अनसुलझे रहस्य-क्या सुपरमैन अभिशापित है,ममतामयी प्रेतात्मा, सपने ने किया मालामाल 

अनसुलझे रहस्य- क्या सुपरमैन अभिशापित है? 

अनसुलझे रहस्य- क्या सुपरमैन अभिशापित है? 

बचपन में सभी सुपरमैन के दीवाने होते हैं। हवा में उड़ते सुपरमैन के करतब देख ताली पीटने वालों में सिर्फ बच्चे ही नहीं, बड़े भी शुमार रहे हैं। 

धरती को बचाने के लिए सुपरमैन जब बुरी ताकतों से लड़ने के लिए स्पेस में उड़ते हुए या घातक चीजों को उठाकर ब्रह्मांड में फेंककर धरतीवासियों की रक्षा करता है तो देखने वालों के दिल बाग-बाग हो उठते हैं तथा हम और आप कुछ समय के लिए उसी को हकीकत मानकर सुपरमैन के साथ ही कल्पना लोक की उड़ान भरने लगते हैं। 

बच्चों तथा बड़ों के बीच समान रूप से लोकप्रिय इस महत्वपूर्ण चरित्र के साथ एक महत्वपूर्ण बात जुड़ी हुई है, जिसकी जानकारी शायद ज्यादा लोगों को नहीं है-वह है सुपरमैन से जुड़ा एक अभिशाप। वैसे तो यह अभिशाप सुपरमैन नाम से ही जुड़ा है तथा जिस किसी भी व्यक्ति का नाम सुपरमैन से संबंधित फिल्म, टीवी सीरियल या कॉमिक्स बुक्स से जुड़ा वही इस अभिशाप का शिकार हुआ। शायद इसीलिए लोगों ने इसे ‘सुपरमैन का अभिशाप’ नाम भी दे दिया। 

अनसुलझे रहस्य- क्या सुपरमैन अभिशापित है? 

‘सुपरमैन का अभिशाप’ का अर्थ है फिल्म, टीवी सीरियल या कॉमिक्स बुक्स में जिन भी लोगों ने सुपरमैन चरित्र के साथ काम किया उन्हें किसी न किसी रूप में इस अभिशाप को भोगना ही पड़ा। इस अभिशाप की सबसे ज्यादा मार पड़ी सुपरमैन की मुख्य भूमिका निभाने वाले कलाकार पर। इस अभिशाप का सीधा सादा अर्थ है कि यदि आप धरती के सबसे ताकतवर व्यक्ति की भूमिका निभाना चाहते हैं तो आपको या तो मरना होगा या आपका जीवन अत्यंत बदतर स्थिति में बरबाद हो जाएगा। 

इस अभिशाप के बारे में काफी कुछ लिखा गया है। खासकर 1995 में क्रिस्टीकर रीव के साथ हुई दुर्घटना और उनकी मौत के बाद। 

इन हादसों की फेयर लिस्ट पर नजर डालें तो पता चलता है कि सन् 1950 में सुपरमैन बने मशहूर टीवी सीरियल में सुपरमैन का किरदार निभाने वाले जार्ज रीव को आत्महत्या करनी पड़ी थी। 

कहा जाता है कि सुपरमैन में सहनियति एवं लेखक जेम्सी संगल तथा कलाकार जो. शुस्टर को भारी आर्थिक तंगहाली का सामना करना पड़ा था, क्योंकि उन्होंने अपने अरबों डॉलर की इस रचना के अधिकार डीसी कॉमिक्स को महज 130 डॉलर में बेच दिए थे। 

यही नहीं 1940 के दशक में सुपरमैन पर बनी दो सीरियल फिल्मों में सुपरमैन की भूमिका को पर्दे पर साकार करने वाले एक्टर क्रिक एल्यन का कॅरियर तो उसके बाद एकदम गर्त में ही चला गया था जबकि सुपरमैन की भूमिका करने से पूर्व हॉलीवुड में उनका अच्छा खासा प्रभाव था। 

सुपरमैन के अभिशाप से जुड़ी इन घटनाओं को सुनकर मन सिहर उठता है और अभिशाप के प्रमाण रगों में खून जमा देते हैं। सुपरमैन के अभिशाप से जुड़ा सबसे त्रासदीपूर्ण मामला है रीव का, जो 50 के दशक में प्रसिद्ध हीरो थे। रीव ने अत्यंत अजीबोगरीब हालत में आत्महत्या कर ली थी। 

