अनसुलझे रहस्य-इंसान जो बन जाते हैं भेड़िये 

अनसुलझे रहस्य-इंसान जो बन जाते हैं भेड़िये 

अनसुलझे रहस्य-इंसान जो बन जाते हैं भेड़िये 

1980 की बात है। आंध्रप्रदेश के खम्माम जिले में एक विचित्र घटना घटी। गांव की एक महिला एक दूसरी महिला के साथ जंगल में जलावन लेने गई। दोनों ने दोपहर से लेकर शाम तक जंगल में ढेर सारा जलावन इकट्ठा किया। उन्हें घर लौटते-लौटते काफी अंधेरा हो गया।

अंधेरे में जब दोनों महिलाएं जलावन लेकर घर की तरफ तेज-तेज कदमों से बढ़ी चली जा रही थीं तो अचानक साथ ही चल रही दूसरी महिला ने नाक से कुछ सूंघने की हरकत की और ऊपर आसमान की तरफ देखने लगी, जहां हल्का-हल्का चांद निकलने लगा था। पता नहीं यह देखकर उसके साथ वाली महिला को क्या हुआ कि उसने जलावन का गट्ठर फेंक दिया। साथ चल रही महिला को लगा कि शायद अचानक उसकी सहेली की तबीयत खराब हो गई है। अत: उसने उसके सिर पर मालिश करने की कोशिश की। 

लेकिन उस महिला ने उसके हाथ को जोर से झटक दिया और चांद की तरफ देख कर विचित्र-सा मुंह बनाने लगी। सहेली की हरकत से परेशान दूसरी महिला के खौफ और आश्चर्य का तब ठिकाना न रहा जब उस महिला के शरीर में अचानक भेड़ियों की तरह लंबे-लंबे बाल उग आए, नाखून बड़े हो गए और दांत जबड़े से बाहर निकल आए। अब वह एक जीते जागते भेड़िये में तब्दील हो गई थी। साथ वाली महिला चीखी और भागने की कोशिश की। लेकिन शायद तब तक काफी देर हो चुकी थी। उसने उसे गिरा दिया और उसकी गर्दन में दांत गड़ाकर उसका खून पीने लगी। 

इस वाकये को दूर खड़े एक आदमी ने देखा। वह देखकर इतना डर गया कि उसे अगले दिन अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा और एक हफ्ते बाद वह उस दहशत के चलते चल बसा। 

वेयर वुल्फ यानी विचित्र इंसानी भेड़ियों के बारे में एक से बढ़कर एक कहानियां प्रचलित हैं। हमारे यहां तो इस तरह की कहानियों पर कोई गंभीर काम नहीं हुआ। किसी ने उन्हें लिखने, जांचने और उनकी वैज्ञानिक तफ्तीश करने की कोशिश भी नहीं की, लेकिन विदेश में ऐसा हुआ है। 

अप्रैल 1967 में वेनिस की एक युवती अपने रिश्तेदारों के यहां इंग्लैंड गई। उसके रिश्तेदार इंग्लैंड में मेरिनेथ सायर के एक गांव में रहते थे। गांव बेहद खूबसूरत था। तनाव और ऊब से परेशान जब वेनिस की वह युवती ईमा अपने रिश्तेदारों के गांव पहुंची तो उसे वह बेहद पसंद आया। गांव बेहद खूबसूरत था। उसके चारों ओर दूर-दूर तक हरी भरी पहाड़ियां फैली थीं। गांव के पास ही एक छोटा-सा रेलवे स्टेशन था। जहां पूरे दिन में सिर्फ दो बार ही रेलगाड़ी आती थीं।

एक सुबह 8 बजे और दूसरी 2 बजे। इन रेलगाड़ियों से भी यदाकदा ही कोई सवारी उतरती थी, नहीं तो पूरे समय रेलवे स्टेशन के आसपास हल्की-हल्की हवा ही पेड़ों के पत्तों का संगीत बजाती रहती थी। उस युवती को यह सब इतना भाया कि वह पेंटिंग बनाने के लिए रेलवे स्टेशन की तरफ निकल पड़ी। 

रेलवे स्टेशन के पास एक पेड़ के नीचे उसने अपना ड्राइंग स्टेंड लगाया। उसमें बोर्ड फिट किया और कैनवास पर उस मनोरम दृश्य को चित्रित करने लगा। कब दोपहर ढली और कब शाम हो गई उसे इसका पता ही नहीं चला। जब उसका ध्यान समय की तरफ गया, तब तक हल्का अंधेरा फैलने लगा था। उसने फटाफट अपना ड्राइंग बोर्ड उठाया और घर की तरफ चल दी। 

