अनसुलझे रहस्य-मृत्यु के उपरांत जीवन का रहस्य

अनसुलझे रहस्य-मृत्यु के उपरांत जीवन का रहस्य

अनसुलझे रहस्य-मृत्यु के उपरांत जीवन का रहस्य

जॉर्ज फैल्हम जिसका वास्तविक नाम जर्जा पिलो था, अपने जीवन में मत्योपरांत जीवन की धारणा में बिल्कुल विश्वास नहीं करता था। वह डॉक्टर रिचर्ड होजसन को भली प्रकार जानता था तथा कभी-कभी जब दोनों मिल बैठते तो अक्सर उनमें इस विषय को लेकर बहस शुरू हो जाती थी।

फैल्हम का कहना था कि मृत्योपरांत जीवन न केवल असंभव है बल्कि अकल्पनीय भी है। परंतु डॉ. होजसन जिन्होंने अपना अधिकांश जीवन प्रेतात्माओं की एक माध्यम मिसेज पाइपर पर अन्वेषण में व्यतीत किया था, वे उसकी इस बात से कैसे सहमत हो सकते थे। वह उसे समझाते कि भले ही यह तथ्य कि शरीर नष्ट हो जाने के पश्चात भी जीव की सत्ता बनी रहती है, तुम्हें असंभव लगता हो परंतु यह अकल्पनीय नहीं है।

फरवरी 1892 में जब वह केवल 32 वर्ष का था तो घोड़े से गिर जाने के कारण उसकी मृत्यु हो गई। डॉ. होजसन ने इस बात की कल्पना भी नहीं की थी कि अपनी मृत्यु के कुछ ही दिनों पश्चात फैल्हम अपनी प्रतिज्ञा निभाने के लिए माध्यम मिसेज पाइपर की बैठक में अपना संदेश देना शुरू कर देगा। फैल्हम के एक मित्र के कहने पर डॉ. होजसन उसे मिसेज पाइपर की एक बैठक में ले गए तथा उस मित्र का परिचय जॉन हॉर्ट (एक नकली नाम) के नाम से करवाया। मिसेज पाइपर जब तंद्रावस्था में चली गईं तो उनकी बैठक के लिए प्रेतात्माओं को नियंत्रित करने वाली एक प्रेतात्मा ‘फिनियट’ पहले तो अस्पष्ट से संदेश देती रही। फिर अचानक उसने संदेश दिया कि जॉर्ज फैल्हम की प्रेतात्मा उपस्थित हुई है और कुछ कहना चाहती है।

बैठक में फैल्हम ने पहले तो अपना पूरा नाम बताकर अपना परिचय दिया और फिर उसने अपने सब मित्रों के पूरे नाम गिनाए जिनमें विशेष मित्र का असली नाम था, जिसे नकली नाम बताकर डॉ. होजसन बैठक में ले आए थे। विशेष रूप से उसने अपने मित्रों में श्रीमती तथा श्री हॉवर्ड का नाम लिया था। उसकी पुत्री कैथरीन के लिए एक संदेश भी दिया। जब फैल्हम का संदेश हॉवर्ड दंपति को पहुंचाया गया तो उन्हें जीवन की वह छोटी सी घटना याद हो आई, जिसका संबंध उनकी पुत्री कैथरीन से था तथा उन्होंने इस संबंध में अपनी पुत्री से बात भी की थी।

इसके पश्चात हॉवर्ड दंपति कई बार मिसेज पाइपर की बैठक में गए तथा माध्यम द्वारा फैल्हम से कई प्रश्न किए जिसके उत्तर उन्हें प्राय: सत्य तथा विस्तार पूर्वक प्राप्त हुए। परंतु उनका एक प्रश्न ऐसा था, जिसका उत्तर फैल्हम नहीं दे पाया तथा हॉवर्ड दंपति को संदेह हुआ कि यह प्रेतात्मा वास्तव में जॉर्ज फैल्हम की प्रेतात्मा है भी अथवा नहीं। उन्होंने अपने संदेश की पुष्टि के लिए प्रेतात्मा से उनके जीवन की कोई ऐसी घटना बताने के लिए कहा जिसके संबंध में केवल वह या मृत जॉर्ज फैल्हम की प्रेतात्मा ही जानती हो। माध्यम मिसेज पाइपर के हाथों ने संदेश लिखना शुरू किया। संदेश की समाप्ति पर माध्यम ने तुरंत कागज को ढक दिया।

डॉ. होजसन को यह संदेश पढ़ने के लिए दिया गया। परंतु पढ़ते-पढ़ते जहां निजी शब्द आया वहां माध्यम ने उन्हें हल्का सा धक्का देकर कागज ले लिया। डॉ. होजसन उसके पश्चात दूसरे कमरे में चले गए तथा उनका स्थान हॉवर्ड ने ले लिया। मि. हॉवर्ड माध्यम के निकट बैठ गए ताकि वह साथ-साथ पढ़ सकें। जब एक पृष्ठ लिख लिया जाता तो उसे शीघ्रता से फाड़ कर मिस्टर हॉवर्ड के हाथ में थमा दिया जाता और पुन: दूसरे पृष्ठ पर संदेश शुरू हो जाता।

