Atm fraud se kaise bache -ए.टी.एम. से जुड़ी सावधानियाँ 

atm fraud se kaise bache

Atm fraud se kaise bache -ए.टी.एम. से जुड़ी सावधानियाँ 

Atm ka full form-(automatic teller machine स्वचालित टेलर मशीन) ए.टी.एम. ने ग्राहकों को जब भी नकदी की आवश्यकता हो, उनके निकटतम ए.टी.एम. में उसे उपलब्ध कराकर उनकी सुविधा में वृद्धि की है। स्वचालित टेलर मशीन (ए.टी.एम.) की पहली व्यावसायिक शुरुआत 1960 के दशक में की गई।

बढ़ती आधुनिकता बैंकिंग सेवाओं को और भी आसान बनाती जा रही है। ए.टी.एम. कार्ड भी बैंकिंग सेवाओं के अंदर मिलनेवाली प्रमुख सहूलियतों में से एक है।

ए.टी.एम. कार्ड सुविधा तो देता है, लेकिन उसके प्रयोग और रखरखाव में सावधानी जरूर बरती जानी चाहिए। कुछ असावधानी व कुछ अपराधियों के कारनामों से ए.टी.एम. फ्रॉड की घटनाएँ बढ़ी हैं। डेबिट कार्ड के पीछे अगर आपने पासवर्ड लिख दिया और डेबिट कार्ड चोरी हो गया तो फिर आपके एकाउंट से पैसे का आसानी से ट्रांजेक्शन हो जाएगा। 

वित्तीय संस्थानों ने अपने ए.टी.एम. में ज्यादा सुरक्षा और धोखाधड़ी के लिए गुंजाइश कम करने की कई रणनीतियाँ लागू की हैं। इनमें शामिल है ए.टी.एम. की स्थापना के लिए सुरक्षित स्थान का चयन, निगरानी वीडियो कैमरों की स्थापना, दूरस्थ निगरानी की स्थापना, कार्ड की जानकारी अनधिकृत रूप से पढ़कर निकाल लिये जाने के विरुद्ध समाधान और ए.टी.एम. या इंटरनेट पर लेनदेन के समय व्यक्तिगत जानकारी की सुरक्षा के विभिन्न तरीकों की जानकारी देकर उपभोक्ताओं की जागरूकता बढ़ाना। 

ATM KI DHOKHA DHADI SE KAISE BACHEN-  ए.टी.एम. की धोखाधड़ी

ए.टी.एम. में कई तरह से धोखाधड़ी की जा रही है। जालसाज ए.टी.एम. कार्ड स्लॉट में प्लास्टिक की फिल्म का एक टुकड़ा तह करके डालता है, ताकि वह कार्ड को पकड़ ले और मशीन द्वारा उसे बाहर फेंकने की अनुमति न दे। उपभोक्ता समझता है कि उसका कार्ड मशीन में फंस गया है और वह नहीं जान पाता है कि कार्ड स्लॉट के साथ छेड़छाड़ की गई है।

एक बार डाला गया कार्ड फँस जाता है तो जालसाज एक जायज कार्डधारक के रूप में शिकार को अपना सुरक्षा कोड पुनः दर्ज करने का सुझाव देता है। जब कार्डधारक अंततः निराश होकर चला जाता है, तो जालसाज कार्ड निकालकर गुप्त रूप से देखा गया कोड दर्ज कर देता है। 

एक और तरीका है—छोटे कैमरों और ‘स्किमर्स’ नामक ऐसे उपकरणों द्वारा एकत्रित डेटा का उपयोग, जो बैंक खाते की जानकारी पढ़कर रिकॉर्ड कर लेते हैं। इसमें जोखिम कम होता है, क्योंकि इसमें जालसाज व शिकार के बीच कोई संवाद नहीं होता तथा जालसाज की अनुपस्थिति कार्डधारक को थोड़ा अधिक बेपरवाह बना देती है तथा वह पासवर्ड की सुरक्षा के बारे में कम सजग हो जाता है। 

