मैराथन का युद्ध |Battle of Marathon history in hindi

मैराथन का युद्ध

मैराथन का युद्ध (Battle of Marathon) (490 ई० पू०) 

मैराथन का युद्ध, प्राचीन यूनान का एक प्रसिद्ध युद्ध है। यह युद्ध सन् 490 ई०पू० में यूनान (Greek) व फारस (Persia) के बीच मैराथन के मैदान में लड़ा गया था। 

फारस का राजा डेरियस (King Darius) था जो राज्य विस्तार की अति महत्वाकांक्षा रखता था। डेरियस अत्यन्त पराक्रमी था। उसने पश्चिम में इजियन सागर से लेकर, पूर्व में सिंधु तक, उत्तर में सिथियन के मैदानों से लेकर दक्षिण के मिस्र की नील नदी तक अपने राज्य का विस्तार कर लिया था।

मैराथन युद्ध का कारण 

मैराथन का युद्ध

फारस राजा डेरियस की दिनों-दिन बढ़ती साम्राज्य लिप्सा ने उसका ध्यान एशिया के पश्चिमी किनारे पर बसे ग्रीकों की ओर मोड़ा। उस समय ग्रीकों को आयोनियन कहा जाता था। डेरियस ने आयोनियनों के पास अपना दूत भेजते हुए उन्हें अपनी अधीनता स्वीकार करने का संदेश भेजा। डेरियस ने आयोनियनों के चार राज्यों को अपने संदेश वाहक भेजे थे। ये राज्य थे थीब्स, इजीना, एथेंस (Athens) और स्पार्टा (Sparta)। 

थीब्ज और इजीना के नागरिक उत्साहहीन साबित हुए। उन्होंने फारस राजा की अधीनता स्वीकार कर ली। पर, एथेंस और स्पार्टा में डेरियस का दूत संदेश लेकर पहुंचे तो इन दोनों राज्यों का एक समान उत्तर था

“हम अपनी स्वाधीनता खोने के बजाय युद्धभूमि में अपना प्राणोत्सर्ग करना श्रेष्यकर समझते हैं।” 

राजा डेरियस ने अधीनता अस्वीकार करने को अपना अपमान माना। उसने लगभग 20,000 की विशाल सेना के साथ अपनी समुन्द्री यात्रा आरम्भ कर दी। फारस के जलपोत योद्धा सैनिकों के साथ, सागर का सीना चीरते हुए तेजी से आगे बढ़ने लगे। डेरियस के दो मुख्य सेनानायक डैटिस और आर्टाफेनिस अपने-अपने नेतृत्व में फारस की आधी-आधी सेना लेकर एथेंस और स्पार्टा पर आक्रमण की रणनीति बना चुके थे। 

फारस (जिसे ईरान भी कहा जाता है) सेना ने एथेंस और स्पार्टा की ओर बढ़ते हुए मार्ग में आने वाले टापू भी जीत लिए।

यूबिया में आकर इरिट्रिया नगर में आग लगा दी। वे इरिट्रिया नगर को आग लगाने की बर्बर कार्यवाही से एथेंस और स्पार्टा के लोगों को संदेश देना चाहते थे कि उनके नगरों का भी यही हाल किया जाएगा। 

डेरियस ने मैराथन के विशाल मैदान में अपनी सेना का पड़ाव डाल दिया। जिसे एथेंस और स्पार्टा को इस बात का संदेश मिल जाए कि युद्ध उनके सामने आ डटा है, यदि वे अब भी आत्म समर्पण कर देते हैं तो युद्ध टल सकता है। 

उस समय स्पार्टा के लोग प्लेटिका के निवासी कहलाते थे। प्लेटिकावासियों ने मैराथन में डटी फारस की सेना का जरा भी भय न खाया। वे 1,000 सैनिक शक्ति के साथ युद्ध भूमि में उतर कर दुश्मन के दांत खट्टे करने को तैयार हो गए। 

उसी समय इस बात को भी उन्होंने याद किया कि एथेंस ने भी फारस की आधीनता स्वीकार कर ली है। प्लेटिका वासियों और एथेंस वासियों के बीच गहरे मैत्री सम्बन्ध थे। दोनों ही राज्य अपने को यूनान रक्त का कहने में गर्व करते थे। 

