अनसुलझे रोचक रहस्य-ड्रेगन का अस्तित्व 

अनसुलझे रोचक रहस्य-ड्रेगन का अस्तित्व 

अनसुलझे रोचक रहस्य-ड्रेगन का अस्तित्व 

रहस्य रोमांच सस्पेंस और हैरत में डाल देने वाली विश्व की ऐसी सत्य घटना है जो आज भी रहस्य की धुन में दफन है।आश्चर्यजनक तथ्य जो अभी तक सिर्फ रहस्य है।

ड्रेगन एक मिथकीय दानव है। विभिन्न प्राचीन कथाओं और मिथकों के मताबिक इतिहास पूर्व के काल में विशालाकार सर्प जैसे जीव थे, जिन्हें ग्रीक भाषा में ड्रेकन कहा गया, जो अंग्रेजी में आकर ड्रेगन हो गया। वैसे तो पिछले कुछ दशकों की जीव वैज्ञानिकों की खोज में यह साबित करने की कोशिश की गई है कि कभी सचमुच इस दुनिया में ड्रेगनों का अस्तित्व था,

लेकिन अभी इस मान्यता को सार्वभौमिक मान्यता मिलनी शेष है। अभी भी दुनिया के तमाम जीव वैज्ञानिकों के लिए ड्रेगन इंसान की महज एक रोमांचक कल्पना ही है। जैसा कि अतीत में तमाम जीव वैज्ञानिकों द्वारा माना जाता रहा है। 

वैसे ड्रेगन के मिथक के पीछे मध्य पूर्व के विशालाकार सांपों का होना भी माना जाता है। मध्य पूर्व में आज भी विशालाकार सांप पाए जाते हैं, जिनका बेबीलोनियन युग में आकार और भयानकता आज से बहुत ज्यादा थी। शायद ड्रेगन की कल्पना उन्हीं को ध्यान में रखकर की गई है।

अनसुलझे रोचक रहस्य-ड्रेगन का अस्तित्व 

कुछ जीवविज्ञानी इतिहासकारों का यह भी मानना है कि मध्यपूर्व में यह महाकाय सांप अथवा ड्रेगन बुराई के सैद्धांतिक प्रतीक माने जाते थे। मिस्र का देवता अलोपी उदाहरण के तौर पर अंधेरी दुनिया का सबसे विशालकाय सांप था। लेकिन यूनानी और रोमन हालांकि सांपों को मध्यपूर्व के विचारों की तरह बुराई की ताकत मानते थे। 

लेकिन वह इस बात से सहमत थे कि ड्रेगन फायदेमंद ताकत भी है। उसकी तीखी आंखें भयानक और शरीर मजबूत है और आसमान में अनंत तक उड़ने की उसमें असीमित क्षमता है। ड्रेगन के साथ सब कुछ रोमांचक और दहशतनाक भाव जोड़ा गया। हालांकि ईसाइत में ड्रेगन का मिला-जुला अस्तित्व है।

लेकिन यहां भी इसे कई मौकों पर पाप का प्रतीक समझा गया है। ड्रेगन के रूप में आकर विवरण भी अलग-अलग तरह का मिलता है। मसलन मध्यपूर्व बेबीलोन कर के कई सिर होते थे। इसका उल्लेख भी कई जगह मिलता है। यूनान में बात ड्रेगन को वीरता का प्रतीक समझा जाता था। 

इलियड राजा आगा मेमन अपने सिर पर हमेशा एक नीले रंग की ढाल रखने थे, जिसके सिर पर तीन सांपों के फन होते थे। बाद में तमाम नोर्मन योद्धाओं अपनी ढाल पर इसी तरह ड्रेगनों के चित्र उकेरवाने शुरू किए, क्योंकि उनका विश्वास था कि ड्रेगन उनकी रक्षा करते हैं। प्राचीन काल में पानी के जहाजों में भी ड्रेगन के चित्र बनवाए जाते थे। इंग्लैंड में भी नोर्मन विजय के पहले युद्ध में डेगन राजशाही का प्रतीक था। बीसवीं शताब्दी में ड्रेगन प्रिंस ऑफ वेल्स की आधिकारिक युद्धक पोशाकों का हिस्सा था। 

सुदूर पूर्व में ड्रेगन अभी भी प्रतिष्ठित है। यहां इसे फायदा पहुंचाने वाला जीव समझा जाता है। चीनी ड्रेगन लंक यांग यानी स्वर्ग के सिद्धांत का प्रतिनिधित्व करता है। चीनी कॉस्मोलॉजी में प्राचीन काल से इसकी मान्यता रही है। यह चीन में राजशाही का प्रतीक माना जाता रहा है। 

ड्रेगन शब्द का प्राणी विद्या के संदर्भ में कोई अर्थ नहीं है। लेकिन लैटिन में डेको शब्द छोटी छिपकलियों और गिरगिटों के संबंध में प्रयुक्त होता है, जो भारत-मलाया क्षेत्र में पाई जाती हैं। भूटान तथा उत्तरपूर्वी भारत के कुछ राज्यों में विभिन्न त्योहारों के दौरान ड्रेगन की मूर्तियों का उपयोग किया जाता है। जापान और चीन की तरह इंडोनेशिया के कुछ द्वीपों पर कोमोडो ड्रेगन पाया जाता है। वास्तव में यह बहुत बड़ी छिपकली होती है, जिसे ड्रेगन की तरह दिखने के कारण ड्रेगन के नाम से जाना जाता है।