अनसुलझे रहस्य-ख्वाब में देखी टकराने वाली ट्रेन 

अनसुलझे रहस्य-ख्वाब में देखी टकराने वाली ट्रेन 

रहस्य रोमांच सस्पेंस और हैरत में डाल देने वाली विश्व की ऐसी सत्य घटना है जो आज भी रहस्य की धुन में दफन है।आश्चर्यजनक तथ्य जो अभी तक सिर्फ रहस्य है।

स्वप्नावस्था में व्यक्ति स्वयं को जाग्रत अनुभव करता है तथा किसी भांति एक या अन्य कारण से दिन में हुई हानि की क्षतिपूर्ति कर लेता है। ऐसा अनुभव कर वह संतोष पाता है। इस प्रकार फ्रायड इस मत के प्रबल समर्थक थे कि स्वप्न में संक्षिप्तिकरण, अव्यवस्था तथा प्रतीकात्मक चिह्न भी दिखते रहते हैं। फ्रायड के अनुसार ऐसी बातें दिन के अधूरे कार्यों के पूरा होने की सूचक हैं, जो सपने देखने वालों को दिन की ताजा घटनाओं की पुनर्रचना, विकृत, संशोधित या परिष्कृत रूप में स्मृतियां बनी होती हैं, वही रात्रि में सपनों के ताने-बाने बुन देती हैं। 

यह रहस्यमय जगत कंपनयुक्त है। चेतना का मुख्य आधार कंपन है। इसमें मनुष्य भूत तथा भविष्य के दर्शन सिनेमा के पर्दे की तरह कर लेता है। महात्मा गांधी की प्रेरणा से संचालित एवं विज्ञापन रहित कल्याण पत्रिका के आदिसंपादक हनुमान प्रसाद पोद्दार एक बार मुंबई पधारे। एक दिन वे मित्र के यहां सो रहे थे तो रात्रि में उन्होंने स्वप्न में देखा कि एक अधेड़ पारसी नवयुवक उनके सामने आकर खड़ा हो गया। एक मिनट, दो मिनट, पांच मिनट तक वह खड़ा रहा। दोनों असमंजस में थे, कोई कुछ नहीं बोला।

तब पोद्दार जी ने ही बोलने की पहल की। वे बोले, “कहो भाई! चुपचाप कैसे खड़े हो? बोलो, अपनी बात बताओ।” तभी उस युवक ने कहा, “मैं 4-5 माह पूर्व अकाल मृत्यु का शिकार हो गया था। आप समर्थ हैं, आप अमुक मात्रा में दूध, चावल, नारियल, चीनी, कपड़ा अमुक स्थान पर पहुंचा दें तो मेरी गति हो जाएगी अन्यथा मेरी आत्मा इधर-उधर भटकती रहेगी।” 

ऐसी घटनाओं के बारे में पोद्दार जी की रुचि से कल्याण के पाठक सुपरिचित हैं। पोद्दार जी ने उससे उसका परिचय पूछा तथा यह आग्रह अन्य सब राहगीरों को छोड़ कर उनसे ही करने का कारण पूछा तो उस पारसी युवक ने पोद्दार जी को पूरा पता तथा परिचय बताया और यह भी बताया कि मुंबई के निवासी अत्यधिक व्यस्त लोग हैं, वे उसकी बात भी न सुनें, इसकी पूरी-पूरी संभावना है। आपका इन सब कार्यों में विश्वास है। आप ये सब कार्य पूरे विधि-विधान के अनुसार कर देंगे, ऐसा मुझे विश्वास है। ये सब बातें स्वप्न में होती रहीं। 

 इतना कहना था कि वह पारसी युवक अदृश्य हो गया। पोद्दार जी ने उस युवक के कहे अनुसार सामग्री निश्चित तिथि को निश्चित स्थान पर पहुंचा दी। बाद में पोद्दार जी ने इस घटना का कल्याण के किसी अंक में भी वर्णन किया है। 

वैज्ञानिक यह मानते हैं कि पारसी युवक की प्रतिमूर्ति निर्जीव थी जो पोद्दार जी के सर्वप्रथम बोलने के कंपन से या ध्वनि से उस पारसी युवक को बोलने योग्य बना दिया। 

इसी प्रकार की एक और रोचक घटना का वर्णन यहां प्रस्तुत करने का लोभ संवरण नहीं किया जा सकता। एक सज्जन को एक बार कहीं अन्यत्र खेलकूद प्रतियोगिताओं के संबंध में मुख्यावास से बाहर रहना पड़ा। 

