अर्बेला का युद्ध |Battle of Gaugamela History in hindi

Battle of Gaugamela

अर्बेला  (गौगमेला )का युद्ध (Battle of Gaugamela) (331 ई०पू०) 

विश्व प्रसिद्ध गौगमेला का युद्ध, यूनान के अलेक्जेण्डर (सिकन्दर) (Alexandria the Great) और परसिया (फारस) के महान् राजा डेरियस तृतीय (Darius III of Persia) के बीच 331 ई०पू० लड़ा गया। उस युद्ध को ‘अरबेला का युद्ध’ नाम भी दिया गया है। 

यूनान (ग्रीक Greek) और परसिया (फारस) की प्रतिद्वन्द्विता डेढ़ सौ वर्ष से भी ऊपर से चली आ रही थी। मैराथन युद्ध 490 ई०पू० तथा थर्मापायली युद्ध 480 ई० में लड़े गए परसियनों और यूनानियों के बीच हुए दोनों युद्धों में यद्यपि परसियनों को हार का सामना करना पड़ा था, बावजूद इसके कहा जा सकता है कि परसियनों की हार निर्णायक साबित न हुई थी। यूनानियों ने परसियनों के आक्रमण से अपनी रक्षा कर उन्हें युद्ध भूमि से मैदान छोड़ने को बाध्य कर दिया था-परसिया के अधीन क्षेत्रों में घुसकर उन्हें हार का स्वाद न दिया था। 

परन्तु अलेक्जेण्डर और राजा डेरियस तृतीय के बीच हुए युद्ध ने परसियनों की युद्ध लिप्सा को हार में बदल कर उनके दम को तोड़ दिया। इस बार परसियन सेना के बजाय यूनानी सेना ने परसिया के भू-भाग पर आक्रमण किया था। 

अलेक्जेण्डर नामक यूनान का प्रसिद्ध योद्धा, विशाल सेना के साथ विश्व विजय का सपना संजोए हुए, अपने मार्ग में पड़ने वाले छोटे-छोटे राज्यों को जीतता हुआ तेजी से एशिया विजय के लिए बढ़ रहा था। 

वह इराक के पूर्व की ओर स्थित मोसूल (Mosul) राज्य को जीतकर, दो वर्ष के अपने विजय अभियान के साथ इसूस (Issue) राज्य तक बढ़ आया था। भू-मध्य सागर को पार कर इजिप्ट (Egypt) पहुंच गया था। वहां तक अपनी जीत दर्ज करके वह परसियन राज्य का हृदय कहे जाने वाले सीरिया (Syria) में पहुंच गया था। उसने इयुफ्रेट्स (Euphrates) और टिगरिस (Tigres) नदियों को बगैर किसी बाधा के पार कर लिया था। टिगरिस नदी के उस पार राजा डेरियस अपनी विशाल सेना सजाए सिकन्दर का मुकाबला करने के लिए गौगमेला की युद्ध भूमि में डटा खड़ा था। उसने परिसियन राज्यों की 2,50,000 पैदल सेना तथा 40,000 घुड़सवार सेना को जुटा लिया था। यह युद्ध 331 ई०पू० के बसन्त मौसम में गौगमेला की युद्ध भूमि में आरम्भ हुआ। 

राजा डेरियस तृतीय, विशाल हखमी साम्राज्य का यशस्वी राजा था। डेरियस तृतीय ने इस युद्ध में 200 रथों का भी इस्तेमाल किया था। उसने युद्ध की व्यूह रचना कुछ इस प्रकार की थी जिसमें घुड़सवार योद्धा आगे के मोर्चे पर हों, पैदल सेना, घुड़सवार सेना के दाएं-बाएं धनुर्धरों के रूप में हो। रथों की सेना को डेरियस ने मध्य में रखा था। यूनानी सेना में जो कि परोक्ष रूप से मकदूनिया की सेना (Macedonian army) थी-उसकी संख्या 47,000 थी। अलेक्जेण्डर ने युद्ध की व्यूह रचना करते हुए अपनी सेना को 9 सेनापतियों के नेतृत्व में पांच-पांच हजार की संख्या में विभक्त कर दिया। शेष बचे दो हजार सैनिकों का नेतृत्व वह स्वयं कर रहा था। 

युद्ध भूमि में उतरते समय अलेक्जेण्डर ने अपनी सेना और सेनापतियों को जोश दिलाते हुए कहा था- “परसियन सेना की संख्या को देखने की आवश्सकता नहीं; तुम्हें इस बात पर ध्यान लगाए रखने की आवश्यकता है कि तुम देवपुत्र अलेक्जेण्डर के आदेश पर युद्ध कर रहे हो-हर हाल में विजय तुम्हारी होगी।” 

Battle of Gaugamela

गौगमेला के युद्ध भूमि में कई दिनों तक दोनों सेनाओं के बीच खूनी युद्ध चलता रहा। युद्ध का कोई निर्णायक परिणाम सामने आता न दिखाई दे रहा था-तब अलेक्जेण्डर ने युक्ति से काम लेते हुए परसियन सेना के बीच यह अफवाह फैला दी कि मकदूनियन सेना रात को आक्रमण करके युद्ध का निर्णय कर देगी। राजा डेरियस, रात को हमला होने की आशंका से रात भर जागता रहा, उसकी सेना भी जागती हुई हमले का इन्तजार करती रही। पर सिकन्दर आराम से अपने तम्बू में सोने चला गया था-उसने अपनी सेना को भी बेफिक्री के साथ सो जाने का हुक्म दे दिया था।

कहा जाता है कि उस रात अलेक्जेण्डर खूब गहरी नींद सोया। सुबह अपने एक जनरल के जगाने पर ही वह जागा। जागते ही उसने कहा-

“आज युद्ध का निर्णय हो जाएगा।” 

उसका कथन सही हुआ-मकदूनिया की सेना पूरी नींद लेकर पूरे उत्साह में भरी हुई थी, जबकि रात भर जागते रहने के कारण परसियन सेना थकी हुई नींद से बेहाल थी। जैसी कि अलेक्जेण्डर ने युक्ति अपनायी थी-उसका परिणाम उसी रूप में सार्थक होकर सामने आया। पूरे जोश के साथ, दुश्मन की शिथिल सेना पर आक्रमण करके अलेक्जेण्डर ने गौगमेला का युद्ध जीत लिया था। उस दिन के युद्ध में 1000 मकदूनियन सैनिक युद्ध भूमि में काम आए थे तो पर परसियन सेना के 90,000 योद्धा मारे गए थे। बताया जाता है 30,000 परसियन सेना ने आत्मसमर्पण कर दिया था। इस तरह अलेक्जेण्डर ने परसिया के भाग्य का निर्णय कर दिया था। 

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