Bal Krishna Stories in Hindi-श्रीकृष्ण ने पलटी छकड़ा गाड़ी |

Bal Krishna Stories in Hindi

Bal Krishna Stories in Hindi-श्रीकृष्ण ने पलटी छकड़ा गाड़ी 

मां यशोदा भगवान कृष्ण की देखरेख बहुत सावधानी से करती थीं। एक दिन वे बालक कृष्ण को छकड़ा गाड़ी के पास छोड़कर यमुना नदी में नहाने चली गईं। भगवान कृष्ण कुछ देर तक बड़े आराम से सोते रहे। फिर वे जाग गए और अपने हाथ-पैर जोर-जोर से हिलाने लगे। तभी उनकी एक टांग छकड़ा गाड़ी के पहिये में फंस गई। 

यह देखकर गोपियां डर गईं। वे सोचने लगीं कि कहीं शिशु कृष्ण को चोट न लग जाए। लेकिन तभी अचानक छकड़ा गाड़ी पलट गई और गोपियां चिल्लाने लगीं, “यशोदा मैया! जल्दी आओ। देखो, यह क्या हो गया! लल्ला को कुछ हो न गया हो।” शोर सुनते ही मां यशोदा दौड़ी आईं। जब उन्होंने अपने बालक को सही-सलामत देखा, तो उन्हें चैन आया। 

जब छकड़ा गाड़ी पलटने के बारे में गोपियों ने मां यशोदा को बताया, तो वे यकीन नहीं कर सकीं। फिर उन्होंने यह बात अपने पति नंद को बताई। वे भी यह चमत्कार सुनकर हैरान रह गए। वे जानते थे कि उनका बेटा कोई आम इन्सान नहीं है। वह भगवान विष्णु का अवतार है और अत्यंत बलशाली है। 

इस घटना के बाद नंद बाबा को पूरा विश्वास हो गया कि उनका बेटा कृष्ण आगे चलकर दुष्टों और राक्षसों को मौत के घाट उतारेगा। ऐसे में सभी लोग सुरक्षित हो जाएंगे। 

little krishna stories in hindi-राक्षसी पूतना का वध

मथुरा के दुष्ट राजा कंस ने सारे राक्षसों को आदेश दिया कि वे जगह-जगह जाकर शिशु कृष्ण को तलाश करें। उनमें से एक बलशाली राक्षसी पूतना को पता चल गया कि श्रीकृष्ण गोकुल में हैं। उसने एक पक्षी का रूप धारण किया और शीघ्र ही गोकुल पहुंच गई। इसके बाद वह एक गोपी के रूप में मां यशोदा के घर जा पहुंची। उसने सोचा कि वह श्रीकृष्ण को अपना जहरीला दूध पिलाकर मार डालेगी। 

आधी रात का समय था। सारा गोकुल गहरी नींद में सो रहा था। उसने श्रीकृष्ण को गोद में उठाया और बाहर जाकर अपना जहरीला दूध पिलाने लगी। शिशु कृष्ण ने राक्षसी पूतना का दूध पीने के साथ-साथ उसके प्राण भी ले लिए। राक्षसी पूतना एक चीख के साथ धरती पर गिर पड़ी। 

यशोदा और नंद आवाज सुनकर भागते हुए बाहर आए। जब उन्होंने एक राक्षसी को घर के बाहर मरा पाया, तो उन्हें एहसास हो गया कि वहां क्या हुआ होगा। इस घटना के बाद मां यशोदा शिशु कृष्ण का काफी ध्यान रखने लगीं। 

इधर जब कंस को पूतना के मारे जाने का समाचार मिला, तो उसे पूरा यकीन हो गया कि देवकी का पुत्र जीवित है और किसी दूसरे परिवार द्वारा उसका पालन-पोषण हो रहा है। 

Bal Krishna in Hindi-संपूर्ण ब्रह्माण्ड

एक दिन भगवान कृष्ण घर के आंगन में अपने बड़े भाई बलराम के साथ खेल रहे थे। दोनों बालक अभी छोटे थे। श्रीकृष्ण ने शरारत करते हुए अपने मुंह में मिट्टी भर ली। यह देखकर बलराम जोर से बोले, “मां, जल्दी आओ। कृष्ण मिट्टी खा रहा है। इसने मिट्टी मुंह में भर ली है।” यशोदा चिल्लाती हुई आईं, “अरे कृष्ण! मिट्टी क्यों खा रहा है? अपना मुंह खोलकर दिखा। देखू, बलराम सच कह रहा है या नहीं।” 