अनसुलझे रहस्य-इंसान जो बन जाते हैं भेड़िये 

अभी वह कुछ दूर ही चली थी कि उसने अपने सामने से एक अद्भुत जीव को आते हुए देखा। उस विचित्र जीव का सिर तो भेड़िये जैसा था, लेकिन जिस्म इंसानों के जैसा था। उस विचित्र जीव को देखकर वह बेहद डर गई। वह तेजी से भागी लेकिन उस विचित्र जीव ने उसका पीछा किया। वह भागकर एक बगीचे के किनारे झुरमुट में जा छुपी और वहीं से भेड़िये को देखने लगी कि वह उसे खोज पाता है या नहीं। वह जहां छुपी थी वहां से उसे भेड़िये की सिर्फ चमकती आंखें भर दिख रही थीं। 

भेड़ियेनुमा उस जीव ने उसे देखा और फिर उसकी तरफ झपट्टा मारा। लेकिन आगे एक गहरा गड्ढा था। उसने चालाकी से उस गड्ढे की तरफ भागने का नाटक किया और फिर सांस रोककर पीछे की तरफ झटके से एक झाड़ी के पीछे छुप कर बैठ गई। भेड़ियेनुमा वह जीव चकमा खा गया। वह गड्ढे में गिरने से बचने की कोशिश करता कि तब तक सामने से एक लोमड़ी आती दिख गई। 

वह लोमड़ी की तरफ दौड़ पड़ा और इस तरह उस युवती की जान बाल-बाल बच गई। वह दौड़कर अपने रिश्तेदारों के घर पहुंची और अपने साथ घटी घटना का पूरा वृतांत सुनाया। 

जीव वैज्ञानिकों ने इस तरह की घटनाओं को पूरी तरह से नकारा नहीं है। उनके मुताबिक इस तरह की घटनाओं के पीछे वेयर वुल्फ या विचित्र किस्म के इंसानी भेड़िये होते हैं। उनकी उत्पत्ति का रहस्य आज तक वैज्ञानिकों को पता नहीं चला। लेकिन वैज्ञानिक मानते हैं कि यदाकदा ऐसे विचित्र किस्म के भेड़िये दनिया के अलग-अलग हिस्सों में देखे जाते है।

आखिर यह कौन हैं? क्या यह भेड़ियों की कोई प्रजाति है? या फिर ये इंसान ही हैं, जो किन्हीं कारणों से हुए शारीरिक परिवर्तनों के चलते भेड़ियों में बदल जाते हैं। अभी तक वैज्ञानिक इस संदर्भ में जिन निष्कर्षों तक पहुंचे हैं उनके मुताबिक कुछ लोग जिनका दिमाग विकृत होता है और शरीर में अजीब किस्म के हार्मोनल परिवर्तन होते है स्वसम्मोहन विद्या से ऐसे विचित्र भेड़ियों में बदल जाते हैं। 

वैज्ञानिकों के अध्ययन के मुताबिक मनुष्य का मस्तिष्क एक बहुत ही आश्चर्यजनक चीज है, जो न सिर्फ विचार को प्रभावित करता है बल्कि आश्चर्यजनक शारीरिक परिवर्तनों को भी उजागर करता है। दिमाग में जब हार्मोनल गडबडी और भयावह कल्पनाशीलता का एक साथ हमला होता है तो कई किस्म की गडबडियां पैदा हो जाती हैं।

इनमें से एक गड़बड़ी है जिसके तहत इंसान को लगने लगता है कि वह इंसान नहीं बल्कि भेड़िया है। वह अपने वजूद की सारी बातें भूल जाता है और अहसास करने लगता है कि वह भेड़िया ही है और फिर शुरू होता है एक ऐसा विचित्र शारीरिक परिवर्तन जिसके बारे में अभी तक वैज्ञानिक भी ठीक-ठीक यह बता पाने में असमर्थ हैं कि आखिर ऐसा क्यों होता है। 

ऐसे लोग देखते ही देखते विचित्र किस्म के भेड़ियों में तब्दील हो जाते हैं। उनमें सिर्फ भेड़ियों के जैसा भावनात्मक परिवर्तन ही नहीं होता बल्कि वह भेड़ियों की ही तरह आवाज निकालने लगते हैं, खून पीने के लिए लालायित हो उठते हैं और किसी भी इंसान पर मौका मिलते ही हमला बोल देते हैं। ऐसी गड़बड़ी के बाद कई बार देखने में आता है कि शरीर तो आदमी या औरत का बना रहता है, लेकिन चेहरा भेड़िये का हो जाता है। उसमें होने वाला परिवर्तन बिल्कुल जंगली जानवरों जैसा होता है। 

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