जालसाज द्वारा डुप्लीकेट ए.टी.एम. जिसमें ऐसे सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया जाता है, जो उन मशीनों पर टाइप किए गए पासवर्ड रिकॉर्ड कर लेता है। उसके बाद डुप्लीकेट कार्ड निर्मित किए जाते हैं और चोरी के पासवर्ड का उपयोग कर पैसे निकाले जाते हैं। कभी-कभी ऐसी धोखाधड़ी अंदरूनी होती है, जिसमें कार्ड जारी करनेवाली कंपनी के कर्मचारियों की मिलीभगत होती है। 

Atm card cvv fraud एटीएम कार्ड सीवीवी  फ्रॉड 

सीवीवी यानी ‘कार्ड वेरीफिकेशन वैल्यू’ एक सिक्योरिटी कार्ड नंबर है, जो हर क्रेडिट कार्ड में अंकित होता है। यह नंबर कार्ड रखनेवाले की अतिरिक्त पहचान और फर्जीवाड़े से बचाने के लिए कार्ड में दिया जाता है। कार्ड चोरी या गुम होने की स्थिति में इस नंबर से ऑनलाइन मिलान कर पैसे की निकासी की जाती है।

अलग-अलग तरह के कार्ड में यह अलग जगह अंकित हो सकता है। उदाहरण के लिए वीजा, यूरो, मास्टर आदि कार्ड में तीन डिजिट का यह ‘यूनिक नंबर’ कार्ड के पिछले हिस्से पर हस्ताक्षरवाले स्थान के दाई तरफ होता है। इन तीन अंकों के पहले क्रेडिट कार्ड का नंबर भी होता है।

इससे अलग ‘अमेरिकन एक्सप्रेस’ समेत कई क्रेडिट कार्ड में यह चार डिजिट का होता है और कार्ड में सामने की ओर ही कार्ड नंबर से थोड़ा अलग अंकित होता है। अगर किसी कार्ड में सीवीवी पता नहीं चल रहा हो तो क्रेडिट कार्ड देनेवाले संस्थान से इस बारे में पूछा जा सकता है।

मास्टरकार्ड में इस कोड को सीवीसी2, वीजा कार्ड में इसे सीवीवी या सीवीवी2 और डिस्कवर कार्ड में इसे सीआइडी नंबर कहा जाता है। इन्हें चाहे जिस नाम से जाना जाता हो, लेकिन कार्ड जारी करते समय ही इसे बनाया जाता है।

उपभोक्ता के पैन कार्ड एक्सपायरी डेट और सर्विस कोड के साथ जारी करनेवाले बैंक की ओर से दिए जानेवाले कार्ड वेरीफिकेशन को जोड़कर यह ‘यूनिक कोड’ तैयार होता है। 

ए.टी.एम. कार्ड को जब इलेक्ट्रॉनिक डाटा कैप्चर (ईडीसी) मशीन में स्वैप किया जाता है तो बैंक के सर्वर में कार्ड के मैग्नेटिक स्ट्रिप का नंबर डाटाबेस ही प्रेषित होता है। कार्ड के ऊपर का नंबर सर्वर में प्रेषित नहीं होता है। इस तरह से पूरे कार्ड का मिलान या सत्यापन बैंकों के आँकड़ों से नहीं हो पाता है। इसी तकनीकी दोष का फायदा उठाकर अपराधी तत्त्व इन घटनाओं को अंजाम देते हैं। 

atm ki upyog ke dauran savdhaniya-ए.टी.एम. कार्ड प्रयोग के दौरान सावधानियाँ 

ए.टी.एम. का उपयोग करते समय सावधान रहें, खासकर तब, जबकि नकद प्राप्त हो रहा हो। उस दौरान निम्नलिखित सावधानियों का पालन करें 

कार्ड हमेशा अपने पास रखें। 

जब भी नया कार्ड प्राप्त हो, उसके पीछे अपने हस्ताक्षर करें। 

ए.टी.एम./डेबिट कार्ड के पीछे दिए तीन डिजिटवाले सीवीवी नंबर को याद करके उसे स्क्रेच कर अपठनीय कर देना चाहिए, ताकि बारे में पूछा जा सकता है। 

मास्टरकार्ड में इस कोड को सीवीसी2, वीजा कार्ड में इसे सीवीवी या सीवीवी2 और डिस्कवर कार्ड में इसे सीआइडी नंबर कहा जाता है। इन्हें चाहे जिस नाम से जाना जाता हो, लेकिन कार्ड जारी करते समय ही इसे बनाया जाता है।