सुपरमैन के रूप में आकाश में लंबी से लंबी छलांग लगाकर तमाम दूरियों को नाप लेने वाले रीव की दुनिया इस दुर्घटना के बाद व्हील चेयर पर ही सिमट कर रह गई थी, क्योंकि घोड़े पर से गिरने के कारण उनकी गर्दन एवं रीढ़ की हड्डी टूट गई थी। व्हील चेयर पर ही जिंदगी के 9 साल गुजारने के बाद रीव की मृत्यु 2004 में हार्ट अटैक पड़ने से हो गई थी। इसी प्रकार सुपरमैन की प्रेमिका मार्गोट किड्डर भी 1996 में एक हादसे में पागल हो गई थी। 

सुपरमैन को पहली बार जीवंत करने वाले क्रिक एल्यन के साथ हुए हादसे की जानकारी लोगों को ज्यादा नहीं है। क्रिक ने अपने फिल्मी करियर की शरूआत शानदार ढंग से की थी तथा उनसे काफी उम्मीदें भी थीं किंतु सुपरमैन पर बनी पहली फिल्म में मुख्य भूमिका निभाने के साथ ही उनका करियर ठप-सा पड़ गया। क्रिक को अपने कॅरियर का दूसरा काम सुपरमैन पर बनी इस पहली फिल्म में 20 साल बाद ही सुपरमैन पर ही एक और फिल्म में मिल सका था। 

ऐसे में यह सवाल जहन में उठना लाजिमी है कि क्या सुपरमैन का किरदार निभाने की वजह से उनकी यह स्थिति हुई थी? 

क्या यह अभिशाप उन लोगों के लिए है जो सुपरमैन की भूमिका निभाकर प्राकृतिक सिस्टम का मजाक उड़ाने का प्रयास करते हैं और सुपरमैन जैसे चरित्र गढ़ कर या निभा कर नकली भगवान की अप्राकृतिक पूजा पर जोर देते हैं? इस सवाल पर यदि गंभीरता से विचार किया जाए तो इसका जवाब काफी हद तक ‘हां में ही मिलेगा। वरना ऐसा और क्या कारण हो सकता है कि सुपरमैन से जुड़े लोगों को किसी न किसी रूप में अपने जीवन में गंभीर किस्म की त्रासदियों को ही भोगना पड़ा है। 

हम आपको यहां सुपरमैन से जुड़ी तमाम दुर्घटनाओं की जानकारी दे रहे हैं। इन घटनाओं को देखकर लगता है कि वाकई ये लोग किसी न किसी रूप में दैवीय प्रकोप का शिकार बने हैं। 

1.फेल्यर स्टूडियो के मैक्स व डैव फेल्यर बंधुओं, जिन्होंने पोपों में बेट्टी वप तथा सुपरमैन कार्टून मूल रूप में प्रस्तुत किया था, को सुपरमैन एमिनेशन फिल्म बनाने के बाद घोर आर्थिक तंगी की वजह से अपना स्टूडियो ही बेचना पड़ गया था। 

2.क्रिक एल्यन ने 1940 में सुपरमैन पर बनी कम बजट की दो फिल्मों में काम किया था और उसके बाद उनके पास काम का टोटा पड़ गया और वे वर्षों बेकार बैठे रहे। बाद में उन्हें अल्जीमर्स की बीमारी ने घेर लिया और 1999 में क्रिक उसी बीमारी की वजह से चल बसे। 

3.सन् 1963 में अमेरिकी राष्ट्रपति जॉन एफ. कैनेडी के स्टाफ ने सुपरमैन की एक स्टोरी को मंजूरी दी थी जिसमें सुपरमैन राष्ट्रपति की फिजिकल फिटनेस की दलाली करता है। यह फिल्म अप्रैल 1946 में रिलीज हुई थी किंतु 22 नवंबर 1963 को ही कैनेडी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। 

