कर भला तो हो भला

कर भला तो हो भला

बच्चों की कहानियाँकर भला तो हो भला

किले के अंदर पुराने महल में युवराज शेरा का राज्याभिषेक होना था।उसे राजगद्दी पर बैठाने से पहले राजमहल में दरबार और महल के विशाल कक्षों को भी नए सिरे से सजाने की तैयारी हुई। 

महाराज शेरसिंह ने पड़ोसी राज्य की दो कंपनियों को फर्नीचर बनाने का काम दिया था। दोनों अपने काम के लिए प्रसिद्ध थे। एक का मालिक लालू बंदर, तो दूसरे का कालू था। 

आदेश के मुताबिक लालू-कालू का काम शुरू हुआ।संयोग से उनके कारीगर और मजदूर कच्चा माल लेकर एक साथ ही राजमहल में पहुंचे। वहीं परसारासामान बनना था।लालू का काम एक सप्ताह में ही पूरा हो गया। 

यह बात जानकर महाराज काम देखने आए।महाराज को देख लालू खुश हुआ। वह अपने माल की तारीफ करने लगा। उसने चापलूसी से महाराज के कान भरे,“हुजूर!कालू के कारीगरों ने बहुत खराब लकड़ी लगाई है। उसका फर्नीचर यहां के योग्य ही नहीं है।” 

महाराजकुछ नहीं बोले।उन्होंने सोचा, कालू के काम में जरूर गड़बड़ होगी, इसलिए उसका काम धीमा है।दूसरी सुबह महाराज ने कालू के कारीगरों को आदेश दिया, “अपने मालिक से कहो, वह अपना खराब फर्नीचर वापस ले जाए।” 

जैसे ही यह खबर कालू को मिली, वैसे ही वह दरबार में पहुंचा और महाराज से मिला।उसने हाथ जोड़ते हुएकहा, “महाराज!मैंने प्रत्येक फर्नीचर में बढ़िया लकड़ी का उपयोग किया है।आप किसी भी पारखी से जांच करा लीजिए।” 

महाराज ने राज्य के पुराने बढ़ई पलटू लंगूर को सामग्री की जांच करने का हुक्म दिया। पलटू ने माल को भी अपनी पैनी नजरों से जांचा-परखा और बताया, “हुजूर! कालू ने जोलकड़ी लगाई है, वह बहुत अच्छी है।” 

महाराज ने कालू को अपना काम चालू रखने का आदेश दिया। फिर बोले,“लालू बंदरतो फटाफट अपना काम पूरा कर यहां सेजा चुका है।जरा उसे देखकर तुम हमें बताओ कि वह कैसा है?” 

“महाराज!मैं केवल अपने माल के बारे में ही बता सकता हूं। दूसरे के काम को हलका-नीचा बताना मेरी आदत नहीं है।” कालू ने जवाब दिया। 

युवराज शेरा के राज्याभिषेक में महाराज शेरसिंह की मुंह बोली मौसी, बिल्लो रानी भी पधारी। उसने अपने लिए भी नए फर्नीचर बनवाने की इच्छा जाहिर की, तब महाराज ने कालू का नाम सुझाया। बिल्लोरानी अपनी हवेली में लौटी।उसने कालू को नए फर्नीचर बनाने का आदेश भेज दिया। 

आदेश पाकर कालू ने बड़ी नसता से उत्तर भेजा, “बहन इस समय मेरे पास काम की अधिकता है।यदि आप चाहें, तो मेरे पड़ोसी लालूसे यह काम करवा सकती हैं। वह अच्छा फर्नीचर बना देगा|

इसके बाद बिल्लो रानी ने लालू को आर्डर भेजा, “मुझे अपनी हवेली के लिए नया फर्नीचर बनवाना है। यह काम तुम्हें ही करना है। तुम्हारे काम की तारीफ हमें पड़ोसी कालू के पत्र से मिली है।” 

बिल्लो की चिट्ठी पढ़कर लालू तुरंत कालू की दुकान पर गया और माफी मांगते हुए बोला, “कालू भैया! मैंने आपको अपना प्रतिद्वंद्वीसमझा। ‘फिर भी तुमने मेरी तारीफ कर मुझे नया काम दिलाया। मुझे माफ कर देना।” 

कालू ने केवल इतना ही कहा, “कर भला तो हो भला, अंत भले का भला।

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