उपभोक्ता के पैन कार्ड एक्सपायरी डेट और सर्विस कोड के साथ जारी करनेवाले बैंक की ओर से दिए जानेवाले कार्ड वेरीफिकेशन को जोड़कर यह ‘यूनिक कोड’ तैयार होता है।

ए.टी.एम. कार्ड को जब इलेक्ट्रॉनिक डाटा कैप्चर (ईडीसी) मशीन में स्वैप किया जाता है तो बैंक के सर्वर में कार्ड के मैग्नेटिक स्ट्रिप का नंबर डाटाबेस ही प्रेषित होता है।

कार्ड के ऊपर का नंबर सर्वर में प्रेषित नहीं होता है। इस तरह से पूरे कार्ड का मिलान या सत्यापन बैंकों के आँकड़ों से नहीं हो पाता है। इसी तकनीकी दोष का फायदा उठाकर अपराधी तत्त्व इन घटनाओं को अंजाम देते हैं। 

ए.टी.एम. कार्ड प्रयोग के दौरान सावधानियाँ ए.टी.एम. का उपयोग करते समय सावधान रहें, खासकर तब, जबकि नकद प्राप्त हो रहा हो। उस दौरान निम्नलिखित सावधानियों का पालन करें 

कार्ड हमेशा अपने पास रखें। 

जब भी नया कार्ड प्राप्त हो, उसके पीछे अपने हस्ताक्षर करें। 

ए.टी.एम./डेबिट कार्ड के पीछे दिए तीन डिजिटवाले सीवीवी नंबर को याद करके उसे स्क्रेच कर अपठनीय कर देना चाहिए, ताकि आपका कार्ड सुरक्षित रहे। 

किसी अवांछित अथवा अवधि समाप्त कार्ड को कार्ड जारीकर्ता से संपर्क कर रद्द करवाएँ और अवांछित अथवा अवधि समाप्त कार्ड को कम-से-कम दो भागों में काट दें।

कार्ड गुम होने के मामले में किसी अन्य द्वारा कार्ड का दुरुपयोग रोकने हेतु तुरंत संबंधित शाखा अथवा कस्टमर केयर सेंटर से संपर्क करें। 

लेनदेन पूरा होने के पश्चात्, कार्ड वापस लेना याद रखें। 

यदि नकदी मशीन कार्ड वापस नहीं करती, इसकी हानि की, खोने/गुम होने की सूचना तुरंत ए.टी.एम. पर दरशाए गए नंबरों पर यूजर बैंक/शाखा को दें। 

ए.टी.एम. के आसपास संदिग्ध व्यक्तियों या गतिविधि के प्रति सजग रहें। आपको कुछ भी अजीब दिखाई दे, तो वहाँ से निकल जाएँ। 

अँधेरे के समय किसी साथी के साथ जाएँ। 

अपना ‘एक्सेस कोड’ या पिन दर्ज करते समय अपने शरीर का एक ढाल के रूप में प्रयोग करें, ताकि टाइप करते समय कोई उसे देख न पाएँ।
अपने लेनदेन की समस्त रसीदें अपने साथ ले जाएँ, उन्हें ए.टी.एम. के पास नहीं फेंकें।

नकदी मिल जाए तो उसे लेकर दूर जाएँ, ए.टी.एम. के सामने खड़े होकर नहीं गिनें। 

एकांत में लगे ए.टी.एम. की अपेक्षा खुले या भीड़भाड़वाले स्थानों में लगे ए.टी.एम. का उपयोग करें। 

हर लेनदेन पूरा होने अथवा अधूरा रहने के बाद ए.टी.एम. में दिए गए कैंसल बटन जरूर दबाएँ। 

ए.टी.एम. कार्ड काम नहीं करने पर अलग अलग मशीनों पर आजमाएँ नहीं। 

अपरिचित या अनजान व्यक्ति को कार्ड कदापि न दें। 

अपने बचत खाते से पैसा निकालने एवं जानकारी प्राप्त करने के लिए दूसरे बैंकों के ए.टी.एम. का भी उपयोग कर सकते हैं, परंतु ऐसा आवश्यक होने पर ही करना चाहिए, क्योंकि दूसरे बैंकों के ए.टी.एम. के उपयोग की कुछ सीमाएँ हैं, उसके बाद शुल्क लगने लगता है।