4.हॉलीवुड के हास्य कलाकार रिचर्ड प्रेमोर जो पहले ड्रग एडिक्ट थे तथा इसी बुराई के कारण एक बार उनके साथ गंभीर दुर्घटना भी घटी थी, ने 1983 में बनी सुपरमैन तृतीय में खलनायक की भूमिका निभाई थी। इसके तीन साल बाद रिचर्ड मल्टीयल सिरोसिस का शिकार हो गई तथा कुछ ही समय बाद उनकी हार्ट अटैक से मौत हो गई।

5.1978 में बनी सुपरमैन फिल्म में सुपरमैन के पिता का किरदार निभाने वाले मार्लोन ब्रांडो को भी निजी जीवन में इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ी थी। 1990 में उनके सबसे बड़े बेटे क्रिस्टियन ने अपनी सौतेली बहन के प्रेमी की गोली मारकर हत्या कर दी थी। हालांकि उन्होंने अपनी सफाई में यही कहा था कि गोली दुर्घटनावश चल गई थी किंतु क्रिस्टियन को इस हत्या के आरोप में दस साल जेल में बिताने पड़े थे। 

ब्रांडो इस सदमे से अभी उभर भी नहीं पाए थे कि 1995 में उनकी 25 वर्षीया बेटी ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। इस घटना के बाद भीतर से बुरी तरह टूट चुके ब्रांडो ने खुद को हॉलीवुड से अलग कर लिया तथा वह अपनी फैमिली ट्रेजेडी एवं अधिक मोटापे की वजह से ही सुर्खियों में बने रहे। 2004 में 50 वर्ष की उम्र में ब्रांडो का निधन लंगस फेलियर की वजह से हुआ जबकि ब्रांडो लिवर कैंसर, हार्ट फेलियर तथा डायबिटिज जैसी बीमारियों से भी पीड़ित थे तथा डायबिटिज की वजह से ही उनकी आंख की रोशनी तक कम होने लगी थी। 

6.सुपरबॉय टेलीविजन सीरियल टाइटल में भूमिका निभाने वाले जों. हेमस न्यूटन, गेरार्ड क्रिस्टोफर दोनों ही सीरियलों में अपनी-अपनी भूमिका निभाने के बाद गुमनामी के अंधेरों में खो गए थे। 

7.सन् 1978 में बनी सुपरमैन फिल्म में बेबी करल एल की भूमिका निभाने वाली ली क्विगले की मृत्यु महज 19 साल की उम्र में मार्च 1991 में हो गई थी। ली की मौत जहरीला तरल पदार्थ सूंघने की वजह से हुई थी। 

8.सुपरमैन सीरियल कई फिल्मों-सुपरमैन-द मूवी 1978, सुपरमैन द्वितीय 1980, सुपरमैन तृतीय 1983, सुपरमैन चतुर्थ द क्वीस्ट फोर्ड पीस 1987 में सुपरमैन का किरदार निभाने वाले क्रिस्टोफर रीव 1995 में शूटिंग के दौरान घोड़े से गिरकर लकवे का शिकार हो गए थे और फिर 2004 में हार्ट फैल होने की वजह से रीव की मौत हो गई थी। 

9.सुपरमैन फिल्म में रीव की प्रेमिका की भूमिका निभाने वाली मार्गोट किड्डर गंभीर बायपोलर डिसआर्डर की शिकार हो गई थी तथा अप्रैल 1996 को वह अचानक गायब हो गई तथा कई दिनों बाद पुलिस को पागलपन की अवस्था में मिली। 

10.सुपरमैन चतुर्थ 1987 फिल्म में सह-कलाकार मारियल हेमिंगवे के दादा की आत्महत्या की बरसी के समय 1996 में उनकी बड़ी बहन मार्गोट मृत पाई गई थी। उसने मेडिक्टिव दवा की ओवरडोज लेकर अपनी जिंदगी खत्म कर ली थी। 

11.सन् 1987 में बनी सुपरमैन चतुर्थ ‘द क्विस्ट फॉर पीस’ फिल्म में न्यूक्लीयर मैन का किरदार निभाने वाले मार्क फिल्लो को उसके बाद कभी किसी फिल्म में काम करने का मौका नहीं मिला। 

