अनेकता में एकता पर निबंध – Anekta Mein Ekta Essay in Hindi

अनेकता में एकता पर निबंध

अनेकता में एकता पर निबंध – Anekta Mein Ekta Essay in Hindi

भारतीय संस्कृति : अनेकता में एकता

संस्कृति का अभिप्राय आमतौर पर खान-पान, पहनावा, बोलचाल आदि समझा जाता है. जब किसी त्यौहार, मेला या शादी ब्याह में लोग देशी वेशभूषा धारण करते हैं तो उसे संस्कृति का प्रतीक माना जाता है. 

संस्कृति वह चीज है जो संस्कार करती है. इसकी व्याख्या से यह स्पष्ट होता है कि मनुष्य को पशु की श्रेणी से ऊपर उठाना ही संस्कार करना है. संस्कृति मनुष्य के लिए ही बनी है. 

आचार्य नरेन्द्र देव की परिभाषा के अनुसार संस्कृति मानव चित्त की खेती है, इस मानव चित्त का निरन्तर संस्कार होता रहना चाहिए.

भारतीय संस्कृति में अनेकता में एकता निम्नलिखित तथ्यों से स्पष्ट होती है.

भौगोलिक एकता 

भारत की जलवायु, वनस्पति और खनिज सम्पदा में भिन्नता है, फिर भी प्राकृतिक सीमाओं ने भारत को एकता के सूत्र में बाँध रखा है. हिन्द महासागर के उत्तर और हिमालय पर्वत के दक्षिण में स्थित यह देश हमेशा एक माना गया है. वे सभी भारतीय हैं जो इस देश में निवास करते हैं. 

यहाँ की प्रकृति, नदियों, पहाड़ों पहाड़ियों, झरने और लहलहाते खेतों, घने बागों आदि स्थानों से जुड़ाव सबको रहा है. हिमालय से लेकर हिन्द महासागर तक हमारा देश सांस्कृतिक दृष्टि से एक ही है- 

गंगा च यमुने चैव गोदावरी सरस्वती 

नर्मदे सिन्धु कावेरी जलेस्मिन सन्निधि कुरूम।

इस श्लोक में उत्तर भारत और दक्षिण भारत की नदियों का स्मरण एक साथ किया गया है. इसी प्रकार पर्वतों के नाम स्मरण में भी सांस्कृतिक एकता के दर्शन होते हैं- 

महेन्द्रो मलय सत्वः शक्तिमान ऋक्ष पर्वतः 

विंध्यश्च परियातुश्च सप्तैते कुल पर्वतः

भारत की सांस्कृतिक धोतिका सप्त नगरियों का स्मरण भी एक साथ किया जाता है- 

अयोध्या, मथुरा माया, च काशी कांची अवन्तिका

पुरा द्वारावती चैव सप्तैते मोक्ष दायिकाः । 

भाषायी एकता

भारत बहुभाषी देश है. यहाँ सैकड़ों बोलियाँ बोली जाती हैं, हिन्दी हमारी राष्ट्रभाषा है. इन सब भाषाओं का स्रोत प्राकृत, संस्कृत और पाली है. अधिकांश भाषाओं की वर्णमाला और व्याकरण समान है. संस्कृत भाषा ने दक्षिण भारत की भाषाओं और उनके साहित्य को भी प्रभावित किया है.

सामाजिक एकता 

समूचे देश में वर्णव्यवस्था, जन्म मरण और विवाह के संस्कार, अनुष्ठान आदि समान रूप से प्रचलित हैं. जो विदेशी तत्व भारत में आये वे भी भारतीय संस्कृति में समा गए. यही कारण है कि खानपान रहन-सहन, रीति-रिवाज, विधि-विधान भारत के विभिन्न भागों तथा समुदायों में प्रायः समान है.

त्यौहारों और उत्सवों की अनेकता में एकता 

भारत उत्सवों और त्यौहारों का देश है. यहाँ पर विभिन्न धर्मों के लोग विभिन्न त्यौहार जैसे-रक्षाबंधन, दीपावली, दशहरा, ईदुलजुहा, मोहर्रम, क्रिसमसडे, दुर्गा पूजा, गणगौर, पोंगल आदि त्यौहार मनाते हैं. 

रामनवमी, शिवरात्रि, महावीर जयन्ती, बुद्ध जयन्ती आदि पर उत्सवों का आयोजन किया जाता है. ये सभी उत्सव एवं त्यौहार भारत की विभिन्न संस्कृतियों के परिचायक हैं, इनका देश की जलवायु, संस्कृति तथा इतिहास से अटूट सम्बन्ध है. विभिन्न धर्मावलम्बी इनके आयोजनों में भाग लेते रहे है. 

उदाहरणस्वरूप रक्षाबंधन का त्यौहार अर्थात राखी, धर्म सम्प्रदाय, भाषा, प्रांत और देश-विदेश की सीमाएं नहीं देखती, बल्कि हमें एक-दूसरे के दुःख दर्द में शरीक करके परस्पर स्नेह के बंधन में बाँधती चली जाती है. 

रानी करणवती ने बहादुरशाह के आक्रमण से स्वरक्षा के लिए हुमायूँ को राखी भेजी थी और राखी बंधन से भाई बनाकर उससे सहायता माँगी थी. इससे सिद्ध होता है कि यहाँ के त्यौहार विभिन्न जातियों की राष्ट्रीय एकता के प्रतीक हैं.