अपने ही बैंक का इस्तेमाल करने से ये भी फायदा है कि अगर कभी बिना पैसा मिले आपका खाता डेबिट हो जाता है तो रकम वापसी एक ही बैंक का मामला होने के कारण शीघ्रता से हो जाती है। 

अगर कार्ड खो जाता है या ए.टी.एम. मशीन में फँस जाता है तो तुरंत अपने बैंक से संपर्क करें और अपने ए.टी.एम. कार्ड को ब्लॉक करने के लिए कहें। अपनी समस्या जल्दी 

हल हो, इसके लिए अपने बैंक में शिकायत लिखित रूप में भी दर्ज कराएँ। 

यदि आप अपना पिन भूल गए हैं तो परेशान होने की जरूरत नहीं है। अपने बैंक जाकर नए पिन के लिए आवेदन करें। नया पिन प्राप्त करने में लगभग एक सप्ताह लगता है। 

ए.टी.एम. के माध्यम से प्रति दिन 25,000 से 40,000 रुपए तक निकाले जा सकते हैं, कुछ ए.टी.एम. सेवाओं में यह राशि ज्यादा भी हो सकती है। 

मशीन से नोट बाहर आने के बाद तुरंत उठा लें, नहीं तो वे वापस मशीन के अंदर चले जाएँगे। यदि ऐसा होता है तो आप तुरंत अपने बैंक में शिकायत करें। 

विफल रहे लेन-देन के सबूत के रूप में ए.टी.एम. परची सुरक्षित रखें। 

एक ए.टी.एम. मशीन हर लेन-देन के बाद तीस सेकंड के लिए सक्रिय रहती है, तो आप वेलकम लोगो मशीन पर फिर से प्रदर्शित होने का इंतजार करें, उसके बाद ही मशीन छोड़ें। 

आपके ए.टी.एम. कार्ड पर उसकी समाप्ति अवधि लिखी होती है। कार्ड की समाप्ति की अवधि से पहले नए ए.टी.एम. कार्ड के लिए आवेदन कर दें। 

ए.टी.एम. कार्ड के पीछे की ओर काले रंग की पट्टी बनी होती है, जोकि एक चुंबकीय पैनल होता है। इस पर खरोंच न लगने दें, न ही इसे टीवी के पास रखें। 

अजनबियों से ए.टी.एम. के लिए कभी सहायता स्वीकार नहीं करें, मदद के लिए बैंक से पूछे। 

अपना ‘एक्सेस कोड’ याद रखें, उसे कहीं नहीं लिखें, न ही अपने साथ रखें। 

ऐसे एक्सेस कोड का उपयोग न करें, जो आपकी जेब में मौजूद अन्य शब्दों या संख्या के समान हो। 

अपना ‘एक्सेस कोड’ बैंक कर्मचारियों, पुलिस सहित कभी किसी को न बताएँ । 

अपना ए.टी.एम. कार्ड कभी किसी को नहीं दें। इसे नकद या क्रेडिट कार्ड की तरह समझें। 

बैंक आपके ए.टी.एम. विवरण ऑनलाइन दर्ज करने के लिए कभी ई-मेल नहीं भेजता। 

नियमित रूप से अपने खाते में ए.टी.एम. विवरण की जाँच करें और अपने लेनदेन का हिसाब-किताब रखें। 

कुछ महत्त्वपूर्ण सुझाव 

ए.टी.एम. मशीन में कुछ भी असाधारण दिखनेवाली बात से सावधान रहें, जैसे अजीब दिखनेवाले उपकरण या उपकरण के साथ संलग्न तार। 

छेड़छाड़ नहीं (नो टेंपरिंग) चिह्न देखें। 

बदमाश किसी नए उपकरण के बारे में उत्सुक लोगों को रोकने के लिए इन्हें लगा देते हैं। 

जाम ए.टी.एम. मशीन से बचें, जो ग्राहकों को ऐसी ए.टी.एम. मशीन के उपयोग के लिए विवश करती है, जिसमें स्किमर लगा हो। अकसर अपराधी क्षेत्र में अन्य ए.टी.एम. निष्क्रिय कर देता है, ताकि उपयोगकर्ता उस मशीन पर आकर्षित हों, जिसमें स्किमर लगा हो। 

