अनुशासन पर निबंध-Discipline essay in hindi

अनुशासन पर निबंध

अनुशासन पर निबंध-Discipline essay in hindi

अनुशासन पर निबंध- ‘अनुशासन’ शब्द ‘शासन’ के साथ ‘अनु’ उपसर्ग जोड़ने से बना है, जिसका अर्थ है ‘शासन के पीछे’, अर्थात् ‘शासन के पीछे चलना’ । श्रेष्ठजनों के आदेशों पर चलना या स्वशासन के अंतर्गत रहना ही अनुशासन कहलाता है। इस प्रकार, अनुशासन कायिक एवं वैचारिक नियमों का पालन है। 

प्रकृति के कण-कण अनुशासन की दास्तान कह रहे हैं। चाँद और सूरज अनुशासन में बँधकर ही रात-दिन की आँखमिचौनी खेल रहे हैं। ऋतुचक्र अनुशासन की कील पर घूमकर ही सुख, स्वास्थ्य एवं समृद्धि की सृष्टि करता है। मामूली-से-मामूली प्राणी भी जब अनुशासन की डगर पर चलते हैं, तब उनका जीवन आदर्श और अनुकरणीय बन जाता है। एक बार जब किसी ने प्रिंस बिस्मार्क से पूछा था कि आप मनुष्य को छोड़कर किस योनि में जन्म लेना पसंद करेंगे, तो उन्होंने धड़ल्ले से कहा था-चींटी, क्याकि उसका जीवन सर्वाधिक अनुशासनबद्ध होता है। चीटियों का जीवन अनशासन की एक अनमोल दस्तावेज है। काश, हम वैसा जीवन अपना पाते । 

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अनुशासन हमारे जीवन की केंद्रस्थ धूरी है। रथ का एक चक्र यदि पूरब की ओर तथा दूसरा पश्चिम की ओर जाए, तो रथ की क्या गति हो सकती है? इसी प्रकार, मनरूपी सेनापति की अवज्ञा कर यदि दोनों पाँव दो ओर चलें, दोनों हाथ दो ओर उठे, दोनों कान दो ओर सुनें तथा दोनों आँखें दो ओर देखें, तो उस मनुष्य की क्या स्थिति हो सकती है? इसीलिए, यह आवश्यक है कि हम जीवन के कदम-कदम पर अनुशासित होना सीखें। .

 युद्ध के मैदान में विजयी होने का रहस्य है–सेनापति के एक इशारे पर बिना कुछ सोचे-विचारे जूझ पड़ना। खेल के मैदान में भी वे ही प्रशंसा के पात्र होते हैं, जो कैटन के आदेश का पालन तत्परतापूर्वक करते हैं। शिक्षाप्राप्ति की भी स्वर्णिम कुंजी है-अनुशासन । जो व्यक्ति अपने गुरु की आज्ञा का उल्लंघन करता है, उनके द्वारा बताए मार्ग का अनुगमन नहीं करता, वह शिक्षित नहीं हो सकता। वह अपने जीवन में पद, प्रतिष्ठा एवं धन-सभी से वंचित रहता है।

कक्षाओं में सियार की बोली बोलनेवाले छात्र जीवन में सियार की तरह ही भुंकते-भटकते चलते हैं। परीक्षा-भवन में छुरे की नोक पर कमाल दिखानेवाले छात्र आजीवन छूरे की नोंक पर ही चलते रहते हैं-कहाँ है उनके जीवन में फूलों की सेज, कीर्ति की कुसुममाला एवं आदर का तिलक ! परिवार में ऊधम मचानेवाले, माता-पिता की बातों की परवाह न करनेवाले, बड़े-बूढ़ों के वचन पर कान न देनेवाले स्वेच्छाचारी व्यक्तियों पर जीवन भर उपहास की धूलि पड़ती है, उन्हें अपमान का गरल पीना पड़ता है। 

अनुशासन जीवन की चतुर्दिक सफलता का महामंत्र है। जैसे-पुष्प सूई और धागे का अनुशासन मानकर हार बन जाता है, वैसे ही जीवन नियमों एवं नीतियों का अनुशासन मानकर वरेण्य बन जाता है। हम महापुरुषों के जीवन पर किंचित दृष्टिपात करें, तो अनुशासन के लाभ से परिचित हो जाएँगे। महात्मा गाँधी, स्वामी विवेकानंद, लोकमान्य तिलक इत्यादि का जीवन अनुशासन का अडिग प्रकाशस्तंभ था । 

यदि हम अपने समाज और राष्ट्र की उन्नति चाहते हैं, तो इसके लिए आवश्यक है कि हम परिवार, गुरुजन, समाज और राष्ट्र के प्रति स्वयं अनुशासित हों, ऐसे अनुशासित लोगों को ही चुनाव आदि द्वारा पंचायतों में या सरकार में जाने दें, और तब जहाँ भी जिसका अन्याय या अत्याचार हो, उसका कानून और कायदे से प्रतिरोध करें। जब हम स्वयं अनुशासित होंगे, तभी दूसरे को अनुशासित रख सकेंगे-Example is better than precept; उपदेश से उदाहरण अच्छा है। . 

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