धार्मिक एकता 

जिन धर्मों का उदय भारत में हुआ (जैसे हिन्दू, जैन, बौद्ध, सिख आदि) वे प्राचीन मूल आध्यात्मिक तत्वों से ही निकले हैं अतएव उनके उपदेशों में आन्तरिक समानता है. अन्य धर्मों ने (जैसे इस्लाम, ईसाई तथा पारसी) अपने आपको भारतीय परिस्थितियों के अनुकूल ढाल लिया जिससे वे धर्म भारत में फले-फूले हैं. इन विभिन्न धर्मों के मतावलम्बी देश के समस्त भागों में हैं. 

कितनी जातियाँ यहाँ घुली-मिलीं. उनकी अलग पहचान नहीं रह गई. गंगा की धारा में जितनी नदियाँ मिलीं सभी गंगा हो गईं. भारतीय संस्कृति की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह परायापन नहीं देखती, न मनुष्य की किसी अन्य प्रजाति में, न जीव जगत में. 

अकबर के फतेहपुर सीकरी में जोधाबाई का महल और मधुबनी का विवाह मंडप दोनों ही इस देश के भीतरी संस्कार को रूपायित करते हैं. एक में फूल पत्तियों की सजावट है तो दूसरे में नक्काशी के बेलबूटों की. अकबर ने राम-जानकी के सिक्के ढलवाये थे. 

उत्तर भारत में स्थित बद्रीनाथ, पश्चिम भारत में द्वारका, दक्षिण भारत में रामेश्वरम् और पूर्व भारत में पुरी हिन्दू धर्म के महान तीर्थ हैं. इनके अन्तर्गत समस्त देश समा जाता है. ये तीर्थ भारत की सांस्कृतिक एकता और अखण्डता के सशक्त प्रमाण हैं. जिन नदियों का उल्लेख दैनिक प्रार्थनाओं में किया जाता है, वे भी भारत की मौलिक एकता की परिचायक हैं.

कला की विविधता और एकता 

भारत की प्राचीन मूर्तिकलाएं तथा चित्रकलाएं विश्वविख्यात है. हिन्दुओं के मन्दिर विशुद्ध भारतीय शैली के बने हुए हैं, उनमें जाति और धर्म का कोई भेदभाव नहीं है. सभी मन्दिरों में मूर्तियों के लिए गर्भगृह है. खजुराहो, सोमनाथ, काशी, रामेश्वरम्, कोणार्क आदि के मन्दिर उल्लेखनीय कलाओं के नमूने हैं. मध्यकाल में इस कला का सम्पर्क मुस्लिम कला से हुआ जिसके परिणामस्वरूप दुर्ग, मकबरे, मजिस्दें आदि बने. इन कलाओं के सम्पर्क के परिणामस्वरूप फतेहपुर सीकरी का विश्व प्रसिद्ध बुलन्द दरवाजा तथा संसार के 8 आश्चर्यों में से एक आश्चर्य ताजमहल का निर्माण भी भारत में ही हुआ है.

चित्रकला में एकता 

मुगलकाल में भारतीय और ईरानी चित्रकला का समन्वय हुआ. दोनों जातियों के कलाकार साथ-साथ काम करते थे.

संगीत में एकता 

संगीत का तात्पर्य वादन और नर्तन से है. इस्लाम में संगीत को निषिद्ध माना गया है फिर भी मध्यकाल में संगीत का काबिले तारीफ विकास हुआ है. 

इस पहचान के कारण कुछ नकली भेद कुछ विशेष क्षेत्रों में किए पर हिन्दू, कविता, मुस्लिम कविता या मुस्लिम संगीत, हिन्दू संगीत जैसे भेद विकसित नहीं हुए… 

अकबर के दरबार में 36 उच्चकोटि के गायक थे, जिसमें तानसेन और बैजूबावरा उल्लेखनीय हैं. सूफी संत गजल और कब्बाली के रूप में खुदा की इबादत करते थे तो भक्त संतों ने भजन और कीर्तन के लिए संगीत का उपयोग किया.

मध्यकालीन समन्वयता या एकता 

मध्यकाल में जब दूसरी जातियाँ भारत में आकर बसने लगीं उस समय हिन्दुओं में अनेक जातियाँ, सम्प्रदाय तथा पंथ थे तथा छुआछुत प्रथा प्रचलित थी. उस समय के हिन्दू समाज को एक ऐसा समाज का सामना करना पड़ा जिसमें न तो जाति प्रथा थी और न सामाजिक भेदभाव था. इससे हिन्दुओं की आन्तरिक शक्ति को जाग्रत करने में सहायता प्राप्त हुई. 

धीरे-धीरे मुसलमान भी भारत को अपना देश समझने लगे तथा धीरे-धीरे वे हिन्दुओं के निकट आने लगे. इस सम्पर्क का प्रभाव दैनिक क्रियाओं तथा धर्म तक पड़ा. विवाह के समय माँग भरने की प्रथा मुसलमानी महिलाओं में प्रचलित हुई. हिन्दू मुसलमान एक-दूसरे के त्यौहारों, उत्सवों में सम्मिलित होने लगे जो आज भी जारी है. 

धीरे-धीरे एक-दूसरे ने एक-दूसरे के गुण-दोष दोनों अपना लिए. शायद दोष अधिक, पर कुल ले देकर साथ बैठकर एक-दूसरे के हास-परिहास तक में हिन्दू मुसलमान मिल गए. 

इस प्रकार हम कह सकते हैं कि कई विषमताओं और भिन्नताओं के होते हुए भी भारतीय संस्कृति में मौलिक एकता विद्यमान है. इस मौलिक एकता को कोई भी विद्वान अस्वीकार नहीं करता है. 

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