पिन प्राप्त करते समय सुनिश्चित करें कि लिफाफे और सिक्यूरिटी दस्तावेज से छेड़छाड़ नहीं की गई है। छेड़छाड़ के मामले में तुरंत कॉल सेंटर से संपर्क करें एवं उस पिन का इस्तेमाल न करें। 

पिन को कार्ड के साथ न रखें। पिन को सदैव याद कर लें एवं पिन मेलर को नष्ट कर दें। 

पहली बार प्रयोग के बाद ही ए.टी.एम. कार्ड पिन नंबर को समय-समय पर बदलते रहें। 

अपने फोन या मोबाइल नंबर, जन्मतिथि, गली नंबर या 1111, 1234 इत्यादि को पिन बनाने से बचें। 

कार्ड पर अथवा ऐसे स्थानों पर जहाँ अन्य आसानी से पहुँच बना सकें, कभी भी यूजर पिन अथवा सुरक्षा जानकारी न लिखें अथवा रिकॉर्ड करें। 

कार्ड पर दिए गए यूजर पिन अथवा सुरक्षा जानकारी किसी अन्य को न बताएँ, न तो बैंक और न ही अधिकृत एजेंसियाँ पिन बताने के लिए कहती हैं। 

खाताधारी अपने खाते से संबंधित बैंक में अपना पैन नंबर, मोबाइल नंबर, वर्तमान/ परिवर्तित पता अवश्य अपडेट कराएँ, जिससे आपसे शीघ्र संपर्क किया जा सके। 

ए.टी.एम. में अपने ट्रांजेक्शन को पूरा हो जाने दें, उसके बाद क्लियर या क्लोज का बटन दबाकर ही ए.टी.एम. मशीन को छोड़ें। 

कुछ अन्य सावधानियाँ 

ए.टी.एम. मशीन के कीबोर्ड के ऊपर कैमरा हो सकता है। ए.टी.एम. मशीन को उपयोग करने से पहले सरसरी निगाह से परीक्षण कर लें कि कहीं मशीन इस्तेमाल करते समय आपके पासवर्ड को रिकॉर्ड करने के लिए कीबोर्ड के ऊपर कैमरा तो नहीं लगा। चोर कई बार आपका पासवर्ड चुराने के लिए कीबोर्ड के ऊपर छोटा सा जासूसी कैमरा लगा देते हैं।

शायद आपकी नजर इस पर न पड़े, पर आपका टाइप किया पासवर्ड यह रिकॉर्ड कर लेगा और आपके अकाउंट से छेड़छाड़ किए जाने की आशंका पैदा करता है। 

ए.टी.एम. से पैसे निकालकर ज्यादा वक्त तक वहाँ न रहें। कुछ लोगों की आदत होती हैं वहीं पैसे भी गिनते हैं। हालाँकि यह मशीन से सही पैसे निकलने के सत्यापन के लिए आवश्यक है, पर हो सकता है, चोरों की आप पर निगाह पड़े और वह आपकी गतिविधियों को फॉलो करते हुए आपके ए.टी.एम. कार्ड में सेंधमारी कर दें।

इसलिए कोशिश करें कि पैसे निकालकर जल्दी से वहाँ से निकल जाएँ। पैसों के सत्यापन और मशीन द्वारा किसी गड़बड़ी के हालात के लिए आप स्लिप सँभालकर रख लें और घर जाकर अच्छी तरह चेक कर लें। 

एसएमएस अलर्ट के लिए अपना फोन नंबर बैंक में दर्ज करवाएँ। इससे आपके खाते से होनेवाली ट्रांजेक्शन की पूरी जानकारी मिलती 

कुछ स्थानों पर 2, 3 एवं 5 मशीनवाले मल्टी सेंटर भी स्थापित हैं। अधिकांश ए.टी.एम. पर कार्डधारकों का दबाव ज्यादा रहता है, इस दौरान नियम विरुद्ध अनिवार्यता से अधिक लोग अंदर खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार करते हैं। ऐसे में कार्डधारक भी 