12.टीवी सीरियल लुईस एवं क्लार्क में क्लार्क केंट एवं लुईस ले के बॉस पैरी व्हाइट की भूमिका निभाने वाले लेनस्मिथ 2005 में एक असाधारण बीमारी लोयू गेहरिंग डिजीज का शिकार होकर चल बसे थे। 

13.स्टीकर रीव की विधवा दाना रीव 2005 में फेफड़ों के कैंसर से पीड़ित पाई गई थी। जबकि उसने अपने जीवन में कभी सिगरेट को हाथ तक नहीं लगाया था। फेफड़ों के कैंसर की वजह से वह 2006 में चल बसी थी। 

14.सुपरमैन कॉमिक्स के लेखक जोफ लोएब का बेटा सैम लोएब कैंसर का शिकार होकर मरा था। 

सुपरमैन से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े लोगों के साथ हुई इन त्रासदीपूर्ण घटनाओं से स्पष्ट होता है कि सुपरमैन किसी न किसी वजह से अभिशापित जरूर रहा है। इसका क्या कारण है यह तो कह पाना मुश्किल है, क्योंकि हर सवाल का जवाब हो ऐसा जरूरी नहीं होता। 

अनसुलझे रोचक रहस्य –ममतामयी प्रेतात्मा 

रात गहरा चुकी थी और अनाथालय के चारों ओर निस्तब्धता छाई हुई थी। घड़ी में ग्यारह बज चुके थे। मुख्य द्वार बंद किया जा चुका था। अनाथालय तथा शिशुगृह के प्रबंधक वार्डन ‘फादर चार्ल्स जुप’ अपना नित्य का कार्य समाप्त कर सोने के लिए अपने कमरे में चले गए थे। अभी कुछ ही समय गुजरा था कि अचानक किसी ने मुख्य द्वार खटखटाया तो फादर की नींद उचट गई। वे उठकर अपने बिस्तर पर बैठ गए और आंखें मलते हुए सोचने लगे कि रात के इस वक्त भला कौन हो सकता है? अभी वे कुछ सोच या समझ पाते कि सामने से अनाथालय का पहरेदार उन्हें तीन बच्चों के साथ अपने कक्ष की ओर आता दिखाई दिया। अजनबी बच्चों को देख फादर समझ गए कि कोई इन अनाथ बच्चों को यहां छोड़कर गया होगा। 

अनसुलझे रोचक रहस्य -ममतामयी प्रेतात्मा 

पूछताछ करने पर फादर का शक ठीक निकला। बच्चों की मां की मृत्यु हो चुकी थी और अब उनका इस दुनिया में कोई नहीं था। फादर ने चौकीदार को हिदायत दी कि बच्चों को खाना खिला दे और उनके कमरे में ही उनके सोने का इंतजाम कर दे, क्योंकि रात के इस समय अनाथालय के दूसरे बच्चों को परेशान करना उचित नहीं होगा। तीनों बच्चे खाना खाने के पश्चात फादर के कमरे में ही एक बिस्तर पर सो गए। फादर उनके पास ही एक अन्य बिस्तर पर सोए हुए थे। 

रात आधी बीत चुकी थी। बच्चे सो चुके थे। अचानक फादर हड़बड़ा कर उठ बैठे। कमरे में अंधकार फैला था, फिर भी उन्होंने अपने चारों ओर नजरें घुमाकर कमरे की स्थिति भांपने का प्रयत्न किया और जो अलौकिक दृश्य उन्होंने देखा उससे वह भयभीत तो नहीं हुए, परंतु अचंभित अवश्य रह गए। 

उनके अपने शब्दों में, “एक प्रकाश का गोला-सा कमरे में तैर रहा था। गोले से तेज प्रकाश निकल रहा था; ऐसा अलौकिक प्रकाश मैंने अपने जीवन में कभी नहीं देखा था। उस अलौकिक प्रकाश को देखकर मेरे मन में अपूर्व शांति उतर आई और मैं असीम आनंद का अनुभव करने लगा। वह एक छोटा-सा चांद जैसा चमकीला गोला-सा लग रहा था और अजनबी बच्चों के बिस्तर के आस पास चक्कर लगा रहा था। कुछ क्षण बाद प्रकाश का वह गोला उन तीनों बच्चों में से जो सबसे छोटा था, उसके सिर के आसपास चक्कर लगाने लगा, परंतु इस चमत्कार को केवल मैं ही देख रहा था। बच्चे इस सबसे बेखबर सोए हुए थे।” 