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मां यशोदा की बात सुनकर भगवान कृष्ण की आंखें चमक उठीं। उन्होंने मुस्कराते हुए अपना मुंह खोल दिया। मां यशोदा उनके मुंह के भीतर का दृश्य देखकर हैरान हो गईं। उनके मुंह में संपूर्ण ब्रह्माण्ड दिखाई दे रहा था। तभी यशोदा को याद आया कि गर्ग मुनि ने उनके बेटे के बारे में क्या कहा था। अब उन्हें पूरी तरह विश्वास हो गया कि उनका बेटा कोई साधारण मनुष्य नहीं, बल्कि भगवान स्वयं ही हैं। 

बेटे कृष्ण के मुंह में संपूर्ण ब्रह्माण्ड देखकर यशोदा का सिर चकरा गया था। लेकिन उन्होंने किसी तरह खुद को संभाला, फिर बालक कृष्ण को अपने गले से लगा लिया। नन्हे कृष्ण की आंखें शरारत से चमक रही थीं। आज भगवान कृष्ण ने जान-बूझकर मां यशोदा को अपने असली रूप के दिव्य दर्शन करा दिए थे। 

Krishna bal Roop or little krishna stories in hindi – श्रीकृष्ण ने हराया तृणवर्त को

तृणवर्त एक विशालकाय राक्षस था। कंस ने उसे श्रीकृष्ण के वध के लिए भेजा। तृणवर्त इतना शक्तिशाली था कि वह बवंडर और तूफान ला सकता था। उसने सोचा, ‘मेरे लिए तो बालक कृष्ण को मारना बाएं हाथ का खेल है।’ वह भगवान कृष्ण को मारने के लिए गोकुल पहुंचा और एक जगह छिपकर उनका इंतजार करने लगा। जब श्रीकृष्ण उसके पास से गुजरे, तो वह तेज तूफानी हवा के साथ उन्हें घर से दूर उड़ा ले गया। 

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जब श्रीकृष्ण घर में नहीं आए, तो गोपियां उन्हें ढूंढने लगीं। श्रीकृष्ण के न मिलने पर वे भयभीत हो गईं। यशोदा घबराकर रोने लगीं, “हाय! मेरा लाल कहां गया।” इधर भगवान कृष्ण ने उस राक्षस को एक चट्टान पर ऐसा पटका कि वह तत्काल मर गया। बहुत देर बाद यशोदा और गोपियों को भगवान कृष्ण मिले। वे मरे हुए राक्षस की छाती पर बैठे खेल रहे थे। यशोदा ने तुरंत अपने बेटे को सीने से लगा लिया और चैन की सांस ली। 

भगवान कृष्ण के लिए संकट बढ़ता ही जा रहा था। दुष्ट कंस प्रतिदिन नई-नई चालें चलता और बलशाली राक्षसों को गोकुल भेजता, ताकि वे नन्हे बालक को जान से मार सकें। इधर मां यशोदा ने निश्चय किया कि वे अपने बालक को बहुत सावधानी से रखेंगी और । और इधर-उधर नहीं जाने देंगी। अपने निश्चय के अनुसार वे बालक कृष्ण को घर से बाहर नहीं जाने देती थीं। एक-दो दिन तो इस तरह बीत गए, लेकिन बालक कृष्ण एक स्थान पर बंधकर बैठने वालों में से नहीं थे। नटखट श्रीकृष्ण की लीलाएं भला घर में रहकर कैसे हो सकती थीं। 

Bal Krishna Stories in Hindi- माखनचोर

भगवान कृष्ण को मक्खन और दही खाना बहुत अच्छा लगता था। वे अक्सर दही और मक्खन से भरे बर्तनों पर नजर रखते थे। गोकुल की सभी गोपियां रोजाना मक्खन बिलोती थीं, अतः उन्हें आसानी से मक्खन चुराने का मौका मिल जाता था। इस काम के लिए वे कभी-कभी अपने मित्रों की सहायता भी ले लेते थे। 

Bal Krishna Stories in Hindi- माखनचोर

मक्खन चुराने के कारण सब लोग भगवान कृष्ण को ‘माखनचोर’ कहने लगे थे। गोकुल की लड़कियां दही बिलोकर मक्खन निकालती थीं, इसलिए उन्हें ‘गोपियां’ कहा जाता था। वे अक्सर मां यशोदा से शिकायत करती थीं कि उनका बेटा कृष्ण उनके घर आकर मक्खन चुरा लेता है। भगवान कृष्ण गोपियों के लिए मुसीबत बने हुए थे, लेकिन वे उनकी दिव्य सुंदरता और भोलेपन पर मंत्रमुग्ध भी रहती थीं। श्रीकृष्ण गोपियों के साथ तरह-तरह की शरारतें करते थे, लेकिन वे उन्हें बहुत चाहती थीं। मां यशोदा अक्सर सोचती रहती थीं, ‘अब मेरा बेटा क्या करिश्मा कर दिखाएगा।’ 

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