चंदेरी का युद्ध |Battle of Chanderi history in hindi

Battle of Chanderi history in hindi

 चंदेरी का युद्ध (Battle of Chanderi) (1528 ई०) 

चंदेरी और घाघरा का युद्ध वास्तव में खानवा के युद्ध के बाद के उन दो चरणों के युद्ध हैं जिनमें भारत के मुग़ल साम्राज्य के लड़खड़ाते कदमों को पूरी तरह से जमा दिया था। ब्रिटिश इतिहासकार रशबुक विलियम के शब्दों में- “हिन्दुस्तान पर बाबर के कब्जे को उसके साहसपूर्ण जीवन की एकमात्र घटना समझी जा सकती थी, किन्तु अब यह उसके शेष जीवन के लिए उसकी गतिविधियों का मूल-स्वर बन चुका था।” 

उसके दिल्ली और आगरा के सिंहासन पर जम जाने के बाद ना तो राजपूत उसकी हुकूमत को पचा पा रहे थे और ना ही अफगान, जो इब्राहीम लोदी के वफादार थे और अभी भी भारत के विभिन्न भागों में फैले हुए थे। मुहम्मद गौरी के साथ वे भारत में आए थे–भारत भूमि में मुस्लिम सत्ता स्थापित करने का प्रथम बार स्वाद चखा था। 

यद्यपि ना तो मुहम्मद गौरी रह गया था, ना ही उसका सिपहसालार गुलाम ! गुलाम वंश के बाद कई वंश बदले थे, पर वंशों की हुकूमत बदलने पर भी गौरी के साथ आए अफगानों और उनकी नई नस्ल को हुकूमत में श्रेष्ठ स्थान प्राप्त थे। 

बाबर के साम्राज्य स्थापित करने में उन अफगानों को लग रहा था, अब उन्हें श्रेष्ठता में पीछे हटना पड़ेगा। वे असन्तुष्ट थे और एक शक्ति के रूप में एकत्र हो रहे थे। 

बाबर को अफगानों की समस्या के साथ राजपूतों की भी समस्या का भी प्रकार सामना करना पड़ रहा था। खानवा के युद्ध में राणा सांगा के हराने के बाद भी राजपूतों की एक बड़ी शक्ति बची हुई थी। 

खानवा युद्ध के हार के समय मेदनी राव नामक राजपूत सरदार, 5,000 सैनिकों की टुकड़ी के साथ बच निकला था। वह चंदेरी के किले में जाकर शरण लेते हुए कई एक राजपूतों को अपने साथ जोड़कर एक बार फिर राजपूतों का जौहर, बाबर को दिखाने के लिए तैयार हो रहा था। उसकी तैयारियों से घबराकर बाबर ने उस पर हमला कर दिया। चंदेरी किले को घेर लिया। 

राजपूतों ने बेपनाह साहस से युद्ध किया। पर 21 जनवरी, 1528 ई० को बाबर ने चंदेरी किला जीतकर राजपूतों को सत्ता से बाहर कर दिया। राजपूतों ने अपने पूरे शौर्य से युद्ध किया था। कहा जाता है कि बाबर के सैनिकों को रक्त कुण्ड से होकर गुजरना पड़ा था। राजपूतों की स्त्रियों और बच्चों ने जौहर व्रत लिया था-राजपूत पुरुषों ने गेरुए रंग की पोशाक पहन, बाज की तरह शत्रु पर टूटकर युद्ध किया था। पर बाबर की युद्ध नीति के कारण इस युद्ध को भी बाबर ने जीत लिया था।

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