अनसुलझे रहस्य कहानी-संसार के मशहूर भुतहा घर 

अनसुलझे रहस्य कहानी-संसार के मशहूर भुतहा घर 

अनसुलझे रहस्य कहानी-संसार के मशहूर भुतहा घर 

रहस्य रोमांच सस्पेंस और हैरत में डाल देने वाली विश्व की ऐसी सत्य घटना है जो आज भी रहस्य की धुन में दफन है।आश्चर्यजनक तथ्य जो अभी तक सिर्फ रहस्य है।

अचानक होती पत्थरों की बरसात, जगह-जगह पर कपड़ों में भभक उठती आग की लपटें। ठौर-ठौर पर बदबू उत्पन्न करते मल के ढेर। भूत-प्रेत से आविष्ट होने पर भवनों में ये उपद्रव प्रायः होते रहते हैं। दरवाजे भयानक आवाज करते हुए अपने आप बंद हो जाते हैं। बंद रहने पर भी अपने आप ही खुल जाते हैं। घर के सामान इधर से उधर टकराते हैं। लखनऊ के एक सी. आई. डी. अधिकारी गुरुशरणलाल श्रीवास्तव का भवन बहुत दिनों तक भूत-प्रेतों से पीड़ित रहा। उनकी पत्नी को प्राणों से हाथ धोने पड़े थे। यहां विश्व के कुछ मुख्य भुतहे भवनों का उल्लेख किया जा रहा है। 

एसेक्स में स्टोर नदी के तट पर विक्टोरिया युग का एक भवन है। यह मकान ‘बाले का संन्यासी-आश्रम’ कहलाता है। नदी के उत्तरी किनारे पर बने इस भवन के संबंध में बहुत सी बातें मशहूर हैं। यह गृह इंग्लैंड का सबसे अधिक भुतहा घर कहा जाता है। 

सौ वर्षों से भी अधिक समय से यहां भुतही गाड़ियां नजर आती हैं। उन पर सिर रहित संन्यासी तथा संन्यासिनियां बैठी नजर आती हैं। भवन के भीतर अदृश्य भूत सामान इधर से उधर फेंकते रहते हैं। रह-रह कर रहस्यमय पद-चाप आती सुनाई देती है। उधर सीढ़ियों पर कोई चढ़ा, पैरों की भारी आहट। चीजें न जाने कहां से अपने आप दिखाई देती हैं। छूने बढ़े तो गायब। छत पर लगी घंटियां अचानक बज उठती हैं। दीवारों पर कोई अनजान नजर आने वाला हाथ कुछ लिख रहा है। पास के चर्च में किसी ने आर्गन बाजा बजाया। उसकी धुन पर भजन के बोल रात के सन्नाटे में गूंजने लगे। 

यह आश्रम 1863 में पादरी हैनरी डाउसन एलिस बनल ने बनवाया था। पहले इसके पास ही एक मध्य युगीन मठ था। जैसे ही वह पत्नी तथा बच्चों के साथ रहने आया, उपद्रव शुरू हो गए। कभी पदचाप सुनाई देती तो कभी रात के सन्नाटे में कोई खिड़कियां या दरवाजा थपथपाता। कोई कानों के पास फुसफुसाता। इससे उसके चौदह बच्चे डरने लगे। 

एक बार उसकी लड़की रात में सोते-सोते जाग उठी। उसके गाल पर किसी ने जोर से थप्पड़ मारा था। दूसरी लड़की ने एक काली परछाई बिस्तर के करीब देखी। एक बूढ़ा आदमी सिर पर ऊंचा-सा टोप लगाए था। वहां आने वाले एक व्यक्ति ने एक साधुनी को देखा। वह उसे अक्सर दिखाई देती थी। वैसे आज तक उस भवन के भूतों ने किसी को हानि नहीं पहंचाई। किंतु उनके संसर्ग के अनुभव विकट होते हैं। 

अनसुलझे रहस्य कहानी-संसार के मशहूर भुतहा घर 

विकर के बेटे हैरी बल ने 1892 में भवन को अपने अधिकार में ले लिया था। वह वहां 1829 तक रहा। उस अवधि में एक सिर रहित व्यक्ति प्रायः उस झाड़ियों के बीच दिखाई देता था। एक भूतगाडी रात के सन्नाटे में दौड़ती आती। घोड़े के टापों की आवाज ‘टप-टप’ जैसे दिल के ऊपर पड़ती-सी लगती। एक रसोइये का बयान था कि वह रोज भंडार घर में याद करके ताला लगाता रहा, पर सुबह ताला खुला ही मिलता। बुल की चार बहनों ने भी सिर विहीन साधुओं का देखा था। वे नजर आते और गायब हो जाते थे।

1929 में वहां भूत कुछ ज्यादा ही उपद्रव करने लगे। उन्होंने अचानक कुछ वस्तुएं फेंकनी प्रारंभ की। उन सामानों में कंकड़, चाबियां और पदक होते थे। एक पदक पर संत इगनेशियस का चित्र अंकित था। उस चित्र के नीचे दो मानव आकृतियां बनी थीं। फिर रोमन शब्द अंकित था। 

1930 से 1935 के बीच यह स्थान पादरी लियोनेल एलगेरनान फायस्टर के अधिकार में रहा। वे अपनी पत्नी तथा पुत्री के साथ वहां रहे। उनके समय में दीवारों पर विचित्र संदेश लिखे दिखाई देते थे। कभी-कभी कोई शक्ति पुरजों पर कुछ लिख कर गिराती थी। आहट भी होती रहती थी। कभी कोई उनकी पत्नी का नाम लेकर बुलाता तो बेचारी कांप जाती। एक बार किसी ने उस पर हमला भी कर दिया। यह हमला उस घर में पहली बार हुआ था। कभी-कभी लैवेंडर जैसी अद्भुत सुगंध फैल जाती, दीवार की लिखावटें अजीब होती, पर एक बार साफ लिखा नजर आया ‘किसी की सहायता लो।’

