बद्रीनाथ तीर्थ स्थल-Badrinath tirth sthal

बद्रीनाथ तीर्थ स्थल

बद्रीनाथ तीर्थ स्थल

भारत के चार पवित्र धामों में बदरीनाथ धाम का महत्वपूर्ण स्थान है। तीन अन्य धाम हैं-द्वारका, जगन्नाथ, रामेश्वरम्। उत्तराखंड राज्य में हिमालय की गोद में बसे बदरीनाथ धाम की समुद्र तल से ऊंचाई 3122 मीटर है।

कहा जाता है कि यहां बदरी अर्थात् बेर के घने वन होने के कारण ही इस क्षेत्र का नाम बदरी वन पड़ा। बाद में आदिशंकराचार्य के समय से यह क्षेत्र बदरीनाथ के नाम से विख्यात हुआ। पौराणिक दृष्टि से इस सर्वाधिक प्राचीन क्षेत्र की स्थापना सतयुग में हुई थी। 

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पुराणानुसार भगवान विष्णु के चौथे अवतार नर-नारायण ने आध्यात्मिक शांति पाने के लिए इसी स्थान पर तप किया था। इन्हीं के नाम पर नर-नारायण नामक दो पर्वत हैं जिनमें से नारायण नामक पर्वत के निकट अलकनंदा के दाएं तट पर 45 फीट की ऊंचाई पर बदरीनाथ का मंदिर है जिसमें भगवान विष्णु नारायण के रूप में विराजमान हैं। यह मंदिर पूर्वाभिमुखी है। 

बद्रीनाथ के दर्शनीय स्थल-Badrinath ke darshan sthal

बद्रीनाथ के दर्शनीय स्थल

तप्तकंड : इस कुंड में स्नान करने के बाद ही दर्शन के लिए मंदिर में जाना पड़ता है।  यात्री अपने साथ वनतुलसी की माला, चने   दाल, गोला गीरी. मिसरी का प्रसाद चढाने के लिए ले जाते है। 

इसके अलावा ऋषि गंगा, कूर्मधारा, तप्तकुंड, प्रहलादधारा, नारदकंड, गरुड शिला,नारद शिला,मार्कडेय शिला, नरसिंह शिला, वाराही शिला आदि अन्य दर्शनीय स्थल हैं। 

बद्रीनाथ कब जाए

मई से जून और सितंबर से अक्तूबर तक। 

बद्रीनाथ कैसे जाए

हवाई मार्ग : निकटतम हवाई अड्डा जॉलीग्रांट है, जो देहरादून में है। यहां से बदरीनाथ की दूरी 326 किलोमीटर है। यहां से आप निजी वाहनों की सेवाएं हासिल कर सकते हैं।

रेल मार्ग : रेल मार्ग द्वारा केवल ऋषिकेश तक ही पहुंचा जा सकता है। यहां से बदरीनाथ की दूरी 295 किलोमीटर है। 

सड़क मार्ग : बदरीनाथ उत्तराखंड के कई शहरों से सड़क मार्ग द्वारा जुड़ा हुआ है, जैसे हरिद्वार, ऋषिकेश, देहरादून, पौड़ी, चमोली आदि। यह गाजियाबाद के एनएच-58 से भी जुन हुआ है। 

बद्रीनाथ में कहा ठहरे

बदरीनाथ में यात्रियों के ठहरने के लिए अनेक धर्मशालाएं एवं अतिथि-गृह हैं। इनके अला यहां स्थानीय पंडों द्वारा भी यात्रियों के ठहरने की व्यवस्था की जाती है। बदरीनाथ ठंडा स्था है। यहां मई-जून में भी काफी ठंड पड़ती है, इसलिए यात्रियों को अपने साथ गरम वस्त्र अवश्य ले जाने चाहिए।

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