ट्रांजेक्शन के लिए गुप्त अंक दबाने से संकोच करते हैं, लेकिन मजबूरीवश उन्हें कोड दबाना पड़ता है। इस प्रकार के ट्रांजेक्शन में गुप्त अंक की गोपनीयता भंग होने का खतरा रहता है।

इसके अलावा अनेक लोग ट्रांजेक्शन करने के बाद ए.टी.एम. परची वहीं छोड़ जाते हैं। ऐसी लापरवाही से आपराधिक तत्त्व फायदा उठाते हैं, इसलिए जरूरी है कि ट्रांजेक्शन के दौरान नियम विरुद्ध कक्ष में घुसनेवालों को निवेदनपूर्वक बाहर भेजकर सुरक्षित तरीके से पैसा निकालना चाहिए। पूर्व में इस तरह के ट्रांजेक्शन के दौरान आपराधिक घटना भी हो चुकी हैं। 

अगर बैंक ए.टी.एम.-कम-डेबिट कार्ड खो जाने की शिकायत दर्ज करने में आनाकानी करे तो इसके लिए उपयोगकर्ता कंज्यूमर एक्ट के तहत बैंक पर केस कर सकता है। सेवा में कमी के लिए यह केस किया जा सकता है। 

ए.टी.एम. मशीन का उपयोग करनेवाले अधिकतर लोग जल्दी में दिखाई देते हैं। रकम निकालने के बाद उनका ध्यान रसीद प्राप्त करने और नोट गिनने में ज्यादा होता है। इस चक्कर में वे कैंसल का बटन दबाने या सुरक्षित तरीके से निकालने पर ध्यान नहीं देते। मशीन के उपयोग के लिए ए.टी.एम. रूम के अंदर जाने से लेकर बाहर आने तक में हड़बड़ाहट बिल्कुल नहीं रखें। 

ए.टी.एम. उपयोग के दौरान कई बार मशीन हैंग हो जाती है। ऐसे में लोग उसे छोड़कर दूसरी मशीन पर चले जाते हैं। इस तरह की गलती नुकसानदेह साबित होती है। जब भी उपयोग के दौरान मशीन हैंग हो तो मशीन को अकेला नहीं छोड़कर उसके नजदीक ही रहना चाहिए। हर ए.टी.एम. के लिए हेल्पलाइन नंबर होता है। तुरंत सूचना दें।

ऐसा नहीं होने पर बैंक अथवा सुरक्षाकर्मी को भी समस्या से अवगत कराएँ। कैंसल का बटन दबाएँ। अधिकतर मौकों पर हैंग होने के बाद कुछ ही मिनट में मशीन मुख्य मैन्यू पर आ जाता है। मुख्य मैन्यू आने से पहले मशीन से दूर नहीं जाएँ। 

atm card kharab hone se kaise bachen एटीएम कार्ड को खराब होने से बचाएँ 

एक साथ दो कार्ड रखने पर दोनों के मैग्नेट टेप में दर्ज जानकारी स्वतः ही समाप्त हो सकती है। लगातार छह महीने तक ट्रांजेक्शन नहीं करने पर। भीगने, रगड़ने, धूल, गंदगी लगने पर। कार्ड जारी होने के डेढ़ माह बाद तक पिन नंबर प्राप्त न करने पर। बैंक से निर्धारित अवधि के बाद मैग्नेट टेप घिसने और उखड़ने पर। मैग्नेट टेप पर उँगली लगने या पसीना लगने से भी कार्ड खराब हो सकता है। 

ए.टी.एम. कार्ड की क्लोनिंग 

कुछ दिन पहले मेरे एक मित्र ने बैंक में शिकायत करके बताया कि किसी ने उसके खाते से दस हजार रुपए निकाल लिये हैं हालाँकि जिस ए.टी.एम. से रुपए निकाले गए, वह किसी दूसरे शहर में है। लोगों को पता ही नहीं चलता और ए.टी.एम. कार्ड अपने पास होते हुए भी उनके खाते से रुपए निकल जाते हैं।

ऐसा स्किमिंग के कारण होता है। स्किमिंग एक ऐसी प्रणाली है, जिसमें लोग आपके ए.टी.एम. की चुंबकीय पट्टी का प्रारूप तथा पिन चुरा लेते हैं। इसके बाद ये लोग आपके कार्ड का क्लोन (नकल) बनाकर मशीन से रुपए निकाल लेते हैं। 