1931 में इस्तेमाल न आने वाले एक कमरे में आग लग गई। जैसे ही आग बुझाई गई, हवा से मुर्गी के अंडे के बराबर चकमक पत्थर गिरा। ओझा को बुलाया गया तो इस पर घर के भूत सब पर पत्थर बरसाने लगे। 

1937 में राष्ट्रीय अतींद्रीय शोधशाला के संस्थापक हैरी प्राइस ने ‘टाइम्स’ में एक विज्ञापन प्रकाशित करवाया। उसमें उन्होंने बुद्धिजीवियों, पत्रकारों, आलोचकों तथा अन्य वर्ग के लोगों से उस भवन में आकर वहां की गतिविधियां देखने का अनुरोध किया था। दो सौ लोगों ने इसके लिए आवेदन भेजे थे। उनमें से उन्होंने चालीस का चयन किया। उन लोगों में से एलारस ने लिखा था, “मैंने चीजों को उड़ते हुए देखा था।” 

एलारस होबे ऑक्सफोर्ड का स्नातक था। कुछ लोगों ने अजीब शोर सुना था। सेना-नायक कैंपबेल को किसी ने मुहरबंद कमरे से साबुन की बट्टी फेंककर मारी थी। कमरों का तापमान अचानक गिरने का अनुभव भी लोगों ने किया। 

1939 में अचानक वहां आग लग गई। उस समय उस घर में मात्र कप्तान ग्रेगसन ही थे। उस समय लोगों को एक सुंदर लड़की खिड़की पर दिखाई दी थी। कई लोग आग लगने के बाद बाहर आते दिखाई दिए थे। आग लग कर घर के धाराशायी हो जाने के बाद भी एक कार चालक को वहां भयंकर गर्जना सुनाई दी थी। लेकिन आस-पास कोई दिखाई नहीं दिया था। युद्ध के समय जब सारा शहर अंधेरे में डूबा नजर आता, उस मकान की रोशनियां जलती रहती थीं। इसकी शिकायत कई बार हुई। 

1943 में उस जगह की खुदाई तीन-चार फीट गहरी की गई। जमीन के भीतर एक नारी का शव तथा कुछ धार्मिक पदक पाए गए थे। कहा जाता है कि एक फ्रेंच साध्वी मेरी लायरे को बोर्ल में रहने वाले वालड ग्रेव्स ने विवाह का प्रलोभन दिया था। पर 27 मई, 1667 को उसने उसको गला दबा कर मारा डाला था और उसकी लाश नीचे तहखाने में छिपा दी गई थी। 

डॉक्टर नंदोर फोडोर के अनुसार अन्य विख्यात भुतहा-घर पर्थशायर का बलेचीन हाउस था। यह घर सदियों तक स्कॉटलैंड के एक जमींदार का था। उसने इसे बहुत समय तक किराए पर उठा रखा था। भुतहा हो जाने के बाद उसने उसे अर्तीद्रीय शक्तियों पर शोध करने वालों को दे दिया था। एक शोध-छात्रा उस भवन में पूरे 62 दिनों तक रही थी। 

उस घर में अंतिम पुरुष निवासी मेजर स्मिथ थे। उन्हें पुरानी शराब संचित करने का बड़ा शौक था। दुर्लभ कोटि की मदिरा उनके शराब घर में मिल जाती थी। वे भारत भी बहुत समय तक रहे थे। अवकाश प्राप्त करने के बाद वे उस मकान में आकर रहने लगे। उनके पास चौदह कुत्ते भी थे। हिंदू पुनर्जन्मवाद पर उनका विश्वास था। वे समझते थे कि आत्माएं मनुष्यों को ही नहीं पशुओं को भी अवशिष्ट करती हैं। 

अनसुलझे रहस्य कहानी-संसार के मशहूर भुतहा घर 

उनके जाने के बाद श्रीमती प्रीयर ने एक बंद कमरे में से कुत्तों के भौंकने की आवाजें सुनी र्थी। एक भारी-भरकम आदमी को उन्होंने चलते-फिरते देखा था। वह मानव आकृति दीवार से निकलती दिखाई देती थी। कभी-कभी तो किसी को पदचाप एकदम निकट ही सुनाई पड़ती, पर कोई दिखाई नहीं देता था। 

डाक्टर नंदोर फोडोर ने लंदन के रायनहेम हॉल के बारे में भी सुना था। यह भवन 49 डावर स्टीट पर है। वे अपने साथ दो छायाकारो को भी ले गय थे|उन लोगों ने  सीढ़ियों पर एक चमकती छाया देखी थी। उन्होंने उसका छायाचित्र लिया| फोटो में स्पष्ट आकति दिखाई नहीं दी। बस एक ज्याती नजर आई|

पता लगाने पर वह फोटो डोरोथी वालपोल के भूत की सिद्ध हुई। वह ऑक्सफाड के अलेराबेट वालपोल (1676 से 1745) की बहन थी। उसकी मृत्यु रहस्यमय दशा में हुई थी। डॉक्टर को छत पर तेज धमक सुनाई देती रही। छाया का आभास हुआ। किंतु तेज टॉर्च ले जाने पर कुछ दिखाई नहीं दिया था।   

कलकत्ता के जिस मकान में लॉर्ड क्लाइव रहा करता था, वहां आज भी रात के सन्नाटे में एक अंग्रेज कभी-कभी घूमता नजर आता है। कभी घुड़सवारों के घोड़े दौड़ने की आवाज आती है।