फादर के इस विवरण से पता चलता है कि वे न तो सो रहे थे और न ही कोई स्वप्न देख रहे थे। इस दृश्य को देखकर उनके मन में यह विचार बार-बार उठ रहा था कि यह प्रकाश पुंज कहां से और क्यों आया है? इन बच्चों से इस अलौकिक प्रकाश पंज का क्या संबंध है? एक जिज्ञासा, एक उत्सुकता उनके जहन में सिर उठा रही थी, उन्होंने चाहा कि वे अपने बिस्तर से उठे और उस अलौकिक प्रकाश पुंज को अपने हाथों से छ कर देखें। 

उन्होंने ऐसा करने का प्रयत्न किया तो वे यह अनुभव करके हतप्रभ रह गए कि किसी अज्ञात शक्ति ने उन्हें ऐसा करने से रोक दिया। उन्हें इससे भय नहीं लगा, उन्हें लगा कि वह शक्ति कृपालु है, दयावान है। यद्यपि उन्होंने अपने कानों से कुछ नहीं सुना बल्कि उन्हें ऐसा महसूस हुआ जैसे कि वह अदृश्य शक्ति उनसे कह रही हो, “फादर ! लेटे रहो…शांत भाव से लेटे रहो…आराम से सो जाओ, तुम्हें कोई नुकसान नहीं होने वाला…तुम निश्चित रहो…निश्चित रहो…” 

ऐसा महसूस करते ही वे अपने बिस्तर पर निष्प्राण-से होकर पड़े रहे और फिर शांत होकर प्रकाश के उस अलौकिक दृश्य को देखते रहे, फिर न जाने कब उन्हें नींद ने घेर लिया। 

दूसरे दिन अपने नियम के मुताबिक वे सुबह छ: बजे ही उठ गए और नित्यकर्मों से निवृत्त होकर उन्होंने उस रात आए बच्चों को जगाया और उन्हें नहलाकर तैयार करने लगे। 

उस समय फादर ने अनुभव किया कि उन तीनों बच्चों में से सबसे छोटा बच्चा जिसके सिर के आसपास वह प्रकाश पुंज थिरकता रहा था, अस्वाभाविक ढंग से शांत था। जब फादर उसे कपड़े पहना रहे थे तो वह फादर की तरफ एकटक अजीब-सी नजरों से देखे जा रहा था। फादर को लगा कि शायद वह कुछ कहना चाहता है। अत: फादर ने प्यार से उसके सिर पर हाथ फेरकर कहा, “बोलो बच्चे! तुम मुझसे कुछ कहना चाहते हो, डरो नहीं बेझिझक होकर कहो।” 

फादर के ऐसा कहने पर बच्चे की आंखों में आंसू छलछला आए और झिझकते हुए कांपती आवाज में उसने कहा, “फादर! कल रात मेरी मां मुझसे मिलने आई थी। क्या आपने भी उसे देखा था ?” 

फादर ने कोई उत्तर नहीं दिया। वे केवल मुस्कराकर रह गए, फिर बच्चे के सिर पर हाथ फेरते हए बोले, “तुम कपड़े पहनो और प्रार्थना के लिए तैयार हो जाओ।” 

अनसुलझे रहस्य इन हिंदी-सपने ने किया मालामाल 

आज से 43 वर्ष पूर्व लंदन की ‘मिस मारिया’ अपनी मां के साथ बड़ी ही गरीबी में गुजर-बसर कर रही थी। गरीबी के कारण उन्हें दो वक्त की रोटी भी नसीब नहीं होती थी। दरअसल मारिया की मां अंधी तो थी ही, उसने किसी दुर्घटना में अपना एक पैर भी खो दिया था। वह बैसाखियों के सहारे अपनी युवा बेटी के साथ बाजार में चली जाती और राहगीरों के सामने अपनी लाचारी का रोना रोती। जिसके चलते कुछ दयालु किस्म के लोग उसकी झोली में कुछ सिक्के डाल देते थे। इसी तरह मां-बेटी की जिंदगी के दुख-भरे दिन बीत रहे थे।