उनकी धर्मपत्नी मकान बंद कर रात्रि को अंदर सो गईं। उन सज्जन के आदेशानुसार चपरासी बाहर बरामदे में सो रहा था। रात्रि में चपरासी ने नींद में बड़बड़ाना आरंभ किया कि ‘ठहर जा, अभी देखता हूं, कहां जाता है तू, रुक तो’। यह सुनकर सज्जन की पत्नी बड़ी डरीं कि चपरासी किसी से लड़ रहा है, रात्रि भी है, कहीं चोट न खा जाए। जब चपरासी ने रुक-रुक कर समय के छोटे अंतराल पर इसी प्रकार की बात दोहराई तो वे और भी अधिक डर गईं। अब वे बिना द्वार खोले अंदर से ही चपरासी को पुकारने लगीं।मानसिक रूप से वह तो नींद में सोया हुआ था, परिणामस्वरूप उन्हें कई बार पुकारना पड़ा।

जब वह जागा तो उन्होंने पूछा कि तुम किससे लड़ रहे थे? चपरासी ने कहा कि किसी से नहीं, मैं तो सो रहा था। जब मित्र की पत्नी ने बातचीत दोहराई तो चपरासी ने अनभिज्ञता जताई। अगले दिन सज्जन ने प्रतियोगिता स्थल से लौट कर अन्य लोगों से पूछताछ की तो उन्हें बताया गया कि चपरासी दिन में अपने खेत में पानी पिलाने के लिए पड़ोसी खेत के मालिक से झगड़ा था। यही बात वह स्वप्न में हावभाव के साथ दोहरा रहा था। 

कहते हैं कि जब सिकंदर महान विश्व पर विजय पाने की दृष्टि से निकला तो स्वप्न विशेषज्ञ उसके साथ थे। प्रसिद्ध दार्शनिक सिकंदर के गुरु अरस्तू भी स्वप्नों पर विश्वास करते थे। जब वे मिस्र को विजय करने निकले तो उन्हें कड़े विरोध का सामना करना पड़ा था। फिर एक दिन सिकंदर ने स्वप्न में देखा कि मिस्र की राजधानी काहिरा पर उसका अधिकार हो गया है। उसने रात्रि में देखे इस स्वप्न को जीत का द्योतक माना।

एक अन्य रात्रि को उत्सव में वनदेवता को नाचते हुए भी देखा तो उसे यह दृढ़ विश्वास हो गया कि यह सब उसकी जीत की संभावना को ही पुष्ट करते हैं। अंत में जीत उसी की हुई। युद्ध हुआ, घमासान मारकाट हुई और मिस्र पर उसका अधिकार हो गया। इस प्रकार स्वप्नों से व्यक्ति का साहस तथा विश्वास बढ़ता है। कई ज्योतिषी अच्छे-बुरे स्वप्नों के आधार पर शकुन-अपशकुन का भी संकेत करते हैं। 

एक अन्य सज्जन की पत्नी ने बताया कि शादी के पूर्व उसने एक बार अपने छोटे भाई को स्वप्न में देखा और पाया कि मोटर साइकिल पर यात्रा करते समय उनके साथ दुर्घटना हो गई है और वे अस्पताल में उपचार करवा रहे हैं। तत्काल ही नींद खुल गई, वे रात भर चिंता के कारण सो नहीं पाईं। प्रातः स्वप्न के बारे में माता-पिता को बताया तथा तत्काल ही वे छोटे भाई से मिलने के लिए रवाना हो गईं। पांच-छ: घंटे यात्रा कर भाई के निवास स्थान पर पहुंची तो ज्ञात हुआ कि वे रात्रि में दुर्घटना में घायल हो गए थे तथा उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती हैं| यह कैसा सयोग रहा कि स्वप्न सच हो गया या होने वाली घटना की पत्नी को स्वपन ने पहले ही जनकारी करा दी थी। 

कई ख्याति प्राप्त साहित्यकारों कलाकारों और लेखकों को स्वप्नों के माध्यम से अपनी कतियों की रचना का मार्गदर्शन मिला है। कहते है  सैमुअल टेलर ने प्रसिद्ध कविता  कुबलाखान की प्रारंभिक पंक्तियां सपने में मार्गदर्शन पाकर ही लिखा था। सपनो से प्रेरित होकर ही गेटे कॉलरिज स्टीवेंशन ब्लेक आदि साहित्यकारा ने श्रेष्ठतम कविताओं की रचना की। सपनों से प्रेरणा पाकर ही विश्व प्रसिद्ध भारतीय गणितज्ञ ने कई जटिल प्रश्नों के हल खोजे। 

हॉलीवड की लावण्यवती अभिनेत्री मरियाना एक बार सख्त बीमार हो गई। वह कई दिनों तक बेहोश रही तथा जब होश आया तो कई घंटों तक न जान क्या-क्या बड़बड़ाती रही। समय बीतते-बीतते वह सामान्य हुई तो संपर्क में आने वाले मित्रों तथा संबंधियों को किसी रेड इंडियन से मिलने की बात कही। 

वह रेड इंडियन खास प्रकार के कपड़े पहने हुए था तथा उसने मरियाना को झकझोर दिया। स्वस्थ होने पर मरियाना ने विभिन्न अजायबघरों तथा पुस्तकालयों से जानकारी चाही कि उस रेड इंडियन ने कौन-सी पोशाक पहन रखी थी। काफी प्रयत्नों के बाद उसे सफलता मिली।

पुस्तकालय की पुस्तक में एक रेड इंडियन को उसने वही पोशाक पहने हुए पाया। उसकी प्रसन्नता तत्काल ही मायूसी में बदल गई। जब उसने पढ़ा कि यह पोशाक पुस्तक में रेखाचित्र के नीचे मरणासन्न व्यक्ति की कुशलक्षेम पूछने जाते वक्त पहनने का संकेत है। मरियाना काफी सोच-विचार में डूब गई, वह समझ नहीं पा रही थी कि रेड इंडियन यह मनहूस दुःखदाई पोशाक पहन कर उससे मिलने क्यों आया? 