स्किमिंग से बचाव 

अपने ए.टी.एम. मशीन के उस स्लोट को जरा ध्यान से देखें, जहाँ पर कार्ड डाला जाता है। इसका बॉर्डर ए.टी.एम. की बॉडी से मैच होना चाहिए। अगर आपको लगे कि यह नया-नया फिट हुआ है अथवा इसका रंग मशीन के रंग से मेल नहीं खाता, तो फौरन सतर्क हो जाएँ, क्योंकि स्किमर इसमें कार्ड की चुंबकीय पट्टी को नकल करनेवाला उपकरण फिट कर देते हैं।

ए.टी.एम. के स्क्रीन के पास ही एक पिन होल कैमरा लगा देते हैं, जो आप द्वारा प्रयोग किया गया पिन रिकॉर्ड कर लेता है। कई बार पिन चुराने के लिए असली ‘की-बोर्ड’ के ऊपर एक नकली ‘की-बोर्ड’ फिट कर दिया जाता है। अतः आपको ए.टी.एम. में लगे किसी पार्ट पर जरा भी शक हो तो इसे प्रयोग में न लाएँ वरना आप स्किमर के फैलाए हुए जाल में फँस सकते हैं। 

  • ए.टी.एम. केबिन में प्रवेश करने से पहले यह सुनिश्चित कर लें कि कोई दूसरा व्यक्ति इसके अंदर न हो। अगर कार्ड डालने की जगह वाला इंडिकेटर ब्लिंक न कर रहा हो तो इसे प्रयोग न करें।
  • अपने कार्ड को अंदर डालते समय ध्यान दें कि स्वाइप होल एकदम सामान्य है अथवा कुछ अलग तरह का दिखाई दे रहा है तो इसका कतई प्रयोग न करें।
  • पिन एंट्री करते समय अपनी उँगलियों को दूसरे हाथ से छिपा लें ताकि पिन-होल कैमरा आपकी उँगलियों की तसवीर लेकर पिन नंबर न चुरा सके। 

atm kho jane par kya kare -ए.टी.एम. खो जाने पर खाता कितना सुरक्षित? 

डेबिट कार्ड खो जाने पर आपका अकाउंट कितना सुरक्षित है? कोई भी बैंक आपको इस बारे में नहीं बताएगा। अपने बैंकर से बात करके अपने कार्ड के खोने या चोरी होने की स्थिति में सुरक्षा की जानकारी लें। 

ए.टी.एम. ट्रांजेक्शन की हर रसीद सँभालकर रखनी चाहिए, क्योंकि ए.टी.एम. एक ऑटोमेटेड प्रोसेस है। जिस सॉफ्टवेयर के माध्यम से यह प्रक्रिया काम करती है, वह कुछ गलतियाँ भी पैदा कर सकता है।

इसकी वजह से कई सारे ट्रांजैक्शन के डुप्लिकेट भी बन सकते हैं, जो आपके लिए नुकसानदायी होगा। इन सभी परेशानियों से बचने के लिए ए.टी.एम. ट्रांजैक्शन की हर रसीद को सँभालकर रखें, जिससे कि आपका पैसा सुरक्षित रहे। समय पड़ने पर आप इन रसीदों को बैंक को दिखा भी सकते हैं। 

ऑनलाइन बैंकिंग, शॉपिंग के दौरान एटीएम कार्ड डिटेल देने से बचें, अगर नेटवर्क सही से सिक्योर्ड न हो। ऑनलाइन पेमेंट्स करने के लिए एटीएम कार्ड का इस्तेमाल करने के दौरान चेक कर लें कि वेबसाइट सिक्योर है या नहीं।

किसी को भी एटीएम कार्ड के दोनों साइड की फोटोकॉपी न दें। 

अकसर लोग ए.टी.एम. का इस्तेमाल अपने खाते में बैलेंस जानने या फिर मिनी स्टेटमेंट देखने के लिए करते हैं। ऐसा करने से बचना चाहिए। आप इसके लिए बैंक की एसएमएस सुविधा या फोन बैंकिंग सुविधा का इस्तेमाल कर सकते हैं। ऐसा करने में सुरक्षा के साथ पैसे की बचत भी है। 

atm se nakli note nikle to kya kare-ए.टी.एम. से नकली नोट निकलें तो क्या करें?