जैसे ही प्लेटिका वालों को एथेंस की याद आयी, वैसे ही उन्होंने इस बात का विचार किया कि एथेंस को संदेश भेजा जाना चाहिए कि मैराथन के मैदान में फारस की सेना ने आकर डेरा डाल दिया है। 

मैराथन से एथेंस की दूरी 150 मील थी। रातो-रात एथेंस संदेश पहुंचाना था। मार्ग पहाड़ी और ऊबड़-खाबड़ था। पैदल का सफर घोड़े की अपेक्षा कहीं सहज था। 

फिडीपीडीज नामक प्लेटिका के एक उत्साही सैनिक ने इस बात का बीड़ा उठाया कि वह 150 मील का सफर दौड़कर पूरा करेगा। फिडीपीडीज के अदम्य उत्साह को देखकर प्लेटिका वासियों ने उसे एथेंस तक संदेश पहुंचाने की जिम्मेदारी सौंप दी। 

फिडीपीडीज नामक उस सैनिक धावक ने 15 घण्टों में अपनी दौड़ पूरी कर एथेंस में खबर पहुंचा दी। 

इधर, मैराथन के मैदान में पड़ाव डाले हुए फारस की सेना ने लम्बे समुन्द्री सफर की थकान उतारने के लिए, इतना समय व्यतीत कर दिया था कि एथेंस की सेना को वहां आ पहुंचने का मौका मिल गया। 

फिडीपीडीज से सूचना पाते ही एथेंस की सेना चल पड़ी थी। एथेंस की सेना की संख्या 10,000 थी। वह प्लेटिका सेना से आ मिली। 

इस संयुक्त सेना का नेतृत्व मिलिटिड्ड्स नामक प्रतिभाशाली सेनापति ने किया। 

मैराथन की युद्ध भूमि में मिलिटिड्ड्स के कुशल नेतृत्व में बढ़ती यूनानी सेना ने अपनी ओर से युद्ध की दुंदुमी बजा दी। 

घनघोर युद्ध आरम्भ हुआ। यूनानी तीरन्दाज योद्धाओं के मुकाबले फारस की सेना अधिक समय तक टिक न सकी। अपनी सेना से दुगुनी सेना वाली दुश्मन की सेना को यूनानियों ने हरा दिया था। डेरियस की फारसी सेना के बहुत कम सैनिक कब्जिता से युद्ध भूमि से बचकर अपने जलपोत पर पहुंच पाए थे। 

यूनान ने मैराथन का युद्ध जीत लिया था। 

इस यद्ध में यूनानी सेना में बहत से गलाम भी थे, जिन्हें कहा गया था कि युद्ध जीतने के बाद उन्हें मुक्त कर दिया जाएगा। यूनानी गुलामों के साथ मिलियाड्स ने वायदा निभाया, युद्ध में शामिल होने वाले गुलामों को आजाद कर दिया गया।

इस युद्ध से सेनापति मिलियाड्स की प्रसिद्धि बहुत बढ़ गयी थी। जबकि फारस के राजा डेरियस को बहुत आघात पहुंचा था। फारस पहुंच डेरियस ने बड़े स्तर पर सैनिकों की भरती कर मैराथन युद्ध के हार का बदला लेने की जोरदार तैयारी की थी। पर, ऐसा कर पाने से पूर्व ही उसका देहान्त हो गया। 

विशेष-मैराथन युद्ध के परिणाम का सबसे बड़ा आकर्षण है फिलीपीडीज। जिसने 15 घण्टों में 150 मील दौड़कर एथेंस में सूचना पहुंचायी थी। उसके द्वारा समय पर पहुंचायी गयी सूचना पर ही एथेंस की सेना मैराथन युद्ध में शामिल हो सकी थी। 

इस मत-धावक फिलीपीडीज की याद को अक्षुण्य बनाए रखने के लिए यूनान ने ‘मैराथन दौड़’ की शुरूआत की। मैराथन दौड़, विश्व के सबसे बड़े ओलाम्पिक खेलों में सबसे प्राचीन और मुख्य खेल है। 

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