 इसी बीच क्रिसमस का त्योहार आ गया। सभी ओर खुशियां छा गईं। लोग एक-दूसरे को क्रिसमस की शुभकामनाएं दे रहे थे। त्योहार पर अच्छी खैरात मिलने की उम्मीद में मारिया और उसकी मां भी बाजार में घूम रही थीं, तभी एक बूढ़े की नजर मारिया की अंधी व अपाहिज मां पर पड़ी। उसने एक नजर मारिया को भी निहारा और फिर मारिया से मुखातिब होकर कहा, “बेटी! तुम भी क्रिसमस की खुशियां मनाओ। भरपेट भोजन करो और चर्च में जाकर प्रभु से सच्चे मन से प्रार्थना करो।” 

मारिया को उस बूढ़े की यह सीख बेहद अच्छी लगी। उसे लगा जैसे बूढ़े के रूप में स्वयं प्रभु यीशु ने उसे ऐसा करने का आदेश दिया है। अत: बूढ़े ने जैसा कहा था, मारिया ने वैसा ही किया। चर्च में सच्चे मन से प्रार्थना करने के बाद किसी दानी ने उन्हें भरपेट भोजन कराया और उपहार के नाम पर कुछ पैसे भी दिए। 

कई दिनों के बाद मां-बेटी को भरपेट भोजन नसीब हुआ था। मारिया के पास आज तेरह पौंड थे। रात जब दोनों घर लौटीं तो बेहद प्रसन्न थीं। घर आते ही उन्हें नींद आ गई। रात में मारिया को सपने में वही बूढ़ा दिखाई दिया। वह हंसते हुए कह रहा था, ‘जो प्रभु से सच्ची प्रार्थना करता है, उसकी मैं मदद अवश्य करता हूं। तुमने भी चर्च में जाकर सच्चे मन से प्रार्थना की थी। इसी कारण मैं बहुत प्रसन्न हूं और तुम्हें मालामाल करना चाहता हूं।” इतना कहकर वह बूढ़ा गायब हो गया। 

इसके बाद मारिया को सपने में एक क्रिसमस-ट्री दिखाई दिया। उस पर एक तख्ती लटकी हुई थी, जिस पर कुछ नंबर लिखे थे। तभी कुछ खटका-सा हआ और मारिया की नींद उचट गई। उसने सपने में जो नंबर देखे थे, वे नंबर उसने एक कोयले से दीवार पर लिख लिए। 

दोपहर को जब वह खाना लेने बाजार जा रही थी। तभी एक युवक ने उसे रोककर कहा, “सिस्टर! मेरे पास लॉटरी का यह आखिरी टिकट बचा है। इसका नंबर बड़ा ही शुभ है, इसे आप खरीद लें।” 

जब मारिया ने वह टिकट देखा, तो उसके आश्चर्य का ठिकाना न रहा। रात सपने में उसने जो नंबर देखे थे, हू-ब-हू वही नंबर उस टिकट पर अंकित थे। उसने अपने उदास चेहरे पर हल्की-सी मुस्कान बिखेरी और तीन पौंड देकर वह टिकट खरीद लिया। 

जाते-जाते लॉटरी बेचने वाले युवक ने कहा, “यह लॉटरी आज शाम ही खुलने वाली है।” 

अपने पास बचे 10 पौंड में से मारिया ने एक ढाबे से छह पौंड का खाना खरीदा और घर लौट आई। दोनों मां-बेटी ने खाना खाया, फिर मारिया एक सरकारी नल पर कपड़े धोने चली गई। जब वह कपड़े धोकर लौटी तो शाम के पांच बज चुके थे। तभी एक हॉकर उसके पड़ोसी के यहां सांध्यकालीन ‘लंदन पोस्ट’ नामक अखबार डाल गया। 

मारिया अपने पड़ोसी से वह अखबार लेकर आई और जब उसने टिकट में छपे नंबर का मिलान किया तो वह खुशी के मारे चिल्ला उठी, “अरे, मुझे तो 35 लाख पौंड की लॉटरी लग गई।” 

और इस प्रकार गरीब मारिया सपने की बदौलत मालामाल बन गई। आखिर उस बढ़े ने मारिया की मदद क्यों की और वह बूढ़ा कौन था? यह आज तक भी रहस्य बना हुआ है। 

 

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