इस बैठक के पश्चात हॉवर्ड दपति पूरी तरह से आश्वस्त हो गए। उन्होंने माना कि फैल्हम के जीवन की अत्यंत निजी घटना जो प्रेतात्मा द्वारा लिखवाई गई थी, बिल्कुल सत्य थी। माध्यम मिसेज पाइपर की बैठक में फैल्हम की प्रेतात्मा निरंतर प्रकट होती रही। छह वर्ष के लंबे समय में 150 व्यक्तियों के साथ प्रेतात्मा के वार्तालाप हुए। जिनमें से तीस उसके जीवन के पुराने मित्र थे। उन मित्रों के असली नाम तथा उनसे संबंधित घटनाएं प्रेतात्मा ने बताईं जबकि उन मित्रों का परिचय माध्यम के साथ नकली नामों से करवाया गया था।

बैठक के समय जब प्रेतात्मा उन्हें उनका असली नाम लेकर संबोधित करती थी तो वे आश्चर्यचकित रह जाते थे|यही नहीं बल्कि फैल्हम की प्रेतात्मा अपने मित्रों के साथ बातचीत भी उसी शैली में करती थी जैसा कि वह जीवित रहते किया करता था।

जब फैल्हम के माता-पिता ने फैल्हम के मृत्योपरांत इन क्रिया-कलापों के सबध में सुना तो उन्होंने भी माध्यम की बैठक में आने का निश्चय किया। इस बात की परीक्षा लेने के लिए मिसेज पाइपर को अपने नकली नाम बताए, परंतु जब माध्यम के द्वारा फैल्हम ने बोलना शुरू किया और माता-पिता को इस प्रकार सबोधित किया जैसे वह अपनी जीवित अवस्था में किया करता था तो वह बहुत देर तक उससे बातचीत करते रहे। इस प्रकार की घटनाओं से इस धारणा की पुष्टि होती है कि मृत्योपरांत भी जीवन रहता है।


Unsolved mystery – the mystery of life after death

George Falham, whose real name was Jarja Pilo, did not believe in the notion of post-life life in his life. He knew Doctor Richard Hodgson well and sometimes when the two met, he often started a debate about the subject.

Falham said that life after death is not only impossible but also unthinkable. But how could Dr. Hodgson, who had spent most of his life exploring the medium of spirits, explore on Mrs. Piper. He would explain to him that even if the fact that even after the body is destroyed, the power of the organism remains, you think it is impossible but it is not unthinkable.

He died in February 1892 after falling from a horse when he was only 32 years old. Dr. Hodgson did not even imagine that just a few days after his death, Falham would start delivering his message to the medium Mrs. Piper meeting to fulfill his vows. At the behest of a friend of Falham, Dr. Hodgson took him to a meeting of Mrs. Piper and introduced the friend to John Hort (a fake name). When Mrs. Piper went into a state of doldrums, a ghost who controlled spirits for her meeting, ‘Finiot’, first gave a vague message. Then suddenly he gives the message that George Felham’s spirit has appeared and wants to say something.

At the meeting, Felham first introduced himself by revealing his full name, and then he enumerated the full names of all his friends, including the real name of the special friend, whom Dr. Hodgson brought to the meeting by giving a fake name. In particular, he named Mrs. and Mr. Howard among his friends. Also gave a message for his daughter Catherine. When Felham’s message was conveyed to the Howard couple, he remembered a small incident in his life, which was related to his daughter Catherine, and he also spoke to his daughter in this regard.
was.

After this, the Howard couple went to the meeting of Mrs. Piper several times and posed several questions to Falham through the medium, to which they often got true and detailed answers. But they had a question, which Falham could not answer, and the Howard couple doubted whether this spirit was actually George Felham’s spirit. In order to confirm his message, he asked the ghost to tell him about any incident in his life in relation to which only he or the deceased George Felham’s soul knew. The medium Mrs. Piper’s hands started writing messages. At the end of the message, the medium immediately covered the paper.

This message was given to Dr. Hodgson to read. But while studying, where the private word came, the medium pushed them lightly and took the paper. Dr. Hodgson then moved to another room and was replaced by Howard. Mr. Howard sat near the medium so that he could read side by side. When a page was written, it was quickly torn and placed in the hands of Mr. Howard and the message would begin again on another page.

After this meeting, Howard Dapati became fully convinced. He believed that the very personal incident in the life of Falham, which was written by the ghost, was absolutely true. In the meeting of the medium Mrs. Piper, Falham’s spirit continued to appear. In a long span of six years, there were conversations of spirits with 150 people. Thirty of whom were old friends of his life. The real names of those friends and the incidents related to them were told by the ghost while those friends were introduced to the medium with fake names.

At the time of the meeting, they were surprised when the spirit was addressed to them with their real name. Not only this, but also, Falham’s spirit interacted with his friends in the same style as he used to live.

When Falham’s parents heard about these activities after Falham’s death, they also decided to attend the meeting of the medium. To test this, Mrs. Piper told her fake names, but when through the medium, Falham started speaking and convincing the parents as he did in his life, he would talk to him for a very long time. Kept doing These types of events confirm the belief that there is life after death.

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