ए.टी.एम. का प्रयोग आज आम तौर पर सभी करते हैं। अगर आपके ए.टी.एम. से भी कभी नकली नोट निकलें तो आप इस तरह शिकायत कर सकते हैं 

नकली नोट निकलने पर आप सबसे पहले ए.टी.एम. के गार्ड के पास उपलब्ध शिकायत रजिस्टर में अपनी शिकायत दर्ज कराएँ और उसमें नकली नोट का नंबर जरूर लिखें। इस पर गार्ड के साइन भी ले लें। इसके पश्चात् तुरंत पुलिस में उसकी शिकायत दर्ज करवाएँ। फिर संबंधित बैंक में जाकर इस बात की जानकारी दें।

बैंक नोट की जाँच करके इस पर जब्त नकली नोट का स्टांप लगाएगा। इसका रिकॉर्ड एक रजिस्टर में लिखकर आपको एक रसीद दी जाएगी। फिर बैंक इस पर काररवाई कर सिस्टम से ऐसे नोट हटवाएगा। इस पर उचित काररवाई के लिए भारतीय रिजर्व बैंक को भी दस्तावेजी जानकारी सहित एक पत्र लिखें। 

ए.टी.एम. और आपके अधिकार 

जब ग्राहक ए.टी.एम. कार्ड मशीन में प्रयोग करता है तो उसकी सूचना सेटलमेंट एजेंसियों में जाती है, जोकि कार्ड की जानकारी को जानने के बाद संबंधित बैंक में खाते को एक्सेस करने की मंजूरी देती हैं।

इन एजेंसियों से ही ए.टी.एम. मशीन को पैसे डिस्पेंस करने की कमांड मिलती है। ऐसे में यदि वापसी की कमांड के दौरान कनेक्टिविटी टूट जाए तो बैंक खाते से तो पैसे कट जाते हैं, लेकिन मशीन से रकम की अदायगी नहीं होती। 

ऐसा होने पर क्या करना चाहिए? 

बैंक कस्टमर के तौर पर आपको अपना डेबिट कार्ड जारी करनेवाले बैंक के पास इसकी शिकायत करनी चाहिए। आपका ट्रांजेक्शन चाहे अपने बैंक के ए.टी.एम. पर फेल हुआ हो या दूसरे बैंक के ए.टी.एम. पर, आपको अपने बैंक के पास ही शिकायत करनी चाहिए। 

आरबीआई का निर्देश है कि चूँकि यह पैसा आपको नहीं मिला, ऐसे में नियमानुसार यह आपको वापस मिलना चाहिए। इसके लिए आरबीआई ने एक समय-सीमा भी तय कर रखी है। 

आरबीआई की ओर से जारी निर्देश के अनुसार, ऐसी शिकायत मिलने के सात कार्यदिवसों के भीतर बैंक को उस कस्टमर के 

खाते में पैसे वापस कर देने होंगे। 

अगर सात कार्यदिवसों के भीतर खाते में पैसे वापस नहीं आए, तो वह कस्टमर मुआवजे का हकदार होता है। सात दिनों के बाद पैसे वापस आने में जितने दिनों की देरी होती है, बैंक को हर दिन 100 रुपए के हिसाब से कस्टमर को मुआवजा देना होता है।

लेकिन अगर कोई बैंक कस्टमर अपना ट्रांजेक्शन फेल होने के 30 दिन के भीतर बैंक से इसकी शिकायत नहीं करता, तो वह व्यक्ति इस मुआवजे को पाने का हकदार नहीं होता। अगर बैंक आपकी शिकायत पर ध्यान न दे, तो आपके पास यह अधिकार है कि आप अपनी शिकायत स्थानीय बैंकिंग लोकपाल के समक्ष रखें। 

अगर बैंक ए.टी.एम.-कम-डेबिट कार्ड खो जाने की शिकायत दर्ज करने में आनाकानी करे तो इसके लिए उपयोगकर्ता कंज्यूमर एक्ट के तहत बैंक पर केस कर सकता है। सेवा में कमी के लिए यह केस किया जा सकता है। 

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