओझल हो गया। जिन्न को दो कहानियों में ही इतना आनंद आ गया था कि उसने तीसरी कहानी सुनाने के बारे में नहीं कहा। व्यापारी अपने घर चल दिया। उसकी जान बच गई थी। परिवार वाले उसे जिंदा देखकर बहुत खुश हुए। 

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