बहुत दिनों बाद मरियाना की दादी ने उसको बताया कि उसकी परदादी ने एक रेड इंडियन से विवाह किया था। संभव है कि प्रपौत्री को मरणासन्न जान कर परदादा खास पोशाक पहन कर उसे देखने, सार-संभाल करने आया हो। 

स्वप्नों का महत्व इस दृष्टि से भी है कि व्यक्ति सपनों में कई बार बड़बड़ाने लगता है। इस बड़बड़ाने में वह अपनी पिछली की हुई गलतियों या अपराधों के बारे में भी बता देता है। पाठक जानते होंगे कि प्राचीन काल में राजा-महाराजा कई बार अपने दुश्मनों को कैद करके या पकड़ कर बिना किसी प्रकार की पीड़ा पहुंचाए या कष्ट दिए दिन भर खूब आराम से रखते थे। उनकी हर जरूरत पूरी की जाती थी। संभवतया इसके पीछे भी छिपा हुआ उद्देश्य यही होता था कि वह दुश्मन दिन भर आराम से रहकर रात्रि में सोने पर बोलने, गुनगुनाने, बड़बड़ाने या 

सांकेतिक मुद्राओं से अपने स्वामी की कुछ कमजोरियां या गलतियां अथवा अपराध दुश्मन को बता दे, या फिर उन गतिविधियों की जानकारी दे दे। 

इस युक्ति की आज भी कई बार मदद ली जाती है। कैद किए दुश्मन से स्वप्न में इस माध्यम द्वारा जानकारी प्राप्त कर शत्रु से लोहा लेने या उसे नीचा दिखाने के लिए या उसे हराने के लिए मार्गदर्शन या संकेत पाकर तदनुसार कार्य करते हैं, कदम उठाते हैं। शायद पाठक भूले नहीं होंगे कि पंजाब के भूतपूर्व मुख्यमंत्री प्रतापसिंह कैरों के हत्यारों-बलदेवसिंह, सुच्चासिंह तथा एक अन्य यानी कुल तीन अपराधियों को नींद में बड़बड़ाने के आधार पर ही गिरफ्तार किया गया था तथा अपराध के आधार पर फांसी की सजा दी गई थी। 

सपने कई बार भविष्य में होने वाली घटनाओं या बातों की जानकारी करा देते हैं। इस प्रकार से भविष्य की घटनाओं के लिए मार्गदर्शक का कार्य करते हैं। 

अमेरिकी डॉक्टर वाल्टर फ्रेंकलिन ने एक बार भयानक सपना देखा कि एक रेलगाड़ी सुरंग में दूसरी रेलगाड़ी से टकरा गई। यात्री डिब्बे पहाड़ के मलबे में फंस गए, यात्री चीख रहे थे, वे घायल हो गए, राहत कार्य में लगे लोग उन्हें खींच-खींच कर बाहर निकाल रहे थे।

इस दृश्य से फ्रेंकलिन चीख पड़ा। उसकी चीख सुनकर पत्नी जाग गई। पत्नी ने फ्रेंकलिन से चीखने का कारण जानना चाहा तो उसने सपना सुना दिया। उस सपने के कुछ देर बाद ही लगभग 80 किलोमीटर दूर ट्रेन सुरंग में एक चट्टान से टकरा कर फंस गई। डॉक्टर वाल्टर फ्रेंकलिन उस दुर्घटना को सपने में पहले ही देख चुका था। 

एलन वैधान नामक एक व्यक्ति को अमेरिका के राष्ट्रपति कैनेडी की हत्या का स्वप्न में पहले ही अनुमान हो गया था। एलन वैधान ने स्वप्न में देखा कि कैनेडी समारोह में भाग लेने के लिए कई युवक साथियों के साथ जा रहे हैं। तभी गोली चलती है तथा कैनेडी गिर पड़ते हैं। 

कहते हैं कि स्वप्न के आधार पर कैनेडी को सूचित भी किया गया था, पर उन्होंने स्वप्न के प्रति उदासीनता जताई। सात दिन बाद गोली मार कर कैनेडी की हत्या कर दी गई। राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन को भी अपनी मृत्यु की जानकारी स्वप्न में पहले ही मिल गई थी। स्वप्नों में दुर्घटनाओं का पूर्वानुमान होना आश्चर्यजनक है। 

 

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